नीरा राडिया की अंतरंग दुनिया किसी पर विश्वास मत करो

nira-radiaमैं यह तथ्य बार-बार नहीं दोहराना चाहता कि नीरा राडिया के पास कितनी सशक्त सूचनाएं होती थीं, उसने कितनी यात्राएं की थीं और वह कितनें सुंदर कपड़े पहनती थी. लेकिन, हमारे जैसे और भी कई लोग, जो यह मानते हैं कि वे नीरा के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, वे भी यह नहीं समझ सके कि नीरा के एपिरिएंस से उसके चरित्र का पता नहीं लगाया जा सकता. वह हमेशा से एक संदेहास्पद महिला रही है. उसने हमेशा किसी काम को कराने के लिए अपने सहयोगियों तक को धोखे में रखा.

हर वक्त वह कुछ रहस्य छिपाकर रखती थी, जिसकी जानकारी उसके नज़दीकी लोगों तक को नहीं होती थी. उदाहरण के लिए, जब वह पहली बार केएलएम के तीन अधिकारियों के साथ मेरे पास एयर क्राफ्ट को अदालत के ज़रिये रिलीज कराने के लिए आई थी, तो मुझे इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी कि केएलएम पहले अदालत का दरवाजा खटखटा चुकी है और असफल रही है. न मैं यह जानता था कि जब नीरा राडिया मेरे पास इस काम के लिए आई थी, तो उसके साथ ही वह तत्कालीन एनडीए सरकार के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा से भी एयर क्राफ्ट रिलीज कराने के लिए संपर्क कर रही थी.

सिन्हा से संपर्क करने से पहले वह एयर क्राफ्ट रिलीज कराने के लिए कस्टम कमिश्नर कृष्णकांत से भी संपर्क साध चुकी थी. चूंकि मामला क़ानून मंत्रालय को भेजा जा चुका था, इसलिए कृष्णकांत ने मिलने से मना कर दिया था. नीरा और उसके समर्थकों के लाख दबाव के बाद भी कृष्णकांत उससे नहीं मिले. इधर, मैंने अपने तौर पर अदालत के ज़रिये एयर क्राफ्ट के रिलीज ऑर्डर इस शर्त पर ले लिए कि 12 करोड़ रुपये टैक्स मनी के तौर पर जमा किए जाएंगे.

यहां भी नीरा ने कोशिश की कि यह पैसा मा़फ कर दिया जाए और इसके लिए उसने यशवंत सिन्हा से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला और एयर क्राफ्ट के उड़ान भरने से पहले यह पैसा जमा कराना पड़ा. सिन्हा ने यह स्पष्ट किया था कि उन पर एयर क्राफ्ट रिलीज कराने का जबरदस्त दबाव था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. हालांकि, सिन्हा ने एनडीए के उस राजनेता का नाम नहीं लिया, जिसने उन पर इस काम के लिए दबाव डाला था.

नीरा के संदेहास्पद चरित्र का स़िर्फ यही एक उदाहरण नहीं है. उसका पता राडियागेट टेप्स में दर्ज बातचीत से लगता है, जिसमें वह अपनी कंपनी वैष्णवी एडवायजरी सर्विसेज (प्रा.लि.) के एसोसिएट डायरेक्टर यतीश वहाल से मुखातिब है. इस बातचीत में उसने न स़िर्फ टाटा, जो उसके सबसे बड़े क्लाइंट थे, के लिए अपशब्द बोले, बल्कि ट्राई के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप बैजल के लिए भी भला-बुरा कहा, जिसे उसने कंसलटेंट के रूप में हायर किया था.

नीरा ने वहाल एवं अपने कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे सब बैजल को इग्नोर (उनकी उपेक्षा) करें, क्योंकि वह एक बहुत ही कंफ्यूज्ड (भ्रमित) व्यक्ति हैं. खान और कोयले की एक डील के संबंध में उसने टाटा में अपना भरोसा नहीं जताया. उसे यह अंदेशा था कि अगर वह सारे राज बता देगी, तो टाटा सीधे कोल सेक्टर के लोगों से संपर्क साधकर अपना काम निकाल लेंगे और फिर उसे भाव नहीं मिलेगा. उसका हर एक एक्शन डील होता था.

2-जी मामले में उसने ए राजा को दूरसंचार मंत्रालय में लाने के लिए टाटा का भी बतौर लॉबिस्ट इस्तेमाल करने की कोशिश की. कोई भी आदमी यह कल्पना नहीं कर सकता कि भारतीय उद्योग जगत के एक सा़फ-सुथरे चेहरे रतन टाटा किसी ऐसे आदमी को मंत्री बनाने के लिए सिफारिशी पत्र लिखेंगे और उस पर अपने हस्ताक्षर करेंगे, जो कुछ सालों बाद सीबीआई द्वारा आपराधिक आरोप के आधार पर गिरफ्तार कर लिया जाता है.

लेकिन नीरा राडिया, जो ए राजा को मंत्री बनवाने के लिए लॉबिंग कर रही थीं, के लिए रतन टाटा ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि (यूपीए के एक सहयोगी दल के मुखिया) को पत्र लिखकर राजा को बेहतर बताया और दूरसंचार मंत्री की स्पेक्ट्रम आवंटन नीतियों को तार्किक बताया.

जारी…
(मशहूर वकील आर. के. आनंद क्लोज एनकाउंटर्स विद नीरा राडिया के लेखक हैं.)

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