खेलों के विकास के लिए व्यापक सोच की जरूरत पुलेला गोपीचंद

12रियो ओलंपिक मजह छह-सात महीने दूर हैं, बतौर बैंडमिंटन के राष्ट्रीय कोच आपको भारत के कैसे प्रदर्शन की आशा है?

अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन जिस तरह का प्रदर्शन भारतीय खिलाड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में कर रहे हैं, उससे लगता है कि ओलंपिक में बड़ा भारतीय दल भाग लेगा. एक बार खिलाड़ी ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लें, उसके बाद हम खिलाड़ियों के आधार पर ओलंपिक के लिए तैयारियां कर सकेंगे. ओलंपिक से पहले आईबीएल (इंडियन बैडमिंटन लीग) फिर सुपर सीरीज, ऐसे में ओलंपिक से पहले खिलाड़ी चोटों से दूर रहेंगे और बेहतर तैयारी कर पायेंगे?

बीडब्लूएफ को इस बात के लिए धन्यवाद कि उन्होंने इस बार प्रतियोगिताओं को इस तरह रखा है कि इस साल की आख़िरी सुपर सीरीज नवंबर में है, इसके बाद अगले साल की पहली मार्च में है, इसलिए हमारे पास तीन महीने का समय है. इस दौरान खिलाड़ी आराम कर सकेंगे और आने वाले ओलंपिक क्वालीफायर्स और सुपर सीरीज की तैयारी कर सकेंगे.

भारतीय बैडमिंटन टीम ओलंपिक में इस बार कितने पदक जीतेगी?
इस बारे में कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी. लेकिन हम आशा करते हैं कि पिछली बार हमने जैसा प्रदर्शन किया था उससे बेहतर प्रदर्शन हम रियो में करेंगे.

आईबीएल ने खिलाड़ियों के खेल कौशल में सुधार में किस तरह योगदान किया है? दुनिया भर के बेहतरीन खिलाड़ियों के साथ खेलने, उनके साथ वक्त गुजारने से उन्हें किस तरह फायदा हुआ है?
हमारे युवा खिलाड़ी जब देश-विदेश के टॉप प्लेयर्स के साथ सफर कर रहे थे, उनके साथ समय गुजार रहे थे. एक नजरिए से इससे उनके खेल में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है. विश्व के टॉप प्लेयर्स के साथ रहने, उनके साथ खेलने, उनके खेल को करीब से देखने, उनसे बातचीत करने से निश्चित रूप से फायदा होता है. इस अनुभव का फायदा हमारे खिलाड़ियों को भी हुआ है और यह अब उनके प्रदर्शन में दिखाई पड़ रहा है.

नए खिलाड़ियों में ऐसे कौन से हैं जो सायना नेहवाल के खेल के स्तर के हैं या भविष्य में उस स्तर तक पहुंच सकते हैं?
हमारे सभी खिलाड़ियों में विश्व स्तर पर जीतने की क्षमता है. कम उम्र में भी बहुत से खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्हें अपने प्रदर्शन को स्थिर रखना होगा और अनुभव लेना होगा. मुझे लगता है कि आगे भी वे अच्छा प्रदर्शन करेंगे.

आप अपनी बेटी गायत्री के बारे में क्या कहना चाहेंगे, वह भी बैडमिंटन में अच्छा कर रही हैं, सभी आशा कर रहें हैं कि वह आपके नक्शे कदम पर चलकर देश का नाम रोशन करेंगी?
गायत्री के बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. वास्तविक चुनौतियां मेरे और उसके लिए अब शुरू हुई हैं, मैं इस बात से खुश हूं कि उसने जिस तरह प्रोगरेस की है वह संतोषजनक है. आने वाले समय में वह इससे बेहतर प्रदर्शन करेंगी.

बैडमिंटन खेलने का निर्णय उनका स्वयं का है या आपने और आपकी पत्नी ने इसके लिए उनपर दबाव बनाया?
शरुआत में मैं सुबह जल्दी उठकर एकेडमी जाता था, तब वह सोती रहती थी और जब वापस आता तब भी. मैं उसे तभी खेलता देख पाता था जब वह मेरे सामने एकेडमी में होती थी. उसी दौरान मैंने उसे शुरूआती ट्रेनिंग दी. इसके बाद उसकी खेल में रुचि बढ़ी, आज उसे बैडमिंटन पसंद है. मैंने या मेरी पत्नी ने बच्चों पर कभी बैडमिंटन खेलने के लिए दबाव नहीं डाला.

ऐसा कहा जा रहा है कि आपके सायना के साथ कुछ मतभेद हैं, क्या यह सही बात है?
इस मौके पर, इस विषय पर मैं कुछ नहीं कहना चाहूंगा. लेकिन किसी अन्य उपयुक्त मौके पर इस बारे में बात करूंगा.

केंद्र सरकार खेलों के क्षेत्र में कैसा काम कर रही है?
खेलों को लेकर सरकार को रुख पूरी तरह सकारात्मक है. मैंने सरकार को खेलों के लिए काम करते हुए बहुत करीब से देखा है. मेरे पास पूरी ईमानदारी से यह मानने के कारण हैं कि सरकार में पूरी लगन, मेहनत और ईमानदारी से काम करने वाले लोग हैं जो देश में खेलों की स्थिति में बदलाव और बेहतरी होता देखना चाहते हैं. हमारे देश में जहां खेलों में कॉम्पेक्स कल्चर या कहें खेलों पर नियंत्रण करने वाली विभिन्न संस्थायें हैं, यहां खेलों को लेकर समझ की कमी है मसलन, खिलाड़ियों की जरूरत क्या है. कई बार इस दौरान हमें आगे आकर कहना पड़ता है कि आप सही जगह या सही चीजों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे हैं. आपके पास खेलों के कई मामलों में दूरदर्शी योजनायें या नजरिया नहीं है न ही कोई दूरदर्शी सिस्टम है. खेलों के विकास का समर्थन करने वाले अच्छे लोगों के होने के बावजूद मुझे नहीं लगता है कि जो परिणाम हम चाहते हैं वे हमें जल्दी मिलने लगेंगे. सभी चीजों के सही रास्ते में आने में अभी वक्तलगेगा. सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है, केवल अभी नहीं बल्कि पिछले कुछ सालों से. अधिकांश समय हम सरकारों की आलोचना ही करते हैं, लेकिन उन्हें अच्छे कार्यों का क्रेडिट भी दिया जाना चाहिए. हमारी सफलता में बहुत बड़ा योगदान सरकार का भी क्योंकि उन्होंने हर जगह हमारा समर्थन और सहयोग किया है.

एक सवाल हमेशा से उठता रहा है कि खेलों का प्रशासन खिलाड़ियों के हाथों में होना चाहिए. सरकार के साथ टॉप्स जैसी योजना की निर्णय प्रक्रिया में शामिल होने के बाद आप इस बारे में क्या सोचते हैं?
मुझे लगता है कि आज हम जो बातें कर रहे हैं वह बहुत कम हैं, मुझे लगता है कि हमें खेलों के बारे में व्यापक स्तर पर बातें करनी चाहिए. अभी खेलों का दायरा सीमित है, फंडिंग सीमित है. स्वास्थ्य मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और खेल मंत्रालय को एक साथ लाकर एक नई युनिट का गठन करना चाहिए, तब जाकर हम देश में खेलों में सुधार या प्रशासन खिलाड़ियों के हाथों में देने की बात कर सकते हैं. वर्तमान में सरकार की खेलों के विकास की सोच का दायरा सीमित है.

बैडमिंटन का देश में दायरा बढ़ रहा है, ग्वालियर में भी आपकी एकेडमी है और दूसरे छोटे शहरों में भी, उन जगहों के खिलाड़ियों से आपको क्या आशायें हैं?
मेरा मानना है कि भारत में लोगों के पास खेलों के लिहाज से नेचुरल एडवांटेज हैं. एक सही एप्रोच के साथ ही हम इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं. इसके लिए खिलाड़ियों के सही प्रशिक्षण की जरूरत है, ऐसा करके हम छोटी जगहों से भी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ला सकते हैं. प