ग्रामीण भारत में आधुनिक शिक्षा की अनूठी पहल

Morarka-Foundationशेखावाटी
शिक्षा समाज की नींव होती है, शिक्षा एक मजबूत एवं समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करती है. शिक्षा मानव के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है, जिससे वह एक सभ्य नागरिक बनता है. आज हम भले ही अंतरिक्ष और चांद पर घर बसाने की बात करते हों, लेकिन आज भी हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर काफी पिछड़ा हुआ है. अत्याधुनिक तकनीक, नए पाठ्यक्रम, नई सोच, संचार क्रांति, आधुनिक शिक्षा और अवसर प्रदान करने वाले संसाधन ग्रामीण भारत से कोसों दूर हैं.

लेकिन, देश में कुछ ऐसी संस्थाएं भी हैं, जो ग्रामीण भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए बिना किसी स्वार्थ के कार्य कर रही हैं, जैसे कि मोरारका फाउंडेशन.क़रीब 20 साल पहले भारत में कंप्यूटर युग का सपना देखा गया था, जो कुछ हद तक पूरा ज़रूर हुआ है, लेकिन देश के हर नागरिक के लिए यह सपना पूरा होने में अभी कुछ और वक्त लगेगा. जहां देश की शहरी आबादी का बड़ा हिस्सा कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहा है, वहीं ग्रामीण इलाके अब भी इसकी पहुंच से दूर हैं.

मोरारका फाउंडेशन राजस्थान के झुंझुनू ज़िले में एक नई उम्मीद की किरण लेकर आया है. झुंझुनू में दूर-दूर तक नज़र आते लहलहाते खेत, चरते पशु, रंग-बिरंगे पक्षी, कच्ची पगडंडियों के किनारे बने मिट्टी एवं घास-फूंस के छोटे-बड़े घर, सौंधी खुशबू वाली आबोहवा और प्रकृति के प्रेम से सराबोर वातावरण में मोरारका फाउंडेशन ने प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, ऑनलाइन शिक्षा से लेकर ऑफलाइन शिक्षा और ई-पुस्तकालय शिक्षा के क्षेत्र में कई अभूतपूर्व व क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं, जिससे शिक्षा का क्षेत्र व्यापक होने के साथ-साथ बहुआयामी हो गया है.

फाउंडेशन की ऑनलाइन शिक्षा द्वारा विद्यार्थियों ने बोर्ड मेरिट, आईआईटी एवं एनआईआईटी में चयनित होकर सफलता की एक नई कहानी लिखी है. मोरारका फाउंडेशन शेखावाटी के ग्रामीण अंचल के स्कूलों में ऑनलाइन कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराने वाला पहला केंद्र बन गया है. मोरारका फाउंडेशन की ओर से किसानों, महिलाओं, लड़कियों एवं विकलांगों की बेहतरी के लिए अलग-अलग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. फाउंडेशन गांवों की मूलभूत आवश्यकताओं को प्राथमिकता के साथ पूरा करता रहा है. अर्द्ध रेतीली ज़मीन पर मोरारका फाउंडेशन के निर्देशन में विकास की बहती धारा सा़फ देखी जा सकती है.

मोरारका फाउंडेशन का उद्देश्य विद्यार्थियों के व्यक्तिगत अनुभव, अभ्यास एवं ज्ञान को मजबूत बनाना है. ऑनलाइन शिक्षा अनिवार्य रूप से कौशल और ज्ञान का कंप्यूटर एवं नेटवर्क समर्थित अंतरण है. विद्यार्थी शारीरिक रूप से कक्षाओं में भाग लेने के लिए किसी विशेष दिन/समय के अधीन नहीं होते. वे अपनी सुविधानुसार शिक्षा सत्रों को कुछ देर के लिए रोक भी सकते हैं. सभी ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के लिए उच्च प्रौद्योगिकी की आवश्यकता नहीं होती.

इसके लिए आम तौर पर केवल बुनियादी इंटरनेट उपयोग, ऑडियो-वीडियो की जानकारी काफी है. इस्तेमाल की जाने वाली प्रौद्योगिकी के आधार पर छात्र काम के वक्त भी अपना पाठ्यक्रम शुरू कर सकते हैं और उसे किसी दूसरे कंप्यूटर पर अपने घर में भी पूरा कर सकते हैं. विद्यार्थियों में आवश्यक डिजिटल साक्षरता कौशल की मौजूदगी सुनिश्चित करना और क्षमताएं विकसित करना कार्यक्रम का खास उद्देश्य है. आज मोरारका फाउंडेशन के प्रयासों से झुंझुनू में ऑनलाइन शिक्षा तेजी से बढ़ रही है.

फाउंडेशन ने एक और करिश्मा कर दिखाया है. मोरारका फाउंडेशन ने नवलगढ़ में 21वीं सदी का पहला ई-पुस्तकालय खोला, जहां उच्च गुणवत्ता वाली मशीनों एवं हाई स्पीड इंटरनेट द्वारा संसार भर की सूचनाएं एक ही क्लिक पर उपलब्ध हैं. इस ई-पुस्तकालय में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को डॉक्युमेंट्री फिल्मों द्वारा आधुनिक विश्व की तमाम जानकारियां दी जाती हैं. बंगलुरू, दिल्ली और मुंबई आज आईटी के हब माने जाते हैं, लेकिन अब नवलगढ़ के लोगों को भी आईटी का ज्ञान मिल रहा है.

मोरारका फाउंडेशन के प्रयासों से प्रबंधन एवं औद्योगिक क्षेत्र में रोज़गार के लिए विद्यार्थियों और क्षेत्र में कबाड़ के उपेक्षित व्यवसाय से जुड़े युवाओं के लिए एक नई राह खुली है. आधुनिकता की अंधी दौड़ और नित्य नए गैजेट के बाज़ार में आने के कारण आज हर घर में सबसे ज़्यादा कबाड़ इलेक्ट्रॉनिक सामान का होने लगा है. फाउंडेशन की पहल पर नवलगढ़ के न्यू इंडियन आईटीआई कॉलेज में क्यूर इंडिया एंड जीरो वेस्टेज ने विद्यार्थियों को ई-वेस्ट कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बारे में जानकारी दी.

इस कार्यक्रम के तहत सभी विद्यार्थियों को प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट का संरक्षण करने और उससे रा़ेजगार हासिल करने के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया गया.

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