आईएसआईएस के ख़िलाफ़ आर-पार की लड़ाई क्यों नहीं?

Who-is-Isis-017आईएसआईएस (दाइश) ने जून 2014 में इराक के उत्तरी हिस्से में संप्रभुता की घोषणा की थी और अबुबकर अल बग़दादी नाम के एक व्यक्ति को नई सल्तनत का अमीर इल मोमीनीन नियुक्त किया था. इराक सरकार ने दाइश पर सैन्य कार्यवाही के लिए लड़ाकू विमान एफ-16 एस की ख़रीदारी को लेकर हुए क़रार के हवाला देते हुए मदद मांगी, लेकिन अमेरिका ने यह कह कर विमान देने से इंकार कर दिया कि अभी इराक के पास इन विमानों को ऑपरेट करने के लिए योग्य पायलट मौजूद नहीं हैं. नतीजतन दाइश तेज़ी के साथ बढ़ता हुआ मूसल तक पहुंच गया और 7 अगस्त को मूसल डैम पर क़ब्ज़ा करने के अलावा मख़मूर और अरबील के लगभग 20-30 किलोमीटर तक के हिस्सों पर क़ब्ज़ा कर लिया. उसके बाद अमेरिका ने दाइश के विरूद्ध सैन्य कार्यवाही करने में कुर्दी सेना ‘‘पशमर्गा’’ की मदद की और मूसल में दाइश के 9 ठिकानों और 8 गाड़ियों पर हमला किया. इन हमलों में 9 ठिकाने तबाह होने के साथ-साथ अनेक बैरक और 6 सशस्त्र और बख़्तरबंद गाड़ियों के अलावा, दो कार मोबाइल विमान रोधक भी तबाह हुए. इसके अलावा, कुछ ऐसे स्थानों को तबाह किया गया, जहां पर विस्फोटक पदार्थ रखे हुए थे. यह सभी हमले बमबारी और ड्रोन के द्वारा किये गए.

दैनिक ‘‘अलशर्क़ अल औसत’’ में प्रकाशित ओबामा प्रबंधन की रिपोर्ट को देखा जाए तो अंदाज़ा होता है कि अमेरिकी हमले का उद्देश्य सीमित है और वह केवल दाइश के विस्तार को रोकना चाहता है, लेकिन अमेरिकी इंटेलीजेंस अधिकारियों की राय एक दूसरी रिपोर्ट में इसके बिल्कुल विपरीत है. इनका कहना है कि इससे यह समझ लेना कि दाइश का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा और वह आसानी से लौटकर अपने बैरकों में चला जाएगा, ग़लत होगा. अधिकरियों की भविष्यवाणी बहुत हद तक सच होती हुई नज़र आ रही है, क्योंकि मूसल में हार के एक हफ्ते के अन्दर अलबग़दादी की ओर से एक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें अमेरिका को यह धमकी दी गई है कि वह दाइश पर और हमले न करे वर्ना इराक में मौजूद अमेरिकियों पर हमले किये जा सकते हैं, बल्कि कई क़दम आगे बढ़ाते हुए दाइश की ओर से एक और वीडियो जारी किया गया है, जिसमें एक अमेरिका पत्रकार जेम्स फौली का सर काटते हुए दिखाया गया है. इस पत्रकार को 2012 में सीरिया में अग़वा किया गया था.
विशेषज्ञों का मानना है कि दाइश बहुत दिनों तक अपनी गतिविधियों को चला नहीं पाएगा, क्योंकि इसके विरूद्ध कई विरोधी ताक़तें एक साथ सर उठा रही हैं. इधर सीरिया ने इस पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं. दूसरी ओर उत्तरी इराक के नेनवी में सुन्नियों का एक बहुत बड़ा ग्रुप दाइश के मुक़ाबले में आ खड़ा हुआ है. यह गु्रप कुर्दी सेना के साथ मिलकर मूसल के पूरे हिस्से आज़ाद कराने का संकल्प रखता है. एक अन्य संगठन के प्रवक्ता माजिऩ सामराई जो इराक़ी सेना में कर्नल रह चुके हैं, ने बताया कि दाइश को इराक से ख़त्म करने के लिए सभी संगठनों ने एक ज्वाइंट वेंचर बनाया है. इसमें फसाइल नक़्शबंदिया, सूरा अशरीन, जैश-ए-राशिदीन, जैश-ए-मुजाहिदीन, जैश-ए-इस्लामी के अलावा अन्य कई गु्रप दाइश के विरूद्ध संगठित हो गए हैं.
यह स्थिति दाइश पर बाहरी दबाव डालने के लिए काफ़ी है, लेकिन अगबग़दादी के बारे में जैसा कि अमेरिकी इंटेलीजेंस ने कहा है कि वह बेहतरीन युद्ध अनुभव रखता है. लिहाज़ा, वह बाहरी दबाव के कारण अपने इरादे से पीछे नहीं हट सकता है. इधर हाल ही में इसके सामने जो नई परिस्थिति पैदा हुई है, इससे निपटना उसके लिए मुश्किल भरा होगा और हो सकता है कि यही स्थिति इसके अंत का कारण बन जाए, क्योंकि इसके एक क़रीबी साथ अबु अलकु़मान ने स्वयं को इराक व सीरिया में मुसलमानों का ख़लीफ़ा घोषित कर दिया है. अबु अलकु़मान का असली नाम अली मूसा श्‍वाख़ है और वह ज़िला ‘‘तबक़ा’’ के रेक़ा गांव का रहने वाला है जो सीरिया में है. वह पेशे से वकील है और 2003 में जिहादी संगठन से जुड़ा था. दाइश की ओर से ‘‘रेक़ा’ और इसके चारों ओर की निगरानी का काम अबु अलकु़मान को दिया गया था. विशेष रूप से सज़ा-ए-मौत और फ़ांसी की सज़ा की निगरानी इसी के ज़िम्मे थी. इसने पिछले हते दाइश से विद्रोह करके ख़ुद को मुसलमानों का अमीर होने का ऐलान कर दिया है और साथ ही यह बयान भी जारी किया है कि ‘‘अबु बकर अलबग़दादी के ख़ानदान और नस्ल का सही पता किसी को नहीं है जबकि इसके बारे में पूरी क़ौम को पता है कि वह अलअसील क़बीले से संबंध रखता है और ‘रेक़ा’ का रहने वाला है. इसीलिए जनता इसे अपना अमीर बनाना चाहती है. लिहाज़ा अलबग़दादी को ख़ारिज किया जाता है और इसकी जगह मैं ‘‘ममलकत इस्लामिया’’ का ख़लीफ़ा हूं’. इस ऐलान ने अलबग़दादी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं हैं. वह बाहरी विद्रोहियों से तो अपने वफ़ादारों के द्वारा मुक़ाबला कर सकता है लेकिन यहां पर तो वफ़ादारों ने ही अपनी वफ़ादारियां बदल दी हैं. स्वयं दाइश के प्रवक्ता अबु मोहम्मद अलअदनानी का कहना है कि 4 हज़ार लोगों के हस्ताक्षर से एक दस्तावेज़ इसे मिला है, जिसमें अबु अल़कुमान को अमीर स्वीकार किया गया है.
इसी प्रकार अलबग़दादी का दायां हाथ कहलाने वाला ‘‘हिजी अलबकर’ जिसके मशवरे पर ही गतिविधियों का ख़ाका तैयार किया जाता था और दाइश संगठन में अलबग़दादी के बाद सबसे महत्वपूर्ण चेहरा इसी का था, इसने पिछले हते दाइश के लिए लड़ने से इंकार कर दिया है. इसका कहना है कि जिहाद के नाम पर निर्दोषों को मारा जा रहा है. ‘हिजी अलबकर’ किसी अज्ञात स्थान पर छुपा है. अलबग़दादी से विरोध की कानाफूसियां अधिकृत क्षेत्र के आम नागरिकों की ओर से भी सुनाई दे रही हैं. इस विरोध का मूल कारण यह बताया जा रहा है कि लोग हिंसक वातावरण होने के कारण परेशान हो चुके हैं. आवश्यक वस्तुएं इतनी महंगी हो चुकी हैं कि उन्हें ख़रीदना बस से बाहर हो चुका है. खाद्य पदार्थों की कमी तो है ही, किराये इतने बढ़े हुए हैं कि 100-100 किलोमीटर तक लोग पैदल चलकर जाते हैं. एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए जहां 60 इराकी दीनार लगते थे, अब इसी के लिए ढाई सौ दीनार तक देने पड़ते हैं, जबकि आय बिल्कुल ख़त्म हो चुकी है.
यह परिस्थितियां अलबग़दादी के लिए चिंता का विषय हैं. लिहाज़ा अमेरिकी हमलों के कारण से दाइश का अस्तित्व ख़त्म हो न हो तब भी आंतरिक रूप से जो मतभेदों का तूफान खड़ा हुआ है, इससे अलबग़दादी की कमर टूट रही है और इसी आंतरिक मतभेद के कारण विशेषज्ञों का मानना है कि दाइश के इस्लामी राष्ट्र का सिमटना शुरू हो चुका है.

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