हार्ड डिस्क, फ़्लैश मेमोरी, सीडी रोम की क्षमता निर्धारित क्षमता से कम क्यों ?

shyam-babaजब कभी आप एक नई हार्ड डिस्क, फ्लॉपी डिस्क, पेन ड्राइव या मेमोरी कार्ड ख़रीदते हैं तो आपने देखा होगा की रैपर या कवर पर दर्शित क्षमता और कम्प्यूटर में लगाने के बाद दिख रही स्टोरेज क्षमता में अंतर दिखाई देता है. कभी-कभी आप यह देखकर चौंक जाते हैं. ऐसा आखिर हुआ क्यों यह जाने बगैर कभी-कभी आप अपने दुकानदार या निर्माता कंपनी पर इस बात को लेकर गुस्सा हो जाते हैं. कि उसने आपको गलत जानकारी देकर चीज थमा दी है उसने आपके साथ धोखा किया है. लेकिन हक़ीकत में इसमें विक्रेता या निर्माता की कोई गलती नहीं होती है.

आखिर ऐसा क्यों होता है?

डिफाइन स्टोरेज मेमोरी और रियल स्टोरेज मेरोरी में अतर होने के कई कारण होते हैं. लेकिन इस अंतर का सबसे प्रमुख कारण आपके द्वारा उपयोग किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम या कहें आपके द्वारा उपयोग किया जाने वाला कंप्यूटर होता है. यदि आप विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम वाले कंप्यूटर का उपयोग कर रहे हैं तो ऐसा सिस्टम की शैडो फाइल्स और फॉर्मेटिंग ओवरहेड के कारण होता है इस वजह से आपकी डिवाइस सही मेमोरी क्षमता नहीं दिखाती है. इसे हम एक उदाहरण से समझते हैं मान लीजिए आपने एक 500 जीबी (गीगा बाइट) की एक हार्ड डिस्क खरीदते हैं, कंप्यूटर में ये कितनी क्षमता दिखाएगा.
एक निर्माता कंपनी के अनुसार 8 बिट (Bit) के बराबर 1 बाइट (Bytes) होता है, उसी तरह 1000 किलो बाइट (KB)के बराबर 1 मेगा बाइट (MB), 1000 मेगा बाइट (MB) बराबर 1 गीगा बाइट (MB), 1000 गीगा बाइट (GB) बराबर 1 टेरा बाइट (TB) इत्यादि होता है. यह वास्तविक मानक जैसे किलो मतलब 1000 और मेगा मतलब 1000000 (10^6) मानता है. वहीं दूसरी तरफ जहां कम्प्यूटर के प्रोग्राम्स जैसे की बायोस, विंडोज, मैक व अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम्स बाइनरी नंबर सिस्टम (बाइनरी नंबर सिस्टम में प्रोग्राम केवल 0 और 1 को समझता है) का प्रयोग करता है जिसका आधार 2 होता है.
बाइनरी नंबर सिस्टम में 8 बिट (Bit) के बराबर 1 बाइट (Bytes) होता है, उसी तरह 1024 किलो बाइट (KB) बराबर 1 मेगा बाइट (MB), 1024 मेगा बाइट (MB) बराबर 1 गीगा बाइट (GB), 1024 गीगा बाइट (GB) बराबर 1 टेरा बाइट (TB) इत्यादि होता है.
मेमोरी में कमी का मुख्य कारण यही गणना का अंतर का होता है, क्योंकि की एक निर्माता कंपनी 1000 केबी=1 एमबी को आधार मान कर अपना उत्पादन करता है और जबकि हम कम्प्यूटर के द्वारा प्रयोग किए जा रहे 1024 केबी =1 एमबी को आधार मान कर उसके अनुसार अपनी मेमोरी को देखते हैं.
अब एक उदहारण के जरिए गणना करते हैं और देखते है की 500जीबी के किसी हार्ड ड्राइव में कितना अंतर आता है. एक निर्माता के दृष्टिकोण के 500 जीबी के किसी हार्ड ड्राइव में 500x1000x1000x 1000=500000000000 बाइट होता है,वहीं एक कम्प्यूटर के बाइनरी डेटा के अनुसार 500 जीबी में 500x1024x1024x1024 = 536870912000 बाइट होगा. इस प्रकार हमें जो गणना के नतीजे मिले हैं उससे पता चलता है की जैसे ही 500 जीबी का हार्ड डिस्क कम्प्यूटर से जुड़ेंगी वो 536870912000-500000000000=36870912000 बाइट (लगभग 36.34) जीबी स्पेस कम दिखाई देगा, इस प्रकार हम यह कह सकते हैं की 500 जीबी की खरीदी गई हार्ड ड्राइव वास्तविक में 465.66 जीबी की होती है.

इस लेख के माध्यम से आप समझ गए होंगे कि आपके द्वारा खरीदी गई पेन ड्राइव, फ्लैश मेमोरी, सीडी रोम एवं हार्ड ड्राइव में बताए गए स्पेस से कम स्पेस दिखाई देता है. इसलिए अब दोबारा इसके लिए किसी कंपनी या दुकानदार के साथ झगड़ा मत कीजिएगा. ये आंकड़ों का खेल है इसे समझकर आप चाचा चौधरी के दिमाग से भी ज्यादा तेज दिमाग होने का दावा कर सकते हैं.

श्याम सुन्दर प्रसाद

लेखक एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल हैं.

2 thoughts on “हार्ड डिस्क, फ़्लैश मेमोरी, सीडी रोम की क्षमता निर्धारित क्षमता से कम क्यों ?

  • October 15, 2014 at 7:01 PM
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    ये बाइनरी नंबर सिस्टम क्या है …

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  • October 14, 2014 at 4:43 PM
    Permalink

    now clear the issue ….

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