चमकती रेत का काला कारोबार

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अवैध खनन देश के लिए एक गंभीर मसला है और किसी न किसी रूप में पूरे देश में यह धंधा चल रहा है. चाहे आंध्र प्रदेश में लौह अयस्क का मामला हो, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बालू खनन का या झारखंड में कोयले का, देश भर में अवैध खनन माफियाओं की हर जगह तूती बोलती है. दुर्गा शक्ति नागपाल प्रकरण के बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश में अवैध खनन का मामला सुर्खियों में है. दुर्गा शक्ति कोई पहली अधिकारी नहीं हैं, जो इस प्रदेश में अवैध खनन को रोकने में बलि का बकरा बनी हैं. इससे पहले भी जो व्यक्ति अवैध खनन की राह में रोड़ा बना, खनन माफियाओं ने सरकार में पहुंच के दम पर उन्होंने कहीं का नहीं छो़डा.

उत्तर प्रदेश में खनन माफियाओं का तिलिस्म कभी कोई सरकार नहीं तोड़ पाई या दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि राजनीतिक दलों के आकाओं ने जान-बूझ कर इस ओर से अपनी आंखें बंद किए रखीं. प्रदेश के नदी किनारे, पहाड़ी इलाकों को छूता कोई भी जिला ऐसा नहीं बचा है, जो अवैध खनन माफियाओं के कब्जे में न हो. ऊपरी तौर पर देखा जाए, तो यह तस्वीर बहुत गंभीर नहीं दिखती, लेकिन इसका असली खेल तब समझ में आता है, जब यह बात सामने आती है कि समूचा धंधा राजनेताओं के संरक्षण मे फल-फूल रहा हैं. कभी वाइन किंग के नाम से मशहूर रहे कारोबारी पोंटी चड्ढा ने मुलायम सिंह यादव व और मायावती की मेहरबानी से अवैध खनन में खूब धन कमाया था. प्रदेश के कई सांसद और विधायक सीधे तौर पर इस धंधे में जुड़े हैं. बसपा के पूर्व नेता और मंत्री रह चुके बाबू सिंह कुशवाहा का नाम सीधे तौर पर अवैध खनन के धंधे में आ चुका है.

राज्य में प्रति वर्ष अरबों रुपये का अवैध खनन का कारोबार फल-फूल रहा है. इस धंधे में अफसरों से लेकर नेताओं तक को चंदे के रूप में राजनीतिक दलों को आर्थिक लाभ मिलता है. ऐसा नहीं है कि खनन माफियाओं पर नकेल कसने के लिए कानूनों की कमी हो, धन-बल के प्रभाव ने हर कानून की सीमाओं को छोटा कर दिया है. खनन माफिया नेताओं और अफसरों को पैसों से अपने पक्ष में कर लेते हैं और इसके अलावा प्रतिरोध में उठी आवाजों को बाहुबल से बंद कर देते हैं. नोएडा में अवैध खनन का विरोध करने वाले किसान पाले राम की हत्या इस बात का ताजा प्रमाण है. प्राकृतिक संसाधनों का अवैध खनन रोकने के लिए अदालतें हमेशा सख्त रहती हैं, इसके बाद भी सिस्टम के साथ खेल कर जाने की कूबत रखने वाले खनन माफियाओं के हौसले पस्त नहीं हुए. अगर कभी अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई हुई भी है, तो वह महज खानापूर्ति से अधिक और कुछ साबित नहीं हुई.

कहने को तो यूपी के युवा सीएम खनन माफियाओं के प्रति काफी सख्त दिखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका जिला इटावा ही खनन माफियाओं का गढ़ बना हुआ है. इटावा के आस-पास पर्यावरण का काम करने वाले फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर के सचिव डॉ राजीव चैहान कहते हैं कि सत्तारूढ़ दल के लोग बंदूक की नोक पर खनन का काम करते हैं.

सीएजी रिपोर्ट कहती है कि उत्तर प्रदेश में करीब साढ़े चार सौ मामलों में जिलाधिकारियों ने एनओसी जारी की थी, लेकिन खनन का राजस्व नहीं दिया. इससे सरकार को करीब 238 करोड़ का नुकसान हुआ. इसकी बड़ी वजह है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में बाहुबली कहीं न कहीं अवैध खनन के धंधें में लिप्त हैं. अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, अखंड सिंह, ब्रजेश सिंह, मुन्ना बजंरगी, धनंजय सिंह आदि जैसे बड़े बाहुबलियों का नाम भी किसी न किसी रूप में इससे जुड़ा रहा है. वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिला भदोही के विधायक और बसपा नेता नंद गोपाल नंदी पर हमले के अरोपी विजय मिश्रा, गाजीपुर के मुख्तार अंसारी, आजमगढ़ के अखंड और कुंटू सिंह, बनारस के विनीत सिंह और सुशील सिंह का पूरा गुट एकजुट होकर अवैध खनन से लेकर अन्य तमाम वैध-अवैध धंधों में एक छत्र राज कर रहा है. इसके गुट के आका का नाम विधायक विजय सिंह बताया जाता है. इन लोगों के नाम पर ही अरबों रुपये का काला कारोबार होता है. बागपत से लेकर सोनभद्र तक इस गुट का दबदबा है. बात पुरानी है, लेकिन अनदेखी नहीं की जा सकती है. माफियाओं ने कभी मिर्जापुर-सोनभद्र में एक लाल पत्थर के पहाड़ को इस बेदर्दी से खोद डाला कि पूरा का पूरा पहाड़ ही ध्वस्त हो गया.

पश्‍चिमी उत्तर प्रदेश में खनन माफिया के साथ-साथ सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे, रंगदारी चीनी मिल मालिकों से जबरन वसूली का धंधा इन दिनों जोरों पर है. चर्चित माफिया गिरोहों में मुजफ्फर नगर के सुशील मूंछ, मेरठ के बदन सिंह बिद्दो और बागपत के धर्मेन्द्र किरठल की दबंगई इस समय बुलंदियों पर है. बुलंदशहर के सपा विधायक गुड्डू पंडित का नाम भी माफिया सूची में टॉप पर है. नोएडा में अवैध खनन के धंधे में लिप्त नरेन्द्र भाटी और उनके साथियों की चर्चा तो हो ही रही है. कानपुर में गंगा के किनारे से अवैध खनन, चमड़ा व्यापारियों से वसूली, सुपारी लेकर हत्या के मामले में अतीक पहलवान जेल से ही अपना गैंग संचालित करता है. इलाहाबाद में बीएसपी विधायक कपिल मुनि करवरिया उनके भाई भाजपा विधायक उदय करवरिया का बालू के अवैध खनन में कोई सानी नहीं है और उन्होंने इसमें अपना वर्चस्व बनाने के लिए कई वारदातों को अंजाम दिया है

बुंदेलखंड में बाबू सिंह कुशवाहा का दबदबा घटने के बाद यहां पर झांसी के सपा नेता चंद्र पाल यादव और सपा के ही घनश्याम अनुरागी के गुर्गों ने पूरी बेतवा नदी पर ही कब्जा कर रखा है. यहां से निकली महीन और मोटी मोरंग की मांग पूरे देश में है. यह जानकार आश्‍चर्य होगा कि बाजार में चालीस हजार रुपये प्रति ट्रक बिकने वाली मोरंग का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खनन के समय ही इन गुर्गों द्वारा वसूल लिया जाता है. बेतवा से मौरंग का अवैध खनन करने के बाद ट्रकों को माफिया के लोग सुरक्षित रूप से 50 से सौ किलोमीटर के दायरे तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी लेते हैं. सुल्तानपुर में सोनू सिंह और मोनू सिंह का अपना सशक्त गिरोह है. सोनू सिंह हाल में ही भाजपा में शामिल हुए हैं. इलाहाबाद में संत ज्ञानेश्‍वर हत्याकांड में भी दोनों जेल में बंद रहे. सुल्तानपुर, फैजाबाद, अंबेडकर नगर में इस गैंग खनन से लेकर अनेक अपराधों में इनकी तूती बोलती है. सत्ता की हनक और राजनीतिक दंबगई के बल पर गोंडा में बृजभूषण शरण, रायबरेली के अखिलेश कुमार सिंह, बलरामपुर के जहीर, लखनऊ के अरुण कुमार शुक्ला उर्फ अन्ना महाराज, रामचन्द्र प्रधान, उन्नाव के बृजेश पाठक भी अवैध धंधों का साम्राज्य स्थापित किए हुए हैं.

बालू के अवैध खनन का मामला केवल अपराध से जुड़ा नहीं है. इससे न केवल सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता भी खतरे में हैं. पर्यावरणविद् मानते हैं कि अगर इसी तरह खनन होता रहा, तो नदी की मौत हो जाएगी और जैव विविधता  भी नष्ट हो जाएगी. नदी में बालू फिल्टर की तरह काम करता है और इससे छन कर शुद्द पानी भूमि में जाता है, लेकिन बालू के अवैध खनन से न केवल भू-जल स्तर घटता है बल्कि इसके प्रदूषित होने का खतरा भी बढ़ जाता है. नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में यमुना व हिंडन की तलहटी में हो रही बालू की अवैध निकासी भले इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन इस धंधे की मोटी कमाई सोनभद्र, बांदा, गोरखपुर, सुल्तानपुर और इलाहाबाद जैसे जिलों में भी खूब है. सोनभद्र जिले में 400 किलोमीटर क्षेत्र में बालू का खनन होता है, लेकिन सरकार को इससे हर माह केवल 15 करोड़ रुपये राजस्व मिलता है. एनसीआर में बन रही नई रिहाइशों ने इस अवैध धंधे को और बढ़ावा दिया है. यहां बिल्डरों को बालू हिंडन, यमुना और गंगा नदियों में गैर कानूनी तरीकेसे खुदाई करने वाले माफियाओं से बालू मिल रही है. एक लाइसेंसधारी आपूर्तिकर्ता राज्य को रॉयल्टी चुकाने के बाद ऊंची कीमत, करीब 20,000 रुपये प्रति डंपर के हिसाब से बालू बेचता है. इतना ही बालू एक गैरकानूनी आपूर्तिकर्ता 8000 रुपये में ट्रांसपोर्टरों को मुहैया कराता है, जो भवन निर्माताओं को 10,000 रुपये में बेचते हैं.

अवैध खनन के प्रभाव भी साफ दिख रहे हैं. फैजाबाद के गुप्तार घाट के निकट बने बांध को खतरा पैदा हो गया है. यही हाल फैजाबाद के उमर पुर गांव का है, जहां धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है. अंबेडकर नगर में नोएडा में नोएडा में अवैध खनन के धंधे में लिप्त नरेन्द्र भाटी और उनके साथियों की चर्चा तो हो ही रही है. कानपुर में गंगा के किनारे से अवैध खनन, चमड़ा व्यापारियों से वसूली, सुपारी लेकर हत्या के मामले में अतीक पहलवान जेल से ही अपना गैंग संचालित करता है. इलाहाबाद में बीएसपी विधायक कपिल मुनि करवरिया उनके भाई भाजपा विधायक उदय करवरिया का बालू के अवैध खनन में कोई सानी नहीं है और उन्होंने इसमें अपना वर्चस्व बनाने के लिए कई वारदातों को अंजाम दिया है

अवैध खनन के धंधे में लिप्त नरेन्द्र भाटी और उनके साथियों की चर्चा तो हो ही रही है. कानपुर में गंगा के किनारे से अवैध खनन, चमड़ा व्यापारियों से वसूली, सुपारी लेकर हत्या के मामले में अतीक पहलवान जेल से ही अपना गैंग संचालित करता है. इलाहाबाद में बीएसपी विधायक कपिल मुनि करवरिया उनके भाई भाजपा विधायक उदय करवरिया का बालू के अवैध खनन में कोई सानी नहीं है और उन्होंने इसमें अपना वर्चस्व बनाने के लिए कई वारदातों को अंजाम दिया है

पश्‍चिमी उत्तर प्रदेश में खनन माफिया के साथ-साथ सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे, रंगदारी चीनी मिल मालिकों से जबरन वसूली का धंधा इन दिनों जोरों पर है. चर्चित माफिया गिरोहों में मुजफ्फर नगर के सुशील मूंछ, मेरठ के बदन सिंह बिद्दो और बागपत के धर्मेन्द्र किरठल की दबंगई इस समय बुलंदियों पर है. बुलंदशहर के सपा विधायक गुड्डू पंडित का नाम भी माफिया सूची में टॉप पर है. नोएडा में अवैध खनन के धंधे में लिप्त नरेन्द्र भाटी और उनके साथियों की चर्चा तो हो ही रही है.

घाघरा के तट पर अवैध खनन कर माफिया जहां राजस्व की तगड़ी चपत लगा रहे हैं, वहीं इससे भू-स्खलन और कछार के इलाकों में कटान का खतरा भी उत्पन्न हो गया है. अंबेडकर नगर के ही जहांगीर गंज थाना क्षेत्र के मांझा उसौरी नसीरपुर का एक मामला हाल ही प्रकाश में आया है. गत 26 मार्च को यहां अवैध खनन की सूचना पर आलापुर तहसील के तत्कालीन तहसीलदार रामजीत मौर्य अमले के साथ मौके पर जा पहुंचे. उन्होंने अवैध खनन रोकते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया, तो कुछ ही पल में माफिया और उनके गुर्गे आ धमके. इन लोगों ने असलहे के बल पर तहसीलदार को बंधक बना लिया. खनन माफिया के  चंगुल से छुटने के बाद तहसीलदार ने जहांगीर गंज थाने में आरोपियों ने आलापुर थाना क्षेत्र के पड़रौना निवासी नरेंद्र सिंह, बृजेश सिंह व दो अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करा दी. जिला बलरामपुर में खनन के चलते पहाड़ी नाले धीरे-धीरे नदी में तब्दील हो रहे हैं. खनन के चलते कई गांव तबाही के मुहाने पर हैं. प्रशासन का दावा है कि खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन रेत का काला कारोबार यहां धड़ल्ले से चल रहा है. जैसे-जैसे रात का अंधेरा बढ़ता है, अवैध खनन से जुड़े लोग सक्रिय हो जाते हैं.

सरकार एक बार नींद से जागते हुए अवैध खनन नीति को लागू कर रही है. नियम-कानून तो पहले से भी मौजूद हैं, लेकिन अमल तो तब हो, जब उन्हें लागू करने वाले आकाओं का प्रश्रय खनन माफियाओं के ऊपर से हटे.