गुजरात पाटीदार आंदोलन आरक्षण से अलग भी कई सवाल हैं

Hardik-Patelगुजरात, पटेल और आंदोलन की एक अनोखी कहानी है. 41 वर्ष पहले यानी 1974 में गुजरात में एक आंदोलन हुआ था, जिसे बाद में नवनिर्माण आंदोलन कहा गया था. उस समय कांग्रेस के चिमन भाई पटेल मुख्यमंत्री थे. उक्त आंदोलन अहमदाबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज की कैंटीन में भोजन महंगा किए जाने के विरोध में शुरू हुआ था. नतीजतन, चिमन भाई पटेल को इस्ती़फा देना पड़ा था. आज 41 वर्ष बाद, एक बार फिर गुजरात में एक आंदोलन शुरू हुआ है. इस बार भी एक पटेल यानी आनंदी बेन पटेल मुख्यमंत्री हैं और दूसरी तऱफ है पटेल समुदाय, जो अपने लिए आरक्षण की मांग कर रहा है. इस आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल गुजरात के नए हीरो के तौर पर पेश किए जा रहे हैं. चूंकि आंदोलन अभी अपनी प्रारंभिक अवस्था में है, इसलिए इसके किसी परिणाम की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है, लेकिन पाटीदार आरक्षण आंदोलन ने एक साथ कई सवाल खड़े कर
दिए हैं.

उक्त सवाल गुजरात के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक मसलों से जुड़े हुए हैं. मसलन, पटेल समुदाय की छवि न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी काफी संपन्न समुदाय वाली मानी जाती है, लेकिन हार्दिक पटेल का मानना है कि यह छवि आंशिक तौर पर ही सही है. हार्दिक के मुताबिक, गुजरात के पटेलों का एक बहुत ही छोटा हिस्सा है, जो व्यवसाय के ज़रिये या अपनी ज़मीनें बेचकर संपन्न हुआ है. वहीं दूसरी तऱफ बहुसंख्यक पटेल आबादी खेती पर निर्भर है और यहां तक कि खेती में नुक़सान उठाने की वजह से कई पटेलों ने आत्महत्या भी की है. हार्दिक के मुताबिक, बहुसंख्यक पटेलों की आर्थिक हालत खराब है, इसलिए उन्हें आरक्षण की ज़रूरत है. यहां सवाल आरक्षण देने या न देने का नहीं है, बल्कि उस तस्वीर का है, जो अब तक पटेल समुदाय को लेकर लोगों के मन में थी. दूसरा सबसे अहम सवाल है, गुजरात की छवि को लेकर. गुजरात को भारत का सर्वाधिक विकसित राज्य बताया जाता रहा है. इसकी तस्दीक वित्तीय एवं औद्योगिक आंकड़े भी करते रहे हैं. इस लिहाज से पिछले कुछ सालों से यह आम धारणा बन गई थी कि गुजरात में सब कुछ अच्छा है, मूलभूत सुविधाओं के साथ जनता खुश है. लेकिन, हार्दिक पटेल द्वारा आरक्षण की मांग उठाए जाने के बाद अब यह सवाल भी उठता है कि क्या सचमुच वे सारे आंकड़े, जो अब तक दिखाए-बताए जाते रहे हैं, सही हैं? क्या विकास की रोशनी सचमुच गुजरात के हर कोने तक पहुंची है?

ज़ाहिर है, ऐसा नहीं है. गुजरात के कुछ चमचमाते शहरों से गुजरात के हज़ारों गांवों की सही तस्वीर का अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल है. हार्दिक पटेल की मांग को सही या ग़लत ठहराया जा सकता है, लेकिन इस आंदोलन ने गुजरात की हक़ीक़त को लेकर कुछ सवाल तो ज़रूर उठाए हैं. पाटीदार अनामत (आरक्षण) आंदोलन से आज पूरा गुजरात प्रभावित हुआ है. 12 वर्षों के बाद एक बार फिर वहां अर्द्धसैनिक बलों एवं सेना के जवानों को तैनात करने की नौबत आ गई. आरक्षण की वजह से एक बार फिर गुजरात हिंसा की चपेट में आ गया. पुलिस फायरिंग हुई, कई लोगों की जानें गईं, बसें जलाई गईं और ट्रेनें रोकी गईं. यह सब तब हुआ, जब अहमदाबाद की शांतिपूर्ण रैली निर्धारित समय सीमा के बाद भी चलते देखकर पुलिस वहां उसे रोकने पहुंची. पुलिस ने लाठीचार्ज किया, हार्दिक पटेल को गिरफ्तार किया और बलपूर्वक लोगों को वहां से खदेड़ा. इसके बाद कई शहरों में इंटरनेट, व्हाट्‌स-एप पर पाबंदी लगा दी गई, ताकि लोगों में संवाद स्थापित न हो सके.

हालांकि, इस आंदोलन के पीछे कई तरह की बातें सामने आ रही हैं. मसलन, यह कहा जा रहा है कि इस आंदोलन के पीछे भाजपा नेताओं का हाथ है. साथ ही यह भी कि इसके ज़रिये देश से आरक्षण ़खत्म करने की साजिश रची जा रही है. ऐसी ़खबरें भी आईं कि गुजरात के ही एक पूर्व मंत्री हार्दिक पटेल को पीछे से समर्थन दे रहे हैं. उक्त सारी बातें अपनी जगह सही हो सकती हैं, क्योंकि आम तौर पर हर आंदोलन के पीछे ऐसी बातें कही जाती हैं, जिनमें से कई बार कुछ सही भी होती हैं. लेकिन, पटेल आंदोलन के शुरुआती चरण में ही ऐसी बातों के ज़रिये आंदोलन के पीछे छिपे मूल सवालों को नहीं टाला जा सकता है. मूल सवाल एक बार फिर यही है कि ऐसे क्या कारण हैं, जिनके चलते गुजरात के पटेलों को अपने लिए आरक्षण की मांग करनी पड़ रही है, क्योंकि गुजरात के बाहर तो यही छवि बनी हुई है कि पटेल काफी संपन्न समुदाय है. ज़ाहिर है, पटेल आरक्षण की मांग कहीं न कहीं गुजरात की चमचमाती तस्वीर के पीछे छिपी बदरंग तस्वीर से भी जुड़ी हुई है.

कौन हैं हार्दिक पटेल

-22 वर्षीय हार्दिक गुजरात के वीरमगाम के रहने वाले हैं और उन्होंने अहमदाबाद के सहजानंद कॉलेज से बीकॉम (स्नातक) तक शिक्षा ग्रहण की है.
-हार्दिक इससे पहले पाटीदारों के युवा संगठन सरदार पटेल ग्रुप के सदस्य थे.
-हार्दिक ने कुछ समय पहले पाटीदार अनामत (आरक्षण) आंदोलन की नींव डाली और पटेलों को ओबीसी का दर्जा दिए जाने की मांग की.
-गुजरात की कुल आबादी में पटेलों की लगभग 20 फीसद हिस्सेदारी है.
-पाटीदार समुदाय के लोग खुद को भगवान श्रीराम का वंशज कहते हैं. उनके मुताबिक, वे श्रीराम के बेटे लव एवं कुश की संतान हैं.
-पाटीदारों की चार मुख्य जातियों में से लेउवा और कडवा पाटीदार को आरक्षण नहीं मिला है.
-हार्दिक पटेल कडवा पाटीदार समुदाय के हैं.