एक औरत के हाथों मारा गया था ओसामा

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यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि मिशन नेप्च्यून स्पेयर की मुख्य नायिका एक महिला थी. मिशन नेप्च्यून स्पेयर दुनिया के सबसे बड़े आतंकी ओसामा बिन लादेन को पकड़ने वाले मिशन का नाम था. इसी महिला ने ओसामा बिन लादेन का ठिकाना ढूंढा था. ओसामा पाकिस्तान के ऐबटाबाद में मौजूद है, इस सूचना पर सीआईए के कई बड़े अधिकारियों को भरोसा नहीं था. यह स़िर्फ और स़िर्फ इस महिला का दावा था कि जो शख्स ऐबटाबाद के सुनसान घर में छिपा है, वह ओसामा बिन लादेन ही है. इसी महिला के दावे पर अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था. लेकिन, सीआईए के इतिहास के इस सबसे महत्वपूर्ण मिशन को सफल बनाने वाली नायिका को ही पूरे परिदृश्य से गायब कर दिया गया. ऐसा क्यों हुआ, यह तो अमेरिका जाने या फिर सीआईए, लेकिन आख़िर इस मिशन को पूरा करने के लिए उस महिला ने कैसे काम किया, आइए इसकी जानकारी लेते हैं… 

osamaग्यारह सितंबर 2001 जैसा आतंकी हमला कर अमेरिका की नाक में दम करने वाले आतंकी ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी कमांडो की सील टीम सिक्स ने मौत के घाट के उतार दिया था. यही ख़बर पूरी मीडिया में दिखाई गई, लेकिन इसके पीछे की कहानी काफी रहस्यमयी है. यह पूरा सच नहीं है. दरअसल, ओसामा को मारे जाने वाले ऑपरेशन नेप्च्यून स्पेयर के पहले एक महिला सीआईए एजेंट ने पांच सालों तक इस बात की तफ्तीश की थी कि मारा जाने वाला शख्स ओसामा ही है. इस ऑपरेशन की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पाकिस्तान को भी नहीं लगने दी थी. वजह, इस ऑपरेशन की सफलता और असफलता पर दुनिया के इस सबसे ताकतवर देश की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी. अगर यह ऑपरेशन असफल हो जाता, तो शायद आतंक के ख़िलाफ़ चल रही अमेरिकी लड़ाई का आधार काफी कमजोर हो सकता था.
दरअसल, ओसामा के सफाए में मुख्य भूमिका एक महिला ने ही निभाई थी. ओसामा की मौत के बाद नेवी सील सिक्स टीम के एक सदस्य मार्क ओवेन ने पूरी घटना पर एक किताब लिखी थी, जिसका नाम था, नो इजी डे. इस किताब को लेकर काफी विवाद भी पैदा हुआ था. इसका कारण यह था कि सील टीम का कोई भी सदस्य सीआईए के ऑपरेशन के बारे में खुलासा नहीं कर सकता. मार्क ओवेन ने यह किताब लिखने से पहले सील टीम छोड़ दी थी. वह ओसामा ऑपरेशन का प्रत्यक्षदर्शी रहा था. उसने पूरे ऑपरेशन के बारे में लिखा और प्रकाशक से बातचीत करके किताब प्रकाशित करा दी. इसे लेकर सीआईए ने विवाद भी पैदा किया था कि इसमें कई ऐसी जानकारियां थीं, जिन्हें प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए था. मार्क ओवेन ने एनवाई पोस्ट को दिए गए अपने एक लंबे साक्षात्कार में यह जानकारी दी थी कि ओसामा को पहचानने वाली एक महिला ही थी. उसी ने पूरी तरह निश्ंिचत होकर यह बताया था कि ऐबटाबाद की उस तीन मंजिला इमारत में बैठा आदमी कोई और नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे खूंखार आतंकी ओसामा बिन लादेन है. मार्क ओवेन ने उस साक्षात्कार में महिला का न स़िर्फ जिक्र किया, बल्कि उसे मिशन के लिए धन्यवाद भी दिया था.

इस महिला ने ओसामा बिन लादेन को मारने वाले मिशन से पहले कई सालों तक इस बात के लिए काम किया था कि जो कूरियर ऐबटाबाद स्थित उस खास घर जा रहे हैं, वह ओसामा का ही घर है. दरअसल, ओसामा बिन लादेन ने 1998 के बाद से टेलीफोन का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था. उस समय अमेरिका ने सेटेलाइट फोन का सहारा लेकर मिसाइल हमले करके ओसामा के अफगानिस्तान और सूडान स्थित आतंकी बेस उड़ा दिए थे.

इस महिला सीआईए एजेंट के किरदार को फिल्म जीरो डार्क थर्टी में पूरी तरह दिखाया गया है. यह महिला कई सालों तक पाकिस्तान के इस इलाके में अंडरकवर एजेंट के तौर पर काम करती रही. जबकि इस दौरान सीआईए के कई अधिकारियों का ऐसा मानना था कि सीआईए के इतिहास के सबसे बड़े मिशन की ज़िम्मेदारी किसी महिला के हाथों में सौंपना ठीक नहीं है. ऐसा माना जाता है कि उस महिला का अपने सीआईए के साथियों के साथ ओसामा को मारने के श्रेय को लेकर झगड़ा भी हुआ था. उसने सीआईए के कई अधिकारियों को एक साथ इस बात के लिए ईमेल भी किया था कि उक्त अधिकारी आख़िर कैसे उसके द्वारा की गई मेहनत का श्रेय खुद ही ले सकते हैं. सीआईए के कुछ अधिकारियों ने भी इस बात को स्वीकारा था कि यह महिला कहीं फिल्म निर्माताओं के साथ मिलकर कोई फिल्म न बनाए, इसके लिए उस पर निगाह भी रखी गई थी. लेकिन इस महिला का बचाव करने वालों का कहना है कि इस महिला के साथ न्याय संगत व्यवहार नहीं किया गया. यहां तक कि उसके आलोचकों का भी यह मानना है कि मिशन ओसामा में उसका योगदान काफी महत्वपूर्ण था, लेकिन उसे इसके लिए पर्याप्त पुरस्कार देने की बजाय सीआईए ने उसकी पहचान छिपाने पर ज़्यादा जोर दिया.
इस महिला ने ओसामा बिन लादेन को मारने वाले मिशन से पहले कई सालों तक इस बात के लिए काम किया था कि जो कूरियर ऐबटाबाद स्थित उस खास घर जा रहे हैं, वह ओसामा का ही घर है. दरअसल, ओसामा बिन लादेन ने 1998 के बाद से टेलीफोन का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था. उस समय अमेरिका ने सेटेलाइट फोन का सहारा लेकर मिसाइल हमले करके ओसामा के अफगानिस्तान और सूडान स्थित आतंकी बेस उड़ा दिए थे.
आइए, अब इस मसले पर आते हैं कि महिला ने ओसामा को पहचाना कैसे? साल 2002 से जांचकर्ताओं ने यह ख़बर सुनी थी कि ओसामा कूरियर के जरिये अपनी आतंकी गतिविधियां अंजाम देता है. उसके लिए कूरियर के काम को अंजाम देने वाला शख्स था, अबू अहमद अल कुवैती. अबू पाकिस्तानी नागरिक था. वह कुवैत का नागरिक नहीं था, लेकिन उसने अपने नाम के आगे कुवैती इसलिए लगा रखा था, क्योंकि उसके माता-पिता कुवैत में रहते थे. यह महत्वपूर्ण जानकारी मोहम्मद अल कहतानी ने दी थी, जिसे गिरफ्तार कर अमेरिकी सेना ने लगभग 48 घंटे तक पूछताछ की थी. इस बात को लेकर थोड़ा भ्रम तब हो गया, जब अलकायदा के कथित ऑपरेशलन चीफ खालिद शेख मोहम्मद ने बताया कि वह अबू कुवैती को जानता तो है, लेकिन उसका कोई वास्ता अलकायदा से नहीं है.
साल 2004 में हसन गुल नामक एक कैदी ने इस बात की जानकारी दी कि लादेन कूरियर से संबंधित कामों के लिए स़िर्फ एक आदमी पर भरोसा करता है और वह है अबू कुवैती. लेकिन, हसन गुल ने ही यह जानकारी दी कि काफी दिनों से कुवैती का कोई अता-पता नहीं है. कई लोगों से यह जानकारी मिलने के बाद कि कुवैती नामक कोई आदमी ओसामा बिन लादेन के कूरियर ब्वॉय के तौर पर काम करता है, सीआईए के अधिकारियों को इस बात की पूरी निश्ंिचतता हो गई थी कि यह कोई ऐसा आदमी है, जिसके बारे में सभी को मालूम तो है, लेकिन बहुत ज़्यादा जानकारी नहीं है. साल 2006 में भी अबू अल लिबीबी नामक आतंकी ने यह जानकारी दी कि अबू कुवैती ओसामा का खास नज़दीकी है.
यहीं से इस महिला का पूरे सीआईए ऑपरेशन में महत्वपूर्ण रोल शुरू हो गया. इस महिला ने पूरी तफ्तीश की कि अबू कुवैती आख़िर कहां उस कूरियर को पहुंचाता है. उसने इसकी पूरी जानकारी हासिल की कि ऐबटाबाद स्थित उस घर में ओसामा ही है. साल 2010 में अबू कुवैती का फोन टेप करके यह बात तय की गई कि वह ओसामा के लिए कूरियर कहां छोड़ता है. इसी महिला की तफ्तीश के आधार पर अमेरिकी स्पेशल नेवी सील टीम सिक्स ने 2 मई, 2011 को पाकिस्तान के ऐबटाबाद स्थित ओसामा के घर पर छापा मारा. इस छापे में ओसामा के साथ अबू कुवैती और उसका एक रिश्तेदार भी मारा गया था. ओसामा की मौत के बाद कुछ स्थानीय लोगों ने अबू कुवैती की पहचान अरशद खान के रूप में की थी, लेकिन जब पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस बात की जांच की, तो पता चला कि अरशद खान नामक कोई आदमी इस इलाके में रहता ही नहीं था. दरअसल, अबू अपनी पहचान छिपाकर इस इलाके में रहता था.
ऑपरेशन नेप्च्यून स्टार पर ही बनी फिल्म जीरो डार्क थर्टी में इस महिला सीआईए एजेंट के बारे में पूरी जानकारी दी गई कि आख़िर किस तरह उसने अपने पूरे मिशन को अंजाम दिया. इस फिल्म के रिलीज होने के बाद सीआईए अधिकारियों ने यह कहा भी था कि इसमें दिखाई गई महिला का किरदार वास्तविक ज़िंदगी की एजेंट से काफी कुछ मेल खाता है.


पत्नी के पीछे छिप गया था दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी

दुनिया भर में बहुत-से आतंकी हमलों का हुक्म देने और अपनी गतिविधियों से पश्‍चिमी देशों की नाक में दम कर देने वाले अलकायदा सरगना पर जब अमेरिका की विशेष टीम ने हमला किया, तो वह एक महिला के पीछे छिप गया, जिसे उसकी बीवी माना जाता है. विश्‍व में सर्वाधिक वांछित यह खूंखार आतंकवादी पाकिस्तान के ऐबटाबाद में दस लाख डॉलर की लागत वाले एक मकान में छिपा हुआ था. आतंकवाद विरोधी एवं गृह सुरक्षा मामलों के राष्ट्रीय उप-सलाहकार जॉन ब्रेनन ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं को बताया कि लादेन ने अमेरिकी हमले के समय एक महिला को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया, जो उसकी बीवी मानी जाती है. अमेरिका की इस कार्रवाई में अलकायदा के दो और सदस्य मारे गए, जो लादेन के संदेश वाहक के रूप में काम कर रहे थे. इनमें से एक उसका बेटा खालिद और एक महिला शामिल है, जो ओसामा बिन लादेन की बीवी मानी जाती है. उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि उसने (महिला) लादेन की ढाल के रूप में काम किया. हम अब भी सही रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं कि उन खास क्षणों में क्या हुआ. उप-सलाहकार ने कहा कि जब लादेन को पकड़ने का मौक़ा आया, तो उस महिला ने लड़ाई लड़ी. वह इस तरह तैनात थी, जिससे पता चल रहा था कि उसे ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.


 

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