लोकतंत्र में सच के खिलाफ यह किसका षड्‌यंत्र है

कहते हैं, पत्रकार जनता की आवाज होते हैं, लेकिन जब पत्रकार की आवाज को ही दबाने की कोशिश हो, यहां तक कि उसे जान से मारने की धमकी मिलने लगेगी तो तय मानिए कि लोकतंत्र का चौथा खंभा बस ढहने ही वाला है और किसी भी इमारत का एक खंभा ढह जाए, तो उस इमारत की हालत क्या होगी, इसका अन्दाजा आप खुद लगा सकते हैं.

पिछले कुछ समय से देश के भीतर तार्किक बातें करने वाले लोगों, सच कहने वाले पत्रकारों और सही आलोचना करने वाले लोगों को धमकियां मिल रही हैं. जान से मारने की धमकी दी जा रही है.

हालांकि, इसमें वैसे पत्रकार शामिल नहीं हैं, जो सरकार की नीतियों में कसीदे पढ़ते हैं. इसमें वैसे पत्रकार भी शामिल नहीं हैं, जो हवा के रुख के मुताबिक अपनी पीठ फेरने में उस्ताद हैं और जो येन-केन-प्रकारेण सत्ता की गलियारों में घुसपैठ करने में माहिर हैं. इन धमकियों के शिकार बस ऐसे पत्रकार हो रहे हैं, जो सरकार की नीतियों, उन्मादी संगठनों के कुकृत्यों के खिलाफ बोलते या लिखते हैं.

ताजा उदाहरण मुम्बई का है. गोवा के हिन्दुवादी सनातन संस्था के सदस्य समीर की गिरफ्तारी के बाद उसके कॉल रिकॉर्ड से कुछ जानकारी हासिल हुई. इस जानकारी से पता चला कि लोकमत के पूर्व संपादक निखिल वागले की जान को खतरा है. इसी के साथ एक और मराठी पत्रकार श्याम सुंदर सोनार की जान के खतरे को लेकर भी खबरें आईं.

महाराष्ट्र में समाजवादी गोविंद पनसारे की हत्या के सिलसिले में सनातन संस्था के एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी के बाद निखिल वागले को लगातार धमकियां मिल रही हैं.

वागले कहते हैं कि चार साल पहले उन्हें सनातन संस्था की ओर से धमकियां मिलीं थीं. सनातन संस्था से अभय वरतक उस कार्यक्रम के बीच में ही उठकर चल दिए थे, जिसे वागले ने आयोजित किया था. इस कार्यक्रम मेंे तब नरेन्द्र डाभोलकर भी शामिल थे. इस कार्यक्रम के दौरान पैनल और वागले के बीच काफी तीखी बहस हुई थी.

इसके बाद, सनातन संस्था ने निखिल वागले का फोन नंबर सार्वजनिक कर अपने समर्थकों से निखिल वागले का विरोध करने की अपील की थी. इस संस्था की सनातन प्रभात पब्लिकेशन में वागले को चेतावनी देते हुए एक लेख भी छापा गया. वागले के मुताबिक, कुछ ही दिन पहले मुम्बई के पुलिसकर्मी उनके पास आए और कहने लगे कि उन्हें सुरक्षा देने का निर्णय लिया गया है. वागले का कहना है कि मैं एक पत्रकार हूं. मैं सुरक्षा के साथ भला कैसे काम कर सकता हूं.

सबसे ब़डी बात यह है कि सिर्फ मेरी ही नहीं, बल्कि सभी नागरिकों की सुरक्षा का दायित्व सरकार का है. उन्होंने कहा कि उन्हें सनातन संस्था की ओर से ट्विटर के जरिए और संस्था के मुखपत्र सनातन प्रभात के जरिए भी धमकी दी गई है. मराठी अखबार प्रहार के पत्रकार श्याम सुंदर सोनार ने भी गोविंद पनसारे की हत्या को लेकर काफी कुछ लिखा है और अपने परिवार के लिए पुलिस को पत्र लिखकर सिक्योरिटी की मांग की है.

सनातन संस्था से जुड़े समीर गायकवाड़ को पानसारे की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है. कोल्हापुर पुलिस ने गायकवाड़ से पूछताछ की है और इसी के बाद से यह जानकारी हासिल हुई कि इन लोगों के निशाने पर अब निखिल वागले जैसे पत्रकार भी हैं.

16 फरवरी, 2015 को 82 वर्षीय पनसारे की मोटरसाइकिल सवार लोगों ने उनके घर के पास कोल्हापुर में गोली मारकर हत्या कर दी थी. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पनसारे की मौत के पीछे संदिग्ध कट्टरपंथी संगठन सनातन संस्था के सदस्य समीर गायकवाड़ को कथित तौर पर फोन पर यह कहते हुए सुना गया कि पनसारे के बाद अगला नंबर वागले का है. मीडिया को चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन अब तक पत्रकार पूरी तरह से स्वतंत्रत नहीं हो पाए.

खबर के नाम पर राजनेताओं द्वारा पत्रकारों पर बनाया जाने वाला दबाव, कोर्ट केस, मानहानि के केस के अलावा अब तो सीधे उन्मादी संगठनों द्वारा पत्रकारों को जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है. समाज में दबे-कुचले लोगों की आवाज उठाने में पत्रकार अहम रोल निभाते हैं, लेकिन पत्रकारों की आवाज को ही दबाने की कोशिश की जा रही है.