रूहानी कव्वाली मौला-मौला

kailash khairप्रश्न- फिल्म ‘हो गया दिमाग का दही’ में आपने कव्वाली ‘मौला-मौला’ को आवाज़ दी है. उसे लेकर आपका अनुभव कैसा रहा?
जवाब- यह अनुभव अद्भुत और अलौकिक रहा क्योंकि आज के युग में काफी ज्यादा गहमा-गहमी और उच्चश्रृंखलता है. लेखन में गहराई का अभाव है. गायकी के भी स्तर में थोड़ी गिरावट आई है. यह कार्य अच्छे संकलन से हुआ है. इसमें अल्लामा इक़बाल, अमीर खुसरो और कृष्ण बिहारी नूर जैसे बड़े शायरों की शायरी है. इन्हें फौज़िया अर्शी ने संकलित किया है. फौज़िया अर्शी को ईश्वर ने परमात्मा ने कई गुणों से लाभांवित किया है. वे फिल्म की निर्देशक भी हैं. और जब अच्छे काम का बुलावा आता है, तो हम उससे जुड़ जाते हैं.
प्रश्न- हाल में बजरंगी भाईजान फिल्म आई थी जो सुपरहिट रही. उसमें अदनान सामी ने क़व्वाली गाई है और अब इस फिल्म में आप की क़व्वाली है. क्या फिर से कव्वाली का ट्रेंड शुरू हो गया है?
जवाब- देखिए, सिर्फ ट्रेंड कायम नहीं होता. दरअसल बीच-बीच में अच्छी चीजें फिर से आ जाती है. बाहुबली में हमारे शिव तांडव की विश्व स्तर पर चर्चा हुई. होता क्या है कि हमारे इर्द-गिर्द ही कोहिनूर घूमते हैं. तेरी काया नगर में राम-राम, तू जंगल-जंगल क्या ढूंढे/ तेरे रोम-रोम में राम-राम, तू पत्थर में सर क्या मारे.
प्रश्न- जैसी रूहानी मौशिकी के लिए आप जाने जाते हैं, मौला मौला को उसके कितने नज़दीक पाते हैं?
जवाब- इसमें अच्छे शायरों के लेखन का संकलन है. आज के युग में अच्छी चीजें कम बनती हैं. इसका शुमार अच्छी चीजों में आएगा.
सवाल- हमारी जानकारी में फौज़िया अर्शी पहली बार संगीत दे रही हैं. संगीतकार कैसी लगीं वे आपको?
जवाब- पहला कार्य बड़ा जुनूनी होता है. जब हमारी पहली अलबम कैलाशा आई थी. तेरी दीवानी उसी का गाना है. इश्क जुनून जब हद से बढ़ जाये हंसते-हंसते आशिक सूली चढ़ जाये, इश्क का जादू सर चढ़ कर बोले, खूब लगा लो पहरे रस्ते रब खोले. तो फौजिया ने भी अपने पहले काम को जुनूनी तरीके से पूरा किया है.
फौज़िया जी की आवाज भी है उस क़व्वाली में आपके साथ है गायिका के तौर पर आप उन्हें कैसा पाते हैं?
बहुत बहुत प्यारा है अभी-अभी देखिये सब अच्छा है. मेरे दाता ने चाहा तो अब इस को थोड़ा लोग सुनें. गाना आगे जाये और फिल्म लोगों द्वारा देखी जाये. अब तो केवल उतने की जरूरत है. यही गाना तार देगा लोगों को अगर दिल से सुन लिया तो.
यह कव्वाली ट्रेंड भी कर रही है यहां दिल्ली में बहुत जगहों पर इसे सुना भी जा रहा है एफएम पर, टीवी चैनलों हर जगह, इसे लेकर आपको कैसी प्रतिक्रिया मिल रही है?
अच्छी मिल रही है. सब लोग तारीफ कर रहे हैं. खुशी की बात है कि अच्छी चीजों की तारीफ हो वरना बुराइयों ने इतना घेर रखा है माहौल को, बाजार में घटिया माल इतना ऊतर आया है की अच्छे माल की कोई पहचान ही नहीं रही, थैंक गॉड अच्छी चीजें भी बाजार में हैं उनकी भी तारीफ हो रही ह.ै उनके भी चाहने वाले हैं इस दुनिया में यानी दुनिया में पृथ्वी वीरों से खाली अभी नहीं है. यहां तक दिल्ली की बात है दिल्ली में तो संगीत के चाहने वाले रसिक बहुत पाये जाते हैं. और वहां मोहब्बत करने वाले, संगीत से प्रेम करने वाले बहुत लोग हैं. चाहे हमारा अकड़ बम बम बम बम लहरी हो या बिस्मिल्लाह हो या अब मौला मौला मौला मौला रे जिसके बार में आप बात कर रहे हैं सभी को लोग बहुत चाहते हैं.