मगध निर्दलीय और छोटे दल हमेशा देते रहे चुनौती

peess-partyछोटे-छोटे राजनीतिक दल एवं निर्दलीय प्रत्याशी जीत भले न सके हों, लेकिन वे राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के प्रत्याशियों के लिए चुनाव में चुनौती बनकर ज़रूर सामने आते हैं. हालांकि, कभी-कभी उन्हें सफलता भी मिल जाती है. मगध में 26 विधानसभा क्षेत्र हैं. यहां 2010 के चुनाव में औरंगाबाद के ओबरा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी ओम प्रकाश सिंह बाजी मारने में सफल रहे थे. वहीं दूसरी ओर इसी ज़िले के गोह विधानसभा क्षेत्र से जदयू प्रत्याशी डॉ. रणविजय कुमार महज कुछ सौ वोटों की बदौलत जीत का मुंह देख सके थे. उन्हें 47,378 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी राजद प्रत्याशी राम अयोध्या प्रसाद यादव को 46,684 वोट मिले.

यहां निर्दलीय राधे श्याम यादव ने 1,027 और बृजनंदन सिंह यादव ने 2,093 वोट हासिल कर राजद प्रत्याशी की जीत को हार में तब्दील कर दिया. दोनों को मिले वोट राजद के थे. इसी तरह गया ज़िले के बेलागंज विधानसभा क्षेत्र से राजद प्रत्याशी डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव 53,079 वोट पाकर जीत हासिल की थी, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी जदयू प्रत्याशी मोहम्मद अहमद को 48,441 वोट मिले. यहां अनाम पार्टी के प्रत्याशी बब्लू रविदास ने तीर-धनुष चुनाव चिन्ह के सहारे 8,942 वोटों पर कब्जा जमाया था. उक्त वोट जदयू के थे. वजीरगंज विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी पारस नाथ सिंह ने 5,919 और कमलेश कुमार वर्मा ने 13,693 वोट हासिल कर भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह की जीत का अंतर कम कर दिया था.

इस बार भी छोटे-छोटे दल एवं निर्दलीय प्रत्याशी मगध में अपने-अपने चिन्हित विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय होकर राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के प्रत्याशियों को परेशानी में डालने की तैयारी में जुट गए हैं. मगध में सपा, बसपा, माकपा एवं फारवर्ड ब्लॉॅक जैसे दल भी स़िर्फ लोगों के बीच चर्चा में बने रहने के लिए चुनाव लड़ते हैं. इनके अलावा इस बार कुछ अन्य राजनीतिक दल भी भाजपा, जदयू, राजद एवं कांग्रेस जैसे दलों के सामने चुनौती पेश करने के मूड में हैं, जैसे भारत भ्रष्टाचार मिटाओ पार्टी, राजनैतिक विकल्प पार्टी एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी. भारत भ्रष्टाचार मिटाओ पार्टी और राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी गया ज़िले में अधिक सक्रिय हैं, वहीं राजनैतिक विकल्प पार्टी जहानाबाद ज़िले में.

भारत भ्रष्टाचार मिटाओ पार्टी ने गया में लगातार कार्यक्रम करके और नियमित रूप से घर-घर जाकर मतदाताओं को जागरूक करने का अभियान चला रखा है, जिससे अन्य बड़े दलों के संभावित प्रत्याशियों में हड़कंप मच गया है. इस पार्टी के घोषित प्रत्याशी रंजीत कश्यप भले न जीतें, लेकिन कहीं वह बड़ी संख्या में वोट काट ले गए, तो किसी की संभावित जीत एक बार हार में बदल सकती है. इसी तरह राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी का प्रचार कार्यक्रम चल रहा है. इसके अलावा विभिन्न बड़े एवं क्षेत्रीय दलों के टिकट से वंचित नेता भी बागी होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपने दल के प्रत्याशियों को कड़ी चुनौती दे सकते हैं.

मगध के जिन विधानसभा क्षेत्रों में बागी प्रत्याशियों के मैदान में उतरने की आशंका है, उनमें गया ज़िले के टिकारी, गुरुआ, बेलागंज, अतरी, वजीरगंंज एवं शेरघाटी, औरंगाबाद ज़िले के ओवरा, गोह, रफीगंज एवं नवीनगर, जहानाबाद ज़िले के जहानाबाद, अरवल एवं कुर्था और नवादा ज़िले के वारिसअलीगंज एवं गोबिंदपुर प्रमुख हैं.

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