इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

क्या इस देश की सेना पर हथियारों के दलालों का कब्जा हो गया है? जो लोग देश के साथ गद्दारी करते हैं, उन्हें ईनाम और जो लोग जान देने के लिए तत्पर हैं, उनके साथ अन्याय!  क्या ऐसे ही देश चलेगा? आज हम भारतीय सेना के एक ऐसे राज से पर्दा उठाएंगे, जिसे जानकर आपको हैरानी होगी. आज हम सेना में छुपे गुनहगारों और मीडिया के नेक्सस का पर्दाफाश करेंगे. हम आपको बताएंगे किस तरह इंडियन एक्सप्रेस अ़खबार का एक रिपोर्टर शक के घेरे में आया और किस तरह वह छूट गया?

भारतीय सेना की एक यूनिट है टेक्निकल सर्विस डिवीजन (टीडीएस), जो दूसरे देशों में कोवर्ट ऑपरेशन करती है. यह भारत की ऐसी अकेली यूनिट है, जिसके पास खुफिया तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता है. इसे रक्षा मंत्री की सहमति से बनाया गया था, क्योंकि रॉ और आईबी जैसे संगठनों की क्षमता कम हो गई थी. यह इतनी महत्वपूर्ण यूनिट है कि यहां क्या काम होता है, इसका दफ्तर कहां है, कौन-कौन लोग इसमें काम करते हैं आदि सारी जानकारियां गुप्त हैं, टॉप सीक्रेट हैं, लेकिन 16 अगस्त, 2012 को शाम छह बजे एक सफेद रंग की क्वॉलिस गाड़ी टेक्निकल सर्विस डिवीजन के दफ्तर के पास आकर रुकती है, जिससे दो व्यक्ति उतरते हैं. एक व्यक्ति क्वॉलिस के पास खड़े होकर इंतज़ार करने लगता है और दूसरा व्यक्ति यूनिट के अंदर घुस जाता है. वहां मौजूद एक सैनिक ने जब उस अजनबी को संदिग्ध हालत में खड़े देखा तो उसने उसकी पहचान पूछी. इस पर पहले तो उस व्यक्ति ने झांसा देने की कोशिश की और कहा कि वह एक आर्मी ऑफिसर है. जब उससे पहचान पत्र की मांग की गई और वहां आने का कारण पूछा गया तो उसने बताया कि वह इंडियन एक्सप्रेस का रिपोर्टर है.

भारतीय सेना का एक हवलदार ड्यूटी करके उसी रास्ते से लौट रहा था. उसने देखा कि सफेद क्वॉलिस के पास खड़ा एक लंबा व्यक्ति संदिग्ध तरीके से दूर से ही टेक्निकल सर्विस डिवीजन के परिसर की तऱफ देख रहा था. उस हवलदार ने लंबे व्यक्ति की पहचान बता दी, क्योंकि वह आएदिन टीवी और अ़खबारों में उस शख्स की फोटो देख रहा था. वह शख्स था सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल तेजेंदर सिंह. वही तेजेंदर सिंह, जिसके खिला़फ सीबीआई ने पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह को घूस देने की पेशकश के आरोप में मामला दर्ज किया है.

इंडियन एक्सप्रेस का रिपोर्टर उस वर्जित क्षेत्र में क्या करने गया था? क्या यह रिपोर्टर अपने संपादक शेखर गुप्ता की अनुमति से वहां आया था? क्या शेखर गुप्ता को यह पता था कि उनका रिपोर्टर एक ऐसी जगह पर गया है, जहां पर जाना वर्जित है? उस समय जिस जगह यह यूनिट थी, वह सैनिक क्षेत्र के बीचोबीच है, जहां कुत्तों के घूमने पर भी गोली चल सकती है. अगर वह रिपोर्टर शेखर गुप्ता को बिना बताए वहां गया था तो क्या उसने घटना के बाद यह जानकारी शेखर गुप्ता को दी? ये सारे सवाल इसलिए उठाने ज़रूरी हैं, क्योंकि इंडियन एक्सप्रेस में काम करने वाले लोग बताते हैं कि वह रिपोर्टर शेखर गुप्ता के नज़दीक है, उनका हिटमैन है. वैसे यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती है.

जब उस सैनिक ने रिपोर्टर से पूछताछ शुरू की तो वह घबरा गया. सैनिक ने जब रिपोर्टर को बताया कि यह आर्मी का दफ्तर नहीं है तो उसने कहा कि वह अंदर टहल कर आ चुका है और उसने सेना वाले नंबरों की गाड़ियां भी देखी हैं. इसके बाद वह सैनिक इंडियन एक्सप्रेस के उस रिपोर्टर को दफ्तर के परिसर से बाहर निकालने लगा, लेकिन जैसे ही वह बाहर आया तो उसकी नज़र कुछ दूरी पर खड़ी एक सफेद क्वॉलिस गाड़ी पर पड़ी, जो उस रिपोर्टर का इंतज़ार कर रही थी. उस सैनिक को शक हुआ. उसने रिपोर्टर से पूछा कि उसे इस दफ्तर की लोकेशन के बारे में कैसे पता चला? इस पर रिपोर्टर चुप रहा. सैनिक ने फिर पूछा कि तुम यहां तक कैसे पहुंचे? सवालों से परेशान होकर इंडियन एक्सप्रेस का वह रिपोर्टर वहां से एक झटके में निकल पड़ा और क्वॉलिस की तऱफ चला गया. अब सवाल है कि उस क्वॉलिस गाड़ी में कौन था? इंडियन एक्सप्रेस का रिपोर्टर किसके साथ वहां पहुंचा था?

भारतीय सेना का एक हवलदार ड्यूटी करके उसी रास्ते से लौट रहा था. उसने देखा कि सफेद क्वॉलिस के पास खड़ा एक लंबा व्यक्ति संदिग्ध तरीके से दूर से ही टेक्निकल सर्विस डिवीजन के परिसर की तऱफ देख रहा था. उस हवलदार ने लंबे व्यक्ति की पहचान बता दी, क्योंकि वह आएदिन टीवी और अ़खबारों में उस शख्स की फोटो देख रहा था. वह शख्स था सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल तेजेंदर सिंह. वही तेजेंदर सिंह, जिसके खिला़फ सीबीआई ने पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह को घूस देने की पेशकश के आरोप में मामला दर्ज किया है. अब सवाल यह है कि एक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के साथ इंडियन एक्सप्रेस का रिपोर्टर ऐसे वर्जित स्थान पर क्या कर रहा था? यह पूछना हमारा अधिकार है, क्योंकि वह यूनिट इतनी गुप्त है, उसे सेना के बड़े-बड़े अधिकारी तक नहीं जानते, तो फिर उस सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल ने इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर को उसकी लोकेशन क्यों बताई और उसे वहां लेकर क्यों गया? क्या वह वहां जासूसी करने गया था? वह जगह कोई पर्यटन स्थल तो है नहीं, तो फिर तेजेंदर सिंह के साथ इंडियन एक्सप्रेस का रिपोर्टर वहां किसके लिए उस यूनिट के राज हासिल करने पहुंचा था? यह सवाल इसलिए भी ज़रूरी है, क्योंकि यह कहानी यहीं पर खत्म नहीं हुई.

जिस हवलदार ने तेजेंदर सिंह की पहचान की, उसने फौरन इसकीशिकायत की. यह मामला डीजीएमआई (डायरेक्टर जनरल मिलेट्री इंटेलिजेंस) को बताया गया और पूछा गया कि क्या इसकी रिपोर्ट सिविल थाने में करें. डीजीएमआई ने कहा कि इसकी लिखित शिकायत मुझे दो. लिखित शिकायत डीजीएमआई को भेज दी गई, जिसका नंबर एA/103/टीएसडी है.  तीन दिनों के बाद डीजीएमआई ने चिट्ठी लिखने वाली टीम से कहा कि चिट्ठी फाड़ दो और कंप्यूटर के हार्डडिस्क को भी नष्ट कर दो, लेकिन इन तीन दिनों में उस चिट्ठी की कई कॉपियां कई लोगों को भेजी जा चुकी थीं.

इसी बीच सीओसीआईओ ने इंडियन एक्सप्रेस के उस रिपोर्टर को फोन किया और पूछा कि आप टीडीएस यूनिट के पास क्यों गए थे? रिपोर्टर ने जवाब दिया कि मैं नहीं गया था. इस पर सीओसीआईओ ने कहा कि आपने उस समय नीले रंग की कमीज पहन रखी थी और आपके फुटेज हमारे सीसीटीवी में कैद हैं. इस पर वह रिपोर्टर खामोश हो गया और उसने फोन काट दिया. इस बीच यह खबर आईबीएन-7 पर दिखा दी गई. हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों ने वर्जित क्षेत्र में प्रवेश किया, जिन लोगों ने देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया, उनके खिला़फ कोई कार्रवाई नहीं हुई और जिस टीम ने यह चिट्ठी लिखी, उस पर कार्रवाई शुरू हो गई कि यह खबर मीडिया तक कैसे पहुंच गई.

हैरानी की बात है कि यह सब तब हो रहा है, जब इस घटना के ठीक आठ दिनों पहले एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट आई कि टेक्निकल सर्विस डिवीजन पर ़खतरा मंडरा रहा है. हमें मिले दस्तावेज़ के  मुताबिक, कुछ देशद्रोही ताकतें इस डिवीजन और इससे जुड़े अधिकारियों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं. इस रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि यह काम मीडिया में प्रसारित करके उन्हें बदनाम करने की कोशिश होने वाली है. क्या सेना भी दूसरे सरकारी संस्थानों की तरह शिथिल पड़ गई है? अगर इस तरह की खुफिया जानकारी थी तो तेजेंदर सिंह और इंडियन एक्सप्रेस के  रिपोर्टर को क्यों छोड़ दिया गया?

क्या हमने पाकिस्तान और चीन को भारतीय सेना के अंदर खुफिया ऑपरेशन या जासूसी करने की खुली छूट दे दी है? यह सवाल उठाना इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि इस यूनिट का गठन दूसरे देशों में गुप्त ऑपरेशन करने के लिए हुआ था. इसे ़खत्म करने के लिए वे देश तत्पर थे, जिनसे भारत के रिश्ते अच्छे नहीं हैं. वहां की खुफिया एजेंसियां इस यूनिट की सबसे बड़ी दुश्मन थीं. इसलिए इसे गुप्त रखा गया था. इसकी लोकेशन भी कभी किसी को बताई नहीं जाती थी. यह सीधे रक्षा मंत्री की जानकारी में काम करती थी. अगर इसे गुप्त न रखा जाए तो इसमें काम करने वाले लोगों की पहचान सामने आ जाएगी, जो उनकी जान के लिए खतरनाक साबित होगी. जिस संदिग्ध अवस्था में उक्त दोनों लोग पकड़े गए, उसमें यह भी सवाल उठता है कि क्या वे जासूसी कर रहे थे और अगर जासूसी कर रहे थे तो किसके लिए? वे किस देश के लिए जासूसी करने वहां पहुंचे थे? क्या इन सवालों के मद्देनजर लेफ्टिनेंट जनरल तेजेंदर सिंह और इंडियन एक्सप्रेस के उस रिपोर्टर को बिना किसी सजा के छोड़ा जा सकता है? सेना में वे कौन सी ताकतें हैं, जो लगातार उन्हें बचा रही हैं? सवाल यह भी है कि किसके कहने पर डीजीएमआई ने यह आदेश दिया कि शिकायती पत्र को फाड़ दिया जाए और कंप्यूटर की हार्डडिस्क को नष्ट कर दिया जाए.

एक दूसरी खबर के बारे में एक एक्सक्लूसिव जानकारी चौथी दुनिया को मिली है. यह मामला ऑफ-द-एयर जीएसएम मॉनिटरिंग सिस्टम का है. कई दिनों से यह सुर्खियों में है कि इसे किसने खरीदा, इसमें क्या धांधली हुई और इसके पीछे कौन लोग हैं? इसे खरीदने में गड़बड़ियां हुईं. इन यंत्रों को खरीदने में ज़्यादा रुपये खर्च किए गए. चौथी दुनिया को मिले दस्तावेज बताते हैं कि इन यंत्रों को टीसीजी (टेक्नोलॉजी को-आर्डिनेशन ग्रुप) की अनुमति के बिना खरीदा गया. इस रिपोर्ट में

सा़फ-सा़फ लिखा है कि डीजीडीआईए को यह बात बताई गई कि टीसीजी के आदेश पर इन यंत्रों को नहीं खरीदा गया. अब जरा यह जान लीजिए कि उस वक्त डीजीडीआईए (डायरेक्टर जनरल डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी) लेफ्टिनेंट जनरल तेजेंदर सिंह थे. कैबिनेट सेक्रेटरी, डिफेंस सेक्रेटरी, चेयरमैन-एनटीआरओ (नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन), डायरेक्टर-पीएमओ एवं ज्वाइंट सेक्रेटरी सहित चौदह लोगों को यह चिट्ठी दी गई, लेकिन जब इस मामले पर हंगामा हुआ तो किसी ने यह नहीं कहा कि ऑफ-द-एयर मॉनिटरिंग सिस्टम की खरीददारी लेफ्टिनेंट जनरल तेजेंदर सिंह ने की. सब क्यों खामोश रहे? इसका क्या मतलब है? क्या रक्षा सौदे पर सा़फ-सा़फ बोलने की किसी की हिम्मत नहीं है? उन्हें किसका डर है? क्या यह मान लिया जाए कि हथियारों के दलालों, अधिकारियों, नेताओं और मीडिया का एक ऐसा नेक्सस देश में फैल चुका है, जिसके खिला़फ बोलने की हिम्मत सरकार में भी नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता के बारे में हम अगले सप्ताह विस्तारपूर्वक बताएंगे, लेकिन हम जानते हैं कि इंडियन एक्सप्रेस रामनाथ गोयनका के आदर्शों के विपरीत पत्रकारिता करते हुए अब हमारे खिला़फ अफवाहें और झूठी कहानियां फैलाएगा. हम इंतज़ार कर रहे हैं. हम इसका जवाब पत्रकारिता की उसी विधा से देंगे, जिसके लिए रामनाथ गोयनका देश के सर्वोच्च पुरोधा माने जाते थे.

जनरल वी के सिंह ने जबसे रक्षा सौदों में दलाली और घूसखोरी के खिला़फ आवाज़ उठाई, तबसे वह हथियारों के दलालों के निशाने पर आ गए. मीडिया में उनके खिला़फतरह-तरह की झूठी खबरें फैलाई गईं. अ़फसोस की बात यह है कि पिछले छह महीने से वर्तमान थलसेना अध्यक्ष बिक्रम सिंह स़िर्फ जांच कमीशन बैठा रहे हैं. ऐसा लगता है कि इन जांच कमीशनों का एकमात्र उद्देश्य जनरल वी के सिंह की ईमानदारी पर सवाल उठाना है. जनरल बिक्रम सिंह ने टेक्निकल सर्विस डिवीजन को खत्म कर दिया है. इस डिवीजन को बंद करने का मतलब यह है कि अब भारत के पास ऐसा कोई डिवीजन नहीं है, जो दुश्मन देशों के अंदर जाकर खुफिया कार्रवाई कर सके. हमारा काउंटर इंटेलिजेंस कमज़ोर हो गया, लेकिन इसकी परवाह किसी को नहीं है. देश की सरकार को भी नहीं है. यही वजह है कि जो डिवीजन पाकिस्तान और चीन के निशाने पर था, उसे देश की सरकार ने ही बंद कर दिया. जो दुश्मन चाहते थे, वह काम हमने खुद कर दिया, लेकिन वजह यह बताई गई कि इसमें काफी धांधली हुई है. धांधली क्या हुई, इसका विवरण किसी के पास नहीं है. हम पाकिस्तान, नेपाल, बर्मा और चीन से घिरे हैं. हमारे रिश्ते किसी के साथ अच्छे नहीं हैं. इतने देशों में काउंटर इंटेलिजेंस में अगर 40-50 करोड़ रुपये खर्च होते हैं तो यह धांधली नहीं है, बल्कि इस पर जो लोग सवाल उठाते हैं, वे दुश्मन देशों के प्रतिनिधि के तौर पर खड़े दिखाई देते हैं. इस यूनिट के अधिकारियों को परेशान किया जा रहा है. उन्हें इसलिए परेशान किया जा रहा है, ताकि वे जनरल वी के सिंह के खिला़फ बयान दे दें. इस यूनिट के अधिकारियों, जिन्होंने अपनी जान को दांव पर लगाकर देशहित की रक्षा की, को परेशान करने के पीछे आ़िखर क्या तर्क है? क्या उन्होंने देश की सुरक्षा के साथ कोई सौदा किया? अगर नहीं, तो उन्हें परेशान करने वाले लोग क्या अपने विदेशी आकाओं के इशारे पर यह काम कर रहे हैं?

जब देश की रक्षा और सुरक्षा का मामला हो तो मीडिया को सतर्क रहने की ज़रूरत है. इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर ने तो गलत किया ही, लेकिन इसके लिए उसके एडिटर शेखर गुप्ता भी ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि उन्हें पता होना चाहिए कि उनका रिपोर्टर किसके साथ वहां गया और किस योजना के तहत गया. शेखर गुप्ता से उक्त दोनों ही अपरिचित नहीं हैं. इंडियन एक्सप्रेस अपने प्रचार में यह दावा करता है कि 97 फीसदी लोग उस पर भरोसा करते हैं. हम शायद बाकी तीन फीसदी में आने वाले लोग हैं, इसलिए यह कहानी उन्हीं 3 फीसदी के लोगों के लिए है. चौथी दुनिया पहले भी इंडियन एक्सप्रेस की स्पूफ स्टोरी की सच्चाई और उसमें शेखर गुप्ता की भूमिका की सच्चाई बता चुका है. इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता के बारे में हम अगले सप्ताह विस्तारपूर्वक बताएंगे, लेकिन हम जानते हैं कि इंडियन एक्सप्रेस रामनाथ गोयनका के आदर्शों के विपरीत पत्रकारिता करते हुए अब हमारे खिला़फ अफवाहें और झूठी कहानियां फैलाएगा. हम इंतज़ार कर रहे हैं. हम इसका जवाब पत्रकारिता की उसी विधा से देंगे, जिसके लिए रामनाथ गोयनका देश के सर्वोच्च पुरोधा माने जाते थे. आखिर में हम एक सवाल छोड़े जाते हैं कि यह कैसा संयोग है कि जब-जब आर्मी चीफ बिक्रम सिंह कोई जांच बैठाते हैं, तो उसकी खबर सबसे पहले इंडियन एक्सप्रेस को मिलती है. इंडियन एक्सप्रेस को र्फ वह खबर नहीं मिल सकी, जब सीबीआई ने लेफ्टिनेंट जनरल तेजेंदर सिंह को अपने शिकंजे में लिया.

डा. मनीष कुमार

डॉ. मनीष कुमार राजनीतिक-सामजिक मसलों पर मौलिक विचार और उसके धारदार विश्लेषण के माहिर हैं. अपनी नेतृत्व क्षमताके साथ चौथी दुनिया में संपादक (समन्वय) का दायित्व संभाल रहे हैं. विजुअल मिडिया का उनका लंबा अनुभव प्रिंट मीडिया में भी अपनी शिनाख्त दर्ज कर रहा है.
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डा. मनीष कुमार

डॉ. मनीष कुमार राजनीतिक-सामजिक मसलों पर मौलिक विचार और उसके धारदार विश्लेषण के माहिर हैं. अपनी नेतृत्व क्षमता के साथ चौथी दुनिया में संपादक (समन्वय) का दायित्व संभाल रहे हैं. विजुअल मिडिया का उनका लंबा अनुभव प्रिंट मीडिया में भी अपनी शिनाख्त दर्ज कर रहा है. ‎

13 thoughts on “इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

  • October 17, 2014 at 10:22 AM
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    इंसान की सोच उसका स्थान तय करती हे किसी व्यक्ति की सोच यह तय हे कि विद्वान् हे या मूर्ख कोई भी इन्सान अपनी सोच के लिए जाना जाता हे क्योकि सोच ही व्यक्ति के कर्मो का निर्धारण करती हे व्यक्ति वैसे ही काम करता हे जेसी उसकी सोच होती हे महात्मा गांधीजी ,स्वामी विवेकानंदजी , चन्द्र शेखर आजाद जी , केवल इस लिए जाने गये क्योकि उनके कार्य अच्छे थे कार्यो के पीछे सोच अच्छी थी जो अपनी सोच पर काबू पा लेता हे तो सोच सकारात्मक हो तो मनुष्य बड़े से बड़े और दुनिया की भलाई के लिए कार्य कर सकता हे यदि इन्सान की सोच सकारत्म नही हे तो छोटे से छोटा कार्य भी नही कर सकता हम एक छोटी सी चीटी से प्रेरणा ले सकते हे यदि हम ध्यान से देखे तो चीटी एक छोटे मानव की तरह दिखती हे एक छोटी सी चीटी इतनी मेहनती होती हे कि वह एक चीनी का टुकड़ा जो उससे कई गुना भारी होता हे उसे लेकर एक चट्टान पर चढ़ने की कोशिश करती हे गिरती हे फिर खड़ी हो जाती हे कई बार प्रयास करने के बाद आखिर सफल हो जाती हे क्या हम एक चीटी जेसे भी नही हे सोच हमेसा सकारत्म रखनी चाहिए चाहे जेसी भी परिस्थति हो |

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  • October 14, 2014 at 4:25 PM
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    आत्म हत्या के मामले में भारत का स्थान पहला हे | हर साल करीब २५०००० लोग आत्म हत्या करते हे | आत्म हत्याओ की प्रवर्ती युवाओ में सबसे ज्यादा देखने को मिलती हे | युवा केवल इसलिए आत्म हत्या करते हे , क्योंकि उनके पास कोई उनका मार्ग दर्शन करने के लिए नही होता ,जो उन्हें जीवन का मूल उद्श्य समझा सके | आज कल सहरी इलाको में माँ- बाप अपने बच्चे को अच्छा जीवन देने के लिए पेसे कमाते हे , ताकि वे उसकी पढाई आदि जरूरते पूरी कर सके | जब उनका बच्चा उनसे अचानक से छिन जाए तो उन्होंने जितने भी सपने अपने बच्चे के लिए देखे हे | वह सब टूटे सो अलग उनके दुःख का अंदाजा लगाना मुश्किल हे , में पूछता हूँ , कि एसे धन का क्या लाभ जो किताबी ज्ञान तो दे सकता हे | पर यह सब क्या उनको नेतिक ज्ञान दे सकता हे | जो उनको बता सके क्या निति सगत हे | में पूछता हूँ , कि ऐसे ज्ञान का क्या लाभ जो जीवन को एक नई दिशा और लक्ष्य n दे सके | यह सब काम केवल एक गुरु ही कर सकता हे और सायद ही माँ -बाप से बडा और कोई गुरु हो |
    स्कूलों और कालेजो में युवा मात्र इस वजह से आत्म हत्या करते हे क्योंकि उनका पूरे साल का रिजल्ट खराव हो जाए या कोई अन्य वजह जेसे उनकी प्रेमिका उनसे नाराज हो जाए या उनका मित्र नाराज होजाए तो वह आत्म हत्या जेसा घ्रणित मानशिकता वाला कदम उठाते हे | बिना यह सब सोचे की वे एक एसा बहुमूल्य जीवन खोने जा रहे हे , जिनकी मदद से वह बड़े-बड़े कार्यो को सफल कर सकते थे | जिसकी मदद से दुनिया को जीता जा सकता हे | युगों युगों तक दुनिया उनको यद् कर सकती हे | उनके बाद उनके माँ -बाप अपनों पर क्या बीतेगी जहा तक स्कूल या कोलेज के रिजल्ट की बात हे , तो किसी भी कागज के टुकड़े से किसी मनुष्य के गुडो की असली परख नही की जा सकती हे | और जहा तक किसी मित्र या प्रेमिका की बात हे इनके लिए हमारे जीवन में प्रमुख माँ -बाप इश्वर और गुरु को छोड़ा नही जा सकता ये मित्र तो जीवन में आते रहते हे लेकिन ईश्वर हमारा एसा मित्र हे जो हमारे साथ रहने वाला हे और सच्चा मित्र हे शास्त्रों में लिखा हे जो व्यक्ति अपने बहुमूल्य जीवन को नष्ट करता हे वह n केवल दुनिया का सबसे मूर्ख व्यक्ति बल्कि महा पाप का भागी होता हे इस लिए हर हालत से लड़ना चाहिए n ही जीवन समाप्त कर सब कुछ समाप्त करना चाहिए इस दुनिया को किसी के जीने मरने पर कोई फर्क नही पड़ता यह दुनिया अपनी गति से चलती रहती हे यह केवल उन्हें ही याद रखती हे जो सर्घष करता हे हमारे सामने इतिहास में कई उदाहरन हे |
    जीवन आपका हे आपको फेसला करना हे क्या सही हे क्या गलत यदि जीवन को समाप्त ही करना हे ,तो देश के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दे | जय हिन्द जय भारत

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  • July 5, 2014 at 7:39 PM
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    मेरे प्यारे,प्रदेश व देशवासियों
    नमस्ते !प्रणाम !
    भारतीय पंचायत संघ की वेबसाइट व वेब पेज पर आपका हार्दिक स्वागत है।
    हम इस वेबसाइट व वेब पेज को आपस में सीधी बातचीत का एक अति महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं.। मुझे आशा है कि इस मंच से प्रतेयक व्यक्ति के विचारों को सुनने, समझने और जानने का अवसर मिलेगा।साथ ही क्षेत्रीय समस्याओं से रूबरू हो पाएंगे ! उन्हें जन पाएंगे !इन्हें दूर करने के लिए ,शासकीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए, भारतीय पंचायत संघ ग्रामीण इलाकों में ”ग्राम चौपाल ” तथा शहरी इलाकों में ”मोहल्ला चौपाल ” का आयोजन कर रहा है. आप सभी को आमंत्रण है कि इस अभूतपूर्व रास्ट्रीयव्यापी अभियान में शामिल हो आत्मनिर्भर गाँव से आत्मनिर्भर रास्त्र के निर्माण में सहयोगी बने | हम देश भर के लोगों से संपर्क बनाने के लिए तकनीकी शक्ति और सोसल मीडिया में दृढ़ विश्वास करते हैं।
    इस वेबसाइट व वेब पेज के माध्यम से आप सभी संघ से सम्बंधित सभी नवीन सूचनाएं, गांवों की स्थिति, चौपाल कार्यक्रम के बारे में अद्यतन जानकारी और बहुत कुछ प्राप्त कर सकेंगे। हम भारत सरकार द्वारा उठाए जा रहे नए कदमों ,नई नीतियों से भी अवगत कराते रहेंगे |
    इस वेबसाइट व वेब पेज पर एक बार फिर आपका हार्दिक स्वागत है और आशा है कि आने वाले महीनों में अनेक मुद्दों पर आपके साथ चर्चा करूंगा।
    आपका,
    अतुल गुप्ता
    Head Office: G – 22, Anupam Plaza, Near Azad Apartment, Sri Arvind Marg, New Delhi -110016Phone: 011-26511266/566/866,09810321708,9630428223 Fax No: 011-26511966 email.atulbps1980@gmail.com,

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  • September 25, 2013 at 6:32 PM
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    जय हो दलाल मीडिया जिसबे की देश की भी ऐसी की तैसी कर राखी है ………क्या करारारा थप्पर मारा है देश की सुरछा ,इ ….. तेजेंदर सिंह , माननीय सेनाध्यछ महोदय भी कमीशंगीरी करते है वही पवन बंसल जैसे चोर नेताओं को सरकारी गवाह बनाया जाटा है }…ये काबिले तारीफ़ है …..बिश्व का प्रथम देश जहा की चोरो को सरकारी गवाह बनाया जाता है }
    जहा की विदेशी महिला को प्रोजेक्ट किया जाता है प्रधानमंत्री के रूप में …जय हो…..
    लेकिन सावधान दोस्तों अब जैसे ही ये मत कांग्रेस को गए सर्वनाश तय है

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  • September 24, 2013 at 5:11 PM
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    कांग्रेस और उसके दलालों को फासी से कम कुछ नहीं जय हिन्द जय भारत वन्दे मातरम |

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  • September 24, 2013 at 12:34 AM
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    नीस & वेल व्रित्तेनेद… कम्प्लीटली एक्सपोज्ड ट्रेटर

    Reply
  • September 21, 2013 at 7:21 PM
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    मित्रो उक्त प्रसंग
    से लगता है की इस भारत माँ को तोड़ने वाले गद्दार और दोगले किसी दूसरे देश में नहीं बल्कि हमारे बीच में छुपे भेरिये है जिनको जन्मजात विदेशियों की गुलामी करने और उनके तलुवे चाटने की आदत पड़ी हुई है वो आज भी समाप्त नहीं होने वाली है , जहाँ तक बात पत्रकारों या सच्ची पत्रकारिता की है आज उसका आभाव हो गया है बहुतायत पत्रकार अपनी अस्मिता नेताओं, दलालों, भ्रष्टाचारियों के हांथो में गिरवी रख चुके है और ट्रांस्फाएर पोस्टिंग ठेका दिलवाने के धंधे में लगे हुए हैं और उनकी लेखनी मंद हो चुकी है, आज जो भी ईमानदारी से पत्रकारिता करता होगा या निष्पछ लिखता होगा वो बेचारा और उसका परिवार आज की चकाचौंध भरी जिन्दगी का लुफ्त नहीं ले पायेगा , आजके पत्रकारिता में दलाल पत्रकारों की भरमार है क्योंकि उनहोने अपना ज़मीर बेच दिया है , यदि Hindustan के नवजवानों ने अगराई नहीं लिया तो ये देश चाँद गद्दारों के वजह से गर्त में चला जायेगा , क्या इसी के लिए हमारे पूर्वजों और स्वतंत्रता सेनानीओं ने अपने देश को आजाद कराया था , जब कोई ईमानदार या देश भक्त राष्ट्र हित में कुछ बोलता है तो बिल में छुपे चूहे भी आकर उसका जबाब देने लगते है मैं तो शिर्फ़ एक बात जनता हूँ जो अपने निहित स्वार्थ के लिए देश या Pradesh या भारत भूमि की अस्मिता से खिलवार करने वाले लोग एक बाप kee औलाद ho ही नहीं sakte , भोली भाली जनता और देश की संपदा को लूटने वाले देश द्रोहियों क्या तुम्हारी आत्मा मर चुकी है की तुम्हे देश की आर्थिक हालत दिखाई नहीं पड़ते ? तुम्हे क्या ! तुम तो दिन दूना रात चौगुना अपनी झोली भरने में लगे रहो और बेवकूफ जनता को भीख देते रहो . देश के तथा कथित जन्प्रत्निधियों मंत्रियों की यदि सुरछा हटा दिया जय तो देश में sachcha और kada कानून बन जायेगा सुरछा की जरुरत न्यायाधीशों को होना चाहिए कलम के उन सिपाहियों की सुरछा की जानी चाहिए जो अपनी लेखनी से देश के गद्दारों की कली करतूतों को उजागर कर सके

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  • September 21, 2013 at 3:30 PM
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    में इस सरकार पर बिस्वास नही करता हु यह अपनी सता बनाये रखने के लिए कुछ भी कर सकती हे

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  • September 21, 2013 at 3:01 AM
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    This shameless UPA govt will sell out our nation and country just to ‘trap’ its potential political adversary!

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  • September 21, 2013 at 1:50 AM
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    कांग्रेस एंड करप्ट मीडिया ने देश को बेच दल ……. जागो लोगो जागो…….!!!

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  • January 7, 2013 at 3:31 PM
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    अगर कोई मुस्लिम होता ना जाने अब तक किया किया हो जाता अब चुप्पी क्यूँ ?

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    • September 26, 2013 at 12:24 PM
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      अगर कोई मुस्लिम होता तो हमें कोई आश्चर्य नहीं होता क्यूंकि गद्दारी तो उनके खून में ही है.

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  • December 29, 2012 at 8:47 AM
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    धिक्कार है भारत सरकार पर ————-सबसे बड़ी दलाल मिडिया है ———–सराहनीय लेख———– हिन्दुओं की भ्रष्ट बुद्धि ———-

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