बर्बर लाठीचार्ज से ज़िंदा हो उठी कांग्रेस

congressउत्तर प्रदेश सरकार के नाकारेपन, बदहाल क़ानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और भ्रष्ट मंत्रियों एवं नौकरशाहों को सत्ता से मिल रहे संरक्षण के ख़िलाफ़ राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियों पर हुए जबरदस्त लाठीचार्ज ने राज्य में मरणासन्न कांग्रेस की खाल में थोड़ी गर्मी पैदा की और दिल्ली में अब तक कांग्रेस के साथ अठखेलियां करती रही समाजवादी पार्टी का असली चेहरा उजागर किया. समाजवादी सरकार की पुलिस ने कांग्रेसी नेताओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा.

पुलिस ने लाठी चलाने में यह ध्यान रखा कि समाजवादी पार्टी से किस कांग्रेसी नेता के अंतरंग रिश्ते हैं और कौन कांग्रेसी नेता समाजवादी पार्टी के नेताओं को नहीं सुहाते. लिहाजा, राज बब्बर, निर्मल खत्री जैसे नेता तो पुलिस से पिटे, लेकिन प्रमोद तिवारी पुलिस के प्रकोप से बचे रहे. दर्जनों कांग्रेसी जख्मी हए. कुछ पुलिस वालों को भी चोटें आईं. पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मधुसूदन मिस्त्री,

प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री, सांसद राज बब्बर एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी समेत कई नेताओं की सांकेतिक गिरफ्तारी भी हुई.

विधानसभा का मानसून सत्र बाधित करने के लिए संपूर्ण विपक्ष ने 17 अगस्त को सरकार की घेराबंदी कर दी थी. बहुजन समाज पार्टी एवं भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा के दोनों सदनों के अंदर हंगामा किया और सदन का कामकाज दिन भर बाधित रखा. विधानसभा के बाहर कांग्रेस ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और पूरा शहर अस्त-व्यस्त कर दिया. राज्य सरकार की नाकामियों के ख़िलाफ़ कांग्रेस ने विधानसभा घेरने की योजना बनाई थी.

कांग्रेसियों ने पहले विधानसभा के बाहर धरना दिया. पुलिस द्वारा खदेड़े जाने के बाद वे लखनऊ स्थित लक्ष्मण मेला मैदान पहुंच गए, जहां कांग्रेसियों का जमावड़ा सभा में तब्दील हो गया. सभा में कांग्रेस ने अपनी 15 सूत्रीय मांगें सामने रखते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए. इसके बाद कांग्रेसियों का जत्था दोबारा विधान भवन जाने लगा. पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. जब कांग्रेसी नहीं रुके, तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया.

जवाब में कांग्रेसियों ने भी पथराव किया. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में क़ानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है, राज्य सरकार नोएडा के भ्रष्ट चीफ इंजीनियर यादव सिंह समेत कई नौकरशाहों एवं नेताओं के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में लगी है, दलितों एवं महिलाओं पर अत्याचार बेतहाशा बढ़े हैं, बिजली की दरों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और कटौती भीषण हो रही है.

पश्‍चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव पर सरकार लापरवाही बरत रही है, सरकारी नौकरियों की भर्तियों में घोटाले हो रहे हैं, बुनकरों एवं मदरसों की हालत खस्ता है, दलित छात्रों की छात्रवृत्ति बंद कर दी गई है, किसानों का करोड़ों रुपये का गन्ना मूल्य बकाया है, लेकिन सरकार उसके भुगतान का कोई उपाय नहीं कर रही है.

कांग्रेसियों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पुतला फूंकने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस ने पुतला छीन लिया और कांग्रेसियों को जमकर पीटा. कांग्रेसियों का गुस्सा और भड़क गया. उन्होंने लाठीचार्ज के ख़िलाफ़ निशातगंज पुल पर भी धरना दिया. कांग्रेस के प्रदर्शन के चलते शहर के मुख्य मार्ग सहित कई स्थानों की यातायात व्यवस्था चरमरा गई. विधानसभा के अंदर बसपा एवं भाजपा के विरोध और विधानसभा के बाहर कांग्रेसियों के प्रदर्शन पर सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की.

सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि विधानसभा के अंदर और बाहर विपक्ष ने जो आचरण प्रदर्शित किया, उसे कतई लोकतांत्रिक नहीं ठहराया जा सकता.

मेट्रो के लिए दो सौ करोड़, बुंदेलखंड को स़िर्फ तीन करोड़

विपक्ष के हंगामे और शोरशराबे के बीच पेश हुए अनुपूरक बजट में लखनऊ मेट्रो परियोजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. सरकार ने बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के विकास के लिए महज तीन करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. विडंबना यह है कि जो चीनी मिलें किसानों का बकाया देने के लिए तैयार नहीं हैं, उन्हें राज्य सरकार ने 1,529 करोड़ रुपये का राहत पैकेज दिया है. डायल 100 सेवा के लिए सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

अखिलेश सरकार ने आगरा में मुगल म्यूजियम की स्थापना के लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इटावा में बब्बर शेर प्रजनन केंद्र फेज-2 के लिए सात करोड़ और अयोध्या एवं चित्रकूट में भजन संध्या स्थल के लिए चार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसी अनुपूरक बजट की आड़ में मंत्रियों एवं राज्य मंत्रियों को गाड़ियां खरीदने के लिए 40 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं. इसी तरह विधायकों के बढ़े वेतन-भत्तों और पूर्व विधायकों के बढ़े हुए भत्तों के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

कांग्रेस के मुद्दे

ध्वस्त क़ानून व्यवस्था.

यादव सिंह के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने

की कोशिश.

बिजली की दरों में भारी बढ़ोत्तरी और आपूर्ति में भीषण कटौती.

पश्‍चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव पर सरकार की लापरवाही.

सरकारी नौकरियों में हो रही भर्तियों में घोटाले,

अल्पसंख्यकों को स़िर्फ तीन फ़ीसद प्रतिनिधित्व.

बुनकरों और मदरसों की खस्ता हालत, दलित छात्रों की छात्रवृत्ति.

प्रभात रंजन दीन

प्रभात रंजन दीन शोध,समीक्षा और शब्द रचनाधर्मिता के ध्यानी-पत्रकार...