राजस्‍थान का नंदीग्राम नवलगढ़ : सीमेंट फैक्‍ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण

बिन पानी सब सून. राजस्थान के अर्द्ध मरुस्थलीय इलाक़े शेखावाटी की हालत कुछ ऐसी ही है. यहां के किसानों को बोरवेल लगाने की अनुमति नहीं है. भू-जल स्तर में कमी का खतरा बताकर सरकार उन्हें ऐसा करने से रोकती है. दूसरी ओर राजस्थान सरकार ने अकेले झुंझुनू के नवलगढ़ में तीन सीमेंट फैक्ट्रियां लगाने की अनुमति दे दी है. इसमें बिड़ला की अल्ट्राटेक और बांगड़ ग्रुप की श्री सीमेंट कंपनी शामिल है. इन कंपनियों के लिए हज़ारों हेक्टेयर ज़मीन अधिग्रहीत की जा रही है. दूसरी ओर इन सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए रोज़ाना लाखों लीटर पानी की ज़रूरत होगी. भूमि अधिग्रहण के विरोध में दो साल से किसान आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. सवाल है कि राज्य सरकार के इस दोहरे रवैये की वजह क्या है? प्रस्तुत है चौथी दुनिया की ख़ास रिपोर्ट…

देश में जल, जंगल और ज़मीन बचाने के लिए हर हिस्से में आंदोलन हो रहे हैं. उक्त आंदोलन कई जगहों पर हिंसक टकराव का रूप भी ले चुके हैं. बावजूद इसके कॉरपोरेट ज़मींदारों और उनकी रहबर बनीं सरकारें उनकी हिमायत करती नज़र आती हैं. नंदीग्राम और सिंगुर में जिस तरह किसानों का नरसंहार हुआ, उसके बाद देश के हर उन क्षेत्रों में जहां किसानों से उनकी ज़मीनें ली जा रही हैं, वहां इसके ख़िला़फ आंदोलन हो रहे हैं, वहां नंदीग्राम और सिंगुर एक उदाहरण बन चुका है. जान देंगे, लेकिन ज़मीन नहीं, यह नारा भी अपनी भूमि खो चुके किसानों के लिए आम हो चुका है. कुछ ऐसी ही सूरत राजस्थान के झुंझुनू ज़िले की नवलगढ़ तहसील में देखी जा सकती है, जहां आदित्य बिड़ला ग्रुप की ओर से अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री, बांगड़ ग्रुप की श्री सीमेंट फैक्ट्री और उद्योगपति एस श्रीनिवासन की कंपनी इंडिया सीमेंट लिमिटेड के लिए किसानों की हज़ारों एकड़ उपजाऊ ज़मीन का अधिग्रहण किया जा रहा है. वहीं किसानों द्वारा इसका लगातार विरोध किया जा रहा है. उनका आंदोलन कितना व्यापक है, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि नवलगढ़ तहसील के समक्ष इलाक़े के पीड़ित किसान 27 अगस्त, 2010 से निरंतर क्रमिक धरना दे रहे हैं.

नवलगढ़ में मोर पक्षी की संख्या सर्वाधिक है. यहां ज़मीन अधिग्रहीत होने से हज़ारों किसानों के अलावा राष्ट्रीय पक्षी मोर भी प्रभावित होंगे. एक तऱफ केंद्र सरकार राष्ट्रीय पशु बाघ के संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये ख़र्च कर रही है, लेकिन राज्य सरकार सीमेंट फैक्ट्रियों के नाम पर किसानों और पशुओं को उजाड़ने पर तुली हुई है.

कैप्टन दीप सिंह शेखावत, (संयोजक, भूमि अधिग्रहण विरोधी किसान संघर्ष समिति, नवलगढ़.)

भूमि अधिग्रहण के ख़िला़फ यह धरना खुद में एक उदाहरण है. भूमि अधिग्रहण विरोधी किसान संघर्ष समिति (नवलगढ़)के संयोजक कैप्टन दीप सिंह शेखावत चौथी दुनिया  को बताते हैं कि तीन औद्योगिक घरानों द्वारा प्रस्तावित सीमेंट फैक्ट्रियां नवलगढ़ के किसानों, यहां की प्राकृतिक संपदा एवं सुंदरता के लिए अभिशाप बन जाएंगी. यही वजह है कि यहां के किसान अपनी उपजाऊ ज़मीन की रक्षा के लिए इतने दिनों से संघर्ष कर रहे हैं. कैप्टन शेखावत के अनुसार, नवलगढ़ में अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री के लिए बिड़ला ग्रुप ने 45 हज़ार बीघा ज़मीन अधिग्रहण करने का लक्ष्य रखा है. अभी तक वह लगभग 4 हज़ार बीघा ज़मीन किसानों से ख़रीद चुका है. श्री सीमेंट (बांगड़ ग्रुप) ने 13 हज़ार बीघा ज़मीन अधिग्रहण करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें कंपनी फिलहाल 1200 बीघा ज़मीन ख़रीद चुकी है. गौरतलब है कि नवलगढ़ तहसील की छह पंचायतों के 20 राजस्व गांवों में कुल 70 हज़ार बीघा ज़मीन अधिग्रहीत की जानी है. प्रस्तावित सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए अल्ट्राटेक और श्री सीमेंट ने कुल 5200 बीघा ज़मीन ख़रीद ली है. हालांकि एस श्रीनिवासन की कंपनी इंडिया सीमेंट लिमिटेड ने नवलगढ़ में भूमि अधिग्रहण के ख़िला़फ चल रहे किसानों के आंदोलन की वजह से अपना प्रोजेक्ट रद्द कर दिया है. आईसीएल के इस निर्णय को स्थानीय किसान अपनी जीत बता रहे हैं. आंदोलन की अगुवाई कर रहे कैप्टन दीप सिंह शेखावत कहते हैं, इंडिया सीमेंट लिमिटेड द्वारा अपने प्रोजेक्ट को रद्द करना एक तरह से हमारी जीत है, लेकिन किसानों का यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक बाकी दोनों कंपनियां भी किसानों के हित में अपने प्रोजेक्ट रद्द नहीं करतीं. उनके अनुसार, पीड़ित किसान भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से पांच बार मिल चुके हैं और उन्हें ज्ञापन भी दिया जा चुका है, लेकिन उन्होंने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की.

एक तऱफ नवलगढ़ के किसान आंदोलित हैं तो दूसरी तऱफ इस आंदोलन की धार को कुंद करने के लिए कंपनियां अपना खेल खेल रही हैं. ग़रीबों को ग़रीबों से लड़ाने का सटीक फॉर्मूला नवलगढ़ में सा़फ नज़र आता है. एक तऱफ जिनकी ज़मीनें जा रही हैं, वे नाराज़ हैं. दूसरी तऱफ नवलगढ़ के ऐसे लोगों, जिनके पास ज़मीन नहीं है, को प्रलोभन भी दिया जा रहा है. उन्हें बताया जा रहा है कि सीमेंट फैक्ट्री खुलने से रोज़गार मिलेगा. नौजवानों को नौकरी के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा. सच्चाई यह है कि निजी कंपनियां पूरे देश में ठेके के मजदूरों से अरबों-खरबों का कारोबार चलाती हैं. इसलिए इन सीमेंट फैक्ट्रियों का फायदा स्थानीय लोगों को नहीं होने वाला है. यह बात नवलगढ़ के लोग भी भलीभांति समझते हैं.

यह पूछे जाने पर कि क्या कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो सीमेंट फैक्ट्रियों का समर्थन करते हैं, तो इस बारे में कैप्टन शेखावत कहते हैं कि सार्वजनिक मंचों और बहसों में ऐसी बातें नहीं सुनी गई हैं. बिड़ला और बांगड़ ग्रुप स्थानीय किसानों को किस तरह भ्रमित करके ज़मीन औने-पौने दामों पर ख़रीद रहे हैं, इस बारे में ग्राम मोहन बाड़ी (बसावा) के किसान झूंथाराम चौथी दुनिया को बताते हैं कि कंपनी के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को अपना बिचौलिया नियुक्त कर रखा है. कंपनी के दलाल ग़रीब-अनपढ़ किसानों को अधिक पैसे का लालच देकर ज़मीन की रजिस्ट्री करा रहे हैं. झूंथाराम के अनुसार, उन्होंने अपनी ज़मीन का विक्रय बिड़ला ग्रुप या अल्ट्राटेक के नाम पर नहीं किया है, बल्कि कंपनी के एजेंट ने अपने नाम से रजिस्ट्री कराई है.

इतना ही नहीं, जिस दर पर उनसे ज़मीन ख़रीदने की बात की गई, वह क़ीमत उन्हें नहीं मिली. जब उन्होंने अपनी ज़मीन बेच दी, तब एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है. नवलगढ़ में सीमेंट फैक्ट्री के नाम पर ग़लत तरीके से ज़मीन रजिस्ट्री कराने की यह पहली और अंतिम घटना नहीं है. क्षेत्र के दर्जनों किसान झूंथाराम की तरह ठगी के शिकार हुए हैं. इलाक़े के पीड़ित किसानों का कहना है कि अल्ट्राटेक और श्री सीमेंट कंपनी के लोगों द्वारा उन्हें ज़मीन बेचने के लिए मज़बूर किया जा रहा है. किसान सुमेर राम बताते हैं कि सीमेंट कंपनी के एजेंट ने उनसे संपर्क किया और कहा कि तुम अपनी ज़मीन बेच दो, वरना सरकार तुमसे ज़मीन ले लेगी और बदले में कुछ नहीं मिलेगा. बसावा गांव के किसान छोटूराम चाहर के पास 36 बीघा ज़मीन है और वह पूरी लगन और मेहनत से कृषि कार्य कर रहे हैं. नवलगढ़ में सीमेंट फैक्ट्री लगाए जाने की योेजना से वह बेहद आहत हैं और आंदोलित किसानों के साथ हैं. छोटूराम के मुताबिक़, सरकार कहती है कि सीमेंट फैक्ट्री लगने से क्षेत्र का विकास होगा, लेकिन अगर खेती की ज़मीन पर अनाज की जगह सीमेंट पैदा की जाएगी तो उस विकास का लाभ चंद लोगों को होगा, बहुसंख्यक आबादी को नहीं. बेहद भावुक होकर छोटूराम कहते हैं, सरकार और सीमेंट कंपनियों को अगर ज़मीन चाहिए तो वे नवलगढ़ के किसानों की सामूहिक हत्या कर दें और उनकी ज़मीनों पर कब्ज़ा कर लें, क्योंकि राजस्थान के किसान अपने जीते जी किसी भी क़ीमत पर ज़मीन नहीं देंगे. किसान महेंद्र सिंह का कहना है कि अल्ट्राटेक और श्री सीमेंट को किसी एक गांव में ज़मीन का बड़ा रकबा नहीं मिल रहा है, लिहाज़ा वे हर गांव में दस, बीस, तीस बीघे का टुकड़ा ख़रीद रही है. महेंद्र सिंह के अनुसार, जो ज़मीन ख़रीदी जा चुकी है, वहां मौजूद राजस्थान के राजकीय वृक्ष हरे-भरे खेजड़ी को बेरहमी से काटा जा रहा है, ताकि बिड़ला और बांगड़ कंपनी के मालिकान यह साबित कर सकें कि उन्होंने जो ज़मीन खरीदी है, वह ग़ैर उपजाऊ और बंजर है. इतना ही नहीं, ख़रीदी गई ज़मीन पर स्थानीय असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर कंपनी के कर्मचारी रात में आवारा पशुओं को छोड़ देते हैं, ताकि नज़दीक के काश्तकार, जिनके खेतों में फसल लगी हुई है, वह तबाह हो जाए और वे अपनी ज़मीनें बेचने को मजबूर हो जाएं. बसावा गांव के किसान अशोक यादव का कहना है कि राजस्थान सरकार एक तऱफ कहती है कि वह किसानों को मजबूर नहीं करेगी कि वे अपनी ज़मीन सीमेंट फैक्ट्री के लिए दें, लेकिन सीमेंट कंपनी के एजेंट जिस तरह मनमानी कर रहे हैं, उससे सा़फ ज़ाहिर होता है कि उन्हें राज्य सरकार का समर्थन हासिल है.

नवलगढ़ में समाजसेवी गींडाराम सैनी भूमि अधिग्रहण के ख़िला़फ हैं. उनका मानना है कि खेती से जितना रोज़गार मिलता है, उतनी संख्या में रोज़गार कारखानों से नहीं मिल सकता. वर्तमान तकनीकी युग में फैक्ट्रियों से एक चौथाई लोगों को भी काम नहीं मिल रहा है. सीमेंट फैक्ट्री के नाम पर हो रहे भूमि अधिग्रहण के ख़िला़फ किसान रामकुमार सिंह, हरलाल सिंह, राम सिंह, विद्याधर सैनी, मूलचंद, हरिराम और श्रीराम ने भी अपनी राय रखी और उसके विरोध में निरंतर संघर्ष करने की बात दोहराई.

आंदोलन पर एक नज़र

  • नवलगढ़ की छह पंचायतों के बीस राजस्व गांवों की ज़मीन प्रस्तावित सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए अधिग्रहीत की जा रही है.
  • सीमेंट फैक्ट्रियों से प्रभावित होने वाले गांवों में बसावा, खीरोड, मोहनबाड़ी, तारपुरा, बेरी, कोलिडा, कटराथल, तुर्कानीजोड़ी, गोठरा, परसरामपुरा, पुजारी की ढ़ाणी, देवगांव, खोजास, वारवा एवं चैनगढ़ आदि शामिल हैं.
  • शेखावाटी के किसानों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है.
  • बिड़ला ग्रुप की अल्ट्राटेक, बांगड़ ग्रुप की श्री सीमेंट और एस श्रीनिवासन गु्रप की आईसीएल द्वारा प्रस्तावित सीमेंट फैक्ट्री के लिए 75 हज़ार बीघा ज़मीन अधिग्रहण करने का लक्ष्य रखा गया है.
  • अल्ट्राटेक और श्री सीमेंट ने क्रमश: 45 हज़ार और 13 हज़ार बीघा ज़मीन अधिग्रहण करने का लक्ष्य रखा है.
  • अल्ट्राटेक और श्री सीमेंट द्वारा क्रमश: 4 हज़ार बीघा और 1200 बीघा ज़मीन ख़रीदी जा चुकी है.
  • किसानों के विरोध की वजह से इंडिया सीमेंट लिमिटेड (आईसीएल) ने अपना प्रस्ताव रद्द कर दिया है.
  • पीड़ित किसान 27 अगस्त, 2010 से नवलगढ़ तहसील के बाहर क्रमबद्ध धरना दे रहे हैं.
  • सीकर ज़िले के कोलिडा और बेरी के किसान भी माल ढुलाई के लिए प्रस्तावित रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं.
  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत किसानों का यकीन दिलाने में नाकाम
  • झुंझुनू के कांग्रेस सांसद शीशराम ओला जब केंद्र सरकार में खान मंत्री थे, उसी दौरान सीमेंट फैक्ट्री के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे.
  • नवलगढ़ के आंदोलित किसानों को देश के कई सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का समर्थन हासिल.
  • झुंझुनू के कांग्रेस सांसद शीशराम ओला अपने 40 वर्ष के राजनीतिक जीवन में शेखावाटी के लिए एक अदद नहर नहीं बनवा पाए.

खेती की अपार संभावनाएं

झुंझुनू के कई हिस्सों में अच्छी खेती होती है. गेहूं, चना, बाजरा और सरसों के अलावा यहां हरी सब्जियां और मूंगफली बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं. सीमित संसाधनों में यहां के किसान जीवनयापन योग्य अच्छी पैदावार कर लेते हैं. अगर कृषिजनित संसाधनों को बढ़ाया जाए, सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, कृषि ऋण सहजता से उपलब्ध कराया जाए तो पूरे शेखावाटी क्षेत्र में कृषि की अपार संभावनाएं दिखाई देती हैं, लेकिन सरकार कृषि का विकास करने की बजाय किसानों से उनकी ज़मीनें छीनने की कोशिश कर रही है. जबकि यहां के लोगों के जीवनयापन का आधार कृषि और पशुपालन है. सीमेंट फैक्ट्री के लिए हज़ारों एकड़ बहु़फसली कृषि योग्य भूमि को दांव पर लगाया जा रहा है. स्थानीय किसानों का कहना है कि वे अपने पूर्वजों की ज़मीन किसी भी क़ीमत पर नहीं देंगे, चाहे इसके लिए उन्हें अपनी जान ही क्यों न देनी पड़े.

 

अभिषेक रंजन सिंह

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. जर्नलिज्म में करियर की शुरूआत इन्होंने सकाल मीडिया समूह से किया. उसके बाद लगभग एक साल एक कारोबारी पत्रिका में बतौर संवाददाता रहे. वर्ष 2009 में दिल्ली से प्रकाशित एक दैनिक अखबार में काम करने के बाद यूएनआई टीवी में असिसटेंट प्रोड्यूसर के पद पर रहे. इसके अलावा ऑल इंडिया रेडियो मे भी कुछ दिनों वार्ताकार रहे। आप हिंदी में कविताएं लिखने के अलावा गजलों के शौकीन हैं. इन दिनों चौथी दुनिया साप्ताहिक अखबार में वरिष्ठ संवाददाता है।
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अभिषेक रंजन सिंह

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. जर्नलिज्म में करियर की शुरूआत इन्होंने सकाल मीडिया समूह से किया. उसके बाद लगभग एक साल एक कारोबारी पत्रिका में बतौर संवाददाता रहे. वर्ष 2009 में दिल्ली से प्रकाशित एक दैनिक अखबार में काम करने के बाद यूएनआई टीवी में असिसटेंट प्रोड्यूसर के पद पर रहे. इसके अलावा ऑल इंडिया रेडियो मे भी कुछ दिनों वार्ताकार रहे। आप हिंदी में कविताएं लिखने के अलावा गजलों के शौकीन हैं. इन दिनों चौथी दुनिया साप्ताहिक अखबार में वरिष्ठ संवाददाता है।

One thought on “राजस्‍थान का नंदीग्राम नवलगढ़ : सीमेंट फैक्‍ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण

  • October 26, 2012 at 4:03 AM
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    ye तो अभी वैसविकरण की शुरुआत है हिंदुस्तान में, अभी इसकी युवा अवस्था देखना बाकि है. जब पूरा हिंदुस्तान फिर से गुलामी की रह देखेगा…क्यूंकि अब इस देश में देश के बुद्धिजीवी वर्ग ही इस देश को बेच रहे है…हिंदुस्तान अब एक “लैंड ऑफ़ मार्केटिंग आर्किटेक्चर ” बनाने जा रहा है..मई बहुत निराश हु इस देश के संबिधान और संसद से…की क्या सच में हम भारतवाशी है और ये देश हमारा है?

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