कमला बाई: हिन्दी सिनेमा की पहली महिला कलाकार

kamala-baiआज भले ही महिला सशक्तिकरण की बातें जोर-शोर से की जाती हों. लेकिन, यह एक ऐसा मसला है जो सदियों से चला आ रहा है. हर दौर में ऐसी महिलाएं रही हैं जिन्होंने स्थापित परंपराओं और मिथकों को तोड़ने का काम किया है. भारतीय सिनेमा के उस दौर में भी कमलाबाई नाम की एक महिला ने स्थापित

परंपराओं और मिथकों को तोड़ने का साहस दिखाया. तमाम पाबंदियों और समस्याओं को एक तरफ रखते हुए रंगमंच की कलाकार कमलाबाई गोखले ने सन 1913 में दादा साहेब फाल्के की फिल्म मोहिनी भस्मासुर में कैमरे का सामना कर भारतीय फिल्मों की पहली अभिनेत्री बन इतिहास रच दिया. उन्होंने सिनेमा में नायिका के किरदार की ऐसी शुरुआत की जो आज भी दिलों की धड़कन बनी हुई है. कमलाबाई महज चार साल की उम्र से ही रंगमंच में अभिनय करने लगी थीं.

अपनी मां के साथ कमलाबाई भी छोटी उम्र में नाटकों में काम करने लगी थीं. उसी दौरान छह महीने के लिए जब उनकी नाटक मंडली बंद हो गयी, तभी दादा साहब फाल्के ने उन्हें अपनी फिल्म मोहिनी भस्मासुर में लीड रोल दिया. उसमें उनकी मां दुर्गाबाई को भी पार्वती का रोल दिया गया.

उस फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा. उस दौर में जब महिलाओं के घर से बाहर निकलने पर भी पाबंदी थी, उन मां-बेटी के फिल्म में अभिनय करने से हंगामा मच गया. अभिनय को अपनी रोजी-रोटी बना लेने के कारण उन्हें समाज से बेदखल कर दिया गया. समाज के अनुसार वह एक स्तरहीन काम कर रही थीं, जिससे महिला की गरिमा खराब होती है. दीनानाथ मंगेशकर सहित कई नामचीन चेहरों ने इसका विरोध किया. लेकिन तमाम विरोध के बावजूद कमलाबाई अभिनय करती रहीं और एक के बाद एक फिल्मों का हिस्सा बनती गयीं. एक नाटक में वे अपने पति के साथ काम कर रही थीं.

नाटक के दौरान ही उनके पति की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गयी. ऐसे में कमलाबाई ने बिना धैर्य खोये नाटक में महिला के साथ-साथ अपने पति के पुरुष वाले किरदार को भी निभाया था. अपने कैरियर में कमलाबाई 200 से भी अधिक नाटकों और 35 से अधिक फिल्मों का हिस्सा रही थीं. अभिनय में वे 85 साल से भी अधिक उम्र तक सक्रिय रहीं.