छा गए मिर्ज़ा साहब, मसाला बिखेर गए अपनी खुशबू

29 सितंबर को फिल्म होगया दिमाग का दही की टीम सबसे पहले माय एफएम रेडियो के दफ्तर पहुंची. वहां के कर्मचारियों ने ओम पुरी का स्वागत ज़ोरदार ठहाकों के साथ किया. ओम पुरी ने भी इस अनोखे स्वागत का जबरदस्त मजा लिया और बताया कि हंसी से बेहतर कोई इलाज (थेरेपी) नहीं है. उन्होंने माय एफएम के आरजे से बात करते हुए कहा कि होगया दिमाग का दही पूरी तरह से पारिवारिक फिल्म है, जिसे हर कोई देख सकता है और यह द्वइर्थी संवादों से मुक्त फिल्म है. इस फिल्म के डायलाग जबरदस्त हैं, जो आपको हंसाते हैं और एक संदेश भी देते हैं. अपने कैरेक्टर के नाम यानी मिर्जा किशन सिंह जोसेफ के बारे में उन्होंने बताया कि यह एक ऐसा आदमी है, जो सही मायने में धर्मनिरपेक्ष है और सभी धर्मों में विश्वास रखता है. फिल्म की निर्देशक फौजिया अर्शी ने कहा कि यह डेली मल्टीमीडिया लिमिटेड की तीसरी फिल्म है. एक फैट्‌सो रिलीज हो चुकी है, दूसरी भैय्याजी सुपरहिट है, जो निर्माणाधीन है और तीसरी होगया दिमाग का दही 16 अक्टूबर को रिलीज हो रही है.
इसके बाद यह टीम रेड एफएम के दफ्तर पहुंची, जहां आरजे मीनाक्षी ने ओम पुरी से पहला सवाल फिल्म के टाइटल को लेकर किया. लेकिन, ओम पुरी ने जो जवाब दिया, वह अद्भुत था. उन्होंने बताया कि दुनिया का सबसे पहला शैंपू दही ही है. उन्होंने तो बाकायदा आरजे मीनाक्षी को भी शैंपू की जगह दही का इस्तेमाल करने की सलाह दी और दावा किया कि इससे बेहतर शैंपू आपको कहीं नहीं मिलेगा तथा ठीक इसी तरह होगया दिमाग का दही से बेहतर कॉमेडी का मजा आपको कहीं नहीं मिलेगा. राजपाल यादव ने अपने कैरेक्टर के बारे में बताया कि जैसे मसाला भोजन का स्वाद बढ़ाता है, उसी तरह उनका कैरेक्टर भी इस फिल्म का स्वाद बढ़ा रहा है. यहीं पर फिल्म की निर्देशक फौजिया अर्शी ने यह खुलासा किया कि कैसे राजपाल यादव ने फिल्म के हीरो दानिश भट्ट के कसरती बदन को देखते हुए उनका नाम बदन बिल्डर रख दिया था. फौजिया अर्शी, जो निर्देशक होने के साथ-साथ इस फिल्म की संगीतकार भी हैं, ने आरजे मीनाक्षी के अनुरोध पर इसके एक गाने की दो पंक्तियां भी सुनाईं.
इसके बाद यह टीम संसद भवन के पास स्थित आकाशवाणी भवन पहुंची, जहां आल इंडिया रेडियो के कर्मचारियों के बीच राजपाल यादव और ओम पुरी के साथ फोटो खिंचवाने की होड़-सी मच गई. सैकड़ों लोगों के साथ फोटो खिंचवाने के बाद आरजे प्रीती मोहन ने राजपाल यादव का इंटरव्यू किया. राजपाल यादव ने बताया कि उन्होंने पहली बार किसी महिला निर्देशक के साथ काम किया है और उनका अनुभव शानदार रहा. वहीं आरजे सुजाता ने ओमपुरी का इंटरव्यू किया. ओम पुरी ने अपने फिल्मी सफर और होगया दिमाग का दही के बारे में विस्तार से बातचीत की. इसके बाद टीम रेडियो सिटी और रेडियो मंत्रा पहुंची, जहां एक
बार फिर से फिल्म निर्देशक फौजिया अर्शी, ओम पुरी और राजपाल यादव रेडियो के श्रोताओं से रू-ब-रू हुए
और अपने अनुभव साझा किए.
इसके बाद यह टीम नोएडा स्थित दैनिक हिंदुस्तान के दफ्तर पहुंची. यहां अ़खबार के वरिष्ठ संपादक राजीव कटारा एवं वरिष्ठ पत्रकार जयंती रंगनाथन ने ओम पुरी, राजपाल यादव और फौजिया अर्शी से फिल्म से जुड़े कुछ गंभीर सवाल किए, जिनका इस टीम ने गंभीरता से जवाब दिया. ओम पुरी ने सा़फ-सा़फ बताया कि फिल्म के दो उद्देश्य होते हैं. एक तो मनोरंजन करना और दूसरा समाज की समस्याओं को सामने रखना. उन्होंने बताया कि होेगया दिमाग का दही एक विशुद्ध मनोरंजक फिल्म तो है ही, लेकिन इसके डायलाग ऐसे हैं, जिनमें कुछ संदेश भी छिपे हैं. ओम पुरी ने यह भी माना कि बेहतर कॉमेडी वही है, जो किसी व्यक्ति का मज़ाक नहीं उड़ाती, बल्कि परिस्थितिजन्य हास्य
खुद-ब-खुद पैदा कर देती है और यही फिल्म होगया दिमाग का दही की खासियत है. फौजिया अर्शी ने बताया कि क़रीब 1,200 थिएटरों में यह फिल्म एक साथ 16 अक्टूबर को रिलीज हो रही है.
अमर उजाला का कॉन्फ्रेंस रूम वरिष्ठ पत्रकारों और कर्मचारियों से खचाखच भरा हुआ था. यहां पर फिल्म से इतर अन्य मसलों पर भी संवाद हुआ. मसलन, एनएसडी, एफटीटीआई में चल रही हड़ताल जैसे मुद्दे पर भी ओम पुरी ने खुलकर बातचीत की. जब उनसे यह पूछा गया कि क्या एक नए निर्देशक के साथ काम करते हुए उन्होंने फिल्म निर्माण में कोई दखल या सुझाव दिया? इस सवाल पर ओम पुरी का कहना था कि फौजिया अर्शी बहुआयामी प्रतिभा की धनी हैं, इसलिए मुझे कभी दखल देने की बात तो दूर, सुझाव देने की भी ज़रूरत नहीं पड़ी. यह पूछे जाने पर कि 16 अक्टूबर को ही रिलीज हो रही अन्य फिल्मों से आपको कंप्टीशन मिल सकता है? इस सवाल के जवाब में फौजिया अर्शी ने कहा कि यह तो अच्छी बात है. कंप्टीशन होना ही चाहिए. फिल्म होगया दिमाग का दही की टीम ने दैनिक पंजाब केसरी-नवोदय टाइम्स के साथ भी संवाद किया, जहां ओम पुरी एवं निर्देशक फौजिया अर्शी ने फिल्म से संबंधित विभिन्न सवालों के जवाब बड़ी संजीदगी के साथ दिए.
30 सितंबर को यानी दूसरे दिन यह टीम सबसे पहले एबीपी न्यूज पहुंची. ओम पुरी बाकायदा अपने कैरेक्टर के अनुरूप ढले नज़र आए. उन्होंने मिर्जा किशन सिंह जोसेफ की पोशाक टोपी, धोती और क्रास पहन रखा था. उनका यह लुक हर किसी को अपनी तऱफ आकर्षित कर रहा था. 30 सितंबर को सुबह 9 बजे से लेकर रात 10 बजे तक विभिन्न न्यूज चैनलों पर इंटरव्यू का सिलसिला चलता रहा. एबीपी न्यूज के बाद, रेडियो मिर्ची, ई24, जी न्यूज, जी बिजनेस, आईबीएन7, आजतक जैसे चैनलों पर फिल्म प्रमोशन का कार्यक्रम देर शाम तक चलता रहा. इसके बाद गेस्ट हाउस, जहां टीम ठहरी थी, वहां भी देर रात तक जैन टीवी, सहारा न्यूज, एएनआई, दिल्ली प्रेस के पत्रकार ओम पुरी, राजपाल यादव और फौजिया अर्शी के इंटरव्यू लेते रहे. इन दो दिनों के दौरान क़रीब-क़रीब सभी राष्ट्रीय न्यूज चैनलों, अ़खबारों और रेडियो के दफ्तरों में यह टीम फिल्म प्रमोशन के लिए पहुंची, जहां न स़िर्फ पत्रकार, बल्कि वहां मौजूद आम लोग भी ओम पुरी और राजपाल यादव के साथ फोटो खिंचवाने, उनसे बात करने और फिल्म के बारे में जानने को उत्सुक नज़र आए. प

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