जनरल वी के सिंह का आहृवान : भ्रष्‍टाचार के समूल नाश का संकल्‍प लीजिए

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देश को बचाने के लिए आज़ादी के संकल्पों को याद करके भ्रष्टाचार के समूल नाश का संकल्प युवा पीढ़ी को लेना होगा, भ्रष्टाचार का कीड़ा देश की रूह को खाए जा रहा है. यह बात पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह ने अयोध्या-फैज़ाबाद दौरे के दौरान कही. उन्होंने कहा कि सेना को उच्च तकनीक का इस्तेमाल करके ख़ुद को मज़बूत करते रहना चाहिए. पड़ोसी देश चीन यदि अपनी सेना को मज़बूत करता है तो यह उसका हक़ है, हमें भी ख़ुद को तैयार करना होगा. अन्ना के बारे में उन्होंने कहा कि वह वहां स़िर्फ अनशन समाप्त कराने गए थे और फिलहाल उनके आंदोलन से नहीं जुड़े हैं. अन्ना एवं उनकी टीम में मतभेद के सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया.

जनरल सिंह ने मेमोरियल हॉस्पिटल में इंस्टीट्यूट ऑफ एंडोस्कोपी का उद्घाटन किया. इस दौरान चिकित्सकों को संबोधित करते हुए उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में लुप्त हो रहे सेवा भाव पर अपने विचार रखे और कहा कि पैसों के लिए हाहाकार मचा हुआ है. मरीज की बीमारी छोड़कर अन्य सभी चीजें उतरवा ली जाएं, यह ठीक नहीं है. हॉस्पिटल के रजत जयंती समारोह में हेल्थ कार्ड योजना की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि इससे ग़रीबों को कम ख़र्च में चिकित्सकीय सुविधाएं मिलेंगी. सुंदर लाल साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय अयोध्या में रक्षा अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित आचार्य नरेंद्र देव मेमोरियल व्याख्यान में उन्होंने विभाग के प्राध्यापकों द्वारा लिखी गई पुस्तक दक्षिण एशिया में सुरक्षा चुनौतियों के नए आयाम का विमोचन किया. छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब हम आज़ाद हुए थे तो वे कौन सी चीजें थीं, जिन्हें लेकर आज़ादी का संग्राम आगे बढ़ा. सबसे पहले हम साम्राज्यवाद को हटाना चाहते थे. दूसरी चीज यह कि हमने एक ऐसे राष्ट्र की कल्पना की, जिसमें सबको न्याय मिले, इससे सबको प्रेरणा मिली. तीसरा यह कि एक ऐसा राष्ट्र बने, जहां सब ख़ुशहाल हों, सब बराबर हों और देश को आगे ले जा सकें. हमारे संविधान में भी इन तीनों चीजों का ध्यान रखा गया, लेकिन अगर पिछले 65 सालों को देखते हैं तो कई बार ऐसा लगता है कि हम शायद कुछ चीजें भूल गए हैं या कुछ चीजें हमने कहीं पर छोड़ दी हैं. छात्र-छात्राएं, युवा वर्ग इस देश का भविष्य हैं, वही देश को आगे ले जाएंगे. जो भी बदलाव होगा, आगे उसकी ज़िम्मेदारी उन पर होगी, इसलिए उनके लिए यह सब कुछ समझना ज़रूरी है.

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार एक ऐसा कीड़ा है, जो देश की रूह को खाए जा रहा है. जब तक हम उस पर ध्यान नहीं देंगे, उसे खत्म नहीं करेंगे तो एक दिन शायद भूलने लगेंगे कि हमारा भारत कहां है. युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिला़फ लड़ाई अपने आपसे सीखो. यह इंतज़ार न करें कि कोई हनुमान जी आएंगे और भ्रष्टाचार को निकाल कर दूर फेंक देंगे. इसके लिए हमें निर्णय लेना होगा. अगर हम अपने मन के अंदर यह विचार करें कि भ्रष्टाचार न होने देंगे, न करेंगे, तो हमें पूरा विश्वास है कि भ्रष्टाचार का समूल नाश कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि ग़रीब और अमीर के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है. इसके कई कारण हैं. जो हमारी आर्थिक नीतियां हैं, उन्हें यह सोचकर नहीं लाया जाता कि उनका समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा. जब किसी अन्य देश की नीतियों को अपने देश की स्थिति न देखते हुए लागू किया जाएगा तो कोई न कोई दिक्कत ज़रूर आएगी. यही कारण है कि 1990 में 50 जिलों के अंदर नक्सलवाद था, वह आज लगभग 270 से ज़्यादा जिलों में फैल चुका है. अगर इसी तरह चलता रहा तो एक दिन जो बाक़ी जिले बचे हैं, उनमें भी नक्सलवाद फैल जाएगा, जो देश हित में नहीं है. असमानता दूर करने के लिए ज़रूरी है कि हम अपने संविधान पर ध्यान दें, जिसमें सरकार एवं आम नागरिक के दायित्व और अधिकार दिए गए हैं. जब तक उन दायित्वों और अधिकारों के बीच सामंजस्य नहीं होगा, तब तक हमारी आर्थिक नीतियों और समाज की संरचना में सामंजस्य नहीं होगा और तब तक हमें असमानताओं एवं दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.

जनरल सिंह ने मेमोरियल हॉस्पिटल में इंस्टीट्यूट ऑफ एंडोस्कोपी का उद्घाटन किया. इस दौरान चिकित्सकों को संबोधित करते हुए उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में लुप्त हो रहे सेवा भाव पर अपने विचार रखे और कहा कि पैसों के लिए हाहाकार मचा हुआ है. मरीज की बीमारी छोड़कर अन्य सभी चीजें उतरवा ली जाएं, यह ठीक नहीं है. हॉस्पिटल के रजत जयंती समारोह में हेल्थ कार्ड योजना की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि इससे ग़रीबों को कम ख़र्च में चिकित्सकीय सुविधाएं मिलेंगी. सुंदर लाल साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय अयोध्या में रक्षा अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित आचार्य नरेंद्र देव मेमोरियल व्याख्यान में उन्होंने विभाग के प्राध्यापकों द्वारा लिखी गई पुस्तक दक्षिण एशिया में सुरक्षा चुनौतियों के नए आयाम का विमोचन किया.

जनरल सिंह ने एक कविता का जिक्र करते हुए कहा कि निर्धन के आंसू अगर बन गए अंगारे तो महलों की ख़ुशियां भी साथ जल जाएंगी. इसलिए निर्धन के आंसुओं का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है. अगर आंसू अंगारे में तब्दील हो गए तो देश के लिए अच्छा नहीं होगा. नौजवान विचार करें कि हम क्या कर सकते हैं, जिससे असमानता दूर हो. उन्होंने कहा कि वैसे तो हम एक बहुत बड़ा लोकतंत्र हैं, लेकिन जब चुनाव आते हैं तो लोकतंत्र कहीं पर लुप्त हो जाता है. लोकतंत्र का मतलब है, उसमें आम आदमी की भागीदारी, आम आदमी का शरीक होना, लेकिन आज प्रत्याशी राजनीतिक दलों के हाईकमान द्वारा तय किए जाते हैं कि फलां आदमी फलां जगह से लड़ेगा. वे अपने प्रत्याशी को धर्म, संप्रदाय एवं जातिवाद से जोड़ते हैं, चाहे आम जनता उसे जानती हो या नहीं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मतलब है कि जो सरकारी नीतियां हैं, उनमें आम आदमी भागीदार बने. अगर आम आदमी नहीं जुड़ेगा तो लोकतंत्र आगे नहीं बढ़ेगा. जनरल सिंह ने कहा कि आज हम लोगों को धर्म, जाति एवं समुदाय के नाम पर बांटा जा रहा है. यह काम पहले अंग्रेज करते थे, लेकिन शायद उनसे अच्छा तरीक़ा अपना कर इसे इतना मज़बूत कर दिया गया है कि हम अभी तक बहक जाते हैं. यही वजह है कि जब भी हम ट्रेन या बस में सफर कर रहे होते हैं तो बगल में बैठे व्यक्ति से पूछते हैं कि आपकी जाति क्या है, धर्म क्या है? धर्म-जाति का फर्क़ कहां से आया? अपने आपको धर्म-जाति में न बंटने दें. जिस दिन आप यह निश्चय कर लेंगे, उस दिन आप सही रूप से लोकतंत्र के अंदर वह कर सकते हैं, जो करना चाहते हैं, क्योंकि आप बंटेंगे नहीं. उन्होंने एनसीसी के कैडटों से कहा कि आपका एनसीसी का जो स्वरूप है, वह भारतीय है और इसलिए बना है कि सेना के अंदर न धर्म होता है और न जाति. वहां स़िर्फ एक सैनिक का कार्य होता है. हमारे गांवों के अंदर अधिकारियों के निजी रिश्ते कुछ भी हों, लेकिन जो उनके ग्रुप्स हैं, जो उनका धर्म है, वे उसे मानकर चलते हैं. वे गिरिजा घर जाते हैं, गुरुद्वारा जाते हैं, मंदिर जाते हैं, मस्जिद भी जाते हैं और अपने धर्म का पालन करते हैं. लोगों को धर्मनिरपेक्षता सेना से सीखनी चाहिए. जिस दिन यह सब हमारे बीच आ जाएगा, उस दिन हम वह सब कुछ कर सकते हैं, जिससे देश का भला हो, समाज का भला हो, परंतु आप अपने आपको बंटने न दें.

अपने 42 वर्षों के अनुभव बांटते हुए जनरल सिंह ने कहा कि जब हम सेना में जाते हैं तो वहां दो चीजें होती हैं. पहली चीज, जहां भी हमें भेजा जाएगा, उसे हम पूरे तरीक़े से करेंगे, चाहे उसमें हमारी जान तक चली जाए. किसी और प्रोफेशन में यह नहीं है. दूसरी चीज, सेना के अंदर हमेशा कहते हैं कि हमारा देश सर्वोपरि है. जिस दिन आपके अंदर एक सैनिक की भावना आ जाएगी, उस दिन देश बदल जाएगा और हम फिर अपने देश को सोने की चिड़िया कह सकेंगे. उन्होंने कहा कि हमारे युवा वर्ग और बाक़ी लोगों के अंदर भी कहीं न कहीं एक सैनिक छुपा हुआ है. शायद उसके ऊपर कुछ धूल की परत जम गई है, जिसे सा़फ करने की ज़रूरत है, अपने आपको इस देश का सैनिक समझने की ज़रूरत है, ताकि हम अपने देश को आगे ले जाएं. आज हमारे लोग बाहर विदेशों में जाकर जाने क्या-क्या कर पाते हैं. वह सब काबिलियत है हमारे पास, स़िर्फ मौक़ा चाहिए. वह मौक़ा तब आएगा, जब आप मंजिल पर विजय पाएंगे, अपने देश के लिए काम करेंगे. इस मुहिम में युवा वर्ग की बहुत अहम भूमिका है. देश में सब चीजें आपसे शुरू होती हैं. अगर आपके क़दम सही दिशा में हैं तो सब चीजें आगे ही चलेंगी, लेकिन अगर आपका क़दम ग़लत चलना शुरू हो गया तो आगे चलकर सब चीजें ग़लत होंगी. आज लोग कहते हैं कि 65 सालों के बाद देश कहां जा रहा है, यह गंभीर विषय है. इस पर सोच-विचार करें और एकजुट होकर निर्णय लें कि हम देश को चलाएं. जिस दिन युवा वर्ग ने निर्णय ले लिया, उस दिन देश बदलेगा. एक चीज जो बहुत ज़रूरी है वैकल्पिक व्यवस्था. अच्छी व्यवस्था लागू होनी चाहिए. ऐसा परिवर्तन लाना होगा, जिससे ख़राब प्रणाली को दूर किया जा सके. नेतृत्व क्षमता आपके अंदर मौजूद है, स़िर्फ उसे तराशने की ज़रूरत है.

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One thought on “जनरल वी के सिंह का आहृवान : भ्रष्‍टाचार के समूल नाश का संकल्‍प लीजिए

  • November 27, 2012 at 9:15 AM
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    !! जागो ओ सीमां के प्रहरी !!

    जागो ओ सीमां के प्रहरी , अब अन्दर है खतरा ज्यादा ,
    रो रही भारत माता , टूट रहा संय्यम से नाता ,
    रोज़ खून के घूँट पीकर अब नहीं चला दफ्तर जाता,
    याद सहीदों की आती है, आँखों में आंसू लाती है,
    रोज़ लुट रही भारत माता को यूं बेबस अब देखा नहीं जाता,
    जागो ओ सीमां के प्रहरी , अब अन्दर है खतरा ज्यादा !!

    राम राज् था इसी धरती पर कभी,
    इस बात का यकीन नहीं होता,
    अंग्रेजों से तो लड़ पाए हम ,
    पर इनसे और लड़ा नहीं जाता,
    जागो ओ सीमां के प्रहरी , अब अन्दर है खतरा ज्यादा !!

    ऐसी कोई गली नहीं,
    जहां भ्रष्टाचार की ध्वजा नहीं,
    भ्रष्टाचार ये देशद्रोह है,
    पर इन भ्रष्टों को कौन सजा है दे पाता ?
    जागो ओ सीमां के प्रहरी , अब अन्दर है खतरा ज्यादा !!

    क़ानून इनकी कठपुतली है,
    ब्यवस्था इनकी मुठ्ठी में,
    भ्रष्टाचारियों को ताज मिले है,
    साधू संत मिले मिटटी में,
    बच्चे नंगे भूखे है, चोर कर रहे अय्याशी,
    दम घुटता है, लाचारी है,
    आम आदमी है क्या कर पाता ?
    जागो ओ सीमां के प्रहरी , अब अन्दर है खतरा ज्यादा !!

    अब नहीं जागोगे तो,
    फिर कभी नहीं जागोगे तुम,
    कोई मार्ग अब शेष नहीं,
    कोई यत्न अब बचा नहीं,
    भारत माँ की चीख सुनो तुम,
    गर सच में माँ से है नाता,
    जागो ओ सीमां के प्रहरी , अब अन्दर है खतरा ज्यादा !!

    !! वन्देमातरम !!

    ये सिर्फ मेरी नहीं,
    हर उस लाचार माता, पिता, बुजुर्ग और युवा की दिल की आवाज़ है,
    जिसके दिमाक हमेशा ये विचार बार बार आता है,
    काश ये गृहस्थी का बोझ न होता, माता पिता की जवाबदारी न होती तो ,
    कम से कम कुछ तो विरोध कर पता इस भ्रष्टाचार का!
    यदि एक महीने की अगर तनख्वाह नहीं मिली, तो क्या होगा ?
    ये सोचकर आम आदमी खून के घूँट पीकर दफ्तर निकल पड़ता है, एक दिन कमाता है तो परिवार एक दिन खाता है, चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पता। सोचता है वोट दूं, पर किसे? कौन सब से कम चोर है उसे ही वोट दे देता है यदि गनीमत से नाम वोटर लिस्ट में आया हो तो। वैसे देखा जाये तो मेरा नाम 10 साल से वोटर लिस्ट से गायब है, पर इस बार फिर फॉर्म भरा है, देखता हूँ इसबार क्या होता है, वैसे मुझे पूरा भरोसा है नाम फिर गायब रहेगा। जनता अब आन्दोलन करके , भूखी रहके हार गयी है, पत्थर पर सर पटकने से कुछ हासिल नहीं होगा। जैसे लोहा, लोहे को कटता है, ठीक उसी तरह, एक ताकतवर संस्था ही इनसे लड़ पायेगी, सारे आन्दोलनकारी ठीक कहते हैं, हमें धोखा सीमा पर कम, अन्दर से ज्यादा है।
    आंखिर कौन लड़ पायेगा इन ताकतवर भ्रताचारियों से? दिल और दिमाक यही एक ही उत्तर देते है।।।।

    ” जागो ओ सीमां के प्रहरी, अब अन्दर है खतरा ज्यादा ”

    एक आम आदमी,
    संतोषसिंह ठाकुर

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