दिल्ली में दिखी रंगीलो राजस्थान की झलक

रंगीलो राजस्थान के विभिन्न रंग एक ही जगह पर दिख दाएं तो फिर क्या कहना. राजस्थान के ऐसी ही कुछ रंग-बिरंगी तस्वीर पिछले दिनों त्रिवेणी कला केंद्र में देखने को मिली. नई दिल्ली स्थित त्रिवेणी कला केंद्र में चित्रकला पदर्शनी का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कलाप्रेमियों और शहरवासी आए. जहां प्रदेश की संस्कृति की सुगंध से मदन मीणा की पेटिंगस ने कलाप्रेमियों को सराबोर कर दिया. कोटा-बूंदी अपनी पांरपरिक स्टाइल के पेंटिगस लिए बहुत प्रसिद्ध है, पर आजकल जिस तरह की पांरपरिक पेंटिगस बन रही है.

उनमें कुछ नयापन नहीं है. अभी भी कई कलाकार पुरानी शैली में ही पेटिंगस बना रहे है. मदन मीणा ने पेंटिगस में एक नया प्रयोग करते हुए कोटा-बूंदी के संस्कृति, परपंरा और पर्यावरण की खूबसूरती को दर्शाया है. मदन मीणा ने पेंटिगस में रण्थम्बोर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के जीवों को दिखाया है. पेंटिग में कई तरह के पक्षीयां है. जो विभिन्न मौसम में दिखाई देती है. मदन मीणा ने उन्हें भी अपने पेंटिंगस में खूबसूरती से चित्रित किया है. इस पेंटिग को बारहमासा नाम दिया है.

गुलाब माचीस पेंटिंग जो किसी समय बहुत पॉपुलर हुआ करती थी. उससे प्रेरित होकर मदन मीणा ने कांटा लगा पेंटिंग बनाई है. इस पेंटिग में गुलाब के फुलों से घीरी महिला है. जिसके पांव में कांटा लगा हुआ है. इस पेंटिंग को वहां मौजूद कलाप्रेमियों ने काफी सराहा. तीसरी पेंटिंग जो काफी आर्कषित कर रही थी, उसमें एक विष कन्या को दिखाया गया है. कन्या के हाथ मेंं एक सांप है, जो उसके जीभ पर डस रहा है. इस पेंटिंग को विष कन्या का नाम दिया है. यह सारी पेंटिंगस मदन मीणा के रिर्सच और यात्रा पर आधारित है.

मदन मीणा चित्रकार और शोधकर्ता हैं. राजस्थान के विभिन्न आंचलिक समुदायों के साथ उन्होंने काम किया है. मीणा जाति की महिलाओं द्वारा बनाये जाने वाले मांडना चित्रकारी पर उन्होंने गहन शोध किया है. इस विषय पर डॉक्टरेट की थीसीस लिखने के साथ ही उन्होंने इस विषय पर किताबें भी प्रकाशित की हैं – तेजाजी की गाथा, जॉय ऑफ क्रियेटिविटी और नर्चरिंग वॉल्स. एक चित्रकार के रूप में उन्होंने देश भर में अपना काम प्रदर्शित किया है.