बाइस साल बाद लंका में बजा डंका

Indian-Teamभारत की युवा कप्तान के नेतृत्व में श्रीलंका दौरे पर गई भारतीय क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया है. टीम इंडिया 22 साल बाद श्रीलंकाई धरती पर टेस्ट सीरीज जीतने में सफल हुई है. इससे पहले श्रीलंका में मोहम्मद अजहरूद्दीन की कप्तानी में जीत हासिल हुई थी. इसके अलावा यह भारतीय टीम की चार साल बाद विदेशी सरजमीं पर मिली पहली टेस्ट सीरीज विजय है. टीम इंडिया ने साल 2011 में वेस्टइंडीज में टेस्ट सीरीज जीती थी.

जो कारनाम महेंद्र सिंह धोनी और सौरव गांगुली जैसे सफलतम भारतीय कप्तान नहीं कर सके, वह कारनामा विराट कोहली और उनकी युवी बिग्रेड ने कर दिखाया है. विराट ने बतौर कप्तान अपने पहले विदेशी दौरे में जीत हासिल की है. हालांकि दोनों टीमों के खेल में पुरानी बात नज़र नहीं आई. दोनों ही टीमें बदलाव के दौर से गुजर रही हैं, दोनों ही टीमों में नये खिलाड़ियों की बहुतायत है. ऐसे में भारतीय टीम श्रीलंका के सामने इक्कीस साबित हुई.

अंतरराष्ट्रीय करियर की आखिरी टेस्ट सीरीज खेल रहे कुमार संगाकारा का फॉर्म में न होना भारतीय टीम के लिए फायदे मंद साबित हुआ, यदि उनके बल्ले का जादू सीरीज में चल जाता तो सीरीज की परिणाम कुछ और ही होता. भारतीय टीम भले ही जीत गई हो लेकिन टीम में अभी भी बहुत सी कमियां हैं.पहले टेस्ट में हारने के बाद भारतीय टीम कभी भी विदेशी धरती पर टेस्ट सीरीज जीतने में कामयाब नहीं हुई थी, यह पहला मौका है जब भारतीय टीम सीरीज का पहला टेस्ट हारने के बाद भी सीरीज 2-1 के अंतर से जीतने में कामयाब हुई है.

टीम इंडिया के लिए चौथी पारी में रनों का पीछा करना अभी भी परेशानी का सबब बना हुआ है. खासकर स्पिन गेंदबाजों के सामने बल्लेबाज घुटने टेक देते हैं. पहले टेस्ट की चौथी पारी में भारतीय टीम 176 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए मजह 112 रनों पर ढेर हो गए. रंगना हीरथ की फिरकी के आगे भारतीय बल्लेबाज असहाय नज़र आये. रंगना ने 48 रन देकर सात विकेट लिए. इससे पहले सीरीज के पहले टेस्ट मैच में भारतीय गेंदबाज दिनेश चांदीमल के बल्ले पर लगाम नहीं लगा पाए.

चांदीमल की 162 रनों की नाबाद पारी और पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ उनकी साझेदारी की वजह से ही भारतीय टीम को हार का मुंह देखना पड़ा. आखिरी के दोनों टेस्ट मैचों में टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी की और दोनों ही मैच जीतने में कामयाब हुई. सीरीज के पांच भारतीय बल्लेबाज एक-एक शतक लगाने में कामयाब रहे. कोई भी बल्लेबाज अपनी इस सफलता को दोहराने में कामयाब नहीं हुआ.

पहले टेस्ट में शिखर धवन (134) और कप्तान विराट कोहली (103) ने शतक जड़ा तो दूसरे टेस्ट में शिखर के चोटिल होने के बाद केएल राहुल ने पहली पारी में 108 रनों की शतकीय पारी खेली. तो दूसरी पारी में उपकप्तान अजिंक्य रहाणे ने 126 रनों की पारी खेल टीम की जीत सुनिश्चित की. वहीं तीसरे टेस्ट में मुरली विजय के चोटिल होने की वजह से अंतिम ग्यारह में शामिल हुए चेतेश्वर पुजारा ने नाबाद 145 रनों की पारी खेल 22 साल बाद श्रीलंका में सीरीज जीत की नींव रखी.

पांच में से तीन शतक ओपनिंग करने वाले बल्लेबाजों ने लगाए. तीनों ही टेस्ट मैचों में भारतीय टीम की ओपनिंग अच्छी नहीं रही, पहला विकेट बहुत जल्दी गंवा दिया. लेकिन अच्छी बात यह रही कि दूसरे ओपनिंग बल्लेबाज ने एक छोर थाम लिया और टीम को अच्छे स्कोर तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया. लेकिन जब-जब दूसरा ओपनर भी सस्ते में पैवेलियन लौटा, टीम की हालत पतली हो गई. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली घऱेलू सीरीज में ओपनिंग विकेट जल्दी गिरने की समस्या से निजात पाए बगैर जीत पाना आसान नहीं होगा.

इसके अलावा खिलाड़ियों को इमरान ताहिर की फिरकी का तोड़ ढूंढकर रखना होगा, जिससे कि टीम इंडिया अचानक से स्पिन आक्रमण के आगे ढेर न हो जाए.के एल राहुल और चेतेश्वर पुजारा की शतकीय पारियों के बाद खिलाड़ियों के चयन को लेकर भी समस्या खड़ी हो गई है, इसके अलावा कौन सा खिलाड़ी किस क्रम पर खेले इसको लेकर भी असमंजस की स्थिति बन गई है. चोट की वजह से बाहर गए खिलाड़ियों की जगह टीम में आए खिलाड़यों ने मौके का सही फायदा उठाया.

ऐसे में रोहित शर्मा के सिर पर एक बार फिर खतरे की तलवार लटकने लगी है. रोहित शर्मा का गैरजिम्मेदाराना रवैया बदस्तूर जारी है, उनपर टी-20 और एकदिवसीय मैचों में बल्लेबाजी की खुमारी नहीं उतर रही है. ऐसा लगता है कि उन्हें मैदान में ज्यादा समय गुजरने में आलस आता है. हालांकि रोहित ने दो अर्धशतकीय पारियां खेलीं, बावजूद उके अंतिम ग्यारह में बने रहने पर सवाल खड़ा हो गया है. वह भी युवराज सिंह और सुरेश रैना की श्रेणी में शामिल हो गए हैं जो वन-डे और टी-20 में बेहतरीन खिलाड़ी हैं लेकिन टेस्ट क्रिकेट खेलने में वे असहज दिखाई पड़ते हैं.

विराट कोहली ने जिस तरह की आक्रामक कप्तानी की है वह काबिले तारीफ है वह मैच जीतने के लिए ही मैदान में उतरी, बहुत कम ऐसे सेशन आए जिनमें भारतीय टीम श्रीलंका से पिछड़ती दिखी हो. बल्लेबाजी में असफल रहने के बावजूद उनकी कप्तानी के अंदाज में कोई अंतर दिखाई नहीं देता था. पहले टेस्ट में असफल रहने के बाद अनुभवी गेंदबाज हरभजन सिंह को बाहर बैठाकर पांच गेंदबाजों के साथ मैदान में उतरने का फैसला उनके लिए सही साबित हुआ, सभी गेंदबाजों ने थके बगैर अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया.

भारतीय गेंदबाजों ने तीनों ही टेस्ट मैचों में श्रीलंकाई टीम को दो बार पैवेलियन भेजने का कारनामा कर दिखाया. अश्विन ने सीरीज में 21 विकेट लेकर नया भारतीय रिकॉर्ड बनाया. वहीं 4 साल बाद टीम में वापसी करने वाले अमित मिश्रा ने 15 विकेट लेकर अश्विन का बेहतरीन तरीके से साथ निभाया और अपनी वापसी को सही साबित किया. वहीं ईशांत शर्मा ने सीरीज में 13 विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की और यह बता दिया कि वह टीम के सबसे अनुभवी गेंदबाज हैं.

क्रिकेट में एक नया ट्रेंड सामने आया है कि टीमें घरेलू सरजमीं पर तो आसानी से जीत जाती हैं लेकिन विदेशी धरती पर उन्हें मुंह की खानी पड़ती है. ऐसा हालिया ऐशेज सीरीज में भी देखने को मिला. लेकिन भारतीय टीम ने इस तरह की सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए श्रीलंका में जीत हासिल की. भले ही टीम इंडिया को श्रीलंका में जीत हासिल हो गई हो लेकिन विराट की असली अग्नि परीक्षा तो 2 अक्टूबर से दक्षिण अफ्रीका के सामने होगी. अफ्रीकी टीम श्रीलंका से मजबूत और संतुलित है, इसलिए लंका पर जीत के बाद अतिआत्मविश्वास से उबरना होगा और रणनीति के तहत आगे बढ़ना होगा तभी अफ्रीकी शेरों का शिकार कर ढेर करने में कोहली एंड कंपनी सफल हो पाएगी.

-यह साल 2011 के बाद टीम इंडिया की पहली विदेशी टेस्ट सीरीज जीत है.
अश्विन सबसे कम उम्र में (26 साल,300 दिन)विदेशी धरती पर टेस्ट सीरीज जीतने वाले भारतीय कप्तान बन गए हैं.
अश्विन ने सीरीज मेंें 21 विकेट लेकर अनिल कुबले के साल 2005 के 20 विकेट के रिकॉर्ड को तोड़ दिया.
आर अश्विन करियर में चौथी बार मैन ऑफ दी सीरीज चुने गए. उनसे ज्यादा बार यह कारनाम सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग पांच-पांच कर चुके हैं.
ईशांत शर्मा ने श्रीलंकाई कप्तान एंजेलो मैथ्यूज को आउट कर करियर का 200 वां टेस्ट विकेट लिया.