टाइटेनिक एक अद्भुत एहसास

luxury-liner-titanicएक समय की बात है…

प्यार एक ऐसा एहसास है, जो बयां तो आंखों से होता है, लेकिन घर दिल में बना लेता है. यूं तो प्यार पर न जाने कितनी फिल्में बनी हैं, लेकिन प्यार का जीवंत एहसास दिखा फिल्म टाइटेनिक में. यह फिल्म उस जहाज के समुद्र में डूब जाने की घटना पर बनी थी, जो 1912 में डूबा था. 4 सितबंर, 1985 को इस आलीशान जहाज टाइटेनिक की तस्वीरें जनता के सामनेआई थीं. टाइटेनिक उस समय का सबसे भव्य पानी में चलने वाला यात्री जहाज था, जो अटलांटिक समुद्र में एक ब़डे हिमखंड से टकराने की वजह से डूबा, हिमखंड से इसे काफी नुकसान पहुंचा था, जिसके कारण ये डूबा. टाइटेनिक जिस समय डूबा, उस वक्त वो 2,223 यात्रियों को लेकर साउथम्पटन जा रहा था.

लेकिन होनी को कुछ और मंजूर थी. 10 अप्रैल, 1912 को टाइटेनिक ने अपनी पहली और आखिरी यात्रा की. इस हादसे में 1517 यात्रियों को भव्य टाइटेनिक जहाज सहित अपनी जान गंवानी पड़ी. लगभग दो साल टाइटेनिक जहाज को बनाने में लगे थे. जहाज के पहले तल पर एक खूबसूरत रेस्तरां भी बनाया गया था, जिसमें बनाये लजीज़ व्यंजन यात्रियों को परोसे जाते थे. दूसरे तल पर लाइब्रेरी और हेयर सैलून भी बनाये गये थे, जबकि थर्ड क्लास में सब सुविधाएं नहीं थीं.

थर्ड क्लास के कमरों की चौखट-दरवाजे और फर्नीचर पाइन लक़डी के तख्तों से बनाये गये थे. टाइटेनिक एक ब्रिटिश कंपनी हरलैंड ऐंड वोल्फ शिपयार्ड में तैयार किया गया था. पानी में ख़डा टाइटेनिक यूं लगता था, जैसे कोई राजमहल तैर रहा हो. इस हादसे को लेकर जो टाइटेनिक फिल्म बनी थी, उसमें फिल्म के निर्देशक कैमरून ने उस समय के हादसे के गवाह कुछ लोगों से भी इस फिल्म में एक्टिंग करवाई थी. यही कारण था कि फिल्म इतनी जीवंत बनी कि 1912 के हादसे की यादें एक बार फिर से दुनियावालों की नजरों में ताजा हो गई.

एक ब़डी बात यह थी कि इस जहाज के बारे में कहा जाता था कि यह कभी नहीं डूबने वाला जहाज है, लेकिन प्रकृति को तो कुछ और ही मंजूर था, इसलिए यह जहाज ही नहीं डूबा, बल्कि इसने कई लोगों की जीवन लीला ही समाप्त कर दी.