आपसे मिलने आ रहे है मिर्ज़ा किशन सिंह जोसेफ

om-puriअपने शानदार व्यक्तित्व और बुंलद आवाज की बदौलत फिल्मों में अभिनय का एक नया मुहावरा गढ़ने वाले ओम पुरी ने अपनी अलग पहचान बनाई है. बॉलीवुड में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने के अलावा ओम पुरी ने कई हॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया है. वोल्फ, दि घोस्ट एंड दि डार्कनेस, सिटी ऑफ जॉय, फुल एंड फाइनल और ईस्ट इज ईस्ट जैसी हॉलीवुड की कई सफल फिल्मों में अभिनय किया है. एक हास्य कलाकार के रूप में पिंटो, मेरे बाप पहले आप, हेराफेरी, छुप-छुप के, मालामाल वीकली, सिंग इज किंग जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को काफी गुदगुदाया है. ओम पुरी एक बार फिर फिल्म हो गया दिमाग़ का दही में मिर्ज़ा किशन सिंह जोसेफ की भूमिका में लोट-पोट  करने आ रहे हैं.

इस फिल्म में उनके साथ बॉलीवुड के कई अन्य मशहूर हास्य कलाकार भी उनका साथ देते नज़र आयेंगे. बॉलीवुड के कॉमेडी किंग कहे जाने वाले क़ादर खान इसी फिल्म से एक लंबे अंतराल के बाद वापसी कर रहे हैं. उनके अलावा राजपाल यादव, संजय मिश्रा, रज्जाक खान भी इस कॉमेडी फिल्म में उनका साथ देंगे. फिल्म हो गया दिमाग का दही में ओम पुरी एक ऐसे व्यक्ति का किरदार अदा कर रहे हैं जो चार धर्मों को मानता है उनका नाम भी चार धर्मों के अनुसार मिर्ज़ा किशन सिंह जोसेफ है. फिल्म के उनके किरदार को काफी पसंद किया जा रहा है उनकी वेशभूषा भी बेहद अनोखी है.

फिल्म के ट्रेलर को अब तक लाखों लोग देख चुके हैं और सराह रहे हैं. वे खुद भी फिल्म हो गया दिमाग का दही को लेकर काफी उत्साहित हैं और अपने इस अनोखे किरदार को मज़ेदार बताते हैं. वह बताते हैं कि उन्हें मिर्जा किशन सिंह जोसेफ का किरदार अदा करते हुए काफी मजा आया, उनका कहना था कि 16 अक्टूबर को जब यह फिल्म रिलीज होगी और दर्शक मिर्ज़ा किशन सिंह जोसेफ से रूबरू होंगे तो हक़ीकत में उनके दिमाग का दही हो जायेगा.

फिल्म समीक्षकों नें ओम पुरी की कई अपारंपरिक भूमिकाओं की सराहना की है. साल 1981 में आई फिल्म आक्रोश में एक पीड़ित आदिवासी की भूमिका में उन्होंने कमाल कर दिया है. उसी तरह सन फिल्म अर्ध सत्य में पुलिस इंस्पेक्टर का शानदार रोल किया है. इसके अलावा गुलजार की 1984 के सिक्ख दंगों पर आधारित फिल्म माचिस में आतंकवादी की भूमिका बेहद संजीदा तरीके से अदा की है. उन्हें बेहतरीन अदाकारी के लिए साल 1981 में फिल्म आक्रोश के लिए सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया. इसके बाद सन 1982 में आई फिल्म आरोहण के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके बाद सन 1984 में आई फिल्म अर्ध-सत्य के लिए एक बार फिर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

उन्होंने फिल्मों में अपने बेजोड़ अभिनय से एक बात साबित कर दी थी कि फिल्मों में हीरो बनने के लिए अच्छे चेहरे से ज्यादा अच्छी एक्टिंग की आवश्यक्ता होती है. चेहरे पर आए चेचक के दाग उनकी राह का रोड़ा नहीं बन सके और वह सफलता की नयी ऊंचाइयों को छूते गए. उम्र के 65 पड़ाव पार करने के बावजूद अभिनय के प्रति उनके समर्पण में कोई अंतर नहीं आया है. ओमपुरी उस पुरानी शराब की तरह हैं जो पुरानी होने के साथ-साथ और ज्यादा बेहतरीन होती जा रही है.

 

ओमपुरी को मिले फिल्म पुरस्कार

1981  फिल्म आक्रोश के लिए सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता  फिल्म फेयर पुरस्कार

1982  फिल्म आरोहण के लिए सर्वश्रेष्ठ -अभिनेता  का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

1984 फिल्म अर्ध सत्य  के लिए सर्वश्रेष्ठ -अभिनेता  का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

2009 फिल्म फेयर पुरस्कार(लाइफ टाइम अचीवमेंट)

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