भारत बनाम पाकिस्‍तान खेल को खेल ही रहने दो

भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की कड़वाहट दूर करने की कोशिश पिछले छह दशक से जारी है. यदि दोनों देशों के बीच मित्रव्रत संबंध बनाए जा सकते हैं तो उसका ज़रिया स़िर्फ क्रिकेट ही हो सकता है. आज़ादी के दौरान हुए दंगों ने दोनों देशों के बीच रिश्तों की ऐसी दरार पैदा कर दी, जिसे भरने की आज तक कोशिश की जा रही है. अब तक हम इस दरार को भर पाने में नाकाम रहे हैं. मुंबई आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच दूरियों को कम करने का ज़रिया फिर से क्रिकेट बन गया है. बीसीसीआई ने पीसीबी के दोनों देशों के बीच मैच कराने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है.

भारत पाकिस्तान के बीच होने वाले मैचों पर पूरी दुनिया की नज़रें होती हैं. जब भी दोनों मुल्कों के बीच मुक़ाबला होता है तब दोनों देशों में रास्ते सुनसान हो जाते हैं. लोग सरहद पार जाकर मैचों का लुत्फ उठाते हैं. बल्ले और गेंद के बीच का मुक़ाबला कुछ पल के लिए सभी गिले-शिकवे दूर कर जाता है. दोनों ही देश क्रिकेट के रंग में सराबोर हो जाते हैं. दोनों देशों में क्रिकेट की मज़बूत जड़ें और दोनों के बीच होने वाले कड़े मुक़ाबले ही हर बार संबंधों के टूटने का सांकेतिक ज़रिया बनते हैं.

भारत और पाकिस्तान के बीच दिसंबर के आ़िखरी और जनवरी के पहले सप्ताह में यह श्रृंखला आयोजित की जाएगी. इस दौरान तीन एक दिवसीय और दो टी-20 मैचों खेले जाएंगे. एक दिवसीय मैच कोलकाता, चेन्नई और दिल्ली में आयोजित किए जाएंगे, जबकि टी-20 मैच अहमदाबाद और बंगलुरु और में होंगे. बीसीसीआई के इस फैसले का विरोध पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने किया है. गावस्कर का कहना है कि बीसीसीआई को दोनों देशों के बीच श्रृंखला आयोजित करने की जल्दबाज़ी क्यों है, जबकि मुबंई हमलों की जांच अब भी जारी है और पाकिस्तान इसमें सहयोग नहीं कर रहा है. हाल में पकड़े गए आतंकवादी अबू जिंदाल ने इस घटना में पाकिस्तानी हाथ होने की बात क़ुबूल की है. इस हालत में दोनों देशों के बीच श्रृंखला का आयोजन करना कितना सही है?  आज़ादी के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पहली श्रृंखला 1951-52 में आयोजित की गई थी, तब पाकिस्तान की टीम भारत के दौरे पर आई थी. भारतीय टीम ने पहली बार पाकिस्तान का दौरा 1954-55 में वीनू मार्कंड की कप्तानी में किया था. 1961 से 1978 के बीच दोनों देशों के बीच कोई श्रृंखला आयोजित नहीं की गई थी. यह दौर भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी लिहाज़ से सबसे बुरा माना जाता है. 17 साल के इस अंतराल में दोनों देशों के बीच 1965 और 1971 में दो युद्ध हुए. 1978 में खेल संबंध बहाल हुए और भारतीय टीम पाकिस्तान के दौरे पर गई. 1978 से 1989 के बीच दोनों देशों के बीच लगातार क्रिकेट खेली जाती रही. 1989 में भारतीय टीम पाकिस्तान दौरे पर गई थी. इसी श्रृंखला में सचिन तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था. 1989-90 में कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में बढ़ोत्तरी के बाद 8 साल तक दोनों देशों के बीच किसी श्रृंखला का आयोजन नहीं हुआ. 1997 में पाकिस्तान क्रिकेट टीम इंडीपेंडेंस कप में भाग लेने भारत आई थी. इसके बाद 1999 में दोनों देशों के बीच संबंध बहाल करने के उद्देश्य से पाकिस्तानी टीम भारत दौरे पर आई थी, तब शिवसेना ने उसका विरोध करते हुए फिरोज़शाह कोटला मैदान की पिच खोद दी थी. तब शिवसेना के विरोध के बावजूद श्रृंखला आयोजित की गई थी. इसके बाद राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ीं और प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने बस से लाहौर तक यात्रा की. मगर उसके बाद पाकिस्तानी फौज ने कश्मीर में घुसपैठ शुरू कर दी, इसके कारण जुलाई 1999 में करगिल में दोनों देशों के बीच लड़ाई छिड़ गई. इसके बाद दोनों देशों के बीच संबंधों की दरार और गहरी हो गई. इसके बाद 2003-04 में एक बार फिर दोनों देशों के बीच संबंध को बहाल करने के लिए क्रिकेट का सहारा लिया गया. इस बार भारत ने पाकिस्तान का दौरा किया और सौरव गांगुली की कप्तानी में पहली बार पाकिस्तान की धरती पर टेस्ट सीरीज जीतने में कामयाब हुआ था. उसके बाद लगातार दोनों देशों के बीच क्रिकेट श्रृंखला आयोजित होने लगी, लेकिन 2009 में मुंबई हमले में पाकिस्तानी आतंकवादियों का हाथ होने की बात सामने आई और फिर दोनों देशों के बीच क्रिकेट सीरीज नहीं हुई. आ़खिरी बार दोनों देशों के बीच सीरीज 2007 में भारत में खेली गई थी. 2011 के विश्वकप के सेमीफाइनल में खेलने के लिए पाकिस्तानी टीम भारत आई थी. तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसु़फ रज़ा गिलानी मनमोहन सिंह के आमंत्रण पर मोहाली मैच देखने आए थे. तब से भारत पाकिस्तान के बीच क्रिकेट श्रृंखला के आयोजन की बात होने लगी थी. भारत पाकिस्तान के बीच होने वाले मैचों पर पूरी दुनिया की नज़रें होती हैं. जब भी दोनों मुल्कों के बीच मुक़ाबला होता है तब दोनों देशों में रास्ते सुनसान हो जाते हैं. लोग सरहद पार जाकर मैचों का लुत़्फ उठाते हैं. बल्ले और गेंद के बीच का मुक़ाबला कुछ पल के लिए सभी गिले-शिकवे दूर कर जाता है. दोनों ही देश क्रिकेट के रंग में सराबोर हो जाते हैं. दोनों देशों में क्रिकेट की मज़बूत जड़ें और दोनों के बीच होने वाले कड़े मुक़ाबले ही हर बार संबंधों के टूटने का सांकेतिक ज़रिया बनते हैं.

क्रिकेट के रिश्ते टूटते ही दोनों देशों के लोगों को दूरियों के ब़ढने का एहसास होने लगता है. लोगों का कहना है कि हर बार किसी भी घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हो जाते हैं. मगर खेल संबंधों के स्थापित होने में ज़्यादा व़क्त लग जाता है. और नुक़सान हमेशा क्रिकेट प्रेमियों और क्रिकेट खिलाड़ियों का होता है. लोगों के बीच राजनयिक संबंधों के  पुख्ता हो जाने की पुष्टि भी क्रिकेट के ज़रिए ही होती है. खेलों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के ज़रिए ही दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ता है. खिलाड़ियों और कलाकारों को सरहदों में बांधना ठीक नहीं है. लोगों के लोगों के बीच मेल-मिलाप बढ़ने से ही संबंधों की तल़्खी कम होती है. क्रिकेट इस पहल में एक कड़ी मात्र है. इसे राजनीतिक बिसात में प्यादे की तरह इस्तेमाल न किया जाए. खेल को अगर खेल ही रहने दिया जाए तो दोनों देशों के लिए बेहतर होगा.

 

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