शरीर के साथ मन को भी म़जबूत बनाने की जरूरत है

China Athleticsचीन की राजधानी बीजिंग के बड्‌र्स नेस्ट स्टेडियम में 22 से 30 अगस्त के बीच आयोजित 15वीं विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप आयोजित हुई. इसमें भाग लेने गया 17 सदस्यीय भारतीय दल एक बार फिर खाली हाथ लौटा.

दो साल के अंतराल में आयोजित होने वाली इस स्पर्धा में ओलंपिक से पहले हर खिलाड़ी के पास अपनी क्षमता और तैयारियों के आंकलन करने का यह सर्वश्रेष्ठ और आखिरी मौक़ा था, जिसमें पूरी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीटों ने भाग लिया. इस मौके को भारतीय खिलाड़ियों ने एक बार फिर गंवा दिया. बीजिंग गए भारतीय दल में 10 महिला और 7 पुरुष खिलाड़ी शामिल थे.

जिन्होंने 9 स्पर्धाओं में भारतीय चुनौती पेश की थी. एशियन चैंपियन इंद्रजीत सिंह(शार्टपुट) और विकास गौड़ा(डिस्कस थ्रो) भारतीय दल के सबसे जाने माने नाम थे. इन दोनों से पदक जीतने की सबसे ज्यादा आशाएं थीं, लेकिन दोनों ही खिलाड़ियों ने निराश किया.

पदक के दावेदारों में से एक रहे इंद्रजीत सिंह ने इस साल विश्व चैंपियनशिप से पहले जिन प्रतियोगिताओं में भाग लिया, उन सभी में उन्हें जीत हासिल हुई थी. वह साल 2015 में विभिन्न स्पर्धाओं में आठ स्वर्ण पदक जीत चुके हैं, लेकिन विश्व चैंपियनशिप में वह अपनी जीत का सिलसिला बरकरारा नहीं रख पाए.

उन्हें 11वें स्थान से संतोष करना पड़ा. इंद्रजीत ने क्वालीफिकेशन राउंड में 20.47 मीटर दूरी तक गोला फेंका, लेकिन फाइनल राउंड में वह केवल 19.52 मीटर तक ही गोला फेंक सके.

ऐसे तो इंद्रजीत पहले ही रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं, उन्हें यहां बिना किसी चिंता के गोला फेंकना था और ओलंपिक से पहले अपनी तैयारियों को पुख्ता करना था लेकिन वह पोडियम तक पहुंचने में नाकामयाब रहे. लंदन ओलंपिक और अन्य स्पर्धाओं में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले विकास गौड़ा विश्व चैंपियनशिप में पदक की सबसे बड़ी आशा थे, लेकिन वह भी अपने फॉर्म में नहीं दिखाई दिए.

क्वालीफिकेशन राउंड में उन्होंने 63.86 मीटर दूरी तक चक्का फेंका, लेकिन फाइनल राउंड में वह क्वालीफिकेशन राउंड से डेढ़ मीटर कम (62.24 मी.) दूरी तक ही चक्का फेंक सके. इस तरह उन्हेें 9वें स्थान से संतोष करना पड़ा. महिलाओं में, पीटी ऊषा की शिष्या टिंटू लूका पदक के उम्मीदवारों में से एक थीं.

लूका 800 मी दौड़ स्पर्धा की हीट में सातवें स्थान पर रहीं और सेमी-फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकीं. लूका ने सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ समय निकालते हुए दौड़ 2.00.95 मिनट में पूरी की और रियो ओलंपिक का अपना टिकट पक्का किया.

ललिता शिवाजी बाबर ने 3000 मीटर स्टिपलचेज स्पर्धा की हीट स्पर्धा 9 मिनट 27.86 सेकेंड का समय निकालकर चौथा स्थान हासिल किया और नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया.

इसके बाद फाइनल मुक़ाबले में उन्होंने भरसक प्रयास किया और 9 मिनट 29.64 सेकेंड का समय निकालकर आठवें स्थान पर रहीं. ललिता बाबर पहली भारतीय महिला हैं, जिन्होंने विश्व चैंपियनशिप में 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाई. फाइनल में उनका प्रयास सराहनीय रहा लेकिन वह पदक जीतने के लिए नाकाफी था. भारत की महिलाओं की 4 गुणा 400 मीटर रिले टीम भी अपना कारनामा नहीं दिखा सकी. हीट में टीम 3 मिनट 29.08 सेकेंड का समय निकाला लेकिन फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकीं.

इस प्रतियोगिता से एक बात साफतौर पर निकलकर सामने आती है कि भारतीय एथलीट/खिलाड़ी बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए शारीरिक रूप से तो तैयार होते हैं, लेकिन मानसिक रूप से वे तैयार नहीं होते हैं. जिन खिलाड़ियों से ओलंपिक खेलों में पदक की आशा की जा रही है, वे फाइनल तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन वहां दबाव सहन नहीं कर पाते हैं.

ऐसा ही इंद्रजीत और विकास के प्रदर्शन में देखने को मिला. आम तौर पर खिलाड़ियों से अपेक्षा की जाती है कि वे फाइनल में अपने प्रदर्शन को ऊपर उठाकर अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे. लेकिन वहां वे ऐसा नहीं कर पाते हैं, बल्कि दबाव के कारण उनके प्रदर्शन में गिरावट आ जाती है, ऐसे में खिलाड़ियों के लिए मनोचिकित्सक मुहैया कराए जाने चाहिए. ताकि वे मानसिक रूप से सुदृढ़ होकर अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकें.

खेल संस्थानों के एथलेटिक्स के लिए कोई योजना नहीं है, भारत सरकार ने टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम(टॉप्स) के अंतर्गत 19 एथलीटों को शामिल किया है. उनकी कुछ अन्य खिलाड़ियों को भी इस स्कीम में शामिल किए जाने की योजना है. केवल इतना करने से ही सरकार की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती है. उसे खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा. जिस तरह 15 वीं विश्व चैंपियनशिप में पहले और दूसरे स्थान पर कीनिया और जमैका जैसे गरीब और छोटे देश हैं.

जिनकी आर्थिक स्थिति भारत से बेहतर नहीं है, लेकिन उनके एथलीट आज विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन से कहीं आगे नज़र आते हैं दोनों विश्व चैंपियनशिप की पदक तालिका में क्रमशः तीसरे और ग्यारहवें स्थान पर हैं, ऐसे में भारत को कीनिया और जमैका जैसे देशों से प्रेरणा लेकर एथलेटिक्स में अपनी स्थित सुदृढ़ करनी होगी, ताकि भारत को दुनिया के खेल नक्शे में पहचान मिल सके.प

loading...