क्या है क्लाउड कम्प्यूटिंग

006अगर कम्प्यूटर और इंटरनेट की बात करें, तो एक तकनीक का नाम बार-बार आता है वो है क्लाउड कम्प्यूटिंग. वैसे वर्तमान दौर की बात की जाए तो अधिकतर इंटरनेट सेवाएं किसी न किसी रूप में क्लाउड कम्प्यूटिंग से जुड़ती जा रही हैं और यही रफ्तार रही तो आने वाले समय में दुनिया लगभग सभी कार्यों के लिए क्लाउड कम्प्यूटिंग पर ही निर्भर होगी.

आइए जानते हैं कि क्लाउड कम्प्यूटिंग क्या है? कौन सी तकनीक प्रयोग में लायी जाती हैं? इसका इतिहास कितना पुराना है? इससे जुड़ी लोगो में क्या क्या भ्रांतियां हैं और इसके फायदे क्या हैं?

क्लाउड कम्प्यूटिंग किसे कहते हैं?

क्लाउड कम्प्यूटिंग यानी डिजिटल डाटा स्टोरेज स्पेस. अगर सीधे शब्दों में कहा जाए तो जिस प्रकार हम अपने कम्प्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन या टैबलेट पर कोई फाइल या डॉक्यूमेंट को सेव करने के लिए उस डिवाइस के स्टोरेज ड्राइव का प्रयोग करते हैं, बिल्कुल उसी तरह ही किस भी दूसरे डाटा को इंटरनेट के माध्यम से किसी दूसरे जगह मौजूद कम्प्यूटर पर सेव करने की प्रक्रिया को क्लाउड कम्प्यूटिंग कहते हैं.

क्लाउड कम्प्यूटिंग के नाम से कई बार लोगों को यह भी भ्रम हो जाता है कि इसके नामकरण में बादलों का भी कोई हाथ है. हालांकि इसका सीधा संबंध बादलों से तो नहीं है लेकिन इस तकनीक के बारे में अगर गहनता से समझा जाए तो यह कुछ-कुछ बादलों से मेल खाती है. इसमें फर्क केवल इतना है कि बादलों में पानी होता है और हम जिस क्लाउड की बात कर रहे हैं, उसमें डिजिटल डाटा होता है. डाटा किसी भी फॉर्मेट में हो सकता है. वो चाहे डॉक्यूमेंट फाइल हो, ऑडियो हो या वीडियो हो. यह बेहद शक्तिशाली और तेज प्रोसेसिंग करने वाले कम्प्यूटरों द्वारा संचालित होते हैं, जिन्हें सर्वर कहा जाता है.

क्लाउड कम्प्यूटिंग कोई नई चीज नहीं है. अगर आप इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे काफी पहले से जुड़े हुए हैं. हो सकता है आपने क्लाउड कम्प्यूटिंग के बारे में विचार नहीं किया होगा. आज के दौर में लगभग सभी लोग ई-मेल सेवा का प्रयोग करते हैं, वह भी क्लाउड कम्प्यूटिंग का एक हिस्सा है. क्योंकि वह भी ई-मेल यूजर के कम्प्यूटर पर सेव नहीं रहता है, बल्कि किसी अन्य सर्वर पर सेव रहता है. ज्यादातर लोग ई-मेल को अपने कम्प्यूटर पर डाउनलोड नहीं करते हैं. इंटरनेट पर देख कर उसे वहीं छोड़ देते हैं, क्योंकि लोग हार्ड ड्राइव को ई-मेल से नहीं भरना चाहते हैं. यह सारी चीजें किसी दूसरे कंपनी के सर्वर(क्लाउड) पर रहती हैं. वहीं दूसरी ओर फेसबुक या अन्य किसी भी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर हम अपना पिक्चर, यू-ट्यूब पर कोई वीडियो या ब्लॉग पर कुछ लिखकर अपलोड करते हैं, तो इन सभी चीजों में क्लाउड कम्प्यूटिंग का ही इस्तेमाल है.

आज दुनियाभर में बहुत सी कंपनियां क्लाउड कम्प्यूटिंग का इस्तेमाल अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए कर रही हैं. सभी कंपनियां अपने-अपने तरीके से यूजर को लुभाने की कोशिश कर रही हैं. जैसे कोई कंपनी अपने यूजर के मनपसंद गानों को उसकी क्लाउड सर्विस पर रखने का मौका देती है, तो कुछ कंपनियां यूजर की पसंदीदा पिक्चर को रखने का मौका देती हैं. कई कंपनियां डाटा को रखने और उसे शेयर करने का ऑप्शन भी दे रही हैं. इस पूरे मामले में यूजर के दृष्टिकोण से सबसे अच्छी और दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर क्लाउड कम्प्यूटिंग सर्विस मुफ्त में हासिल हो सकती है.

इस मायने से देखें तो क्लाउड कम्प्यूटिंग के बिना सभी तरह के कम्युनिकेटिंग डिवाइसेज सिर्फ खिलौने भर हैं. इंटरनेट सुविधा और इसमें मौजूद अलग-अलग फीचर्स क्लाउड कम्प्यूटिंग के जरिये ही कार्य करते हैं. वेब सर्च इंजन हो या कोई दूसरी अन्य साइट सभी क्लाउड कम्प्यूटिंग के माध्यम से ही यूजर तक पहुंचती हैं. गूगल सर्च हो, याहू मेल या फिर फोटो शेयर करनेवाली वेबसाइट, क्लाउड कम्प्यूटिंग के बिना इसका कोई अस्तित्व ही नहीं है.

क्लाउड कम्प्यूटिंग का प्रयोग कैसे करें?

क्लाउड कम्प्यूटिंग को प्रयोग करने के लिए सबसे पहले आप जिस क्लाउड सर्विस प्रदाता का चयन करना चाहते हैं, उसकी वेबसाइट पर अपना एक अकाउंट बनाएं. उसके कुछ देर बाद आप उसकी इस सर्विस का लाभ उठा सकते हैं. यह इस्तेमाल करने में बहुत आसान हैं.

क्लाउड सर्विस देने वाली कंपनियां

वेमवेयर (Vmware), सन माइक्रोसिस्टम्स (Sun Microsystem), रेकस्पेस यू एस (Rackspace US), आईबीएम (IBM), अमेज़न (Amazon), गूगल (Google), बीएमसी (BMC), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और याहू (Yahoo) यह प्रमुख क्लाउड कम्प्यूटिंग सेवा प्रदान करने वाली कंपनियां हैं. सभी कंपनियां अपने यूजर को शुरू के कुछ जीबी स्पेस फ्री में प्रदान करती हैं. यह व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए काफी होता है, पर अगर आपको इसको बिज़नेस या खुद के प्रयोग के लिए फ्री स्पेस से ज्यादा स्पेस चाहिए, तो आप संबंधित कंपनी को पेमेंट कर और अधिक स्पेस खरीद इस सेवा का लाभ ले सकते हैं.

क्लाउड कंप्यूटिंग को कई भागो में बांटा गया हैं

पब्लिक क्लाउड, प्राइवेट क्लाउड और हाइब्रिड क्लाउड कंप्यूटिंग

  1. पब्लिक क्लाउड- नाम के हिसाब से यह क्लाउड आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध होता है. इस इंफ्रास्ट्रक्चर में सर्वर सर्विस प्रदाता के नियंत्रण में होता है. इसमें यूजर न तो सर्वर कम्प्यूटर को देख सकता है और न ही सर्वर पर उसका कंट्रोल होता है. यूजर को यह भी जानकारी नहीं होती है उसका डाटा कहां और किस सर्वर पर रखा गया है. सामान्यतः क्लाउड सर्विस प्रदाता कंपनी जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेज़न और सन माइक्रोसिस्टम्स इसी इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करती हैं. अगर आप बिज़नेस के लिए इस इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करते हैं, तो यह आपके लिए आर्थिक तौर पर ज्यादा किफायती होता है, क्योंकि इसमें मौजूद सभी यूजर में बराबर भागों में खर्च को बांट दिया जाता है, जिससे कम खर्चे में आपका काम हो जाता है. सबसे बड़ी बात यह होती है कि इसमें आपको सर्वर की देख-रेख और रख-रखाव से छुटकारा मिल जाता है.

कब पब्लिक क्लाउड कम्प्यूटिंग को चुनें-

  • जब आपके आर्गेनाईजेशन में किसी एप्लीकेशन पर बहुत सारे लोग एक साथ काम कर रहे हों. जैसे ईमेल का प्रयोग.
  • सर्वर पर कोई एप्लीकेशन रखा हो और आपके संस्थान के सभी लोग उस सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर रहे हों. जैसे टैली
  • अगर कोई सॉफ्टवेयर की प्रोग्रामिंग और टेस्टिंग कई जगह से कई लोगों के द्वारा करनी हो.

अगले अंक में पढ़िए -क्लाउड कम्प्यूटिंग के फायदे और नुकसान

श्याम सुन्दर प्रसाद

लेखक एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल हैं.

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