निसंदेह बहुत ही शार्प विश्लेषण है.इस से पहले भी मैं आपके विश्लेषण देख चुका हूँ खास तौर से कोयला घोटाले पर .मुझे लगता है शायद ही इस से पहले किसी पत्रकार ने गुजरात के साथ अन्य राज्यों के दंगों पर भी चर्चा की हो! आपकी निष्पक्षता स्वागतयोग्य है.साथ ही आपने तीस्ता एवं हाश्मी जैसी हिन्दू विरोध पर दूकानदारी चलाने वालों को भी बेनकाब किया है.क्या इस देश में धर्मनिरपेक्ष होने का मापदंड केवल हिन्दू विरोध ही है? “जो लोग पैसे लेकर कांग्रेस के पक्ष में बोल सकते हैं वो अधिक पैसे लेकर किसी और के पक्ष में भी बोल सकते हैं.” ये बात बहुत कुछ संकेत करती है.
सामान्य तौर से मोदी जी के सकारात्मक पहलू पर चर्चा करने से ही लोग अपने आप को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं लेकिन आप ने कुछ हद तक न्याय किया है. यह भी एक सत्य है कि इस संक्रमणकाल में मोदी ही एक आशा की किरण दिखाई देते हैं.
नई दुनियां में दिए interview से कई सत्यों का उद्घाटन हुआ है .अपने आप को मुसलमनो का रक्षक कहने वाले वम्पन्थिओन के साढ़े तीन दशक से भी अधिक शाशनकाल के बाद भी मुसलमानों की बंगाल में क्या स्थति है ?
असम दंगों पर आपका आंकलन ठीक नहीं है,वास्तविकता यह है कि असम में विदेशी घुस्पथिओं के द्वारा स्थानीय वन्वासिओं एवं शेष हिन्दुओं का बेरहमी से क़त्ल हुआ है.आशा है बंगलादेशी घुसपैठ से देश की सुरक्षा को आने वाले संकट पर भी आपका विश्लेषण मिलेगा.
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निसंदेह बहुत ही शार्प विश्लेषण है.इस से पहले भी मैं आपके विश्लेषण देख चुका हूँ खास तौर से कोयला घोटाले पर .मुझे लगता है शायद ही इस से पहले किसी पत्रकार ने गुजरात के साथ अन्य राज्यों के दंगों पर भी चर्चा की हो! आपकी निष्पक्षता स्वागतयोग्य है.साथ ही आपने तीस्ता एवं हाश्मी जैसी हिन्दू विरोध पर दूकानदारी चलाने वालों को भी बेनकाब किया है.क्या इस देश में धर्मनिरपेक्ष होने का मापदंड केवल हिन्दू विरोध ही है? “जो लोग पैसे लेकर कांग्रेस के पक्ष में बोल सकते हैं वो अधिक पैसे लेकर किसी और के पक्ष में भी बोल सकते हैं.” ये बात बहुत कुछ संकेत करती है.
सामान्य तौर से मोदी जी के सकारात्मक पहलू पर चर्चा करने से ही लोग अपने आप को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं लेकिन आप ने कुछ हद तक न्याय किया है. यह भी एक सत्य है कि इस संक्रमणकाल में मोदी ही एक आशा की किरण दिखाई देते हैं.
नई दुनियां में दिए interview से कई सत्यों का उद्घाटन हुआ है .अपने आप को मुसलमनो का रक्षक कहने वाले वम्पन्थिओन के साढ़े तीन दशक से भी अधिक शाशनकाल के बाद भी मुसलमानों की बंगाल में क्या स्थति है ?
असम दंगों पर आपका आंकलन ठीक नहीं है,वास्तविकता यह है कि असम में विदेशी घुस्पथिओं के द्वारा स्थानीय वन्वासिओं एवं शेष हिन्दुओं का बेरहमी से क़त्ल हुआ है.आशा है बंगलादेशी घुसपैठ से देश की सुरक्षा को आने वाले संकट पर भी आपका विश्लेषण मिलेगा.