घूमने मत जाना मेडल लेकर आना

हर एथलीट का सपना होता है कि वह ओलंपिक में अपने देश का प्रतिनिधित्व करे. वहां मेडल जीते और देश को गौरान्वित करे. जीत के क़रीब पहुंचकर मेडल नहीं जीत पाने का दर्द उड़न सिख मिल्खा सिंह और उड़न परी पी टी ऊषा से बेहतर कौन समझ सकता है, जिन्हें आज तक ओलंपिक में पदक न जीत पाने का मलाल है. भारत ने पहली बार 1928 में ओलंपिक खेलों में भाग लिया था. तब से आज तक भारत एक-एक पदक के लिए तरसता रहा है. का़फी समय तक देश के लिए पदक जीतने का दारोमदार हॉकी पर था. मगर हॉकी भी इस ज़िम्मेदारी को लंबे समय तक नहीं निभा पाई. 32 साल से हम हॉकी के स्वर्णिम युग के लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं. सवा अरब की आबादी वाले देश का प्रतिनिधित्व लंदन ओलंपिक में 85 एथलीट कर रहे हैं, जो 13 खेलों की 55 स्पर्धाओं में भाग लेंगे. एक-दो और खिलाड़ी अभी क्वालीफाई कर सकते हैं, जबकि बीजिंग में केवल 57 भारतीयों ने भाग लिया था. इस बार ओलंपिक में भाग लेने जा रहा भारतीय दल अब तक का सबसे बड़ा दल है. इस दल से लोगों को अपेक्षाएं भी बहुत हैं. अपेक्षाएं हों भी क्यों न, खिलाड़ियों ने पिछले चार वर्षों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. इन खिलाड़ियों ने विश्व में भारत का परचम लहराया है. बॉक्सिंग, बैडमिंटन, टेनिस, कुश्ती, निशानेबाज़ी, तीरंदाज़ी आदि खेलों में सबसे बड़े ख़िताब जीते हैं. कई खेलों में तो भारतीय खिलाडि़यों ने नंबर एक रैंकिंग हासिल की. अब उन खिलाड़ियों पर पूरे देश की नज़र है. देशवासियों को आशा है कि खिलाड़ी ज़्यादा से ज़्यादा पदक जीतकर देश का सर गर्व से ऊंचा कर देंगे. आलोचक तो यह भी कह रहे हैं कि जितने भारतीय ओलंपिक में भाग ले रहे हैं, उससे ज़्यादा पदक चीन और अमेरिका अकेले जीत लेते हैं. इस बार सरकार ने भी खिलाड़ियों को विदेश में ट्रेनिंग देने और विदेशी कोचों की तैनाती पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए हैं. भारतीय ओलंपिक संघ ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके खिलाडि़यों को एडवांस में एक लाख रुपये दिए हैं, ताकि खिलाड़ियों को ओलंपिक से पहले आर्थिक समस्या का सामना न करना पड़े. इस बार ओलंपिक में भाग ले रहे दल में 3 ओलंपिक पदक विजेता खिलाड़ी भी हैं. इनकी मौजूदगी दल का मनोबल ऊंचा रखने में मदद करेगी. आइए नज़र डालते हैं ऐसे ही कुछ खेल और खिलाड़ियों पर, जो लंदन ओलंपिक में भारतीय खेल काइतिहास बदलने की कोशिश में लगे हैं.

निशानेबाज़ी

इस साल ओलंपिक में 11 भारतीय निशानेबाज़ भाग ले रहे हैं. इस दल का नेतृत्व बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले अभिनव बिंद्रा करेंगे. एक तऱफ बिंद्रा अपने ओलंपिक ख़िताब को बचाए रखने की कोशिश करेंगे, तो दूसरी तऱफ इसी इवेंट में विश्व रिकॉर्ड होल्डर गगन नारंग उन्हें चुनौती देते नज़र आएंगे. नारंग ने दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में चार स्वर्ण पदक जीते थे. ओलंपिक में भी नारंग 10 मीटर एयर रायफल के अलावा 50 मीटर रायफल प्रोन और 50 मीटर रायफल थ्री पोजीशन में मेडल के लिए निशाना लगाते नज़र आएंगे. डबल ट्रैप इवेंट में इस बार ओलंपिक रजत पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह भारतीय टीम में नहीं हैं. उनके उत्तराधिकारी के तौर पर उभरे रोंजन सोढ़ी इस प्रतियोगिता मेंे नज़र आएंगे. सोढ़ी विश्व रैंकिंग में भी पहले नंबर पर हैं. एशियन गेम्स में निशानेबाज़ी में स्वर्ण पदक जीतने वाले सोढ़ी अकेले भारतीय निशानेबाज़ थे. डबल ट्रैप में सोढ़ी का साथ देने के लिए मानवजीत सिंह संधू भी हैं. संधू भी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और उनसे ओलंपिक पदक की उम्मीद की जा सकती है.

हॉकी

बीजिंग ओलंपिक भारतीय हॉकी के काले अध्याय में से एक है. पहली बार भारतीय हॉकी टीम ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थी. लेकिन इस साल दिल्ली में हुए ओलंपिक क्वालीफायर में धमाकेदार प्रदर्शन करके भारत ने ओलंपिक में वापसी की है. कोच माइकल नॉब्स की देखरेख में टीम अच्छी तरह तैयार हो रही है. भारतीय टीम ने अपने खेल के तरीक़े में बदलाव किया है. अब वह रक्षात्मक की जगह आक्रामक तरीक़े से खेलने लगी है. खिलाड़ियों की फिटनेस में भी ज़बरदस्त सुधार हुआ है. ओलंपिक के लिए हॉकी इंडिया ने 16 सदस्यीय टीम में युवाओं के साथ-साथ अनुभवी खिलाड़ियों को जगह दी है. ऐथेंस ओलंपिक में टीम के सदस्य रहे इग्नेस टिर्की और संदीप सिंह के अलावा टीम के किसी अन्य खिला़डी को ओलंपिक में खेलने का अनुभव नहीं है. टर्फ के रंग में हुआ बदलाव भी भारतीय टीम के लिए एक चुनौती है. भारतीय टीम इस टर्फ से तालमेल बनाने की पूरी कोशिश कर रही है. अजलान शाह कप में नीली टर्फ पर खेलते हुए भारतीय टीम का कांस्य पदक जीतना यही साबित करता है. ओलंपिक में भारत को पूल बी में जगह मिली है, जहां जर्मनी और नीदरलैंड से पार पाना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगा. ग्रुप की दो टीमें सेमीफाइनल में खेल सकेंगी. इन दोनों टीमों में से किसी एक को भारत को किसी भी सूरत में हराना होगा. ग्रुप में दूसरी टीमें कोरिया, न्यूजीलैंड, बेल्जियम की हैं.

बैडमिंटन

भारत में बैडमिंटन का पर्याय बन चुकी सायना नेहवाल ओलंपिक पदक जातने की सबसे प्रबल दावेदार हैं. 2008 में बीजिंग ओलंपिक में सायना अंतिम आठ तक पहुंच पाई थीं. बीजिंग ओलंपिक के बाद सायना ने अपने खेल में ज़बरदस्त सुधार किया और विश्व रैंकिंग में पहले पांच खिलाड़ियों में शामिल हो गईं. पिछले चार साल में सायना ने 9 सुपर सीरीज ख़िताब, दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण पदक सहित कई ख़िताब जीते. इसी दौरान 2010 में सायना ने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ दूसरी रैंकिंग हासिल की. बैडमिंटन में आज तक कोई भी भारतीय खिला़डी मेडल नहीं जीत सका है. प्रकाश पादुकोेण और सायना के कोच पुलेला गोपीचंद भी यह कारनामा नहीं कर पाए थे. सायना के पास इतिहास रचने का सुनहरा मौक़ा है. सायना को इसके लिए चीन की दीवार मतलब चीनी खिलाड़ियों से पार पाना होगा. अगर सायना चीनी खिलाड़ियों को हराने में कामयाब हो गईं, तो उन्हें ओलंपिक मेडल जीतने से कोई नहीं रोक सकता है. बैडमिंडन के महिला युगल और मिश्रित युगल में ज्वाला गुट्टा के साथ अश्विनी पुनप्पा और वी दिजू भारतीय चुनौती पेश करेंगे. ज्वाला युगल और मिश्रित युगल दोनों में अपने जोड़ीदारों के साथ बेहतरीन तालमेल बनाती हैं. ये जोड़ियां किसी भी दिन बड़ा उलट-फेर करने में सक्षम हैं.

 टेनिस

ओलंपिक में जाने से पहले ही भारतीय टेनिस में भूचाल आ गया है. व्यक्तिगत संबंध और अहं राष्ट्र गौरव से बड़े हो गए. महेश भूपति और रोहन बोपन्ना ने लिएंडर पेस के साथ जोड़ी बनाने से इंकार कर दिया, जबकि पेस रैकिंग के हिसाब से ओलंपिक टिकट पाने वाले अकेले खिलाड़ी थे. एआईटीए ने पेस का जोड़ीदार भूपति को घोषित कर दिया. इस पर भूपति ने ओलंपिक से नाम वापस लेने की धमकी दे दी. का़फी खींचतान के बाद इस निर्णय पर पुनर्विचार किया गया और दो युगल जोड़ियों को ओलंपिक में भेजे जाने का निर्णय लिया गया. एक जोड़ी भूपति और बोपन्ना की बनाई गई, तो दूसरी पेस और विष्णु वर्धन की. इसके साथ ही मिक्स डबल्स में सानिया के साथ पेस की जोड़ी बनाए जाने की बात कही गई. पेस ने इसके लिए सानिया की लिखित सहमति मांगी. आईटीए के इस निर्णय पर पेस ने नाराज़गी जताई और ओलंपिक के बहिष्कार की धमकी दे दी. सायना मिर्ज़ा ने भी वाइल्ड कार्ड मिलने के बाद एआईटीए की आलोचना की और ़खुद को चारे की तरह इस्तेमाल किए जाने का विरोध किया है. लेख लिखे जाने तक इस विवाद का निपटारा नहीं हुआ था. मगर इस विवाद से भारत के टेनिस में पदक जीतने की उम्मीद ज़रूर धूमिल हो रही है. जितनी देर से इस विवाद का निपटारा होगा, उतना ही गंभीर परिणाम देश को उठाना पड़ेगा, वह भी तब जब देश एक-एक पदक के लिए तरस रहा है.

बॉक्सिंग

बीजिंग ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता विजेंदर सिंह की अगुवाई में 7 पुरुष और एक महिला बॉक्सर भारतीय चुनौती पेश करेंगे. जहां विजेंदर विश्व नंबर एक बनने के बाद अपने पदक में सुधार की कोशिश करेंगे, वहीं पांच बार विश्व विजेता रह चुकी इकलौती भारतीय महिला मुक्केबाज़ मेरीकॉम भारत को मेडल जिताने की कोशिश करेंगी. शिव थापा ओलंपिक में भाग लेने वाले आज तक के सबसे कम उम्र के भारतीय मुक्केबाज़ हैं, जिनसे पदक की सबसे अधिक आशा है. मनोज कुमार, देवेंद्रो सिंह, जयभगवान, विकास कृष्णन और सुमित सांगवान अप्रत्याशित परिणाम दे सकने में सक्षम हैं. अब तक सभी मुक्केबाज़ों के प्रदर्शन जोश और तैयारी को देखकर उनसे पदक की आशा करना लाज़मी है.

कुश्ती

सुशील कुमार बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर कुश्ती में कांस्य पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय बने थे. सुशील ने देश के पारंपरिक खेल रहे कुश्ती में नई जान फूंक दी थी. फिर विश्व रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया. चार साल बाद भारत में पहलवानों की एक नई खेप सामने आ गई है. इसकी झलक 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान देखने को मिली. भारतीय पहलवानों ने पदकों की लाइन लगा दी थी. सुशील के अलावा योगेश्वर दत्त, अमित कुमार, नरसिंह यादव और गीता लंदन में पदक जीतने के लिए पूरा ज़ोर लगा देंगे. गीता ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान हैं. ओलंपिक में पदक जीतने से गीता की इस उपलब्धि में चार चांद लग जाएंगे.

तीरंदाज़ी

दीपिका कुमारी ने कुछ दिन पहले ही तुर्की में अपने करियर का पहला विश्वकप ख़िताब जीता था. अब दीपिका दुनिया की नंबर एक तीरंदाज़ बन गई हैं. देश उनकी प्रतिभा का क़ायल का़फी पहले हो गया था. झारखंड के एक ग़रीब परिवार से ताल्लुक़ रखने वाली दीपिका ने दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन किया था. राष्ट्रमंडल खेलों में दीपिका ने दो स्वर्ण पदक जीते थे. वह डबल रिकर्व टीम के सदस्यों डोला बनर्जी और बोम्बायला देवी के साथ ओलंपिक में डबल रिकर्व में भाग लेंगी. टीम की तीनों सदस्य एकल स्पर्धा में भी भारतीय चुनौती पेश करेंगे. ओलंपिक खेलों में तीरंदाज़ी में कोरियाई तीरंदाज़ों का हमेशा से दबदबा रहा है. इसलिए दीपिका के लंदन ओलंपिक में पदक जीतने की प्रबल संभावना है. दीपिका ने कोरियाई तीरंदाज़ को हराकर ही विश्व कप जीता था. पुरुषों ने भी तीरंदाज़ी के टीम इवेंट में ओलंपिक टिकट हासिल कर लिया है. उन्हें ओलंपिक वरीयता हासिल करने में देर तो लगी है. मगर इनके वर्तमान फार्म के आधार पर उनसे ओलंपिक पदक की आशा की जा सकती है.

एथलेटिक्स

लंदन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व दस एथलीट कर रहे हैं. मगर ओलंपिक में पदक जीतने की आशा कृष्णा पुनिया से है. कृष्णा ने राष्ट्रमंडल खेलों में 61.5 मीटर तक डिस्कस फेंकते हुए स्वर्ण पदक पर क़ब्ज़ा किया था. 1958 के राष्ट्रमंडल खेल के बाद ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय हैं. बीते मई में ही कृष्णा ने हवाई में 64.47 मीटर तक डिस्कस फेंका था, जो बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता से 0.02 मीटर ज़्यादा था. कृष्णा ट्रेनिंग के दौरान 65 मीटर के बैरियर को पास करने की कोशिश में हैं. अगर ओलंपिक से पहले कृष्णा ऐसा करने में कामयाब रहीं, तो उन्हें ओलंपिक में पदक जीतने से कोई नहीं रोक सकता.

इस बार खिलाड़ियों की बॉडी लैंग्वेज से तो ऐसा लग रहा है कि वे ओलंपिक में एक नया इतिहास बनाकर लौटेंगे. 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान मिली सफलता के बाद सरकारों और अन्य समूहों द्वारा दिए गए पुरस्कारों की मदद से खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति और मनोबल ऊंचा हुआ है, जिससे ओलंपिक की अच्छी तैयारी हो सकी है.

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