अख़बारों की नज़र में मोदी का यूएई दौरा

modi in UAEप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यूएई दौरा काफ़ी दिनों तक लोगों में चर्चा का विषय रहेगा. 34 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद भारत का कोई प्रधानमंत्री यूएई गया था. दौरे के दौरान भारत सरकार और यूएई की सरकार में कई बिंदुओं पर समझौते हुए. यूएई दुनिया भर के अमीरों का एक ट्रेड यूनियन है. मोदी ने यूएई के इस महत्व को समझा. यही कारण है कि मोदी ने अपने दौरे में इस बात की भरपूर कोशिश की कि यूएई भारत में अधिक से अधिक निवेश करे.

अबुधाबी अथॉरिटी के पास निवेश के लिए 800 बिलियन डॉलर और दुबई निवेश प्राधिकरण के पास 500 बिलियन डॉलर का फंड निवेश के लिए आवंटित है. काफी हद तक मोदी की कोशिशें सफल हुईं और यूएई के निवेशकों ने भारत में 4.50 लाख करोड़ रुपये निवेश करने पर दिलचस्पी दिखाई है.

भारत-यूएई संबंध

यूएई आर्थिक दृष्टि से भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. यह देश कुछ वर्ष पहले तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी था, लेकिन अब अमेरिका और चीन के बाद तीसरे पायदान पर है. दोनों देशों के बीच 2013 में 73 बिलियन डॉलर का व्यापार था, जो घटकर अब केवल 60 बिलियन डॉलर रह गया है. इसके अलावा दुबई हमारे देश को तेल देने वाला छठा बड़ा सप्लायर है, जिसके तहत देश के कुल तेल की खपत का 9 प्रतिशत हम इससे तेल लेते हैं. 25 लाख से अधिक भारतीय वहां पर नौकरी कर रहे हैं, जो प्रत्येक वर्ष अपने देश को लगभग 12 अरब डॉलर भेजते हैं. इन अर्थों में देखा जाये तो यह देश हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

इंदिरा के बाद मोदी गए यूएई

1981 में इंदिरा गांधी के बाद पिछले 34 वर्षों में भारत के किसी प्रधानमंत्री ने यूएई का दौरा नहीं किया. 2013 में मनमोहन सिंह ने वहां जाने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन अंतिम क्षणों में यह दौरा रद्द कर दिया गया. ज़ाहिर है, भारत सरकार की ओर से यह एक बड़ी कोताही थी. नरेन्द्र मोदी ने दो दिवसीय दौरा करके इस कोताही को सुधारने की कोशिश की है. इन्होंने दुबई के मरहबा क्रिकेट स्टेडियम में 50 हज़ार भारतीयों के सामने यह बताया कि यूएई हमारा एक मित्र देश है और हमदोनों में काफी नज़दीकी है. इसके बावजूद प्रधानमंत्री को यहां आने में 34 वर्ष लग गये, लेकिन आगे ऐसी कोई कोताही नहीं होगी.

यूएई के अख़बारों में मोदी का दौरा 

यह कुछ मूल तथ्य हैं, जिसकेकारण प्रधानमंत्री के इस दौरे को दोनों देशों के मीडिया में काफ़ी महत्व दिया गया. यूएई से प्रकाशित होने वाला अख़बार अलबयान लिखता है कि भारतीय प्रधानमंत्री का यह दौरा दोनों देशों के बीच विकास के नये रास्ते खोलेगा. अख़बार लिखता है कि यूएई के संस्थापक शेख़ ज़ायद बिन सुल्तान निहयान ने भारत और यूएई के बीच दोस्ती, आपसी सहयोग की जो नींव रखी थी, मोदी के दौरे से वह नींव और मज़बूत होगी.

एक दूसरा अख़बार अलख़लीज लिखता है कि मोदी के यूएई दौरे के बाद निवेशकों में मेक इंडिया के तहत विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने का साहस बढ़ा है और जनता में बहुत से लोग, जो भारत में निवेश की संभावनाओं से परिचित नहीं थे, इनके इस दौरे के बाद उन्हें महसूस होने लगा है कि एशिया में भारत एक ऐसा देश है, जहां व्यापार के बेहतर भविष्य को तलाशा जा सकता है. एक और अख़बार अलअमारात अलयौम लिखता है कि इस दौरे ने यूएई के लोगों में भारत के प्रति नज़दीकी ब़ढाया है. अब दोनों देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक विकास और आपसी विश्‍वास में ज़बरदस्त

ब़ढोत्तरी होगी. एक इलेक्ट्रॉनिक अख़बार शुऊन खलीजिया लिखता है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह दौरा 34 वर्षों के दौरान दोनों देशों के बीच रिश्तों में जो ज़ंग लग गया था, उसे दूर करेगा. कई अख़बारों ने प्रधानमंत्री के इस दौरे को महत्व देते हुए इसे प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित किया है. कुछ अख़बारों ने तो इस दौरे की ख़बर को दो दिनों पहले से ही प्रकाशित करना शुरू कर दिया था. इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यूएई के स्थानीय अख़बारों में इस दौरे को काफ़ी महत्व दिया गया और इसको सकारात्मक दृष्टि से देखा गया.

भारतीय अख़बारों में दौरे का महत्व

भारतीय उर्दू मीडिया ने जहां इस दौरे को सकारात्मक और मेक इंडिया की ओर बढ़ता हुआ क़दम बताया, वहीं यह भी कहा कि मोदी का यह दौरा पूर्व के दौरों की तरह ख़ुशफहमियों पर आधारित होगा. मोदी अब तक बहुत सारे देशों में गये, वहां के निवेशकों को भारत आने की दावत दी, लेकिन इसका कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया. वह दुबई से 4.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश की बात करते हैं, लेकिन क्या यह व्यावहारिक रूप से हो सकेगा, यह निश्‍चित नहीं है.

एक उर्दू अख़बार लिखता है कि मोदी के यूएई दौरे की जितनी चर्चा की जा रही है, उतनी चर्चा किसी और दौरे की नहीं हुई. अबुधाबी में मंदिर के लिए यूएई सरकार द्वारा ज़मीन आवंटित करने की खबर को भी एक अखबार ने प्रकाशित की है. मोदी के यूएई में मस्जिद में जाने की घटना को एक अख़बार ने राजनीतिक रंग देने के बजाए प्रोटोकॉल का हिस्सा बताया है. बहरहाल, दोनों देशों की अख़बारों में संयुक्त रूप से यूएई दौरे को सकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा है और उम्मीद की जा रही है कि यह दौरा अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की राह में एक मज़बूत क़दम साबित होगा.

इस दौरे में भारत और यूएई के बीच कई अन्य महत्वपूर्ण समझौते हुए, जिनमें सैन्य प्रशिक्षण, आपसी रणनीतिक सहयोग, धार्मिक हिंसा और आतंकवाद को रोकने पर सहमति हुई. मोदी के दौरों में यह अब तक का सबसे पहला ऐसा दौरा है, जिसको दोनों देशों के मीडिया में ख़ूब कवरेज दिया गया.