आईपीएस अधिकारी को फोन पर धमकी देने का मामला

Amitabh-Tahkurमुलायम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश
सक्रिय हुई सरकार, अमिताभ ठाकुर पर जवाबी म़ुकदमा

उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को फोन पर धमकी देने के मामले में अदालत ने मुलायम सिंह यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. 16 सितंबर को लखनऊ की सीजीएम अदालत से जारी इस आदेश से अचानक प्रदेश और देश की सियासत गरमा गई है. मुलायम पर म़ुकदमा दर्ज करने का अदालती आदेश आते ही सक्रिय हुई अखिलेश सरकार ने सतर्कता जांच प्रकरण में अमिताभ पर भी म़ुकदमा ठोंक दिया. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव द्वारा 10 जुलाई, 2015 को आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को फोन पर धमकी देने का मामला लगातार सुर्खियों में रहा.

11 जुलाई को अमिताभ ठाकुर ने मुलायम सिंह यादव पर धमकी देने का आरोप लगाया था. अमिताभ ठाकुर का आरोप था कि मुलायम सिंह ने उन्हें फोन पर सुधर जाने की धमकी दी. दोनों के बीच बातचीत का वॉयस रिकॉर्ड उनकी पत्नी ने जारी किया था. इस मामले में सरकार ने सख्ती और नरमी यानी दोनों तरीके इस्तेमाल कर मामला निपटाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी.

आ़िखरकार सीजेएम सोमप्रभा मिश्रा ने अमिताभ ठाकुर के परिवाद पर प्रार्थना-पत्र को स्वीकार करते हुए हजरतगंज के इंस्पेक्टर को समुचित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया. उन्होंने मामले की विवेचना कर प्रगति से अदालत को अवगत कराने के आदेश भी दिए हैं. इससे पूर्व अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता अखिलेश कुमार अवस्थी ने तथ्य रखते हुए फिरोजाबाद में ठाकुर के एसपी रहने के समय जसराना में उनके साथ विधायक रामवीर सिंह द्वारा की गई मारपीट से संबंधित एफआईआर और आरोप-पत्र की प्रति साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की.

अमिताभ ठाकुर ने मुलायम सिंह यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए 11 जुलाई को हजरतगंज के इंस्पेक्टर विजयमल सिंह यादव को तहरीर दी थी. एफआईआर दर्ज न किए जाने पर 23 जुलाई को लखनऊ के एसएसपी राजेश पांडेय को प्रार्थना-पत्र भेजा गया था. हजरतगंज के इंस्पेक्टर ने 17 जुलाई को पत्र लिखकर ठाकुर को सूचित किया था कि उनकी शिकायत की जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है. ठाकुर ने उस जांच को विधि विरुद्ध बताते हुए 31 जुलाई को सीजेएम के समक्ष एफआईआर दर्ज करने हेतु आवेदन किया था, जिस पर हजरतगंज के इंस्पेक्टर ने यह आख्या दी थी कि ठाकुर ख्याति पाने के लिए यह आरोप लगा रहे हैं.

अदालत के इस आदेश से समाजवादी पार्टी के मुखिया की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं. लखनऊ की सीजेएम सोमप्रभा मिश्रा ने अमिताभ ठाकुर की याचिका पर सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत म़ुकदमा दर्ज करने और अदालत को इस केस की कार्रवाई की जानकारी देने का आदेश दिया है. अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर ने खनन मंत्री गायत्री प्रजापति के भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त के यहां शिकायत की थी.

अमिताभ ठाकुर का आरोप है कि उसके बाद से ही उन्हें फोन पर धमकियां मिलने लगी थीं. 10 जुलाई, 2015 को शाम 4.43 बजे आए फोन पर मुलायम सिंह यादव ने उन्हें सुधर जाने की हिदायत दी और कहा था, जसराना वाली घटना भूल गए? उल्लेखनीय है कि जसराना का मामला वर्ष 2006 में हुआ था, जब अमिताभ फ़िरोज़ाबाद में एसपी थे. सीजेएम सोमप्रभा मिश्रा ने अपने आदेश में कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ धमकी का मामला बनता है. उन्होंने ललित कुमारी बनाम यूपी सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि उक्त केस में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने कहा था कि अगर संज्ञेय अपराध बनता है, तो पुलिस को मामला दर्ज करना ही होगा.

अमिताभ पर भी ठोंक दिया म़ुकदमा

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलने वाले निलंबित आईजी अमिताभ ठाकुर के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान ने लखनऊ के गोमती नगर थाने में भ्रष्टाचार का म़ुकदमा दर्ज कराया. ठाकुर पर आय से 83 प्रतिशत अधिक व्यय का आरोप है. शासन के निर्देश के बाद सतर्कता अधिष्ठान ने यह कार्रवाई की है. सतर्कता अधिष्ठान के निरीक्षक महेश सिंह ने 16 सितंबर को ही गोमती नगर थाने में अमिताभ ठाकुर के खिलाफ तहरीर दी.

तहरीर के आधार पर ठाकुर के ़िखला़फ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आय से अधिक संपत्ति के तहत म़ुकदमा दर्ज किया गया. ठाकुर पर आरोप है कि उनकी आय के जो भी ज्ञात स्रोत हैं, उसके सापेक्ष जांच की गई अवधि में उनकी 98 लाख 12 हज़ार 164 रुपये अवैध आय मिली है.

रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के लिए निर्धारित अवधि में अमिताभ और उनके आश्रित परिवारीजनों ने वैध स्रोत से एक करोड़ 17 लाख 99 हज़ार 465 रुपये की आय अर्जित की, जबकि इसके सापेक्ष दो करोड़ 16 लाख 11 हज़ार 629 रुपये व्यय किए. अमिताभ पर आरोप है कि पर्याप्त अवसर देने के बावजूद उन्होंने इस संदर्भ में कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया. वर्ष 1992 बैच के आईपीएस अमिताभ ठाकुर के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान के संयुक्त निदेशक ने खुली जांच पूरी कर शासन को चार सितंबर को रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें उन्हें दोषी ठहराया गया था.

इस रिपोर्ट पर विचार के बाद शासन के सतर्कता विभाग के उपसचिव एसपी सिंह ने सतर्कता अधिष्ठान के निदेशक भानु प्रताप सिंह को पत्र लिखकर अन्वेषण (मुक़दमा दर्ज कर विवेचना पूरी करने) की आख्या उपलब्ध कराने को कहा था. निदेशक भानु प्रताप सिंह के निर्देश पर म़ुकदमा दर्ज कराया गया. उल्लेखनीय है कि अमिताभ ठाकुर के खिलाफ लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने भी पिछले माह जांच की सिफारिश की थी.

अमिताभ ठाकुर का कहना है कि यह जांच निष्पक्ष नहीं है. उनके परिवार वालों की संपत्ति को उनकी निजी संपत्ति बताया गया है.

जांच एजेंसी ने उन्हें एक बार भी नहीं बताया कि उन पर कौन-सी संपत्ति रखने का आरोप है और उसका आधार क्या है? अमिताभ ने कहा, मैं सतर्कता अधिष्ठान द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर का स्वागत करता हूं और यह मानता हूं कि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत मिलने पर कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए, लेकिन जिस प्रकार से यह पूरी जांच एकपक्षीय तरीके से हमारी बात सुने बगैर की गई और उसके बाद एफआईआर दर्ज कराई गई, वह पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध स्वरूप की गई कार्रवाई दिखती है, जो मेरी दृष्टि में नितांत दु:खद है.

प्रभात रंजन दीन

प्रभात रंजन दीन
शोध,समीक्षा और शब्द रचनाधर्मिता के ध्यानी-पत्रकार...
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प्रभात रंजन दीन

प्रभात रंजन दीन शोध,समीक्षा और शब्द रचनाधर्मिता के ध्यानी-पत्रकार...