यह सरकार भ्रष्ट है

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समाजसेवी अन्ना अपनी जनतंत्र यात्रा के क्रम में 13 जुलाई को शाहग़ढ और धुबरा पहुंचे. भारी संख्या में लोग गांधीवादी अन्ना के स्वागत में सभा स्थल पर पहुंचे, जिनमें बच्चे, बू़ढे, महिलाएं और युवा थे. अन्ना ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने देश को धोखा दिया है. सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ल़डना ही नहीं चाहती. उन्होंने कहा कि सरकार ने मजबूत लोकपाल को लेकर भी देश को धोखा दिया है. उन्होंने कहा कि लोकपाल बिल पास करवाना मेरा पहला लक्ष्य है और मैं इसे पास करवा कर रहूंगा. अन्ना से मिलने किसान भी पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि पहले लोकपाल पास हो जाए, इसके बाद किसानों के हितों की ल़डाई ल़डूंगा. जनतंत्र यात्रा के क्रम में अन्ना 14 जुलाई को दतिया और ग्वालियर पहुंचे. यहां भी लोग हजारों की तादाद में अन्ना को देखने-सुनने पहुंचे थे. लोग अन्ना के समर्थन में नारे लगा रहे थे. हर तरफ से यही आवाज आ रही थी, अन्ना तुम आगे ब़ढो, हम तुम्हारे साथ हैं. अन्ना ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं को आगे ब़ढ कर देश की कमान संभालनी प़डेगी. यह सरकार पहले वादा करती है, फिर धोखा देती है. खुद हमारे प्रधानमंत्री वादा नहीं निभाते. अन्ना की सभा में गांव और शहरों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे.

अन्ना 15 जुलाई को शिवपुरी और गुना पहुंचे. लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की दयनीय हालत के लिए केंद्र सरकार और उसकी गलत नीतियां ही जिम्मेदार हैं. इसलिए अब किसानों को एक मंच पर लाकर उनकी समस्याओं को दूर करना जरूरी हो गया है, लेकिन इससे पहले लोकपाल जरूरी है. जनता को भ्रष्टाचार मुक्त रखने और सरकार के भ्रष्ट महकमों पर अंकुश लगाने के लिए लोकपाल बहुत ही जरूरी है. 16 जुलाई को अन्ना बेवारा और शाजापुर पहुंचे. यहां अन्ना के स्वागत में बच्चे, बु़ढे, युवाओं और महिलाओं की भारी भी़ड पहुंची थी. लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का कोई विभाग ऐसा नहीं है, जहां भ्रष्टाचार नहीं है. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि सरकार इस बात से अनजान है, लेकिन वह भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए गंभीर नहीं है. अन्ना ने कहा कि हमें मजबूत लोकपाल चाहिए और हम इसे लेकर रहेंगे. समाजसेवी अन्ना हजारे जनतंत्र यात्रा के पांचवें चरण के आखिर में 17 जुलाई को उज्जैन, देवास और इंदौर में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार से लोकपाल के मुद्दे पर ऐसी उम्मीद नहीं थी. यह काम तो सरकार को खुद करना चाहिए था, लेकिन यह सरकार इतनी भ्रष्ट है कि उसे इस बारे में सोचने का समय ही नहीं है. कोई ऐसा दिन नहीं होता, जिस दिन सरकार की गलत नीतियों, उसके महकमों में फैले भ्रष्टाचार और घोटाले की बात सामने नहीं आती. इसी के साथ ही अन्ना हजारे की जनतंत्र यात्रा का मध्य प्रदेश दौरा समाप्त हो गया.

जनतंत्र आए, देश में जनता का राज हो : अन्ना

मुझसे पत्रकारों ने पूछा कि श्री नरेंद्र मोदी को मैं सांप्रदायिक मानता हूं या नहीं, तो मैंने तुरंत जवाब दिया कि मेरे पास कोई सबूत नहीं है, इसलिए मैं कुछ कह नहीं सकता. लेकिन समाचार छापा कि अन्ना ने कहा है कि नरेंद्र मोदी सांप्रदायिक नहीं हैं, जो कि गलत है. इसका मतलब यह नहीं है कि वे सांप्रदायिक हैं या नहीं हैं. वे ऐसे दल में हैं, जिस दल की यह मान्यता है कि वह एक समुदाय के पक्ष में है और कुछ समुदायों के खिलाफ है, खासकर एक समुदाय के बहुत खिलाफ है और यह सर्वविदित भी है.

अब रहा सवाल मेरे कथन का, जिसकी बड़ी चर्चा हो रही है. यह अंदाजा नहीं लगाना चाहिए कि मैंने किसी को सांप्रदायिक नहीं है, ऐसा सर्टिफिकेट दे दिया है. सर्टिफिकेट देने वाला मैं कोई नहीं हूं. भारत का संविधान सेकुलर है, धर्मनिरपेक्ष है. इसलिए सब पार्टियों को उसी के अनुरूप चलना पड़ेगा. जो पार्टियां उसके अनरूप नहीं चलेंगी, उनको बहुमत नहीं मिल सकता. एक दल जिस तरह की बात करता है, उन बातों से लगता है कि उसका रुझान सांप्रदायिक है. मैं नहीं चाहता कि यह बात मैं व्यक्ति विशेष को लेकर कहूं, क्योंकि यह तो उनके पूरे दल का मामला है. भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी को अपने कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया है. इसलिए वे भारतीय जनता पार्टी का जो मत है, उसी को प्रतिबिंबित करेंगे. मैं किसी व्यक्ति विशेष की बात नहीं करता. मैं तो देश में जनतंत्र अभियान चला रहा हूं. भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों को जगा रहा हूं. जनतंत्र लाना चाहिए, भष्ट़ाचार हटना चाहिए, जनलोकपाल का कानून बनना चाहिए और सीबीआई सहित जांच एजेंसियों को स्वतंत्र होना चाहिए. जो भी इलेक्शन के बाद पावर में आए, उसे गैर-सांप्रदायिक होना चाहिए और अभी जो चल रहा है, उससे बेहतर शासन देना चाहिए.

मैं चाहता हूं कि देश में संविधान के अनुसार जनतंत्र आए. देश में जनता का राज हो, पक्ष या पार्टी का नहीं. क्योंकि संविधान में पक्ष और पार्टी का जिक्र है ही नहीं. जहां तक मैं जानता हूं, मोदी जी ने गोधरा और उसके बाद हुए दंगों का तीव्र निषेध अब तक नहीं किया है. इसलिए मैं वह सांप्रदायिक नहीं हैं, ऐसा सर्टिफिकेट उन्हें कैसे दे सकता हूं.

मैं शुरू से ही सांप्रदायिकता के विरोध में हूं, क्योंकि सांप्रदायिकता से देश के टूटने का खतरा है.

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