यह है दिल्ली के ग़रीबों का हाल

delhi-slamराष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लाखों लोग बदहाल ज़िंदगी जीने को विवश हैं. बेरोज़गारी, ग़रीबी और कूड़े के ढेरों के बीच पल रही नई पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय है. लेकिन, न तो सरकार का ध्यान इस तऱफ है और न ग़रीबों की रहनुमाई का दंभ भरने वाले राजनेताओं का.

नरैना-मायापुरी की झुग्गी-झोपड़ियों में लोग गंदे नाले के ऊपर लकड़ी के पटरे डालकर जी रहे हैं. वहीं गुज़र-बसर के लिए किसी-किसी ने अपनी छोटी-सी दुकान भी खोल ली है. भीषण गंदगी के बीच एक डॉक्टर साहब भी अपने छोटे-से क्लीनिक के साथ विराजमान हैं. शायद वह भूल गए कि जहां गंदगी का ज़हर मौजूद हो, वहां दवा किसी भी तरह कारगर नहीं हो सकती. बरसात के दिनों में यहां जगह-जगह नाले भर जाते हैं और उनका गंदा-बदबूदार पानी झोपड़ियों में घुस जाता है. यहां रहने वाले अधिकतर लोग अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के हैं. कई सामाजिक संगठन इनमें जागरूकता पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं. झुग्गियों में रहने वाली लड़कियों की ज़िंदगी एक दर्दनाक किस्से से कम नहीं है.

नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमेन की डिप्टी सेक्रेटरी शहनाज़ ने बताया कि पहाडीइस इलाके की 22 लड़कियां गायब हो चुकी हैं, जिनमें से दो बरामद हुईं और दो की लाश मिली, बाक़ी कहां गईं, कुछ पता नहीं चला. वापस आई एक लड़की ने शादी कर ली. बकौल शहनाज़, कुछ लोगों ने उस लड़की को अग़वा करके किसी दूसरे शख्स के हाथों बेच दिया, जिसने उससे शादी कर ली. कुछ लोग झुग्गियों में रहने वाली लड़कियों को नौकरी का लालच देकर बाहर ले जाते हैं और उनसे ग़लत काम कराते हैं. ऐसे लोग अधिकतर हरियाणा एवं राजस्थान से संबंध रखते हैं, जिनकी रोज़ीज-रोटी का एकमात्र ज़रिया लड़कियों को बहला-फुसला कर ले जाना और उन्हें बेच देना है. इस काम में कुछ सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं. इस पेशे से जुड़े युवक स्कूल-कॉलेज की छात्राओं से पहले दोस्ती करते हैं और फिर तीन-चार बार उन्हें शॉपिंग कराते हैं. जब वे पूरी तरह उन पर विश्वास करने लगती हैं, तो उनका किसी के हाथ सौदा कर लिया जाता है.

ऐसी लड़कियां अधिकतर जिस्मफरोशी के धंधे में जबरन धकेल दी जाती हैं. पुलिस या अन्य किसी के सहयोग से वापस घर आईं कुछ लड़कियां बताती हैं कि उन्हें नशीला पदार्थ खिला दिया गया, जिससे वे बेहोश हो गईं. उनके साथ क्या-क्या हुआ, यह होश पर ही उन्हें पता चला. बीते जून माह में सीतापुरी की गली नंबर एक में गाज़ियाबाद पुलिस ने एक मकान पर छापा मारकर 50 लड़कियों को मुक्त कराया. उन लड़कियों को पश्चिम बंगाल निवासी एक महिला ने वहां कैद कर रखा था और वह उनसे देह व्यापार कराती थी. शहनाज़ बताती हैं कि सीतापुरी की गली नंबर दो की एक लड़की को उसके घर आने वाले एक लड़के ने मकान की तीसरी मंजिल से नीचे फेंक दिया. दबंगों के डर से उस लड़की के माता-पिता ने कहा कि उसे बे्रन हेमरेज हो गया था. सीतापुरी की ही एक 16 वर्षीय लड़की के साथ उसके मकान मालिक एवं एक अन्य शख्स ने बलात्कार किया और फिर उसे फांसी पर लटका दिया.

जांच के दौरान मकान मालिक ने पुलिस से कहा कि इसके घर रोज़ न जाने कौन-कौन आता-जाता था. यही नहीं, मकान मालिक ने लड़की की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी गायब कर दी. हादसे के बाद से लड़की की मां लापता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मकान मालिक ने उसे कुछ पैसे देकर कहीं दूसरी जगह भेज दिया. बकौल शहनाज़, ऐसे मामलों में जब हम थाने रिपोर्ट लिखाने जाते हैं, तो पुलिस कहती है कि ये तो गंदी नाली के कीड़े-मकोड़े हैं, उसी में सड़कर मर जाएंगे. मैडम, आप क्यों परेशान होती हैं? जब ऐसी कई लड़कियों को हमने आज़ाद कराया, तो फोन पर धमकी दी गई कि दोबारा इधर मत नज़र आना, हमें रोज़ी-रोटी कमाने दो, तुम्हारा क्या जाता है? शहनाज़ कहती हैं कि इस सारे गोरखधंधे के पीछे राजनीतिक संरक्षण काम करता है और पुलिस की भी अच्छी-खासी कमाई हो जाती है. इसलिए जल्दी कोई सुनवाई नहीं होती.

दिल्ली में अनगिनत झुग्गी-झोपड़ियां हैं, जिनमें इंदिरा मार्केट एवं आरके पुरम सेक्टर-7 में रहने वाले लोगों को सरकार से का़फी शिकायतें हैं. यहीं के अनिल ने कहा कि वह हाईस्कूल करने के बाद कोई भी नौकरी करना चाहता है. एक बुजुर्ग महिला का कहना था कि आजकल के बच्चे पढ़-लिख कर भी क्या करेंगे, नौकरी तो मिलती नहीं. क्या सरकार उन्हें नौकरी देगी? केजरीवाल ने बहुत वादे किए, लेकिन पूरा एक भी नहीं किया. वहीं प्रमिला श्रीवास कहती हैं कि केजरीवाल सरकार ने बहुत कुछ किया.

सबसे बड़ी बात यह कि अब हर समय पुलिस तंग नहीं करती, पहले हर क़दम पर पुलिस का डर सताता था. हालांकि, झुग्गी में रहने वाले अधिकतर लोग प्रमिला के प्रति अच्छी राय नहीं रखते. उनका कहना है कि प्रमिला श्रीवास ने कई लोगों की झुग्गियों पर क़ब्ज़ा करके उन्हें बेसहारा कर दिया. फातिमा ने बताया कि उनका एक पैर खराब है, सरकारी सहायता के लिए उन्होंने इलाकाई विधायक के कार्यालय में आवेदन भी जमा कराया, लेकिन कुछ नहीं हुआ. मुनिरका स्थित झुग्गी में रहने वाली गजना ने बताया कि उन्होंने विधवा पेंशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्हें आज तक एक किस्त भी नहीं मिली.

दिल्ली में झुग्गी आबादी पर एक नज़र
हिंदू 8,00,000
मुस्लिम 1,50,000 (लगभग)
ईसाई 3,000 (लगभग)
सिक्ख 4,000
जैन 100
बौद्ध 200
पारसी 190

-22 प्रतिशत लोग खुले में शौच करते हैं.
-स़िर्फ 16 प्रतिशत घरों में शौचालय.
-सात प्रतिशत लोग सामुदायिक शौचालय का इस्तेमाल करते हैं.
-पहाडी इलाके की 22 लड़कियां लापता, जिनमें से दो बरामद, दो की लाश मिली.
-जून, 2015 में सीतापुरी इलाके में पुलिस छापे के दौरान 50 लड़कियां बरामद.