उड़ीसा ने अन्‍ना हजारे को सिर-आंखों पर बैठाया : राजनीति को नए नेतृत्‍व की जरूरत है

अन्ना हजारे कार्यकर्ता सम्मेलन में शिरकत करने के लिए उड़ीसा दौरे पर गए. उनकी अगवानी करने के लिए बीजू पटनायक हवाई अड्डे पर हज़ारों लोग मौजूद थे, जो अन्ना हजारे जिंदाबाद, भ्रष्टाचार हटाओ और उड़ीसा को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के नारे लगा रहे थे. अन्ना ने कहा कि हमारा काम बहुत बड़ा है और किसी को भी खुद प्रसिद्धि पाने के लिए यह काम नहीं करना है. लोगों को ऐसा काम करना है, जिससे पूरे मानव समुदाय का भला हो. उनकी दूसरी बैठक एक इंजीनियरिंग कॉलेज में हुई, जिसकी अध्यक्षता नक्षत्र न्यूज के प्रबंध संपादक रंजन मलिक ने की. चौथी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय इस बैठक के मुख्य वक्ता और अन्ना हजारे मुख्य अतिथि थे. संतोष भारतीय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा उनका विशेषाधिकार है, लेकिन देश का दुर्भाग्य है कि अभी भी बहुत सारे विद्यार्थियों को आठवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़नी पड़ जाती है. उन्होंने वहां उपस्थित छात्रों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया कि वे नए विचारों एवं योजनाओं के साथ विधानसभा में आने की कोशिश करें. उन्होंने राजनीति को नए नेतृत्व की ज़रूरत पर जोर दिया. उनका कहना था कि भारत एक कल्याणकारी देश है, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे बाज़ार आधारित देश बना दिया है, जहां जनता को कई तरह के कर देने पड़ते हैं. अन्ना हजारे ने कहा कि युवा देश के भविष्य हैं और वे ही इस देश को नई दिशा दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि न तो प्राकृतिक संसाधनों का दोहन होना चाहिए और न लोगों का शोषण, लेकिन इस देश में दोनों हो रहा है. सरकार संविधान के अनुसार काम नहीं कर रही है. उड़ीसा में तो भूमि एवं कोयले की लूट मची हुई है. अगर यही स्थिति रही तो आगे की पीढ़ी के लिए कुछ नहीं बचेगा. उन्होंने कहा कि सभी लोग धन कमाने के लिए बेचैन हैं और कोई मानवीयता के बारे में नहीं सोच रहा है. लोगों को समझना चाहिए कि आदमी इस धरती पर खाली हाथ आता है और खाली हाथ यहां से चला जाएगा. इसलिए हमें निज स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरे के बारे में भी सोचना चाहिए.

अन्ना हजारे ने उड़ीसा यात्रा के दौरान वहां के किसानों, मज़दूरों एवं युवाओं में एक नया जोश भर दिया. वे परिवर्तन के लिए तैयार हैं. अन्ना को जिस तरह लोगों ने अपने सिर-आंखों पर बैठाया, उससे तो यही लगता है कि वहां की आम जनता वर्तमान सरकार की नीतियों से खुश नहीं है और उसे किसी ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत है, जो उसके अधिकारों की रक्षा करने के लिए उसे प्रेरित कर सके. किसान अपनी फसलों की सही कीमत न मिलने के कारण परेशान हैं तो मज़दूर काम न मिलने के कारण और युवा पीढ़ी भ्रष्ट नेताओं की कारगुजारियों तथा शिक्षा की दयनीय हालत से परेशान है. ऐसे में सभी को अन्ना हजारे में उम्मीद की एक किरण दिखाई पड़ रही है, जो उनकी समस्याओं के निराकरण का उपाय लेकर यहां आए. यही कारण है कि वह जहां जाते हैं, लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है. कुछ ऐसा ही उड़ीसा में भी हुआ.

अन्ना हजारे ने कहा कि जब वह जीवन से निराश थे तो उन्होंने स्वामी विवेकानंद की किताब पढ़ी और जीवन के उद्देश्य को समझ कर खुद को मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया. उन्होंने कहा कि दूसरों की सहायता करो, छोटे परिवार की बात मत सोचो और पूरे देश को एक परिवार की तरह समझो. अन्ना ने पांच बातों की ओर युवाओं का ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि चरित्र में कोई दाग नहीं होना चाहिए, व्यवहार अच्छा होना चाहिए, आचरण शुद्ध होना चाहिए, त्याग करने की भावना होनी चाहिए और अपनी आलोचनाओं को स्वीकार करने की क्षमता होनी चाहिए. उन्होंने युवाओं से अपना लक्ष्य निर्धारित करने, उसे पूरा करने और भगत सिंह, राजगुरु एवं सुखदेव की शहादत बेकार न जाने देने की अपील की. उन्होंने कहा कि सच्चाई कभी बेकार नहीं जाती है. उन्होंने महिलाओं से आगे आने को कहा और लिंग भेद के खिला़फ संघर्ष करने की अपील की. उन्होंने कहा कि उनके लिए महिला एवं पुरुष एक समान हैं. इस मौके पर छात्र संसद का भी आयोजन किया गया. अन्ना ने कहा कि उन्हें किसी भी दल के समर्थन की आवश्यकता नहीं है, उन्हें तो लोगों के समर्थन की ज़रूरत है. अपने दो दिवसीय दौरे में अन्ना हजारे जगतसिंहपुर भी गए, जहां वह किसानों से मिले. वहां किसान बचाओ-देश बचाओ का नारा दिया गया. जनता ने अन्ना हजारे का जोरदार स्वागत किया. उन्हें सुनने के लिए हज़ारों लोग आए थे. सभा की शुरुआत एक गीत-न जिंदाबाद होगा, न मुर्दाबाद होगा, जब जागेगी जनता तो इंकलाब होगा से हुई. यहां अन्ना हजारे ने ग्राम सभा को मजबूत बनाने की बात कही. उन्होंने कहा कि जिस देश के अस्सी प्रतिशत लोग भूखे हैं, वहां से अनाज बाहर भेजा जा रहा है. विदेशी कंपनियां किसानों को लूट रही हैं. प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा है. किसानों को उनकी उपज की सही क़ीमत मिलनी चाहिए. उन्होंने एफडीआई का विरोध किया और भ्रष्टाचार मिटाने के लिए एक देशव्यापी संगठन की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि एक जन संगठन ही देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करा सकता है. उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और उनके रास्ते भले ही अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों का मकसद एक है. अन्ना हजारे का आंदोलन भ्रष्टाचार के विरोध में है और वह उड़ीसा की राजनीति को नई दिशा दे सकता है. अन्ना हजारे के उड़ीसा दौरे के बाद वहां के लोग काफी उत्साहित हैं और नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार भी हो रहे हैं. अन्ना के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में जिस तरह छात्रों एवं किसानों की भीड़ जुट रही है, उससे तो यही लगता है कि अब अगर सरकार किसानों, मज़दूरों एवं छात्रों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देती है, तो इस राज्य में किसान, मज़दूर और छात्र आंदोलन होने में देर नहीं लगेगी. अन्ना ने जिस तरह किसानों की बात की, उससे वहां के किसान काफी उत्साहित दिखाई पड़ रहे थे. लोगों का कहना था कि राज्य में पहली बार कोई उनकी सहायता के लिए आया. उन्हें उम्मीद है कि उनकी समस्याओं का निराकरण होगा और उनके अधिकारों की रक्षा होगी. किसानों ने कहा कि राजनीतिक दलों से उनका भरोसा उठ गया है और अब उन्हें अन्ना हजारे जैसे लोगों की ज़रूरत है, जो उन्हें उनके अधिकार दिला सकें. उड़ीसा में अन्ना की उपस्थिति ने लोगों में एक नया जोश भर दिया है. लगता है, उड़ीसा में जल्द ही परिवर्तन की बयार बहनी शुरू हो जाएगी.

विदेशी कंपनियां खेती का वजूद खत्म कर देंगी

भुवनेश्वर में अन्ना हजारे ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि एफडीआई और विदेशी कंपनियां भारत में खेती का वजूद खत्म कर देंगी. उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की उस बात का पुरजोर विरोध किया कि खुदरा बाज़ार में विदेशी  निवेश से रोज़गार मिलेगा. उनका कहना था कि खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश से रोजगार तो नहीं मिलेगा, लेकिन किसानों के शोषण का स्तर ज़रूर बढ़ जाएगा. अन्ना का सा़फ तौर पर मानना है कि विदेशी कंपनियों को देश में नहीं आने देना चाहिए, सरकार किसानों का शोषण कर रही है. उन्होंने कहा कि पॉस्को जैसी कंपनियों के प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए, क्योंकि वे उद्योग स्थापित करने के नाम पर देश के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रही हैं. साथ ही देश के किसानों एवं आदिवासियों को अपनी ज़मीन और घर से वंचित होना पड़ रहा है. वे यहां केवल देश के संसाधनों को लूटने आई हैं. अन्ना हजारे ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें निजी कंपनियों के फायदे के लिए लोगों से चर्चा किए बिना उद्योग स्थापित कर रही हैं. किसानों से जबरदस्ती उनकी ज़मीनें छीनी जा रही हैं और विदेशी कंपनियों को दी जा रही हैं. ये वे ज़मीनें हैं, जिन पर किसान कई पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं. जब भी इसके खिला़फ किसान आवाज़ उठाते हैं और आंदोलन करते हैं तो सरकार उनकी आवाज़ को लाठियों-गोलियों से दबा देती है. सरकार को भूमि अधिग्रहण का अधिकार ग्राम सभाओं को दे देना चाहिए. ग्रामीणों की सहमति के बिना किसी भी तरह की ज़मीन का अधिग्रहण नहीं किया जाना चाहिए. सरकार को यह याद रखना चाहिए कि जनता ही जल, जंगल और ज़मीन की असली मालिक है. उसे उसका अधिकार मिलना चाहिए. किसानों को एकजुट होकर जबरदस्ती किए जाने वाले भूमि अधिग्रहण का विरोध करना चाहिए. अगर वे ऐसा नहीं करेंगे, तो विदेशी कंपनियां देश में किसानों और खेती का वजूद खत्म कर देंगी.

You May also Like

Share Article

2 thoughts on “उड़ीसा ने अन्‍ना हजारे को सिर-आंखों पर बैठाया : राजनीति को नए नेतृत्‍व की जरूरत है

  • December 19, 2012 at 8:39 AM
    Permalink

    बलात्कार हिन्दूओं के होते हैं — हिन्दू , मुसलमान , ईसाई , सिख सब हिन्दू – महिलाओं का करते हैं — मुसलमान महिलाओं का कभी भी नहीं — हिन्दू – बलात्कारियों को फांसी हो जाय गी जैसे बंगाल के धन्न्जाए को अगले दिन फांसी हो गई किन्तु ” अफ़ज़ल गुरु ” को नहीं वर्षो बीत गए ——————————
    हिन्दुओं ने ” परमोशन – आरक्षण ” पर कितना आन्दोलन ओर प्रदर्शन किया कुछ नहीं हुआ और मुसलमानों को बिना प्रदर्शन किये सब कुछ मिलरहा है ————————————-
    कर – विभाग , सी आई बी , पोलिस आदि आदि के छापे सब हिन्दुओं पर मुसलमानों पर कभी नहीं , अवैदय घर , दुकानीं आदि आदि सब हिन्दुओं के गीराए मुसलमानों के नहीं ————————
    भारत हिन्दुओं के लिए नर्क मुसलमानों के लिए स्वर्ग ——————

    Reply
  • December 17, 2012 at 5:36 AM
    Permalink

    यदि कोई सलमान खुरशीद किसी राम विलास की ह्त्या करे तो क्या राम विलास का परिवार और उस के सघे सम्बधि यह गाने लगे गे ” सलमान खुरशीद ; राम विलास भाई भाई ” ??? और राम विलास का परिवार प्रचार करने लगें ”’ सब धर्म अच्छी बातें सिखाते हैं ” ”और सलमान खुरशीद को छोटा भाई समझ कर उसे क्षमा करें दें गे ” —- क्या ऐसा हो गा या होता है —- तो इसलामिक मुसलमान सैकड़ो वर्षों से हिन्दुओं की हत्याएं कर रहें हैं और हिन्दू देशों को इस्लामिक देश बनाते जा रहें हैं ; इन्हीं हिन्दू – हत्याओं द्वारा मुसलमानों ने पाकिस्थान बनाया और अब हिन्दुस्थान को इस्लामिक स्थान बनाने में लगे हुएं हैं और हिन्दू गाते जा रहें हैं ””” हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई भाई —— और सब धर्म अच्छी बातें सिखातें हैं ”” —— आप इस हिन्दू – मानसिक – अवस्था को क्या कहें गे जो नहरू – गांधी हम हिन्दुओं को सिखा गए हैं और सिखाते जा रहें हैं —-???? —–

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *