नीतीश कुमार का विज़न डॉक्यूमेंट

nitish-kumarबिहार विधानसभा चुनाव अब बिलकुल नज़दीक आ चुके हैं. राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के लिए हर तरह के दांव आज़मा रहे हैं. वहीं राजनीतिक विश्लेषक इस चुनाव को काफी अहमियत दे रहे हैं. उनके मुताबिक, देश की भविष्य की राजनीति पर इस चुनाव के नतीजों का गहरा प्रभाव पड़ने वाला है. इसकी अहमियत का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक राज्य में चार चुनावी सभाएं-रैलियां कर चुके हैं. वहीं दूसरी तऱफ महा-गठबंधन, जिसमें सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल एवं कांग्रेस शामिल हैं, भी पटना में एक रैली कर चुका है.

हालांकि, अभी तक किसी भी गठबंधन ने अपना चुनावी घोषणा-पत्र जारी नहीं किया है, लेकिन दोनों तऱफ से मतदाताओं, खास तौर पर युवाओं को लुभाने के प्रयास जारी हैं. जहां एक तऱफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी आरा रैली में बिहार के लिए एक लाख 65 हज़ार करोड़ रुपये का पैकेज देने की घोषणा की, वहीं इसके जवाब में नीतीश कुमार ने भी विकसित बिहार के सात सूत्र नाम से अपना विज़न डॉक्यूमेंट पेश किया है, जिसमें उन्होंने अगले पांच वर्षों के अपने कार्यों और उन पर आने वाली लागत का एक खाका पेश किया. आइए देखते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह विज़न क्या है? इसमें उन्होंने जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा किया भी जा सकता है या ये महज़ चुनावी वादे हैं? इन वादों में क्या नया है और क्या पुराना? जो पुरानी योजनाएं हैं, उन पर क्या प्रगति हुई है?

नीतीश कुमार के इस सात सूत्रीय विज़न डॉक्यूमेंट में युवाओं के लिए आर्थिक सहायता, स्किल डेवलपमेंट, विद्यालयों-कॉलेजों में मुफ्त वाई-फाई, मेडिकल कॉलेज की स्थापना, सरकारी नौकरियों में महिलाओं को आरक्षण, गांवों को पक्की सड़क से जोड़ना, 24 घंटे बिजली आपूर्ति और शौचालय निर्माण आदि कार्य शामिल हैं. उनके मुताबिक, इन कार्यक्रमों के कार्यान्वयन पर 2.70 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा. अब सवाल यह उठता है कि क्या इन कार्यक्रमों के लिए नीतीश कुमार बजट आवंटित कर सकते हैं?

वर्ष 2015-16 की वार्षिक योजना के लिए बिहार सरकार ने 57 हज़ार करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है. इस बजट में शिक्षा, ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, समाज कल्याण जैसे कार्यक्रम शामिल थे, जिनका संबंध सात सूत्रीय विज़न डाक्यूूमेंट में शामिल कर्यक्रमों से भी है. इसलिए यह कहा जा सकता है कि वह अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में 2.70 लाख करोड़ रुपये की राशि मुहैया करा सकते हैं.

जहां तक महिलाओं को आरक्षण देने की बात है, तो राज्य में शिक्षकों एवं पुलिस की भर्ती में महिलाओं को पहले से ही आरक्षण मिला हुआ है. महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नीतीश कुमार का योगदान नकारा नहीं जा सकता. उन्होंने स्कूली छात्राओं के लिए साइकिल योजना चलाई, जिसकी वजह से स्कूलों से न केवल लड़कियों का ड्राप रेट कम हो गया, बल्कि आज लड़कियां लड़कों की तरह साइकिल चलाकर स्कूल जाती हैं, जिसकी कल्पना आज से 10-15 वर्ष पूर्व बिहार में कोई नहीं कर सकता था. जहां तक बसावटों में बिजली पहुंचाने की बात है, तो इसमें भी नीतीश कुमार का रिकॉर्ड बहुत खराब नहीं है.

हालांकि, राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 144 किलोवाट है, जो राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है. जहां तक बिजली की मांग और आपूर्ति में अंतर का सवाल है, तो पिछले वर्षों में इसमें भी कमी आई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 39,000 बसावटों में से 36,000 को बिजली से जोड़ा जा चुका है. ज़ाहिर है, अगले पांच वर्षों में बाकी बसावटों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल करना दूर की कौड़ी नहीं है. लेकिन, हर किसी के लिए नल का पानी मुहैया कराना मुश्किल है. शौचालय निर्माण भी एक अभियान के तहत चल रहा है, जिसमें केंद्र सरकार भी स्वच्छ भारत मिशन के तहत सहयोग कर रही है, इसलिए यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

नीतीश कुमार बार-बार कह चुके हैं कि राज्य में भले ही खनिज संपदा का अभाव है, लेकिन हमारे पास मानव संपदा है, जो बिहार की सबसे बड़ी पूंजी है. युवाओं के स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था, टेक्निकल, मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेज का प्रस्ताव और शिक्षा ऋण आदि अच्छे वादे हैं. अगर इनमें थोड़ी-बहुत प्रगति होती है, तो भी अच्छा है. अगर पूरी तरह से इनका कार्यान्वयन होता है, तो और भी अच्छा है. लेकिन, मुफ्त वाई-फाई, मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी जैसे वादे चुनावी वादे प्रतीत होते हैं. जहां तक मुफ्त वाई-फाई की सुविधा का सवाल है, तो इसका कोई खास लाभ युवाओं को नहीं होने जा रहा है.

दरअसल, यह वादा राज्य के 80 लाख युवा मतदाताओं को लुभाने के लिए किया गया है. वहीं मुफ्त बिजली और मुफ्त पानी भी चुनावी वादे हैं, जिन्हें पूरा करना मुश्किल है. यदि उन्हें पूरा किया भी गया, तो कुछ न कुछ शर्तें ज़रूर लागू होंगी. दिलचस्प बात यह है कि कुछ लोग नीतीश कुमार के मुफ्त बिजली और मुफ्त वाई-फाई के वादे को उनकी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से हालिया मुलाकातों से जोड़कर देख रहे हैं.

बहरहाल, नीतीश कुमार की छवि एक ऐसे राजनेता की है, जिन्होंने बिहार जैसे पिछड़े राज्य को प्रगति की राह पर ला खड़ा किया. उनके शासनकाल में बिहार की विकास दर 10 प्रतिशत के ऊपर थी. राज्य में क़ानून व्यवस्था की स्थिति में उन्होंने उल्लेखनीय सुधार किया और लोगों में उम्मीद जगाई कि बिहार भी देश के दूसरे राज्यों की तरह विकास कर सकता है. पिछले कुछ वर्षों में राज्य के चुनावी समीकरण बिल्कुल बदल चुके हैं. भारतीय जनता पार्टी, जो पिछले कई चुनावों से उनके साथ थी, अब उनके लिए चुनौती पेश कर रही है. वहीं राजद, जो पहले विपक्ष में था, अब उनके साथ है.

नीतीश कुमार के इस 2.70 लाख करोड़ के विज़न डॉक्यूमेंट को नरेंद्र मोदी के 1.65 लाख करोड़ के पैकेज के जवाब में भी देखा जाना चाहिए. एक दूसरी आपत्ति नीतीश कुमार पर यह लगाई जा रही है कि उनकी पार्टी जदयू केवल 100 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. ज़ाहिर है, अगर वह अपनी सभी सीटें जीत भी जाती है, तब भी सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों का सहयोग लेना आवश्यक होगा. जब नीतीश कुमार अपना विज़न डॉक्यूमेंट जारी कर रहे थे, तो उनके गठबंधन के किसी घटक का कोई नुमाइंदा मौजूद नहीं था. बहरहाल, यह तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा कि ये वादे पूरे भी होते हैं या नहीं? और, जब गठबंधन का घोषणा-पत्र जारी होगा, तो उसमें विज़न डॉक्यूमेंट का ज़िक्र होता है या नहीं? लेकिन, हालिया अनुभवों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि इस तरह के लोक-लुभावन वादों को चुनाव जीतने के बाद पूरा करने की कोशिश शायद ही होती है.

मुख्य बिंदु

1. विद्यालयों एवं कॉलेजों में मुफ्त वाई-फाई की सुविधा, 20 से 25 वर्ष के बेरा़ेजगार युवाओं को रोज़गार तलाश करने के लिए दो बार नौ महीने के लिए 1,000 रुपये प्रति माह की सहायता.
2. 12वीं पास विद्यार्थियों के लिए चार लाख रुपये तक शिक्षा ऋण उपलब्ध कराना और उसके ब्याज में तीन प्रतिशत की सहायता देना. युवाओं को स्व-रा़ेजगार और उद्यमिता विकास को प्रोत्साहन देने के लिए 500 करोड़ रुपये का फंड मुहैया कराना.
3. राज्य के सभी ज़िलों में रोज़गार परामर्श केंद्र की स्थापना, भाषा एवं संवाद कौशल और कंप्यूटर की बेसिक ट्रेनिंग उपलब्ध कराना.
4. सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान.
5. सभी गांवों और बसावटों तक बिजली पहुंचाना, सभी घरों में बिजली का कनेक्शन, 24 घंटे बिजली आपूर्ति.
6. हर घर में नल का पानी पहुंचाना.
7. हर घर तक पक्की गली और सड़क
8. शौचालय निर्माण कार्यक्रम के तहत एक करोड़ 72 लाख शौचालयों का निर्माण.
9. तकनीकी-उच्च शिक्षा के लिए पांच मेडिकल कॉलेज, सभी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना.
10. इन सभी योजनाओं के कार्यान्वयन पर 2.70 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे.

संभावित खर्च

मद राशि (करोड़ में)
युवा 49,800
पाइप जलापूर्ति 47,700
हर घर बिजली 55,600
पक्की सड़कें 78,000
मेडिकल कॉलेज 10,300
घरेलू शौचालय 28,700
कुल 2,70,100

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