जावेद बनेंगे सऊदी अरब में भारतीय राजदूत!

javedइस्लाम की जन्मस्थली सऊदी अरब में भारतीय राजदूत नियुक्त करने के लिए एक अच्छे मुस्लिम चेहरे की तलाश खत्म होने का नाम नहीं ले रही. भारतीय विदेश सेवा में कोई ऐसा अधिकारी मिल नहीं रहा. और जो हैं, वे या तो अभी कनिष्ठ हैं या फिर जाने में हिचक रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, दौड़ में काफी नाम आए और कटते चले गए. सऊदी अरब में भारतीय राजदूत की नियुक्ति ज़रूरी होती जा रही है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वहां और इजरायल जाने का कार्यक्रम इसी वर्ष के अंत या अगले वर्ष की शुरुआत तक बनना तय है.

बिना भारतीय राजदूत के मोदी का वहां जाना हास्यास्पद जैसा होगा. चौथी दुनिया का यह अंक छपने तक, एक नाम पर पीएमओ में काफी विचार-विमर्श हुआ. वह हैं, मुंबई के नए पुलिस कमिश्नर अहमद जावेद. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने जावेद का नाम चलाया है. कहा जाता है कि वह मोदी के अमेरिका यात्रा पर जाने से पहले दिल्ली आए थे और विशेष अधिकारियों से मिलकर गए.

जावेद को लेकर पीएमओ और विदेश मंत्रालय के एक वर्ग में ज़्यादा उत्साह नहीं है, क्योंकि हाल में चर्चित शीना बोरा हत्याकांड में गिरफ्तार हुई इंद्राणी मुखर्जी एवं उनके पति पीटर मुखर्जी की जावेद से दोस्ती जगजाहिर हो गई है. इंद्राणी मुखर्जी द्वारा जेल में आत्महत्या की कथित कोशिश ने मुंबई पुलिस-प्रशासन पर सवालिया निशान लगा दिया है.जावेद भारतीय पुलिस सेवा के 1980 बैच के अधिकारी हैं और वह लखनऊ के एक प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखते हैं.

कुछ समय तक उन्होंने दिल्ली पुलिस में भी काम किया. वह मुंबई के पेज थ्री वर्ग में एक जाने-माने चेहरे रहे हैं. मुख्यमंत्री फडणवीस ने उन्हें उस समय पुलिस कमिश्नर बना दिया, जब राकेश मारिया शीना हत्याकांड की जांच बतौर पुलिस कमिश्नर बहुत बारीकी से कर रहे थे. मारिया को अचानक हटाने के बाद मीडिया और पुलिस में शक की सुइयां घूमने लगीं और कुछ दिनों में ही जावेद को मानना पड़ा कि वह इंद्राणी एवं पीटर मुखर्जी को अच्छी तरह से जानते हैं और वे उनकी ईद की दावत में आए थे.

अब इंद्राणी द्वारा आत्महत्या की कथित कोशिश से शक गहरा गया है कि कहीं कोई इंद्राणी को मारने की कोशिश तो नहीं कर रहा? इस सबके बीच जावेद का नाम सऊदी अरब में भारतीय राजदूत के पद की दौड़ में शामिल होना दाल में कुछ काला होने का इशारा कर रहा है. जावेद कुछ दिनों बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं. एक पुलिस अधिकारी को इतने महत्वपूर्ण देश में राजदूत बनाकर भेजने का विचार यह दर्शाता है कि उन्हें अच्छा पुरस्कार देने की कोशिश की गई है. लेकिन सवाल उठता है क्यों? भारतीय विदेश सेवा के किसी अधिकारी को न भेजना तय है, लेकिन देश में कई अच्छे मुस्लिम चेहरे हैं. हां, यह ज़रूर है कि मोदी सरकार उन्हें अपना नहीं मानती.

सवाल यह उठता है कि जावेद ने ऐसा क्या किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फणनवीस उन पर इतने फिदा हैं कि उन्होंने दिल्ली में उनका नाम इस पद के लिए चलवा दिया? कहा जा रहा है कि जावेद फणनवीस के क्षेत्र नागपुर से उन्हें जानते हैं. सऊदी अरब सबसे अधिक भारत को तेल बेचता है. मिडिल-ईस्ट में सबसे अधिक भारतीय वहां काम करते हैं. आतंकवाद के ़िखला़फ लड़ाई में सऊदी अरब ने भारत की काफी मदद की है और कई जेहादी तत्वों को उसने भारत को सौंपा है.

सूत्रों के अनुसार, भारतीय राजदूत के चयन पर आ़िखरी ़फैसला प्रधानमंत्री के इशारे पर होगा और इस चयन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अहम भूमिका मानी जा रही है. इसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की कहीं दूर-दूर तक दखलंदाज़ी नहीं है. नाम का चयन होने पर केवल उन्हें बता दिया जाएगा. विदेश सेवा के इतिहास में किसी कैबिनेट मंत्री का इतना अनादर कभी नहीं हुआ.

विदेश सेवा में 31 जुलाई तक तीन डिप्लोमेट्‌स के नाम तय होने थे. शिकागो में तैनात एक मुस्लिम अधिकारी ने मना कर दिया. वह अभी सऊदी अरब नहीं जाना चाहते. वैसे वह मिडिल-ईस्ट में काम कर चुके हैं. तब शुरुआत हुई कोई अच्छा मुस्लिम चेहरा तलाशने की, जो राजनीतिक या सामाजिक क्षेत्र में जाना-पहचाना जाता हो. विदेश सेवा से ही एक नाम उभरा, एनआरआई रियाज़ नकवी का. वह एक सेवानिवृत्त सीनियर टेक्नोकेट ऑफिसर हैं.

राजीव गांधी सरकार के समय देश में आईटी टेक्नोलॉजी लाने में उनका अहम योगदान रहा. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय उन्हें अमेरिका के सिलिकॉन वैली में प्रथम आईटी राजदूत बनाकर भेजा गया. यह अपने किस्म की पहली डिप्लोमेटिक पोस्ट थी, जिसका अमेरिका में भारतीय दूतावास से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन आईटी मिनिस्टर प्रमोद महाजन से मतभेद होने पर उन्होंने त्याग-पत्र दे दिया था. सुन्नी मुसलमान नकवी उत्तर प्रदेश के जाने-माने परिवार से संबंध रखते हैं.

उनके बड़े भाई ज़फर नकवी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सरकार में गृहमंत्री रहे और बाद में नेशनल माइनॉरिटीज कमीशन के चेयरमैन बने. यूपीए-2 में ज़फर लखीमपुर खीरी से लोकसभा चुनाव जीते, लेकिन रियाज़ नकवी ने अपने बड़े भाई के राजनीतिक क्षेत्र में दिलचस्पी नहीं ली. उन्होंने एक सरकारी अधिकारी के तौर पर लगन से काम किया. विदेश सेवा के उच्चाधिकारियों ने रियाज नकवी को सऊदी अरब भेजने में काफी रुचि दिखाई है.

भाजपा के राज्यसभा सदस्य एवं पत्रकार एमजे अकबर का नाम भी उनके संसद में आने से पहले चला. अकबर लंदन में भारतीय उच्चायोग में जाना चाहते थे, फिर उन्होंने सऊदी अरब में राजदूत पद के लिए सोचा और उसके बाद कतर में राजदूत बनने में दिलचस्पी दिखाई, लेकिन मोदी को लगा कि वह संसद में ही ठीक रहेंगे. अकबर अब मंत्री बनने के ख्वाब देख रहे हैं. सऊदी अरब में राजदूत बनाने के लिए भाजपा सांसद आरिफ मोहम्मद खान का भी नाम चला, लेकिन ज़्यादा दिनों तक नहीं.

एचडी देवगौड़ा सरकार में मंत्री रहे सीएम इब्राहिम का नाम भी सुझाया गया, लेकिन पीएमओ ने उसे फौरन काट दिया. इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी आसिफ इब्राहिम के नाम पर भी काफी ग़ौर हुआ है. यह नाम अभी भी सूची में है, लेकिन मोदी सरकार में एक वर्ग का मानना है कि आसिफ का बैकग्राउंड शायद सऊदी अरब में एक अच्छा संकेत न भेजे. आसिफ इब्राहिम भी वहां जाने में ज़्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं.

वह पीएमओ में स्पेशल सेके्रटरी-एंटी टेरर पद पर काम कर रहे हैं. कॉरपोरेट मंत्रालय में सचिव पद से सेवानिवृत्त प्रशासनिक सेवा के नावेद मसूद भी शार्टलिस्ट हुए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवंबर में विदेश यात्राओं में काफी व्यस्त होने वाले हैं. अभी बिहार विधानसभा चुनाव ने उनकी नींद उड़ा रखी है. दिसंबर में संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो जाएगा. लगता है, मोदी की सऊदी अरब एवं इजरायल की यात्राएं कुछ समय के लिए टल जाएं.

अगर ऐसा होता है, तो सऊदी अरब में भारतीय राजदूत के नाम का चयन भी टलेगा. हां, विदेश मंत्रालय के अधिकारी चुस्की लेते हुए पूछ रहे हैं कि नरेंद्र मोदी के दिमाग में अच्छे मुस्लिम चेहरों की क्यों कमी है? वे यह भी कहने से गुरेज नहीं करते कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भी कानों तक बात पहुंचनी चाहिए कि मक्का-मदीना की धरती पर भेजने के लिए एक मुस्लिम चेहरे की तलाश है.