पिता की विरासत संभालने के लिए बेटे चुनाव मैदान में

भारतीय राजनीति में वंशवाद कोई नई बात नहीं है. चाहे केन्द्र की राजनीति हो या राज्य की, भारत की राजनीति में वंशवाद हमेशा से ही हावी रहा है. कहना गलत नहीं होगा कि वंशवाद का इतिहास ही पुराना है. भारतीय लोकतंत्र को परिवारवाद का दीमक आजादी के समय से ही लगा हुआ है. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कई खानदान सत्ता पर काबिज हैं. दरअसल, लोकतंत्र के नाम पर हमारा देश राजनीतिक वंशवाद का प्रतीक बन गया है. नेता अपने परिवार को आगे बढ़ाने में लगे हैं. जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने इंदिरा गांधी को आगे बढ़ाया. इंदिरा की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने. राजीव गांधी की हत्या के कुछ साल बाद सोनिया गांधी ने पार्टी की कमान संभाली.

अब उनके बेटे राहुल गांधी न सिर्फ पार्टी में उपाध्यक्ष हैं, बल्कि पार्टी का बड़ा तबका उन्हें पार्टी अध्यक्ष और पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर देखता है. अब बात बिहार में वंशवाद की राजनीति की करते है. बिहार विधानसभा चुनाव में वंशवाद की बेल को बढ़ाने के लिए नेताओं ने अपने पुत्रों को राजनीति के मैदान में उतार दिया है. राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू यादव का अपनी पार्टी पर पूरा वर्चस्व है. 2014 लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी वंशवाद की बेल को आगे बढ़ाने के लिए अपनी बेटी मीसा भारती को पाटलीपुत्र से चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन वह चुनाव हार गईं.

अब लालू यादव ने अपने पुत्रों को बिहार विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारा है. लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को महुआ से उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि छोटे बेटे तेजस्वी यादव को राघोपुर से उम्मीदवार बनाया गया है. राघोपुर लालू यादव के परिवार की परंपरागत सीट रही है. इस सीट से लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी भी विधायक रह चुकी हैं. अब लालू यादव के पुत्रों पर उनके विरासत को बचाने की चुनौती है.

राम विलास पासवान भी अपनी विरासत अपने बेटे के हाथ में सौंप चुके हैं. लोक जनशक्ति पार्टी का अधिकतर फैसला अब चिराग पासवान ही लेते हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से गठबंधन का फैसला चिराग का ही था. लोजपा बिहार विधानसभा चुनाव चिराग पासवान के नेतृत्व में ही लड़ रही है. रामविलास पासवान के भाई रामचन्द्र पासवान सांसद हैं.

लोजपा ने खगड़िया जिले की अलौली सीट से रामविलास पासवान के भाई पशुपति कुमार पारस और रामचंद्र पासवान के बेटे प्रिंस राज को समस्तीपुर जिले की कल्याणपुर सीट से टिकट दिया है. सहरसा जिले की सोनबरसा सीट से रामविलास पासवान की रिश्ते की बहू सरिता पासवान को टिकट दिया गया है. रामविलास पासवान ने अपने एक और रिश्तेदार विजय पासवान को भी टिकट दिया है. यही नहीं, राजग के एक मात्र मुस्लिम सांसद महबूब अली कैसर के बेटे मोहम्मद यूसुफ को लोजपा ने खगड़िया से उम्मीदवार बनाया है.

हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपनी दूसरी पीढ़ी को राजनीतिक विरासत सौंपने का फैसला किया है. मांझी खुद तो जहानाबाद जिले के मखदूमपुर से उम्मीदवार हैं, तो अपने बेटे संतोष कुमार सुमन को औरंगाबाद जिले के कुटुम्बा से उम्मीदवार बनाया है. मांझी ने अपनी समधिन ज्योति मांझी को पहले ही विधायक बना रखा है. हम के प्रदेश अध्यक्ष शकुनी चौधरी मुंगेर के तारापुर से, तो उनके पुत्र राकेश कुमार खगड़िया से उम्मीदवार हैं. हम के विवादित नेता और पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह के पुत्र अजय प्रताप सिंह को भाजपा ने जमुई से अपना उम्मीदवार बनाया है.

अब बात करते हैं भारतीय जनता पार्टी की. भाजपा वंशवाद पर भले ही शेखी बघारती हो, लेकिन सत्य यह है कि इस पार्टी में भी वंशवाद का खूब बोलबाला है. खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजनीति में वंशवाद पर खूब वार करते हैं, लेकिन उन्हें भी पता है कि उनकी खुद की पार्टी वंशवाद से अछूती नहीं है. भाजपा सांसद अश्विनी चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत को भागलपुर से टिकट दिया गया है. डॉ. सीपी ठाकुर के पुत्र विवेक ठाकुर को ब्रह्मपुर से चुनाव मैदान में उतारा गया है. दीघा से पूर्व विधान पार्षद गंगा प्रसाद चौरसिया अपने बेटे संजीव चौरसिया को दीघा से टिकट दिलवाने में कामयाब रहे. गोरियाकोठी से बीजेपी नेता भूपेंद्र नारायण सिंह के बेटे देवेश कांत को भी टिकट दिया गया है. भाजपा सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के विधायक बेटे अशोक यादव को केवटी से फिर से टिकट मिला है. विधायक चन्द्रप्रकाश राय का टिकट काटकर उनके पुत्र चन्द्रप्रकाश राय को चनपटिया से उम्मीदवार बनाया गया है. राजद के सांसद रहे स्वर्गीय उमाशंकर सिंह के पुत्र जितेंद्र स्वामी को दरोंधा से उम्मीदवार बनाया गया है.

भाजपा ने चारा घोटाले में सजा काट रहे पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र के पुत्र नीतीश मिश्र को झंझारपुर तथा चाराघोटाले में एक और सजायाफ्ता पूर्व सांसद जगदीश शर्मा के पुत्र राहुल शर्मा को जहानाबाद जिले के घोसी से टिकट दिया गया है. शिवहर से आरजेडी के सांसद रहे सीताराम सिंह के बेटे राणा रंधीर सिंह को भाजपा ने मधुबन से टिकट दिया है. यहां बात उन नेता पुत्रों की हो रही थी, जिन्हें टिकट मिल चुका है, अभी तो कई नेता अपने पुत्रों को टिकट दिलाने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं. नेताओं के लिए पार्टी और पार्टी कार्यकर्ता से ज्यादा अपने पुत्रों का हित दिखाई दे रहा है. ऐसे ही परिवारवाद चलता रहा, तो एक दिन राजनीतिक पार्टियां प्राइवेट कंपनी बनकर रह जाएंगी.

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