विशुद्ध मनोरंजक फिल्म है होगया दिमाग़ का दहीः ओमपुरी

Om-Puriहिंदी फिल्मों के बेहतरीन कलाकार ओमपुरी अपनी फिल्म होगया दिमाग़ का दही के प्रमोशन के लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे, तो यहीं के होकर रह गये. तबीयत खराब होने के बावजूद ओमपुरी यहां दो दिन रुके और जबरदस्त तरीके से फिल्म का प्रचार किया. इस दौरान पूरा शहर उनका दीवाना हो गया. उनसे मिलने, उनके साथ सेल्फी खिंचवाने के लिए लोग जगह-जगह पहुंचते रहे. लोगों से मिलने का उनका तरीका इतना सामान्य था कि वे शहर की मशहूर पान-दुकान बनारसी पान भंडार गए और वहां पान का मज़ा लेते हुए लोगों के साथ फिल्मों और थियेटर के बारे में चर्चा की.

रायपुर में उनके प्रचार की बदौलत फिल्म होगया दिमाग़ का दही की चर्चा हर ज़ुबान पर है, हर किसी को बेसब्री से 16 अक्टूबर का इंतजार है जब फिल्म रिलीज होगी. ओमपुरी ने फिल्म को लेकर रायपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने फिल्म और अपने रोल के बारे में बताया. उन्होंने पहली ही लाइन में यह साफ कर दिया कि फिल्म विशुद्ध रुप से मनोरंजक है, इसमें सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन है, इस फिल्म में कोई संदेश नहीं है न ही द्वि-अर्थी संवाद हैं.

लेकिन फिल्म हंस-हंसाकर और गुदगुदाकर लोगों की सेहत जरूर सुधार सुधारेगी. ओमपुरी ने बताया कि यह फिल्म हेराफेरी, मालामाल वीकली जैसी उत्कृष्ठ श्रेणी की कॉमेडी फिल्मों की श्रृंखला की अगली फिल्म है. उन्होंने बताया कि यह फिल्म एक साफ सुथरी कॉमेडी फिल्म है. फिल्म 16 अक्टूबर को रिलीज हो रही है. फिल्म की निर्देशक फौज़िया अर्शी मध्यप्रदेश के भोपाल की रहने वाली हैं. दही का तड़का पूरी फिल्म में देखने को मिलेग, जो दर्शकों को पूरे समय गुदगुदाते रहेगा.

उन्होंने बताया कि फिल्म के निर्माता संतोष भारतीय हैं जो कि एक पत्रकार और पूर्व सांसद हैं. ओमपुरी ने लोगों को फिल्म की बिगड़ी हुई शायरी सुनाई तो सभी हंस-हंसकर लोटपोट हो गए. अपनी आने वाली फिल्म होगया दिमाग़ का दही में गालिब के शेर के साथ अटपटे प्रयोग को सुनाया तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पर दम निकले, मेले से आकर देखा तो दो बच्चे कम निकले.

इस फिल्म में ओमपुरी मिर्ज़ा किशन सिंह जोसेफ की भूमिका में हैं. फिल्म में वह एक ऐसे व्यक्ति का किरदार अदा कर रहे हैं जो चार धर्मों को मानता है उनका नाम भी चार धर्मों के अनुसार मिर्ज़ा किशन सिंह जोसेफ है. फिल्म के उनके किरदार को काफी पसंद किया जा रहा है उनकी वेशभूषा भी बेहद अनोखी है. अपने फिल्मी करियर में वह पहली बार किसी गेटअप में नज़र आयेंगे. फिल्म के ट्रेलर और गानों को यू-ट्यूब में अब तक लाखों लोग देख चुके हैं और सराह रहे हैं.

ओमपुरी खुद भी फिल्म होगया दिमाग़ का दही को लेकर काफी उत्साहित हैं. वह अपने इस अनोखे किरदार को मज़ेदार बताते हैं. उन्होंने पत्रकारों से बताया कि उन्हें मिर्ज़ा किशन सिंह जोसेफ का किरदार अदा करते हुए काफी मजा आया. ओमपुरी रायपुर में सिर्फ मीडिया से ही मुख़ातिब नहीं हुए, बल्कि रात को कुछ पत्रकारों और रंग-कर्मियों के साथ शहर के बीचों-बीच स्थित बनारसी पान दुकान पहुंचे. वहां उन्होंने पान का मजा लिया और प्रशंसकों का अभिवादन स्वीकार किया.

पान की दुकान पर अपने बीच प्रसिद्ध अभिनेता को खड़ा देकर प्रशंसक फूले नहीं समा रहे थे. लोग उन्हें निहार रहे थे और साथ में सेल्फी ले रहे थे. यहां उन्होंने पत्रकारों और रंगकर्मियों से सिनेमा और थिएटर पर चर्चा की. इस दौरान उन्होंने थियेटर की बदहाली पर चिंता जाहिर की. मीडिया से मुखातिब होते हुए ओमपुरी ने अपनी निजी जिन्दगी से लेकर हर विषय पर बात की. फिल्म जगत के बारे में बात करते हुए उन्होंने स्टार पुत्रों के बारे में भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि जैसे गुब्बारे वाला गुब्बारे को दुकान में सजाता है, उसी तरह एक्टर्स ने बॉलीवुड में अपने बच्चों की दुकानें लगा रखी हैं. सभी आजकल दुकान लगा रहे हैं.

लेकिन बिना प्रतिभा के एक्टर चलेगा नहीं. इरफान ख़ान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी और एनएसडी से निकले बच्चों से उन्हें काफी उम्मीदें हैं.ओमपुरी ने अपने बचपन में चाय बेची है. जब उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समानता पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मोदी मुझसे अमीर थे. वह चाय की दुकान के मालिक थे. मैं तो चाय की दुकान में गिलास और कप धोता था. सरकारी स्कूल में पढ़ता था, लेकिन वह संघर्ष नहीं था, वह एक दौर था. बहरहाल ओमपुरी दो दिन रायपुर में गुजारकर काफी खुश दिखे और सभी को फिल्म होगया दिमाग़ का दही देखने का सबको न्यौता दिया.

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