दिल्ली का बाबू : तबादलों पर सवाल

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दुर्गाशक्ति प्रकरण ने नौकराशाहों को एक तरह से जगा दिया है और राजनेताओं के उस हथियार को चुनौती देने की ताकत भी दे दी है, कभी जिसका इस्तेमाल नेता नौकरशाहों को दंडित करने के लिए करते थे. वह हथियार है नौकरशाहों का ट्रांसफर. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा दुर्गाशक्ति के विवादास्पद स्थानांतरण के विरोध में आईएएस ऑफिसर एसोसिएशन सार्वजनिक तौर पर खिलाफत पर उतर आया. और अब जब चौतरफा दबाव के चलते दुर्गाशक्ति की बहाली हो गई है तो इससे प्रभावित होकर दूसरे अधिकारी भी ऐसे प्रकरणों के खिलाफ खड़े होते दिख रहे हैं. हालांकि केंद्र उनके समर्थन में आता नहीं दिख रहा है.
सूत्रों के मुताबिक भारतीय पुलिस सेवा एसोसिएसन ने एक औपचारिक प्रतिनिधिमंडल बनाया है जो कि कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग को इस बात का संज्ञान देगा कि किस तरह से राज्यों में राजनेता अधिकारियों की ताकत को ट्रांसफर व निलंबन के माध्यम से खत्म कर रहे हैं. एसोसिएसन के जनरल सेक्रेट्री पंकज सिंह ने दो उदाहरणों का हवाला भी दिया है. एक मामला है उत्तर प्रदेश के 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय मिश्रा का जिन्हें 15 महीनों के लिए सस्पेंड कर दिया है, इसी तरह छत्तीसगढ़ में आईपीएस मयंक मिश्रा को इस वर्ष के शुरू में ही सस्पेंड किया गया था. लेकिन सवाल तो यह है कि क्या केंद्र राज्य सरकार को रोकेगा कि वह अधिकारियों को इस तरह से संस्पेंड न करे. अभी इसकी उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

मजबूत होती आईएफएस लॉबी

downloadभारतीय विदेश सेवा (आइएफएस) ने आखिर एक प्रतिष्ठित राजनयिक पद को आखिरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा के चंगुल से वापस अपने पाले में कर लिया है. हाल ही में यूनेस्को में स्थाई प्रतिनिधि के तौर पर 1987 बैच की आइएफएस अधिकारी रुचिरा कम्बोज की नियुक्ति हुई है. वे फिलहाल विदेश मंत्रालय में चीफ ऑफ प्रोटोकॉल है. सूत्रों के मुताबिक पेरिस में यह पद कैरियर राजनयिकों के लिए आरक्षित रहता था. अब तक इस पर 1979 बैच के आईएएस ऑफिसर विनय शील ओबेराय की नियुक्ति थी.

एमएस कम्बोज की नियुक्ति के साथ, भारतीय विदेश सेवा लॉबी अब ताकतवर आईएएस लॉबी से कुछ दूसरे पदों को अपनी तरफ  लाने की कोशिश में है. लेकिन आईएफएस लॉबी कितने दिनों तक अपनी पकड़ बनाए रखेगी, इसको लेकर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता.

बाबुओं के काम का परीक्षण

IAS-Preparationकेंद्र सरकार ने एक फैसला लिया है कि जिन नौकरशाहों का प्रदर्शन उम्मीद से कम है उनकी सेवाएं या तो खत्म कर दी जाएंगी या समय से पहले सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह फैसला यूपीए सरकार के सत्ता में आने के बाद 2004 में प्रस्तावित किया था. लेकिन जल्द ही इसे ताक पर रख दिया गया. अब सरकार ने एक बार फिर से इसे लागू करने का फैसला किया है. कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय के मुताबिक हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु व अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम यूनियन टेरिट्री ने तो अधिकारियों के प्रदर्शन का रिव्यू करना शुरू भी कर दिया है, जबकि पंजाब भी जल्द ही यह कदम उठाने जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक व अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम यूनियन टेरिट्री के तीन अधिकारियों को अच्छे प्रदर्शन न कर पाने के कारण समय से पहले रिटायरमेंट दिया जा रहा है. हालांकि उनके नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं लेकिन उन लोगों ने खुद को बचाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं.

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