विधान परिषद स्थानीय निकाय चुनाव : धन और बाहुबल की आजमाइश

पिछले विप चुनाव में जिस दल ने अधिक संख्या में धनबलियों-बाहुबलियों का समर्थन किया, उसका सफलता का प्रतिशत उतना ही अधिक रहा और कमोबेश सभी दल इसी पुराने फॉर्मूले को इस बार भी आजमा रहे हैं. उम्मीदवारों के चयन में धन-बल को तव्वजो दी जा रही है. सभी दलों ने ‘लोहा से लोहा काटने’ को विप चुनाव की सफलता का सूत्र मान लिया है, जिसके तहत जिन दलों में धन-बाहु की कमी है, उसमें सदस्यों को आयात करने पर जोर दिया जा रहा है.

money-or-muscle-powerबिहार विधान परिषद के स्थानीय निकाय का चुनाव एक ऐसा अनोखा चुनाव है, जिसमें न ज्यादा शोर-शराबा होता है, न आम चुनाव की तरह सभाएं होती हैं, न रैलियां होती हैं, न बड़े नेताओं का भाषण होता है और न ही मुद्दे आधारित नारे गढ़े जाते हैं. अलबत्ता धनबल-बाहुबल का प्रदर्शन खुलेआम होता है, जो शायद ही किसी और चुनाव में होता होगा. हर-एक वोट को नोट से तौलने की कोशिश की जाती है. वोटों की बोली लगती है. हर वोट की एक तय राशि प्रत्याशियों द्वारा अपने सामर्थ्य के हिसाब से तय कर दिया जाता है और जो नोट से नहीं बिक रहे होते हैं, उन्हें बाहुबल से अपनी ओर करने की आजमाइश शुरू हो जाती है. हालांकि इस बार चुनाव आयोग ने पहल करते हुए वोटरों के लिए फोटो पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया है. इससे धनबल के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. अन्यथा तय रेट पर सर्टिफिकेट जमा करने का दौर इस बार के चुनाव के लिए भी शुरू हो गया था. सर्टिफिकेट में फोटो नहीं रहने के कारण उसका बेजा इस्तेमाल धनबली प्रत्याशी करते आ रहे थे.
इस साल 24 सीटों के लिए जून के अंतिम सप्ताह या फिर जुलाई में होने वाले विप चुनाव कई मायने में महत्वपूर्ण है. हर दल विधानसभा चुुुनाव के मुख्य मुकाबले से पहले सेमीफाइनल माने जा रहे विप चुनाव में खुद को आजमा लेना चाहता है. नीतीश कुमार का चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला चुनाव होगा. महाविलय का जमीन पर कितना असर पड़ा, वह इस चुनाव में साफ हो जाएगा. राजद और जदयू की मिलीजुली ताकत की पहली परीक्षा इसी चुनाव में हो जाएगी.
भाजपा यह आंकना चाहेगी कि दिल्ली की हार के बाद भी मोदी लहर कायम है या ठहर गई. लोजपा को भी आजमाने के लिए बहुत कुछ होगा, लेकिन आजमाने के लिहाज से बड़ा अवसर मांझी के हम मोर्चा समर्थित उम्मीदवार व तीन सांसदो की पार्टी रालोसपा के पास ज्यादा होगी. हम मोर्चा समर्थित व रोलोसपा को पहली बार स्थानीय निकाय क्षेत्र के चुनाव में उम्मीदवार खड़े करने का मौका मिलेगा. एनडीए के बीच तालमेल की भी पहली परीक्षा इस चुनाव में हो जाएगी. देखना होगा कि भाजपा, लोजपा और रालोसपा मिलकर चुनाव में उतरते हैं या फिर तीनों अपनी-अपनी ताकत को आजमाएंगे.

राजनीतिक पंडितों का एक खेमा यह मान कर चल रहा है कि विप चुनाव में जिस दल का अधिक सीटों पर कब्जा होगा, विधानसभा में भी सफलता के प्रतिशत की संभावना उसके लिए अधिक रहेगी. इसलिए सभी दल पुरजोर कोशिश में जुटे हैं कि विप चुनाव में अधिक से अधिक सीटों पर सफलता हासिल कर विरोधियों पर फाइनल से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल किया जाए. कुछ कमी रह जाए, तो वक्त रहते मुख्य मुकाबले से पहले ठीक-ठाक किया जा सके.

हम मोर्चा दो-एक सीटों को झटककर चुनावी जीत का श्रीगणेश करना चाहेगी, तो रालोसपा के पास लोस चुनाव में मिले शत-प्रतिशत सफलता के जादू को भुनाने का मौका होगा. राजनीतिक पंडितों का एक खेमा यह मान कर चल रहा है कि विप चुनाव में जिस दल का अधिक सीटों पर कब्जा होगा, विधानसभा में भी सफलता के प्रतिशत की संभावना उसके लिए अधिक रहेगी. इसलिए सभी दल पुरजोर कोशिश में जुटे हैं कि विप चुनाव में अधिक से अधिक सीटों पर सफलता हासिल कर विरोधियों पर फाइनल से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल किया जाए. कुछ कमी रह जाए, तो वक्त रहते मुख्य मुकाबले से पहले ठीक-ठाक किया जा सके.

पिछले विप चुनाव में जिस दल ने अधिक संख्या में धनबलियों-बाहुबलियों का समर्थन किया, उसका सफलता का प्रतिशत उतना ही अधिक रहा और कमोबेश सभी दल इसी पुराने फॉर्मूले को इस बार भी आजमा रहे हैं. उम्मीदवारों के चयन में धन-बल को तव्वजो दी जा रही है. सभी दलों ने ‘लोहा से लोहा काटने’ को विप चुनाव की सफलता का सूत्र मान लिया है, जिसके तहत जिन दलों में धन-बाहु की कमी है, उसमें सदस्यों को आयात करने पर जोर दिया जा रहा है. मसलन, सारण लोकसभा क्षेत्र से जदयू के निवर्तमान विधान परिषद सदस्य धनबली सलीम परवेज को मुकाबला देने के लिए जदयू से ही आयातित सच्चितानंद राय को भाजपा समर्थन देने का मन बना रही है. सलीम परवेज व सच्चितानंद राय दोनों ही धनबली हैं. राजनीति का शौक पालने वाले राय कोलकाता के जाने-माने बिजनैसमैन हैं. बिहार में उनका ट्रांसपोर्ट का व्यावसाय व शिक्षण संस्थान हैं. धनबल-बाहुबल का इससे भी सटीक अंदाजा नालंदा जैसे स्थानीय निकाय से लगाया जा सकता है. नालंदा, जो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गढ़ माना जाता है और साथ में यह भी कि बिना उनके चाहे यहां कोई वार्ड कमिश्नर तक नहीं बन सकता. विधायक, सांसद, विधान परिषद चुनाव में तो नीतीश की इच्छा के बगैर फतह हासिल करना लगभग असंभव सा ही है. इसी नालंदा में पिछले चुनाव में जदयू के डॉ. कुमार पुष्पंजय को राजद-लोजपा समर्थित बाहुबली राजेश कुमार सिंह उर्फ राजू यादव ने पटखनी दी थी. राजू यादव की धमाकेदार जीत 2009 विप चुनाव के चर्चित जीत में से एक थी. नीतीश के गढ़ में बाहुबल के बूते राजद-लोजपा ने परचम लहरा दिया था. शिक्षा क्षेत्र के बड़े कारोबारी पुष्पंजय नीतीश के गढ़ में जदयू के निशान पर मात खा गए, तो इसकी वजह उनका बाहुबल में पिछड़ना व वोटों की खरीद में कंजूसी बताया गया. राजू यादव अपनी सीट को बचाने के लिए फिर मैदान में हैं, जहां इसका मुकाबला पुराने प्रतिद्वंद्वी से तो नहीं, मगर कई अन्य धनबलियों से हो सकती है. जमुई के जाने-माने समाजसेवी अशोक कुमार सिंह भी इस बार पूरे दमखम के साथ चुनावी अखाड़े में उतरने को तैयार हैं. संजय कुमार से उनका कड़ा मुकाबला होना तय माना जा रहा है. अशोक सिंह कहते हैं कि मुकाबला एकतरफा होगा और मेरी जीत तय है. मधुबनी में विनोद सिंह अपने विकास कार्यों और सुलभता के कारण काफी लोकप्रिय हैं और पूरे मनोयोग से चुनावी अखाड़े में उतर रहे हैं. विनोद सिंह कहते हैं कि जनता, नीतीश कुमार और अब लालू प्रसाद का भी आशीर्वाद मुझे प्राप्त है, इसलिए पूरी उम्मीद है कि एक बार फिर जनता और इस क्षेत्र की सेवा का मौका मुझे जरूर मिलेगा.

ये कुछ-एक सीट तो बानगी मात्र हैं, पूरी फेहरिस्त ही धनबलियों-बाहुबलियों से अटी पड़ी है. चाहे वह सीवान का क्षेत्र हो, मुजफ्फरपुर का क्षेत्र हो, पूर्वी चंपारण का क्षेत्र हो, आरा का क्षेत्र हो, नवादा का क्षेत्र हो या कोई अन्य क्षेत्र. सभी जगह मुख्य मुकाबला बाहुबलियों-धनबलियों बनाम बाहुबलियों-धनबलियों के बीच ही है. सीवान में वर्तमान विप सदस्य व शराब माफिया टुन्ना पांडेय का मुकाबला विधायिका कविता सिंह के पति दुर्दांत अजय सिंह से होने के आसार हैं. मुजफ्फरपुर में दौलतमंद, दबंग, दिलेर दिनेश सिंह का मुकाबला कई अन्य दौलतमंदों से होगा. पूर्वी चंपारण में साहेबगंज विधायक व विदेशों में कारोबार करने वाले राजू सिंह की पत्नी व विप सदस्य रेणु सिंह भाजपा के धनवान उम्मीदवार राजेंद्र गुप्ता आमने-सामने हो सकते हैं. दरभंगा में विप सदस्य मिश्रलाल यादव का भाजपा के अर्जुन साहनी के बीच पुराना जंग दोहराया जा सकता है. बालू घोटाला व 307 (हत्या के प्रयास) के दो मामले में नामजद नवादा क्षेत्र से विप सदस्य सलमान राजीव को टक्कर देने के लिए विरोधी इसी के कद के बाहुबली को मैदान में उतारने के फिराक में हैं. पटना क्षेत्र से विप सदस्य जदयू के बाल्मीकि सिंह को चुनौती के लिए भाजपा शराब माफिया भोला यादव को समर्थन देने पर विचार कर रही है. रुन्नी सैदपुर से विधायिका गुड्‌डी चौधरी के पति राजेश चौधरी भी उच्च सदन में जाने को बेचैन हैं. उनकी भिड़ंत भाजपा के व्यावसायी विप सदस्य बैद्यनाथ प्रसाद से हो सकती है. जाहिर है, जब थोक भाव में बाहुबली-धनबली भाग्य आजमाइश करेेंगे, तो वोटरों के पास मोल-भाव का मौका भी होगा. सूत्र बताते हैं कि पिछले चुनाव में मुखिया व जिला परिषद सदस्यों का 15 से 25 हजार में प्रमाण-पत्र जमा कराया गया. वार्ड मेम्बर की कीमत भी 8 हजार रुपये से अधिक थी. सरपंच को 10 से 15 हजार रुपये की कीमत अदा की गई. पंचायत समीति के लिए भी यही राशी थी. सूत्रों की मानें तो इस दफा यह राशी बढ़कर डेढ़ से दोगुनी तक हो चुकी है, लेकिन चुनाव आयोग की पहल के बाद इस पर अंकुश लगा है. चुनाव आयोग के फरमान को बेअसर करने के लिए संभावति प्रत्याशी दूसरा रास्ता अपना रहे हैं. चूंकि यह चुनाव पार्टी के सिंबल पर नहीं लड़े जाते, इसलिए राजनीतिक दलों को भी अपनी लाइन बदलने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती, लेकिन इतना तय है कि विधानसभा चुनाव के ठीक पहले होने वाले इस चुनाव में राजनीतिक दलों की अपनी जमीनी ताकत का एक मोटा अंदाजा तो लग ही जाएगा.


उच्च सदन की गरिमा बचाना चाहता हूं : अनिल कुमार

बिहार बिल्डर ऐशोसिएसन के अध्यक्ष व चर्चित समाजसेवी अनिल कुमार आरा-बक्सर स्थानीय निकाय क्षेत्र से उच्च सदन में जाने हेतु भाग्य आजमाइश कर रहे हैं. उनका मुकाबला वर्तमान विधान परिषद सदस्य हुलास पांडेय से होने के आसार हैं. बाहुबल बनाम समाजसेवी के इस मुकाबले में जीत किसकी होगी, यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा, मगर अनिल कुमार ने अपने जीत का दावा ठोक दिया है. अनिल कुमार से बातचीत के कुछ अंश :

  • राजनीति में आने व विधान परिषद के स्थानीय निकाय क्षेत्र का चुनाव लड़ने का फैसला आपने अचानक क्यों किया?

-जहां तक राजनीति में मेरे प्रवेश का सवाल है, कह सकते हैं की अचानक हुआ है, लेकिन मैं पिछले काफी अर्से से राजनीति पर नजर रखे हुए था. खासकर उच्च सदन पर. जिस उच्च सदन को अनेक महान लोगों ने सुशोभित किया, आज वहां अच्छे लोगों की कमी है. समाज के हर योग्य व्यक्ति को उच्च सदन की गरिमा बचाने का प्रयास करना चाहिए. मैं वही कर रहा हूं. बैठ कर आलोचना करने की जगह उच्च सदन को शुद्ध करने के लिए मैंने एक कदम भर बढ़ाया है. मतदाताओं के रुझान से लगता है कि चुनाव जीतने में कामयाब होंगे.

  • आपने आरा-बक्सर को ही चुनाव लड़ने के लिए क्यों चुना?

-यह मेरा गृह क्षेत्र है. किसी भी कार्य का आगाज घर से करना शुभ होता है और इस क्षेत्र को एक ऐसे नुमाइंदे की सख्त जरुरत है, जो समस्याओं को उच्च सदन में बेहिचक रख सके. गैंगवार, जातिवाद, नशाखोरी जैसे अनेक समस्याओं से घिरे इस क्षेत्र में व्यापक बदलाव की जरूरत है. बदलाव तभी संभव होगा, जब लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए नुमाइंदे उनके दर्द को सदन में उठाने के साथ इसके निवारण के लिए संघर्ष कर सकेगें.

  • आप समाज सेवा के माध्यम से भी तो समस्याओं के खिलाफ संघर्ष कर सकते थे?

– सिर्फ खिलाफत से कुछ नहीं होने वाला. इसके लिए संवैधानिक ताकत चाहिए. संवैधानिक ताकत के सही इस्तेमाल से वर्षों में दूर होने वाली समस्याओं को महीनों में निपटाया जा सकता हैं. बशर्ते जनता के नुमाइंदे में काम करने की इच्छा हो.


स्थानीय प्राधिकार के संभावित उम्मीदवार
क्षेत्र का नाम                                            संभावित उम्मीदवार
गया, जहानाबाद व अरवरल                        अनुज कुमार सिंह, सी.पी. यादव, कुंदन कुमार, मनोरमा देवी
कटिहार                                                      अशोक कुमार अग्रवाल, हीमराज सिंह, शोयब आलम, श्रीकांत मंडल
सीतामढ़ी व शिवहर                                    बैद्यनाथ प्रसाद, दिलीप कुमार यादव, लक्ष्मी प्रसाद यादव, राजेश चौधरी
पटना                                                         बाल्मीकि सिंह, भोला यादव, रीतलाल यादव.
मधुबनी                                                    विनोद कुमार सिंह, कृष्ण देव मुखिया, देवेंद्र प्रसाद यादव, मनोज कुमार झा.
मुजफ्फरपुर                                                दिनेश प्रसाद सिंह, अब्दुल कयूम, अरविंद कुमार सिंह.
पुर्णिया, अररिया व किशनगंज                    डॉ दिलीप कु. जायसवाल, अजीमुद्दीन, सैयद, गुलाम हुसैन, कृष्ण कुमार महतो.
आरा-बक्सर                                               हुलास पांडेय, अशोक कुमार, अनिल कुमार, विशेस्वर ओझा.
रोहतास कैमूर                                             कृष्णा कुमार सिंह, चंदन सिंह, मुन्ना राय, मनोज यादव
सीवान                                                        टुन्ना पांडेय, इमरोज आलम, विंध्याचल प्रसाद, करणजीत सिंह.
बांका-भागलपुर                                          मनोज यादव, मुकेश कुमार, लखन पाठक, लक्ष्मण मंडल.
दरभंगा                                                       मिश्रीलाल यादव, अर्जुन साहनी, सुशील कुमार सिंह, सुधीरकांत मिश्र.
सहरसा, मधेपुरा, सुपौल                             मो. इसराइल, बलराम सिंह यादव, भूपनारायण यादव, जय प्रकाश सिंह.
वैशाली                                                       राजेन्द्र राय, किशोर राय, राजेश राय, राजदेव राय.
नालंदा                                                       राजेश कुमार सिंह, दिलीप चौधरी, कपिल देव प्रसाद, प्रवीण कुमार.
पश्चिम चंपारण                                          राजेश राम, पशुपति शाह, रानी तिवारी, सुरेन्द्र कुमार चंद्रा.
बेगुसराय-खगड़िया                                   रजनीश कुमार, डॉ. संजीव कुमार, उर्मिला ठाकुर, गजेंद्र मंडल, नीशा देवी.
पूर्वी चंपारण                                              रेणु सिंह, जदयू, रबीश रंजन, नंदकिशोर राय, कलावती देवी.
समस्तीपुर                                           रोमा भारती, राजद, संभावित उम्मीदवार- मोहन चौधरी, रंजन कुमार, नीलम देवी.
सारण                                                       सलीम परवेज, मो. यासीन, सच्चितानंद राय, विनोद यादव.
मुंगेर, जमुई लखीसराय-शेखपुरा               संजय प्रसाद, अशोक कुमार सिंह
नवादा                                                       सलमान राजीव, जदयू, नीवेदिता सिंह, राजो प्रसाद, बलेश्वर चौधरी.
गोपालगंज                                                सुनील कुमार सिंह, सुशील सिंह, अनवर हुसैन, सुधाकर तिवारी.
औरंगाबाद                                                रंजन कुमार सिंह, जग नारायण सिंह, उमा देवी, रणजीत सिंह