केंद्र की बेरुख़ी के बावजूद हम आगे बढ़ रहे हैं : रावत

harish-rwatनमो लहर में राज्य की सभी पांच सीटें जीतने के बाद मोदी टीम अति उत्साह में आ गई थी. मोदी लहर को बेअसर करते हुए पूरे उत्तराखंड में भाजपा के क़दमों पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जो ब्रेक लगाया, उससे भाजपाध्यक्ष अमित शाह की रणनीति को भारी धक्का पहुंचा. पेश हैं, हरीश रावत से चौथी दुनिया संवाददाता राजकुमार शर्मा से हुई बातचीत के प्रमुख अंश:

केंद्र सरकार के कोप का शिकार आप हो रहे हैं और तंगहाली जनता को झेलनी पड़ रही है, इस पर आपका क्या कहना है?

जनता से अपने मन की बात कहना और जनता से उसके मन की बात सुनना, दोनों में ज़मीन-आसमान का अंतर है. हम जन-जन से उनका दु:ख-दर्द शेयर करते हैं. झूठ बोलकर जनता को ज़्यादा दिनों तक छला नहीं जा सकता. एक दिन झूठ का मुंह काला हो जाता है. राज्य के लोगों की जागरूकता के कारण संघ परिवार द्वारा प्रायोजित मोदी छल बेअसर रहा. उन्हें इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि हिमालय से जो हवा बहती है, वह सर्वत्र असर डालती है. जनता है, सब जानती है.

इन दिनों आबकारी घोटाला सुर्खियों में है, क्या कहना चाहेंगे?

केवल ख्याली पुलाव परोस कर जनता का पेट नहीं भरा जा सकता. कांग्रेस का हाथ सदैव ग़रीब-कमज़ोर आदमी के साथ रहा है. आज सत्ता में बैठे लोग झूठ बोलकर चोरी के बाद सीनाजोरी करने पर उतारू हैं. देश की जनता पंद्रह महीनों से अच्छे दिन आने का इंतज़ार कर रही है. अच्छे दिन ज़रूर आए हैं, लेकिन मुट्ठी भर व्यापारिक घरानों के लिए. काले धन पर सरकार कहती कुछ है और करती कुछ है, जिससे दाल में काला होने का संकेत साफ़ नज़र आता है. सरकार की कथनी-करनी में अंतर है.

किसानों और सैनिकों के मुद्दों पर जो रोल प्रधानमंत्री मोदी अदा कर रहे हैं, वह लालकिले से उनके भाषण के बाद सबको मालूम हो चुका है. हमारी सरकार बेदाग है और हमारी नीतियां जनहितैषी हैं. भाजपा हमें बदनाम करने की चाहे जितनी कोशिश कर ले, जनता खुद सब देख रही है. आज़ादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि विश्‍व प्रसिद्ध हरिद्वार कुंभ मेले को मिलने वाली मदद से केंद्र सरकार हाथ खींच रही है. राज्य के तीर्थों के मार्ग भारी बारिश के चलते तबाह हो गए हैं, लेकिन राज्य के भाजपा सांसदों ने प्रधानमंत्री का रुख देखते हुए मौन धारण कर रखा है. यह सुशासन है कि कुशासन? जनता ही खुद तय कर देगी.

आपने जब उत्तराखंड की सत्ता संभाली, तबसे अब तक क्या बदलाव देख रहे हैं?

भीषण आपदा से त्रस्त राज्य आगे बढ़ने के लिए छटपटा रहा था. आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि उत्तराखंड दिनोंदिन आगे बढ़ रहा है. पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण की प्रक्रिया जारी है, बहुत कुछ अभी किया जाना बाकी है. मुझे विश्‍वास है कि इसके लिए हमें केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता ज़रूर मिलेगी. इस साल अब तक लगभग सात लाख तीर्थ यात्री और तीन करोड़ से अधिक कांवड़िए उत्तराखंड आए. बीते वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक हमारे दूरदराज के पर्यटन स्थलों तक पहुंचे.

देवभूमि पर सस्ती थाली योजना शुरू हो गई है. राज्य के लोग एक सुरक्षित उत्तराखंड का संदेश देश-दुनिया को देने में सफल हुए हैं. केंद्र सरकार की बेरुखी से देश की जनता अब धीरे-धीरे परिचित हो रही है. फिर भी हम पर भरोसा करके लोग लगातार आ रहे हैं. यह इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड में दम है, का संदेश कायम है.

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