किसानों के लिए वरदान है

हमारे देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है. अक्सर यह देखा जाता है कि किसान कम मेहनत करके हाईब्रिड बीजों के सहारे ज़्यादा से ज़्यादा पैदावार लेने की कोशिश में लगे रहते हैं, लेकिन जब वे असफल हो जाते हैं, तो किस्मत पर दोष मढ़ने लगते हैं. आधुनिक युग की चकाचौंध में वे यह भूल जाते हैं कि देशी बीजों से हासिल पैदावार उच्च गुणवत्ता वाली होती है और हाईब्रिड बीजों के इस्तेमाल से ऐसा संभव नहीं हो पाता. रासायनिक खाद, हाईब्रिड बीजों एवं कीटनाशक का लगातार इस्तेमाल करने से फसलें बर्बाद हो जाती हैं. लेकिन कहते हैं कि जहां चाह, वहीं राह. अगर इंसान चाहे, तो वह कुछ भी कर सकता है. किसानों को ऐसा ही कुछ करने की प्रेरणा दी है, मोरारका फाउंडेशन ने.
मोरारका फाउंडेशन ने पिछले 15 वर्षों में जैविक खेती को लेकर कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं. जैविक खेती के विकास के मद्देनज़र और उसकी उपयोगिता समझते हुए फाउंडेशन ने राजस्थान के शेखावाटी समेत देश के कई हिस्सों में काम करना शुरू किया. फाउंडेशन ने जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसानों के मन में उम्मीद की एक नई किरण को जन्म दिया. इस तरह की खेती में सबसे ज़रूरी होते हैं जैविक बीज. इन बीजों को पैदा करना बहुत कठिन कार्य है. इन्हें वही किसान पैदा कर सकता है, जिसमें कुछ नया करने का जुनून हो. ऐसे ही एक किसान हैं, नवलगढ़ के गिरधारी लाल, जो पेशे से सरकारी कर्मचारी हैं, लेकिन सही मायनों में उनका मन खेती में ही लगता था. उनके परिवार के पास 1.6 हेक्टेयर भूमि है. वह आठवीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान ही परिवार के कृषि कार्य में हाथ बंटाने लगे. बाद में वह बिजली विभाग में नौकरी पा गए. गिरधारी लाल ने बिजली का कनेक्शन लेकर सिंचित खेती अपनाई. 2009 में गिरधारी लाल ने मोरारका फाउंडेशन में अपना पंजीयन कराया और जैविक खेती करने का तकनीकी ज्ञान हासिल किया.
गिरधारी लाल ने अपने फॉर्म में पहला बदलाव जैविक आदान बनाकर किया और आज वह हर किस्म का जैविक आदान अपने फॉर्म पर बना लेते हैं. इन आदानों के प्रयोग से फसलों में पानी की खपत कम हो जाती है. गिरधारी लाल की सफलता देखकर मोरारका फाउंडेशन ने उन्हें एवं अन्य किसानों को मशीन द्वारा फॉर्म स्थल पर ही ग्रेडिंग करके अच्छे बीजों का चुनाव करने की सलाह दी. इसके बाद गिरधारी लाल ने नवलगढ़ शहर में ग्रेडिंग मशीन लगाई, जिससे आसपास के लोग अपने खाद्यान्नों की भी गे्रडिंग कराने लगे. फाउंडेशन ने देशी बीजों की ग्रेडिंग करने, बीज उगाने की क्षमता बढ़ाने और कम बीजों में अधिक क्षेत्रफल की बुवाई में किसानों को सहयोग देना शुरू किया. गिरधारी लाल से प्रेरित होकर नवलगढ़ के अन्य किसान भी मोरारका फाउंडेशन से जुड़ने और जैविक खेती की नई तकनीक सीखकर कुछ नया करने के बारे में सोचने लगे. उन्होंने अपनी सोच फाउंडेशन के सामने रखी और विचार-विमर्श करने के बाद जैविक सब्जियों का
उत्पादन शुरू किया. सभी संभावित स्थानों पर तलाश करने के बाद किसानों को जब यह लगा कि सब्जियों के देशी या जैविक बीज आसानी से नहीं मिलेंगे, तो उन्होंने तय किया कि वे स्वयं सब्जियों के जैविक बीज तैयार करेंगे.
दरअसल, जैविक खेती में किसान के लिए प्रमाणित बीजों का होना बहुत ज़रूरी होता है. किसानों ने रबी के सीजन में केवल पांच क्यारियों में फूल गोभी के बीज तैयार किए. उनके इस प्रयास से उन्हें फूल गोभी के पांच किलो बीज प्राप्त हुए. इससे उनका उत्साह बढ़ा और उन्होंने भविष्य में भी इसी तकनीक से बीज पैदा करने की योजना बनाई. इस कार्य में किसानों की मदद करने के लिए मोरारका फाउंडेशन ने जैविक खाद एवं कीटनाशक बनाने की ट्रेनिंग दी. इतना ही नहीं, गोमूत्र, नीम, हल्दी एवं लहसुन की सहायता से हर्बल स्प्रे बनाकर दिया, ताकि किसान फसल को कीटों से बचाने के लिए उसका छिड़काव कर सकें. जैविक खेती आज इन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. मोरारका फाउंडेशन ने किसानों को बाज़ार भी उपलब्ध कराया, ताकि उन्हें अपनी पैदावार का उचित मूल्य मिल सके. आज खाद्य पदार्थों की क़ीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. देश में भंडारण की सुविधाएं न होने के कारण हर साल करोड़ों रुपये का खाद्यान्न बर्बाद हो जाता है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. जैविक खेती के ज़रिये इस बर्बादी को नियंत्रित किया जा सकता है, क्योंकि ऑर्गेनिक फूड लंबे समय तक खराब नहीं होते और उनके संरक्षण के लिए विशेष उपाय करने की ज़रूरत नहीं पड़ती. जैविक खेती के माध्यम से सूखा जैसी स्थितियों से भी निपटा जा सकता है, क्योंकि इसमें सिंचाई के लिए ज़्यादा पानी नहीं लगता. इतना ही नहीं, जैविक खेती से मिट्ठी की पौष्टिकता बढ़ती है और खाद्य साम्रगी भी पौष्टिकता से भरपूर होती है. भारत में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी है कि लोगों को जागरूक किया जाए और उन्हें समझाया जाए कि बग़ैर किसी रासायनिक खाद एवं कीटनाशक के इस्तेमाल से पैदा किए गए खाद्यान्न सेहत के लिए कितने लाभकारी हैं.
मोरारका फाउंडेशन का हमेशा यह प्रयास रहा है कि किस तरह युवाओं को कृषि व्यवसाय से जोड़ा जाए और कृषि व्यवसाय से होने वाली आमदनी बढ़ाई जाए. इस दिशा में मोरारका फाउंडेशन किसानों को विभिन्न उपयोगी सलाह देता रहा है, मसलन फसलों का चयन, खेती करने के उन्नत तरीके, कृषि संबंधी आधुनिक सूचनाएं और फसल का बेहतर मूल्य कैसे हासिल किया जाए. इसके साथ ही मोरारका फाउंडेशन द्वारा फसल बीमा और खाद एवं बीज की उपलब्धता आदि के बारे में भी शिविरों के माध्यम से अपेक्षित जानकारियां दी जाती हैं. फाउंडेशन की मदद से जैविक खेती अपना कर नवलगढ़ के किसान हंसी-खुशी जीवन व्यतीत कर रहे हैं. प

loading...