भारत-इजराइल ड्रोन सौदा सीमा पार आतंक का होगा खात्मा

IAFभारत सबसे ज्यादा सीमा पार की आतंकी गतिविधियों से परेशान है. कभी पाकिस्तान, तो कभी चीन तो कभी बांग्लादेश और म्यांमार से सीमा पार की अशांति भारत को चैन से सोने नहीं देती. लेकिन भारत ने अब सीमा पार के ऐसे किसी भी नापाक मंसूबों का सटीक जवाब देने के लिए कमर कस ली है, उसी का परिणाम है इजराइल से सशस्त्र ड्रोन सौदा. यह ड्रोन न सिर्फ दुश्मन को तबाह कर सकता है, बल्कि इससे जान-माल की क्षति भी न के बराबर होगी.

अब तक जवाबी कार्रवाइयों से पहले सबसे बड़ी चिंता बहुत बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की होती थी, लेकिन इजराइली ड्रोन के अब तक के प्रदर्शन के रिकॉर्ड बताते हैं कि यह सीमा पार से परोसी जाने वाली आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाकर भारत के लिए वरदान साबित होने वाला है.

भारत ने इजराइल से 40 करोड़ डॉलर (करीब 2600 करोड़ रुपये) में 10 हेरॉन टीपी ड्रोन खरीदने के प्रस्ताव को चुपके से हरी झंडी दिखा दी है. सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों से निपटने में ड्रोन का नया बेड़ा काम आ सकता है, क्योंकि आए दिन सीमा पार से पाकिस्तान सहित अन्य देशों द्वारा कुछ ऐसी गतिविधियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे भारतीय जान-माल की काफी क्षति हो रही है. मणिपुर में जून में हुए आतंकी हमले में सेना के 18 जवानों के शहीद होने के बाद सीमा पार के आतंकवादी शिविरों को टारगेट करने की जरूरत महसूस की गई थी.

इजराइल से सशस्त्र ड्रोन सौदा इसी का परिणाम है. यह ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए हासिल किए जा रहे हैं. इस सौदे को अमलीजामा पहनाने के लिए इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के अधिकारियों ने हाल ही में भारत का दौरा किया. इन अधिकारियों ने साझा उपक्रम में ड्रोन के उत्पादन की संभावना पर भी विचार किया. इन ड्रोन को भारतीय वायुसेना ऑपरेट करेगी. ड्रोन की एक साल के अंदर सेना में तैनाती हो सकती है.

यह ड्रोन 1000 किलो से ज्यादा का पेलोड ले जा सकते हैं. इनमें हवा से जमीन पर मार कर सकने वाली मिसाइल लगी होगी. हथियारों से लैस ड्रोन खरीदने का प्लान आर्म्ड फोर्सेज ने गोपनीय प्रोजेक्ट के तहत 2011 में बनाया था, लेकिन राजनीतिक बंदिशों के कारण उस समय इस सौदे पर विचार नहीं किया जा सका. हालांकि हाल के दिनों में सीमा पार से जिस तरह से आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं, उस पर काबू पाना देश की जरूरत बन गई.

यह डील बहुत संवेदनशील थी, यही कारण है कि इस डील को सात परदों में छिपाकर रखे जाने की बात कही जा रही है. भारत के पास बिना हथियारों वाले हेरॉन पहले से ही हैं, जो निगरानी और गोपनीय सूचनाएं जमा करते हैं. लेकिन इस नये ड्रोन की डील से भारत की सामरिक शक्ति काफी बढ़ जाएगी. इससे वह दुश्मन के इलाके में बड़ी आसानी से आतंकी शिविरों, यहां तक की किसी शख्स को भी कम से कम रिस्क में टारगेट बना सकेगा.

एयरफोर्स के पूर्व प्रमुख वीपी नाइक भी स्वीकार करते हैं कि इस डील से भारत की ताकत में इजाफा होगा. वीपी नाइक का कहना है कि ज्यादा रिस्क वाले एरिया में पायलट भेजने की बजाय आर्म्ड ड्रोन का प्रयोग करना सबसे अच्छा होगा. इस सिस्टम का इस्तेमाल चोरी-छिपे अचानक हमला करने में हो सकता है. दूसरी बात कि इस सेल्फ-डिस्ट्रक्टिंग सिस्टम का उपयोग मुख्य रूप से दुश्मन के राडार की पोजीशन पता करने में किया जाता है.

भारतीय वायु सेना के पास इजराइल से लिया गया हर्पी यूएवी का बेड़ा है, जो स्व-विध्वंसक प्रणाली है. यह मुख्य रूप से दुश्मन के रडार की स्थितियों को बताता है. अभी तक भारत निगरानी और खु़िफया सूचनाएं जुटाने के लिए बिना हथियार वाले ड्रोन का इस्तेमाल करता रहा है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सशस्त्र ड्रोन आने से सीमा पार के परिदृश्य में बढ़त मिलेगी. इस ड्रोन को हवा से ज़मीन पर मार करने वाली मिसाइल के साथ फिट किया जा सकता है.

ये ड्रोन ऐसे ठिकानों पर कार्रवाई करने के लिए बहुत कारगर साबित हो सकते हैं, जहां से जवानों की जान को खतरा होता है. अगर भारत इस ड्रोन ताकत से लैस हो जाता है तो खासतौर पर चीन और पाकिस्तान की सीमा पार गतिविधियों पर बिना किसी रिस्क के नजर रखी जा सकती है. दूसरी तरफ आए दिन सुनने को मिलता है कि किसी आतंकी संगठन का सरगना भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर देखा गया, ऐसे सरगनाओं को भी चुपके से सटीक निशाना लगाकर ड्रोन से खत्म किया जा सकता है. इतना ही नहीं, भारत खुद के मानवरहित ड्रोन बनाने के कार्यक्रम पर भी निवेश कर रहा है.

दुनिया भर में इजराइली ड्रोन का कोई जवाब नहीं है. 2008-09 के गाजा ऑपरेशन के समय हेरॉन द्वारा किए गए प्रदर्शन का रिकॉर्ड बहुत ही जबरदस्त है. हेरॉन की इसी सफलता को देखते हुए सिंगापुर, तुर्की, फ्रांस, जर्मनी, अजरबैजान, इक्वाडोर, मोरक्को, कोरिया, ब्राजील, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी हेरॉन का उपयोग करते रहे हैं.

हेरॉन ड्रोन
-इजराइल का हेरॉन ड्रोन टोही, युद्धक और समर्थन भूमिकाओं में सक्षम प्रीडेटर-मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) के जैसा ही है.
-इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी मारक स्टाइल कम से कम क्षति पहुंचाती है. यहां तक कि इससे किसी एक व्यक्ति को भी लक्ष्य किया जा सकता है.
-ज्यादा रिस्क वाले क्षेत्रों में आर्म्ड ड्रोन का बेहतरीन प्रयोग किया जा सकता है.
-इस सिस्टम का इस्तेमाल चोरी-छिपे अचानक हमला करने में हो सकता है.
-इसका उपयोग मुख्य रूप से दुश्मन के राडार की पोजीशन पता करने में किया जाता है.
-ये हवा से जमीन पर वार करने वाले मिसाइलों से लैस हैं.
-ये दुश्मन देश के इलाके में छुपे लक्ष्यों की पहचान कर सकते हैं, उन्हें ट्रैक कर सकते हैं और उन्हें भेद सकते हैं.
-हेरॉन ड्रोन्स 1000 किलोग्राम से अधिक वजन के पेलोड ले जा सकते हैं.
-इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित हेरॉन ड्रोन मध्यम उंचाई स्तरों पर लगातार 52 घंटों की उड़ान भर सकता है.
-फिलहाल भारत असैन्य हेरॉन और खोजी यूएवी के बेड़े का संचालन निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए करता है.

भारत और इजराइली ड्रोन

भारत ने पहली बार 1998 में इजरायल से ड्रोन खरीदा था. एसआईपीआरआई के मुताबिक, भारत ने ड्रोन की अधिकतर खरीदारी इजरायल से की है. देश में आयातित 176 ड्रोनों में से 108 खोजी ड्रोन हैं और 68 हेरॉन ड्रोन हैं. ड्रोन के वैश्विक निर्यात में इजरायल का योगदान सर्वाधिक 60.7 फीसदी और अमेरिका का 23.9 फीसदी है. कनाडा का 6.4 फीसदी है. इजरायल ने 1980 से अब तक 783 ड्रोनों का निर्यात किया है. 1985 से 2014 तक यूएवी के वैश्विक आयात में भारत 22.5 फीसदी हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है. इसके बाद क्रमश: ब्रिटेन और फ्रांस रहे हैं. ड्रोन या यूएवी आकाश में उड़ने वाला एक पायलटरहित वाहन है. इसका उपयोग टोही गतिविधियों में होता है.

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