कादर खान को पद्मश्री से नवाजे जाने की मांग

kadar-khanबॉलीवुड के जाने माने अभिनेता कादर खान को पद्मश्री पुरस्कार देने की मांग उठने लगी है, अब तक ओमपुरी, लेखिका-निर्देशक रूमी जाफरी, निर्माता निर्देशक डेविड धवन, अभिनेता शक्ति कपूर और ऋषि कपूर जैसे कई कलाकारों ने उनकी इस मांग का समर्थन किया है. कादर खान निर्माता-निर्देशक फौजिया अर्शी की फिल्म होगया दिमाग का दही से एक दशक बाद वापसी कर रहे हैं. फिल्म जगत और आम दर्शकों की तरफ से भी यह बात उठी कि इतने लंबे समय तक भारतीय रंगकर्म, हिंदी फिल्म जगत की सेवा करने वाले श्री कादर खान को अब तक पद्म पुरस्कार क्यों नहीं मिला और न ही किसी ने अबतक इसकी मांग क्यों नहीं की.
इस तरह की मांग होती देख निर्माता-निर्देशक फौजिया अर्शी ने पहल करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा और कादर ख़ान को पद्मश्री देने की मांग की है. फौजिया अर्शी ने बताया कि वह बॉलीवुड की जानीमानी हस्तियों और अमिताभ बच्चन से लेकर सलमान खान, गोविंदा और अनिल कपूर सहित उनके साथ काम कर चुके कलाकारों से इस पहल का समर्थन करने का अनुरोध कर रही हैं, साथ से क़ादर खान को पद्म पुरस्कार दिए जाने की मांग का समर्थन करने का अनुरोध कर रही हैं.
फौजिया अर्शी ने बताया कि उनके ऊपर दबाव था कि इतने दिनों तक फिल्मों से दूर रहने वाले कादर खान को पद्म पुरस्कार देने की मांग की जाये ऐसा करने से कादर खान साहब को एक नया जीवन मिलेगा.
कादर खान को पद्मश्री से नवाजे जाने की मांग करते हुए ओम पुरी ने कहा है कि वह यह पुरस्कार डिजर्व करते हैं. उन्होंने इतने साल बतौर एक एक्टर और राइटर फिल्म इंडस्ट्री की खिदमत की है, हमारी सरकार से गुजारिश है कि वह उन्हें पद्मश्री से नवाजे. लेखिका-निर्देशक रूमी जाफरी ने कहा कि कादर खान पद्मश्री पाने के सबसे प्रबल दावेदार हैं, उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए बहुत योगदान किया है. उनका यह भी मानना है कि आजकल पुरस्कार केवल उन लोगों को मिलते हैं जिनके पुरस्कार देने वालों के साथ व्यक्तिगत संबंध होते हैं, कादर खान कभी पार्टियों में नहीं गये, न ही उन्होंने फिल्म जगत के बाहर के लोगों के साथ कभी मेलजोल रखा.
इसी वजह से उन्हें अब तक यह पुरस्कार नहीं मिल सका. फिल्म निर्माता डेविड धवन और अभिनेता शक्ति कपूर, कादर खान को पद्मश्री दिए जाने के समर्थन में आगे आए हैं दोनों चाहते हैं कि उनके बतौर लेखक और अभिनेता हिंदी फिल्मों में किए गए काम को मान्यता मिले. वहीं ऋषि कपूर ने कहा कि उन्हें उनके बेजोड़ लेखन और अभिनय में योगदान के लिए निश्चित तौर पर पद्मश्री से पुरस्कृत किया जाना चाहिए. उनकी वापसी को लेकर फिल्म जगत से लेकर दर्शकों तक सभी में गज़ब का उत्साह है. बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन भी उनकी फिल्मों में वापसी का स्वागत कर चुके हैं.
अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग के लिए जाने-जाने वाले कॉदर खान ने बॉलीवुड में 400 से भी ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया और 250 से अधिक लोकप्रिय फिल्मों की पटकथा और संवाद भी लिखे. उन्हें विभिन्न श्रेणियों के चार फिल्म फेयर पुरस्कार भी दिया जा चुके हैं. उन्हें साल 2013 में भारत सरकार ने साहित्य शिरोमणि सम्मान से सम्मानित किया था, लेकिन भारत सरकार ने उन्हें कभी पद्म सम्मान देने पर विचार नहीं किया. उम्र के 79 वें पड़ाव पर पहुंच चुके क़ादर खान को पद्मश्री से नवाजे जाने के लिए उनके साथी कलाकारों को सरकार से गुहार लगानी पड़ रही है.
पद्म पुरस्कारों के लिए लोगों के चयन पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं. सैफ अली खान को साल 2010 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उसी साल अभिनेत्री रेखा को भी पद्मश्री से नवाजा गया. सैफ को इतनी जल्दी और रेखा को इतनी देर से पद्म पुरस्कार दिए जाने की आलोचना भी हुई थी. अब तो यह भी माना जाने लगा है कि राजनीतिक सहयोग या राजनीतिज्ञों की अनुशंसा के बिना किसी भी शख्स को पद्म पुरस्कार नहीं मिल सकता है. इसी प्रवृति का शिकार क़ादर खान भी हुए हैं.
भले ही कुछ लोगों को कादर खान का अभिनय क्लासिकल न लगता हो लेकिन उन्होंने कई लोकप्रिय और सुपरहिट फिल्मों के लिए संवाद लिखे हैं, इस आधार पर एक लेखक के रूप में उन्हें पद्मश्री निश्चित रूप से मिलना चाहिए. पिछले साल सलमान खान के पिता और मशहूर पटकथा लेखक सलीम खान को पद्मश्री से नवाजे जाने की घोषणा हुई लेकिन उन्होंने पुरस्कार लेने से इंकार कर दिया. लोगों ने भी इस निर्णय को लेकर सरकार की आलोचना की और कहा कि यह देर से दिया गया अपर्याप्त पुरस्कार है.
अमिताभ बच्चन को अस्सी-नब्बे के दशक की जिन फिल्मों के लिए याद किया जाता है उनमें से अधिकांश फिल्मों की पटकथा और संवाद कादर खान ने ही लिखे हैं. अमिताभ बच्चन के महानायक बनने के सफर में महत्वपूर्ण योगदान कादर खान का भी रहा है. कादर खान ने अपना जीवन फिल्मों के लिए न्योछावर कर दिया और बॉलीवुड को एक नई दिशा दी. अस्सी और नब्बे के दशक में लोगों को ठहाके लगाने के लिए मजबूर करने वाले कादर खान का फिल्म जगत में सबसे बड़ा योगदान यह है कि उन्होंने आम लोगों की बोलचाल की भाषा को फिल्मों में जगह दिलवाई.
अमर अकबर ऐंथोनी में ऐंथोनी के किरदार का वह टपोरी स्टाइल आज भी लोगों को याद है. कादर खान की लिखी इस तरह की और भी कई फिल्में हैं जिनकी चमक आज तक फीकी नहीं पड़ी है, और इसका सबसे बड़ा कारण उन फिल्मों की कहानी और डायलॉग हैं. जिससे लोग एक बार फिर अस्सी के दशक में लौटने के लिए मजबूर हो जाते हैं. आज वक्त आ गया है कि ऐसे वरिष्ठ कलाकार को सम्मानित किया जाए. गोविंदा के साथ उनकी कॉमिक जोड़ी हमेशा याद की जायेगी. कादर खान अपनी नई फिल्म होगया दिमाग का दही में ओम पुरी, संजय मिश्रा, राजपाल यादव और रज्जाक खान जैसे मंझे हुए कलाकारों के साथ सिल्वर स्क्रीन पर नज़र आयेंगे.
इससे पहले उन्होंने साल 2004 में आई फिल्म मुझसे शादी करोगी में अभिनय किया था. इसके बाद खराब सेहत की वजह से वह लंबे समय तक फिल्मों से दूर रहे.किसी भी कलाकार के लिए प्रशंसकों की तारीफ से बड़ा और कोई पुरस्कार नहीं होता है लेकिन सरकार की ओर से इस तरह का कोई भी सम्मान मिलना, उनके काम को सराहने का सबसे बेहतर तरीका है. कादर खान ने फिल्मों और थिएटर को जो कुछ दिया, वह पुरस्कार दिए जाने के लिए पर्याप्त है या कहें कि आज तक जिस किसी को भी पद्मश्री से नवाजा गया है, उनकी उपलब्धियों से कादर खान की उपलब्धियां किसी भी सूरत में कम नहीं हैं.
शायद इसीलिए ओम पुरी कह रहे हैं कि कादर खान को पुरस्कार देने में देरी भले ही हुई हो लेकिन अंधेर नहीं होनी चाहिए.