पर्यावरण के अनुकूल है इनोवेटिव चूल्हा

सूर्यास्त होते ही एक बार फिर हर रसोई घर में हलचल शुरू हो जाती है, लेकिन यह कार्य पारंपरिक चूल्हों के कारण कष्टमय बन जाता है. उन चूल्हों से निकला धुआं न केवल गृहणियों की आंखों पर दुष्प्रभाव डालता है, बल्कि उसके चलते कैंसर जैसी ़खतरनाक बीमारियां भी हो जाती हैं. पारंपरिक चूल्हों में लकड़ी की खपत ज़्यादा होती है और साथ ही ऊर्जा की क्षति भी. लगभग 90 प्रतिशत ऊर्जा पारंपरिक चूल्हों में नष्ट हो जाती है. लकड़ियां एकत्र करने के लिए महिलाओं को दूर-दूर तक जाना पड़ता है, जिसमें बड़े पैमाने पर समय की बर्बादी होती है. हरे-भरे जंगल लकड़ी की ज़रूरत पूरी करने के लिए काटे जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण को खासा ऩुकसान पहुंच रहा है. न केवल वन संपदा घटती जा रही है, बल्कि मिट्टी का कटाव भी ज़्यादा हो रहा है, जो लगातार बढ़ते रेगिस्तानों और बाढ़ की एक बड़ी वजह है.

ईंधन की कमी इतनी ज़्यादा है कि मांग के मुक़ाबले उपलब्धता नहीं के बराबर है. राजस्थान के नवलगढ़ में मोरारका फाउंडेशन द्वारा सांझा गैस रसोई रा़ेजगार योजना पिछले चार वर्षों से संचालित की जा रही है. इसी योजना के तहत इस बार मोरारका फाउंडेशन ने इको फ्रेंडली इनोवेटिव चूल्हे नवलगढ़ और आसपास के गांवों एवं स्कूलों में मिड डे मील के लिए उपलब्ध कराए हैं. ये चूल्हे भोजन बनाने के लिए न्यूनतम धुएं के साथ एक उपयुक्त वातावरण देते हैं. साथ ही ये महिलाओं को रा़ेजगार दिलाने में भी सहायक साबित हुए हैं. ये पर्यावरण फ्रेंडली हैं और इन्हें उन घरों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां जगह अपेक्षाकृत कम है. इन चूल्हों की लागत बेहद कम है.
क्या है इनोवेटिव चूल्हा
इनोवेटिव चूल्हा लकड़ी एवं गैस से 90 प्रतिशत से भी कम धुएं के साथ क्लीनर और अधिक ताप से कार्य करता है, फलस्वरूप रसोई में ताजी हवा बरकरार रहती है. इसे सोलर पैनल के माध्यम से संचालित किया जाता है. इसे शुष्क बैटरी पर 20 घंटे तक चलाया जा सकता है. इनोवेटिव चूल्हे में लकड़ी, घास और पेड़ की शाखाओं के टुकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है. किसान मोहन सिंह इस इनोवेटिव चूल्हे का इस्तेमाल अपनी चाय दुकान पर कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि जबसे वह इनोवेटिव चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं, ईंधन खर्च में बहुत कमी आई है. परंपरागत चूल्हे के लिए उन्हें लकड़ियों का इंतजाम करना पड़ता था, जो एक मुश्किल काम था और उसमें काफी समय बर्बाद हो जाता था. इनोवेटिव चूल्हे के इस्तेमाल से उन्हें न स़िर्फ ऐसी समस्याओं से छुटकारा मिला, बल्कि उनकी आमदनी में भी अच्छा-खासा इजा़फा हुआ. अगर आपको रसोई गैस मिलने में समस्या है या एक ही सिलेंडर होने से उसकी री-फिलिंग के दौरान खाना तैयार करने की समस्या है, तो आप भी इनोवेटिव चूल्हा आजमा सकते हैं. यह कम लागत के साथ न स़िर्फ तेजी से खाना तैयार करता है, बल्कि पर्यावरण को भी ऩुकसान नहीं पहुंचाता.

इनोवेटिव चूल्हे के फायदे

  • ईंधन की खपत 50 प्रतिशत कम होती है. इसका स्टोव 90 प्रतिशत से भी कम धुआं उत्सर्जन करता है और खाना तैयार करने में 50 प्रतिशत समय भी बचता है.
  • बहुत कम धुएं के साथ खाना तैयार होता है, जिससे स्वच्छता बनी रहती है.
  • प्रकृति प्रदत्त ईंधन जैसे गोबर, लकड़ी आदि का इस्तेमाल.
  • लंबे समय तक चलने के लिए इसे स्टेनलेस स्टील से तैयार किया गया है.
  • हल्के वजन की वजह से लाने-ले जाने में आसानी.