जनरल की जंग जारी है

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जनरल वी के सिंह भारतीय सेना के इतिहास के एक ऐसे सिपाही साबित हुए हैं, जिसने सेना में रहते हुए भी देश हित में भ्रष्टाचार के खिला़फ जंग लड़ी और सेना से रिटायर होने के बाद भी अपनी उस लड़ाई को जारी रखा. जनरल वी के सिंह जब तक सेना में रहे, वहां व्याप्त भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ उठाते रहे और पहली बार ऐसा हुआ कि सेना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के बारे में उस आम आदमी को पता चला, जिसके पैसों की खुली लूट सेना में मची हुई थी तथा अभी भी जारी है. अब सेना से सेवानिवृत्ति के बाद जनरल सिंह एक बार फिर से उसी आम आदमी के हक के लिए सड़क पर हैं.

जनरल हरियाणा के फतेहाबाद के गोरखपुर गांव पहुंचे. सरकार पावर प्लांट बनाने के लिए इस गांव के किसानों की ज़मीनों का अधिग्रहण कर रही है. यहां जनरल वी के सिंह भूमि अधिग्रहण के खिला़फ गांव वालों की लड़ाई के पक्ष में धरने पर बैठे और भूमि अधिग्रहण का विरोध किया.

जनरल सिंह आजकल गांव-गांव घूम रहे हैं. सेवानिवृत्ति के बाद वह सबसे पहले अपने गांव भिवानी गए. गांव पहुंचने में उन्हें 3 घंटे से ज़्यादा का व़क्त लगा. उसकी वजह यह थी कि उनके स्वागत में इतने लोग एकत्र थे कि उन्हें ले जाने वाला जुलूस लगभग 8 किलोमीटर लंबा हो गया था. इसके बाद जनरल राजस्थान के झुंझुनू गए, जहां भूतपूर्व सैनिकों ने उनके स्वागत में एक रैली की, जिसमें लगभग 10 हज़ार भूतपूर्व सैनिक शामिल हुए. रैली में जनरल वी के सिंह ने भूतपूर्व सैनिकों से कहा कि अब तक आपने देश के लिए जान देने की तैयारी दिखाई थी, अब आपको देश बनाने की तैयारी दिखानी होगी. आपने सेना में अनुशासन सीखा है, उस काम को पूरा करना सीखा, जो आपको दिया जाता था और देश की आन-बान-शान के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देना सीखा है, इसलिए वक़्त आ गया है कि अब आप समाज एवं देश को नेतृत्व देने के लिए अपनी तैयारी और नेतृत्व क्षमता दिखाएं. इसके बाद जनरल ने गाजीपुर के गमहर गांव में किसानों के एक बड़े सम्मेलन में भी शिरकत की. हाल में जनरल हरियाणा के फतेहाबाद के गोरखपुर गांव पहुंचे. सरकार पावर प्लांट बनाने के लिए इस गांव के किसानों की ज़मीनों का अधिग्रहण कर रही है. यहां जनरल वी के सिंह भूमि अधिग्रहण के खिला़फ गांव वालों की लड़ाई के पक्ष में धरने पर बैठे और भूमि अधिग्रहण का विरोध किया. उन्होंने कहा कि गांव में परमाणु संयंत्र के लिए अधिग्रहीत की जा रही ज़मीन उपजाऊ है, सरकार को अपने फैसले पर दोबारा सोचने की ज़रूरत है, उसे किसानों के साथ बातचीत करनी चाहिए. वी के सिंह ने किसानों से वायदा किया कि वह उनके संघर्ष में साथ है. ग़ौरतलब है कि उक्त किसान पिछले दो सालों से अपनी ज़मीन बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं और धरना दे रहे हैं. यहां की ज़मीन उपजाऊ है और किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन है. इस परमाणु संयंत्र के लिए क़रीब 1500 किसानों की ज़मीन अधिग्रहीत की जा रही है. जाहिर है, इसकी वजह से न स़िर्फ किसान ज़मीन से बेद़खल हो जाएंगे, बल्कि खेतों में मज़दूरी करने वाले हज़ारों लोगों की रोज़ी-रोटी भी छिन जाएगी. इस परमाणु संयंत्र के मुद्दे पर जनरल वी के सिंह का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज़ से भी गोरखपुर में परमाणु संयंत्र लगाना उचित नहीं होगा, क्योंकि देश एवं विदेशों में जहां-जहां परमाणु संयंत्र लगे हुए हैं, उनके आसपास बसे लोग जानलेवा बीमारियों की चपेट में हैं.

जनरल वी के सिंह ने भूतपूर्व सैनिकों से कहा कि अब तक आपने देश के लिए जान देने की तैयारी दिखाई थी, अब आपको देश बनाने की तैयारी दिखानी होगी. आपने सेना में अनुशासन सीखा है, उस काम को पूरा करना सीखा, जो आपको दिया जाता था और देश की आन-बान-शान के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देना सीखा है, इसलिए वक़्त आ गया है कि अब आप समाज एवं देश को नेतृत्व देने के लिए अपनी तैयारी और नेतृत्व क्षमता दिखाएं.

चौथी दुनिया को मिली जानकारी के मुताबिक़, जनरल वी के सिंह अब देश के छात्रों एवं नौजवानों के बीच में भी जाने वाले हैं. इसके लिए उन्हें कई जगहों से निमंत्रण भी मिले हैं. उनका मानना है कि नौजवानों के साथ सबसे बड़ा अन्याय हुआ है, क्योंकि उनके भविष्य के लिए कोई भी सरकार किसी तरह की कोई योजना नहीं बना पाई है. आश्चर्य की बात यह है कि जनरल के सेनाध्यक्ष रहते हुए मीडिया के वे लोग, जो उनके खिला़फ बड़े-बड़े लेख लिखते थे, उन्होंने उनकी इन यात्राओं के बारे में एक शब्द नहीं लिखा. बहरहाल, जनरल वी के सिंह ने इतना तो साबित कर दिया है कि वह सेवानिवृत्ति के बाद आराम की ज़िंदगी गुज़ारने नहीं जा रहे हैं, बल्कि सरहद के बाद सरहद के भीतर एक और जंग लड़ने के लिए कमर कस चुके हैं.

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One thought on “जनरल की जंग जारी है

  • August 28, 2012 at 4:31 PM
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    जयादा से जयादा सेव्निविरत करम्चरिओन और जनरल्स को राजनीती में आना चाहियी. गरीब के दरद को गरीब ही समझ सकता है भरष्ट नेता और आमिर कर्पोरेट से जुड़े हुयी नेता गरीब के दरद को नहीं समझना चाहते. असली देशभगत फौजी ही हो सकता है जो देश के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर सीमा पर मतर्भूमि की रक्षा करता है. जय जवान जय किसान. जय Hind

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