ज़बानी जमा-खर्च पर लड़े जा रहे चुनाव

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं. कहने को इन चुनावों में हर पार्टी ने अपना घोषणा-पत्र जारी किया, लेकिन वास्तव में ये चुनाव मुद्दों के आधार पर नहीं, बल्कि केवल निजी हमलों और आरोप-प्रत्यारोप के दम पर ल़डे गए. कांग्रेस और भाजपा के ब़डे नेताओं से लेकर राज्य इकाई तक के नेताओं ने एक-दूसरे पर ज़बानी हमले किए और कीच़ड उछाला. ऐसे में वे मूलभूत एजेंडे पार्टियों से ग़ायब हैं, जिनपर बात की जानी चाहिए. बीते पांच राज्यों के चुनाव यह सिद्ध करते हैं कि जनता के वास्तविक विकास के मुद्दों पर बहस करने से सभी पार्टियां कतराती हैं.

modi-&-sheelaहर चुनाव के पहले जागरूक आम जनता में यह चर्चा और उम्मीद रहती है कि आने वाला चुनाव पिछले चुनावों से कुछ मामलों में भिन्न होगा. मसलन, राजनीतिक दलों की ओर से अपनाए जाने वाले पारंपरिक तरीके बदलेंगे. वे विकास की बातें करेंगे. वे बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार आदि को मुद्दा बनाएंगे. जो चीज़ें सरकार की ओर से अबतक जनता को मुहैया नहीं हो सकी है, उस पर गंभीरता से बहस करेंगे और राजनीतिक हो़ड के परिणामस्वरूप जो भी दल सत्ता में आएगा, वह मूलभूत आवश्यकताओं को अपने एजेंडे के तहत पूरा करेगा. लेकिन हर चुनाव के बाद बदलाव की आशाओं पर पानी फिर जाता है. यही कारण है कि आज़ादी के 65 वर्षों में आज तक हर चुनाव में बिजली, पानी, स़डक ही चुनावी मुद्दा बना रहता है जो कि कभी पूरा नहीं होता.

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं. कहने को इन चुनावों में हर पार्टी ने अपना घोषणा-पत्र जारी किया, लेकिन वास्तव में ये चुनाव मुद्दों के आधार पर नहीं, बल्कि केवल ज़बानी जमा-ख़र्च के आधार पर लड़ा गया.

चुनाव के शुरुआती दौर पर ग़ौर करें तो ऐसा माहौल बन रहा था कि लोकसभा के अलावा इन पांचों राज्यों के चुनाव मूलभूत सुविधाओं, संसाधनों और ज़रूरी मुद्दों के आधार पर लड़ा जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. दिल्ली से लेकर  पांचों राज्यों तक केवल ज़बानी तीर चले और चुनाव संपन्न हो गए.

दिल्ली की बात करें तो भाजपा ने 30 फीसदी सस्ती बिजली व 12 सिलेंडर देने का वायदा किया. आम आदमी पार्टी ने हर दिन 700 लीटर मुफ्त पानी और 50 फ़ीसदी सस्ती बिजली का वायदा किया. शीला दीक्षित ने लाडली योजना, प्रति माह 40 किलो लीटर पानी की बात की. लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आते गए, यह सारे मसले केवल प्रीरिकॉर्डेड मैसेज तक सीमित रह गए.

मिजोरम की बात छोड़ दें क्योंकि पांचों राज्यों में सबसे ज्यादा 81 फीसदी मतदान मिजोरम में हुआ, बावजूद उसके मीडिया में कोई बड़ा कवरेज नहीं मिला. अन्य चारों राज्यों यानी दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसग़ढ में यह हाल रहा कि घोषणा-पत्र के अलावा जनता की बात किसी ने नहीं की. कहीं भी ऐसा देखने को नहीं मिला कि दो विरोधी दल जनसमस्याओं और उसके निदान पर गंभीरता से चर्चा करते दिखे हों. भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेताओं ने केवल और केवल एक-दूसरे पर आरोप लगाने को अपने प्रचार का माध्यम बनाया.

राजस्थान के बांसवाड़ा में प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर हमला करते हुए कहा कि कोई भी पार्टी कांग्रेस से अधिक ज़हरीली नहीं हो सकती, क्योंकि वह क़रीब आधी सदी से उसी पर फल-फूल रही है, जिसे उन्होंने सत्ता का ज़हर कहा था. इस पर सोनिया गांधी ने कहा कि भाजपा ज़हरीले लोगों की पार्टी है. मोदी राजनीति की दिशा बदलने और विकास के मुद्दे पर चुनाव ल़डने का दावा करते हैं लेकिन उन्होंने अपने प्रचार में व्यक्तिगत हमले किए जो केवल कुंठा की ओर इशारा करते हैं. राजस्थान के बड़े हिस्सों में गुणवत्तापूर्ण पानी उपलब्ध न होने की बात कहते हुए मोदी ने कहा, राजस्थान और गुजरात का भूगोल लगभग एक जैसा ही है. मैंने पानी उपलब्ध करवाने के लिए पाकिस्तान की सीमा तक पाइपलाइनें बिछाई हैं. ये पाइप इतने बड़े हैं कि गहलोत जी और उनका परिवार इसमें एक मारुति कार में बैठकर सफ़र कर सकता है.

इसी तरह मोदी ने बुंदेलखंड के मच्छरों को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को काटने के लिए बधाई दी है. राहुल ने राहतगढ़ में कहा था कि मच्छर काटने की वजह से बीमार हो गए थे. मोदी ने एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, मैं बुंदेलखंड के मच्छरों को शहजादे को काटने की हिम्मत, ताक़त एवं हौसले के लिए बधाई देता हूं. पिछले 100 सालों में जिस परिवार को कोई छू भी नहीं सका, उसका वे ख़ून चूसते रहे. उन्होंने कहा, यह ऐसा परिवार है, जिसे छूना तो दूर, यदि उसके ख़िलाफ़ कोई बोल भी दे, तो उसे उनकी फ़ौज़ नोच लेती है. उन्होंने कहा, लगता है जैसे बुंदेलखंड के मच्छर अच्छी तरह प्रशिक्षित थे. सामान्यत: तो मच्छर के काटने पर लोगों को अपने ख़ून की जांच करानी पड़ती है. लेकिन यहां के मच्छरों ने शहज़ादे को काटकर ख़ुद ही रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसका नतीजा आठ दिसंबर को जनता के सामने आएगा, जब ईवीएम से चुनाव के परिणाम सामने आएंगे.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रहार करते हुए मोदी ने कहा, दिल्ली से आए शहज़ादे कहते हैं कि केंद्र ने राज्य के विकास के लिए बहुत पैसे दिए, वह बताएं कि यह पैसा केंद्र के पास कहां से आया, क्या उनके मामा ने दिए हैं? उन्होंने कहा कि कांग्रेस बताए कि उनका मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन है? जब कांग्रेस के लोगों से पूछा जाता है तो वे दबे-छिपे रूप में अजीत जोगी का ही नाम लेते हैं, ऐसे में वह जोगी का नाम घोषित क्यों नहीं करती? उन्होंने कहा, लगता है, जोगी से कांग्रेस को हार का ख़तरा है. हो भी क्यों न, एक तरफ छत्तीसगढ़ी हैं तो दूसरी तरफ धोखाधड़ी है.दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र नरेंद्र मोदी ने द्वारका क्षेत्र में एक चुनावी जनसभा में कहा कि कांग्रेस ने अक्सर अपना नाम, चिह्न और नीतियां बदलीं, लेकिन अपनी नीयत नहीं बदली. उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी यह मान बैठी है कि ईश्‍वर ने उसे शासन करने के लिए ही बनाया है. वे सोचते हैं कि उनका जन्म ही शासन करने के लिए हुआ है और जनता तो उनकी ज़ेब में है. वह (जनता) जाएगी कहां.

मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करने आए राहुल गांधी ने मंदसौर के मल्हारग़ढ में कहा, कांग्रेस वादे करने के बाद उन्हें पूरा करती है, वहीं भाजपा मार्केटिंग करती है, कई कैमरों के ज़रिए अपना प्रचार करती है, मगर कैमरे सच्चाई को नहीं छुपा सकते. भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि इन दोनों सरकारों के बीच भ्रष्टाचार की वर्ल्ड चैंपियनशिप चल रही है. यह बकवास ख़त्म होनी चाहिए.

यह केवल भाजपा और कांग्रेस तक ही सीमित नहीं है, आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को नोटिस भेजा. केजरीवाल पर धार्मिक आधार पर वोट मांगने का आरोप लगा है. मुस्लिमों से वोट मांगने के प्रयास में केजरीवाल ने  आपत्तिजनक बातें कहीं. नरेंद्र मोदी ने अलवर में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान में कांग्रेस ने कुछ विकास नहीं किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आकाश, पाताल और धरती किसी को नहीं छोड़ा है. तीनों लोकों में कांग्रेस का भ्रष्टाचार है. वह रेत में भी खाते हैं और खेत में. वह रेल में भी खाते हैं और खेल में भी. राहुल गांधी के संदर्भ में बात करें तो जिस तरह से पिछले विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने यूपी और बिहार के दौरे में लोकप्रियता हासिल की थी, वह इस चुनाव प्रचार में धूमिल पड़ गई. दिल्ली की एक सभा में राहुल गांधी के आने पर लोग उठकर जाने लगे तो शीला दीक्षित को हाथ जोड़कर जनता से अपील करनी पड़ी कि कृपया आप लोग राहुल का भाषण सुन लीजिए. यही हाल उनकी अन्य रैलियों में भी रहा.

यह हमले दोनों ही पार्टियों के सभी दर्जे के नेता कर रहे थे. देश की ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ज्ञान पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कटाक्ष किया कि भाजपा को चाहिए कि वह अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को इतिहास का ट्यूशन दिलाए. भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को देश के उस इतिहास की भी जानकारी नहीं है, जो हमारे यहां 12वीं में पढ़ाया जाता है. दिग्विजय ने केशूभाई पटेल से लेकर लालकृष्ण आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम गिनाते हुए कहा, जिस हाथ ने मोदी को आगे बढ़ाया, उसे उन्होंने काटा है. अब भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह का नंबर है.

कांग्रेस महासचिव ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किए जाने वाले विकास के दावों को खोखला बताते हुए उन्हें ‘फेंकू नंबर दो’ बताया. उन्होंने कहा कि शिवराज के भाई नरेंद्र के कथित भ्रष्टाचार की सीडी सामने आ गई है तो इसकी प्रतिक्रिया में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के घोषणा पत्र को ‘मृत्यु पूर्व बयान’ करार दिया. इसी तरह छत्तीसगढ़ के खरसियां में एक चुनावी सभा में भाजपा को कथित तौर पर ‘चोरों की पार्टी’ कहा.

मोदी ने सीधे तौर पर नाम न लेते हुए सोनिया व राहुल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आजकल दिल्ली से लोग आकर आपसे वादे कर रहे हैं कि हम छत्तीसगढ़ को ये देंगे और वो देंगे. लेकिन उन्होंने आज तक क्या दिया. वे कहते रहते हैं कि हमने छत्तीसगढ़ को हज़ार करोड़ रुपये दिए. मोदी ने प्रश्‍न किया, क्या छत्तीसगढ़ की जनता कटोरा लेकर खड़ी है और दिल्ली से जो आ रहे हैं, उसमें पैसे डालकर जा रहे हैं? ऐसा कहकर वे छत्तीसगढ़ की जनता का अपमान कर रहे हैं. मोदी ने टीवी पर व अख़बार पर छप रहे विज्ञापन ‘कांग्रेस लाओ छत्तीसगढ़ बचाओ’ पर चुटकी लेते हुए कहा कि क्या छत्तीसगढ़ हिंदुस्तान में नहीं है? एक तरफ कांग्रेस कह रही है कि उसे पूरे देश की फ़िक़्र है और यहां छत्तीसगढ़ के साथ पराये जैसा व्यवहार कर रही है. उन्होंने कहा, आप ही बताइए कि जहां भी कांग्रेस की सरकार है वो मुफ्त में चावल देती है? नहीं देती है. लेकिन यहां की भाजपा सरकार ने दिया है.

राहुल गांधी के बयानों को लेकर चुनाव आयोग ने उन्हें संयम बरतने तक की सलाह दी. पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के कुछ पीड़ितों के संपर्क में है. बीजेपी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा था कि वह आग लगाते हैं और हम बुझाते हैं. चुनाव आयोग के मुताबिक, राहुल के भाषणों का तेवर ठीक नहीं था. आयोग ने नाख़ुशी जताते हुए कहा है कि आगे सार्वजनिक मंचों पर बोलते हुए राहुल गांधी अपनी भाषा पर संयम रखें. यह इसलिए था क्योंकि कांग्रेस भ्रष्टाचार-महंगाई जैसे मसलों से जूझ रही है, इसे छिपाने के लिए वह कोरी सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाली बयानबाज़ी कर रही है. भाजपा की ओर से प्रचार की कमान मोदी के हाथ में है, जो मुद्दों पर कभी बात करते ही नहीं या देश के सामने क्या मुद्दें हैं, उन्हें पता ही नहीं है.

यही हाल राज्यों में दोनों पार्टियों के नेताओं में हुआ. वे एक-दूसरे की व्यक्तिगत ख़ामियों को लेकर हमले करते रहे. आपस में निजी आरोप-प्रत्यारोप करते रहे और मुद्दों पर बात करने से कतराते रहे. अब लोकसभा चुनाव के लिए पार्टियां कमर कसेंगी, जिसके लिए कांग्रेस और भाजपा-दोनों पार्टियां पहले से ही प्रचार में नहीं लगी हैं. अब देखना यह है कि वे आपस में वास्तविक मुद्दों पर बात करते हैं, वे शिक्षा, रोज़गार, विकास, बिजली, स़डक, पानी पर बात करेंगे या एक-दूसरे पर स़िर्फ असंसदीय भाषाओं में आरोप लगाएंगे?