न थकेंगे, न झुकेंगे

आखिर अन्ना हज़ारे क्या हैं, मानवीय शुचिता के एक प्रतीक, बदलाव लाने वाले एक आंदोलनकारी या भारतीय राजनीति से हताश लोगों की जनाकांक्षा? शायद अन्ना यह सब कुछ हैं. तभी तो इस देश के किसी भी हिस्से में अन्ना चले जाएं, लोग उन्हें देखने-सुनने दौड़े चले आते हैं? उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ को देखकर कई राजनेताओं को रश्क होता होगा. छात्र, युवक, युवतियां, वृद्ध, महिलाएं, समर्पित कार्यकर्ता, किसान, बुनकर हों या डॉक्टर-इंजीनियर, किसी भी राजनीतिक दल की एक दिनी सभा में समाज के इतने अलग-अलग वर्ग के लोग शायद ही शिरकत करते नज़र आएं, लेकिन न जाने अन्ना में ऐसा क्या जादू है, जो हर उस आदमी को अपने पास खींच लाता है, जो इस देश से प्यार करता है, जो इस देश को बर्बाद होते नहीं देखना चाहता और जो इस देश को बचाना चाहता है.

अन्ना का आंदोलन जारी है, भ्रष्टाचार के खिला़फ. आंदोलन उन सरकारी नीतियों के खिला़फ, जो जनविरोधी हैं, जो जल, जंगल और ज़मीन से आम आदमी को बेदखल करती हैं. दिल्ली हो, गुवाहाटी हो या फिर 12 दिसंबर को बनारस में हुई अन्ना हज़ारे की सभा में जुटी भीड़ उन लोगों के लिए एक संदेश है और शायद चेतावनी भी, जो खुद को इस देश के वर्तमान हालात से संतुष्ट बताते हैं.

12 दिसंबर, 2012 यानी 12-12-12. एक अद्भुत संयोग, एक ऐतिहासिक क्षण, लेकिन इस सबके अलावा एक और अद्भुत संयोग. इतिहास का वर्तमान से मिलन का. बनारस के राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ भवन. इसका इतिहास यह है कि यहीं पर जेपी ने अपने आंदोलन की रूपरेखा तय की थी और यही वह जगह है, जहां 12-12-12 को अपनी बनारस यात्रा के दौरान अन्ना हज़ारे पहुंचे और उन्होंने भ्रष्टाचार के खिला़फ अपनी लड़ाई का शंखनाद किया. अन्ना ने यह भी कहा कि वह आगामी 30 जनवरी को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से भ्रष्टाचार और सरकार के खिला़फ आंदोलन की शुरुआत करेंगे.

अन्ना हज़ारे बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्रों की ओर से भारत माता मंदिर में आयोजित छात्र-युवा सम्मेलन में पहुंचे थे. हज़ारों युवाओं एवं छात्रों को संबोधित करते हुए अन्ना ने राष्ट्र निर्माण के लिए युवा शक्ति को आगे आने को कहा. उन्हें जेल जाने और डंडे खाने के लिए तैयार रहने को कहा. अन्ना ने सा़फ कहा कि यह लड़ाई व्यवस्था परिवर्तन की है, लड़ाई लंबी है, देर हो सकती है, लेकिन असफल नहीं हो सकती. जन लोकपाल से शुरू हुए इस आंदोलन को अन्ना अब और व्यापक बना चुके हैं, मसलन राइट टू रिकॉल, राइट टू रिजेक्ट, जल-जंगल-ज़मीन और ग्राम स्वराज जैसे मुद्दें. युवाओं एवं छात्रों को संबोधित करते हुए अन्ना हज़ारे ने कहा कि आज का युवा अभी खामोश है, जब वह जागेगा, तभी देश बदलेगा और भ्रष्टाचार मिटेगा. उन्होंने युवाओं को देश के लिए मरना सीखने की नसीहत भी दी और कहा कि वर्तमान राजनीति के चलते देश तो बर्बाद हो ही रहा है, अब बाकी बचे देश को बचाना है. युवाओं में अन्ना की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब वह भारत माता मंदिर पहुंचे तो उन्हें देखने, उनसे मिलने के लिए युवाओं के बीच होड़ सी मच गई, धक्कामुक्की होने लगी. मंच पर अन्ना के साथ बैठने के लिए छात्र नेताओं के बीच कहासुनी भी हुई.

12 दिसंबर, 2012 यानी 12-12-12. एक अद्भुत संयोग, एक ऐतिहासिक क्षण, लेकिन इस सबके अलावा एक और अद्भुत संयोग. इतिहास का वर्तमान से मिलन का. बनारस के राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ भवन. इसका इतिहास यह है कि यहीं पर जेपी ने अपने आंदोलन की रूपरेखा तय की थी और यही वह जगह है, जहां 12-12-12 को अपनी बनारस यात्रा के दौरान अन्ना हज़ारे पहुंचे और उन्होंने भ्रष्टाचार के खिला़फ अपनी लड़ाई का शंखनाद किया. अन्ना ने यह भी कहा कि वह आगामी 30 जनवरी को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से भ्रष्टाचार और सरकार के खिला़फ आंदोलन की शुरुआत करेंगे.

युवा शक्ति का महत्व क्या है, इसे अन्ना हज़ारे बखूबी जानते हैं, इस ताकत को उन्होंने दिल्ली के रामलीला मैदान में भी देखा है. यही वजह है कि अन्ना हज़ारे और वी के सिंह भ्रष्टाचार के खिला़फ चल रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए युवाओं को आगे आने के लिए कह रहे हैं. युवाओं की भागीदारी ने ही रामलीला मैदान वाले आंदोलन को इतना असरदार बना दिया था कि सरकार से लेकर संसद तक को अन्ना की बात सुननी और माननी पड़ी थी. दूसरी तऱफ इस देश के युवाओं को भी एक नेतृत्व चाहिए, जो उन्हें अन्ना हज़ारे जैसे ईमानदार आदमी से मिलता दिख रहा है. दरअसल, अन्ना की सादगी ही अन्ना की ताकत है. उनकी यह सादगी उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बना देती है.

बनारस में बुजुर्ग अन्ना ने अपने संबोधन से 25-30 साल के युवाओं को प्रभावित भी खूब किया. हज़ारों युवक-युवतियां हाथों में मोबाइल लेकर अन्ना को अपने कैमरे में कैद करने की कोशिश में लगे थे. अन्ना ने युवाओं से जाति-धर्म से ऊपर उठने की बात कही. उन्हें न स़िर्फ अपने परिवार, बल्कि इस देश के लिए भी सोचने को कहा. अन्ना ने इस सभा में सबसे हाथ उठाकर संकल्प कराया कि हम सब भगत सिंह की कुर्बानी बेकार नहीं जाने देंगे. अन्ना ने माना कि अगर युवा शक्ति जाग गई तो इस देश को बदलने में वक्त नहीं लगेगा. उन्होंने कहा कि देश का सिस्टम ऐसा हो गया है, जहां शिक्षा की दुकानें सजने लगी हैं, जिससे ग़रीबों के बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही है. दूसरी ओर देश में विदेशी कंपनियां आ रही हैं, उन्हें किसानों की ज़मीन दी जा रही है. अन्ना ने कहा कि आज़ादी हासिल हुए 65 वर्ष बीत गए, लेकिन आज भी कुछ लोग खाने के लिए जी रहे हैं तो कुछ लोग जीने के लिए खा रहे हैं. उन्होंने ऐलान किया कि शरीर में प्राण रहने तक भ्रष्टाचार से मुक्ति और व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई जारी रहेगी. घुट-घुटकर मरने से अच्छा है समाज के लिए संघर्ष करते हुए जीना. इसलिए लोकपाल विधेयक लाओ या जाओ की तर्ज पर आंदोलन जारी रहेगा. इस मौके पर पूर्व थलसेना अध्यक्ष जनरल वी के सिंह भी अन्ना के साथ थे. उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली की हालत ऐसी हो गई है कि यहां के बच्चों को पढ़ने के लिए विदेश जाना पड़ता है. इसमें हर साल क़रीब 50 हज़ार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि सरकार अगर चाहे तो वह इतनी ही धनराशि में प्रतिवर्ष हज़ारों आईआईएम एवं आईआईटी स्थापित कर सकती है. जनरल सिंह ने माना कि युवाओं के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है.

लड़ाई व्यवस्था परिवर्तन की है. लड़ाई लंबी है, देर हो सकती है, लेकिन असफल नहीं हो सकती.

– अन्ना हज़ारे

अन्ना ने इस मौके पर छात्रों-युवाओं को अपना मोबाइल नंबर भी दिया और कहा कि जो लोग इस आंदोलन में, संघर्ष में अपनी भागीदारी चाहते हैं, वे उनके मोबाइल नंबर 09923599234 पर एसएमएस करें. राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ भवन में अन्ना हज़ारे एवं वी के सिंह इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कार्यकर्ताओं, बुनकरों, किसानों और समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों से मिले, उनकी बातें सुनीं, उनकी समस्याओं पर गौर किया. शक्तिशाली भारत के निर्माण के लिए अन्ना ने इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कार्यकर्ताओं से कहा कि गांवों के विकास के बिना देश में परिवर्तन नहीं लाया जा सकता. इसलिए गांवों को स्वावलंबी और स्वयं शासित बनाना होगा. अन्ना ने अपने गांव रालेगन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस गांव में 40 से अधिक शराब की भट्ठियां थीं, वहां आज बीड़ी-सिगरेट की एक दुकान तक नहीं है. यहां पर जनरल वी के सिंह ने देश में बदलाव के लिए एक नहीं, कई आंदोलनों की ज़रूरत बताई. छात्रों, युवाओं एवं किसानों से रूबरू होने के बाद अन्ना हज़ारे डॉक्टरों से भी मिले, लेकिन इस बार अपना इलाज कराने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें नसीहत देने के लिए. वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन वाराणसी के दफ्तर पहुंचे. वहां उन्होंने डॉक्टरों से अपील की कि वे समाज के शरीर से भ्रष्टाचार रूपी रोग को दूर करें. उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि भ्रष्टाचार के खिला़फ आंदोलन में आईएमए जैसी संस्थाएं भी सहयोग देने के लिए आगे आ रही हैं. डॉक्टरों से मुखातिब होते हुए जनरल वी के सिंह ने कहा कि अगर डॉक्टर चाहें तो जनता उनकी एक बात भी न काटे, क्योंकि धरती पर आम आदमी डॉक्टर को भगवान से कम नहीं मानता.

देश के पुनरोद्धार के लिए एक नहीं, कई आंदोलनों की ज़रूरत है.

– वी के सिंह

बहरहाल, अपनी इस बनारस यात्रा के दौरान अन्ना ने एक बार फिर से यह ऐलान कर दिया है कि आगामी 30 जनवरी को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से भ्रष्टाचार और सरकार के खिला़फ एक बड़े आंदोलन की शुरुआत की जाएगी. इस बीच वह देश के अलग-अलग स्थानों पर घूमकर लोगों के बीच अपनी बात रख रहे हैं. बनारस में जुटी भीड़ अपेक्षा से ज़्यादा थी. उसमें युवाओं की संख्या देखकर अन्ना निश्चित तौर पर खुश हुए होंगे. दूसरी ओर देश की जनता को अन्ना से भी काफी अपेक्षाएं हैं, उम्मीदें हैं, सपने हैं और जिन्हें पूरा करने के लिए निश्चित तौर पर यह बुजुर्ग आंदोलनकारी न तो थकेगा और न झुकेगा.

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One thought on “न थकेंगे, न झुकेंगे

  • December 30, 2012 at 6:57 PM
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    देश को अन्ना हजारें जी से बहुत उम्मीदे हैं लेकिन जिस प्रकार से अन्ना अरविंद को लेकर बार -बार बयान बदल रहें हैं वो अन्ना को सवालों के धेरे में खडा करता हैं । केजरीवाल की नियत परअन्ना को शक था तो अन्ना बाद अन्ना टीम का बडा चेहरा अरविंद ही क्यों बने इस सवाल का जवाब अन्ना देना चाहिए ।

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