चुनावी पिच पर सौगातों की बैटिंग

3उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार आम चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से पूर्व अपने सभी मोर्चे दुरुस्त कर लेना चाहती है, ताकि चुनावी मैदान में जनता के सामने समाजवादी पार्टी के पक्ष में मजबूती के साथ पेशबंदी की जा सके. इसके लिए एक तरफ़ तमाम नई योजनाओं के शिलान्यास किए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ तमाम सौगातें भी बांटी जा रही हैं. इसी क्रम में सपा के प्रति वफादार नौकरशाहों की बजाय अच्छा काम करने वाले ईमानदार एवं कर्मठ ब्यूरोके्रट्स को महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती दी जा रही है. शासन-प्रशासन का गणित सुधारने के लिए दर्जनों आईएएस/पीसीएस इधर-इधर किए जा चुके हैं. पीसीएस से पदोन्नत होकर आईएएस बने अधिकारियों को अहम पदों पर बैठाकर उनके प्रति विश्‍वास जताया जा रहा है. सरकारी, अर्द्ध-सरकारी शिक्षण संस्थाओं एवं निकाय आदि के अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षकों को प्रमोशन-एरियर का बकाया भुगतान और नियमितीकरण आदि के सहारे लुभाया जा रहा है. सरकार से लेकर संगठन तक की छवि को सलीके के साथ निखारा जा रहा है. सरकारी अस्पतालों में एक्सरे और तमाम तरह की जांचें मुफ्त कर दी गई हैं. ग़रीबों को दवा मिले, इसके लिए सख्त क़दम उठाए जा रहे हैं. चुनाव से पूर्व बिजली की दरें भी कम होने की उम्मीद जताई जा रही है. राज्य योजना आयोग और नियोजन विभाग ने ऊर्जा विभाग से पूछा है कि बिजली की दरों में कैसे कमी की जा सकती है. यह फाइल भी काफी तेजी से आगे बढ़ रही है. प्रदेश विकास की ओर अग्रसर है, इस बात का एहसास कराने के लिए औद्योगिक घरानों को दामाद की तरह पूजा जा रहा है. क़ानून व्यवस्था की बात छोड़ दी जाए, तो अन्य तमाम मोर्चों पर सरकार तेजी के साथ आगे बढ़ती दिख रही है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सत्ता की पिच पर खुलकर बैटिंग कर रहे हैं. सुपर सीएम जैसे शब्द अब उनके सामने बेमानी लगने लगे हैं.
आचार संहिता लागू होने की तारीख क़रीब आते देख अखिलेश सरकार ने फरवरी में तो बड़े-बड़े और महत्वपूर्ण ़फैसलों की झड़ी ही लगा दी. लंबे समय से लटके क़रीब 900 करोड़ रुपये के नए कामों की झटपट मंजूरी दे दी गई. 546 करोड़ रुपये का तो बजट भी जारी कर दिया गया. इसमें अच्छी-खासी तादाद बिजली, पानी, सड़क एवं पुलों की योजनाओं की है. सरकारी तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिदिन 25-30 शासनादेश जारी हो रहे हैं. लोक निर्माण विभाग मुख्यालय को नित्य प्रगति रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है. ग़ौरतलब है कि 2013-14 के वित्तीय वर्ष के बजट में लोक निर्माण विभाग के लिए कुल 9672 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी, जिसमें से जनवरी तक 7954 करोड़ रुपये दिए गए थे. फरवरी की 7 तारीख को यानी एक हफ्ते में यह आंकड़ा साढ़े आठ हज़ार करोड़ रुपये तक पहुंच गया. मतलब यह कि सात दिनों में 546 करोड़ रुपये की मंजूरी.
अखिलेश सरकार द्वारा मुफ्त सिंचाई, पढ़ाई और दवाई जैसे ़फैसलों का ढिंढोरा पीटा जा रहा है. जनता को बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में किसानों, नौजवानों, मुसलमानों एवं कन्याओं के लिए सरकार ने अपना खजाना खोल रखा है. बेरोज़गारी भत्ता, कन्या विद्याधन, हमारी बेटी उसका कल जैसी योजनाओं के माध्यम से जनता का पैसा उसे वापस लौटाने का कार्य किया जा रहा है. इसके साथ-साथ 40 लाख ग़रीब परिवारों को समाजवादी पेंशन योजना का लाभ देने के लिए चिन्हित कराया जा रहा है. प्रदेश में वर्ष 2011 की जनगणना के आधार प्राथमिक स्वास्थ्य एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना-निर्माण हेतु नीति निर्धारण का प्रस्ताव अनुमोदित कर दिया गया है. इसके तहत वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जिला योजना समिति के अनुमोदनोपरांत प्रति 30 हज़ार की जनसंख्या पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना का प्रावधान किया गया है. एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से दूसरे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की न्यूनतम दूरी 5 किमी निर्धारित की गई है. प्रति एक लाख की जनसंख्या पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए जाने की नई नीति भी निर्धारित की गई.
इस प्रकार वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर नई नीति के अनुसार प्रदेश में 12वीं एवं 13वीं पंचवर्षीय योजना में 1674 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं 719 नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना चरणबद्ध रूप से होनी है. प्रदेश के सभी चिकित्सालयों में असाध्य रोगों जैसे कैंसर, हृदय रोग, किडनी, लीवर के नि:शुल्क उपचार की सुविधा जनता को उपलब्ध कराई गई है. संपूर्णानंद संस्कृत विश्‍वविद्यालय वाराणसी से 31 दिसंबर, 2000 तक अथवा इसके पूर्व स्थायी मान्यता प्राप्त अशासकीय/असहायिक संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों/ महाविद्यालयों को अनुदान सूची में शामिल किए जाने हेतु मानक निर्धारित कर दिए गए हैं. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की इंटर उत्तीर्ण छात्राओं को आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक मदद का बीड़ा सपा सरकार ने उठा रखा है. मदरसा शिक्षकों को भी मदद पहुंचाई जा रही है. उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी एक जनवरी, 2006 से राज्य कर्मचारियों की भांति सामान्य पुनरीक्षित वेतनमान देने का ़फैसला किया गया है. साथ ही सेवानिवृत्ति की आयु 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष किए जाने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है. युवाओं को व्यवसायोन्मुखी बनाने के लिए कौशल विकास मिशन की स्थापना की गई है, जिसमें 18 वर्ष से ऊपर के युवाओं को प्रशिक्षित करके उन्हें रोज़गार दिलाया जाएगा. मेडिकल की सीटें बढ़ाना एक क्रांतिकारी क़दम है. प्रदेश लंबे समय से योग्य चिकित्सकों का अभाव झेल रहा है.
अखिलेश सरकार समाजवादी पार्टी का मजबूत वोट बैंक समझे जाने वाले अल्पसंख्यकों पर भी खूब डोरे डाल रही है. अल्पसंख्यक समुदाय के कक्षा एक से दस तक के छात्रों, जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे कम है, को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है. चालू वित्तीय वर्ष में 170.59 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय करके उसका लाभ अल्पसंख्यक छात्रों को पहुंचाया गया है. प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले अल्पसंख्यक छात्रों के लिए आईएएस/पीसीएस/ मेडिकल/ इंजीरियरिंग की कोचिंग चलाई जा रही है. ग़रीब मुसलमानों की पुत्रियों के विवाह हेतु अनुदान और अरबी-फारसी मदरसों को मान्यता एवं अनुदान सूची में शामिल किए जाने की योजना पर भी काम चल रहा है. अब तक 6248 मदरसों को मान्यता प्रदान की गई है और 459 मदरसों को अनुदान सूची में शामिल किया गया है. अल्पसंख्यकों के उद्धार के लिए ऐसी तमाम योजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है. यह और बात है कि स़िर्फ अल्पसंख्यकों के लिए बनाई जा रही योजनाओं को अदालत में चुनौती मिलने का सिलसिला जारी है.
बहरहाल, समाजवादी सरकार ने सौगातों की झड़ी लगाकर जनता पर डोरे डालने की जो मुहिम चला रखी है, उसका फायदा आम जनता को पूरा नहीं, तो थोड़ा-बहुत ज़रूर मिल रहा है. इससे अखिलेश सरकार के नंबर भी बढ़ रहे हैं, लेकिन क़ानून व्यवस्था का मसला ऐसा उलझा हुआ है कि सपा चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही है. अपराधियों के हौसले बुलंद हैं. दु:ख की बात यह भी है कि प्रदेश की क़ानून व्यवस्था बिगाड़ने में वही लोग अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिनके कंधों पर सरकार की छवि बनाने की ज़िम्मेदारी है. फिर भी चुनावी पिच पर सौगातों की बैटिंग करके नतीजों का रुख समाजवादी पार्टी की तरफ़ मोड़ने के लिए मुलायम टीम कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहती. इसीलिए वह मोदी से लेकर राहुल और मायावती, सभी के प्रति हमलावर रुख अपनाए हुए है.

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