बिहार विधानसभा में बाहुबलियों की बहार

ranvir yadavबिहार में राजनीति और अपराध का बहुत पुराना नाता रहा है. पहले यहां राजनेता बाहुबलियों के बल पर राजनीति करते थे, लेकिन समय के साथ बाहुबली भी राजनीति में आ गए. आज भी यहां बाहुबलियों को जीत की गारंटी समझा जाता है, इसलिए इस बार भी सभी दलों ने अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए बाहुबलियों को टिकट देने में किसी तरह का गुरेज नहीं किया.

एनडीए हो या महागठबंधन या अन्य दल, सभी ने दिल खोलकर बाहुबलियों को टिकट दिए. सभी ने बाहुबलियों पर बड़ा दांव खेलते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतारा था. जहां बाहुबली स्वयं चुनावी मैदान में नहीं उतर सके, वहां उनकी पत्नी या करीबी रिश्तेदार को उम्मीदवार बनाकर चुनावी समर में उतारा गया.

इस बार बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों के लिए पांच चरणों में हुए मतदान में कुल 3450 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई, जिनमें से 1038 यानी 30 फीसद उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मुक़दमे दर्ज हैं. साल 2010 में हुए विधानसभा चुनावों में 3058 उम्मीदवार मैदान में थे. जिनमें से 986 दागी थे.

इसका सीधा सा मतलब यह है कि इस बार प्रत्येक दल ने दागी उम्मीदवारों पर ज्यादा भरोसा जताया. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा ने 39 फीसद, जदयू ने 41 फीसद, आरजेडी ने 29 फीसद और कांग्रेस ने 41 फीसद दागी उम्मीदवारों को अपना टिकट दिए, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरने वाले 18 फीसद उम्मीदवार दागी थे.

पांच चरण में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में तीसरे चरण में सबसे ज्यादा बाहुबली चुनावी मैदान में थे. इनमें मनोरजंन सिंह, अनंत सिंह, कन्हैया सिंह, ददन यादव और विश्वेश्वर ओझा प्रमुख हैं. अन्य बाहुबलियों में काली प्रसाद पांडे, चितरंजन सिंह, राजू तिवारी, केदारनाथ सिंह आदि शामिल हैं.

अपने अनोखे अंदाज के लिए जाने जाने वाले दंबग-बाहुबली नेता अनंत सिंह को इस बार जदयू ने टिकट नहीं दिया, इसलिए अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया. साल 2005 में पहली बार मोकामा से चुनाव जीतने वाले अनंत सिंह को इस इलाके में छोटे सरकार के नाम से भी जाना जाता है.

निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अनंत सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जदयू के नीरज कुमार को 18,848 वोटों के अंतर से हराया है. बाहुबली सूरजभान सिंह के भाई और लोजपा उम्मीदवार कन्हैया सिंह इसी सीट पर चौथे स्थान पर रहे.

एकमा विधानसभा सीट से जदयू के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे एक समय के मोस्ट वांटेड मनोरंजन सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के कामेश्वर प्रसाद सिंह को 8,126 वोटों से हराया. उनके खिलाफ 9 आपराधिक मुक़दमे दर्ज हैं. वहीं डुमराव सीट से जदयू उम्मीदवार के रूप में उतरे ददन यादव ने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राम बिहारी सिंह को 30,339 वोटों से हराया.

उनके खिलाफ 28 आपराधिक मामले दर्ज हैं. बक्सर के ददन, राबड़ी देवी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. अंडरवर्ल्ड सरगना और पूर्व विधायक राजन तिवारी के भाई राजू तिवारी ने लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार के रूप में गोविंदगंज सीट से जीत हासिल की है.

उनके खिलाफ 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं. उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी ब्रजेश कुमार को 27,920 मतों के अंतर से हराया. जदयू के टिकट से मटिहानी विधानसभा सीट से उम्मीदवार नरेंद्र सिंह उर्फ बोगो सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार सर्वेश कुमार को 22688 मतों के अंतर से हराया. नरेंद्र के खिलाफ हत्या सहित 15 अन्य गंभीर मामलों में अपराध पंजिबद्ध हैं.

राज्य की कई सीटों पर भले ही बाहुबली स्वयं चुनाव मैदान में नहीं उतरे, लेकिन उन्होंने अपनी पत्नी या अन्य रिश्तेदारों को चुनाव मैदान में उतारा था. दरौंधा सीट से बाहुबली अजय सिंह की पत्नी और निवर्तमान विधायक कविता सिंह चुनाव मैदान में थीं. उन्होंने भाजपा के जितेंद्र स्वामी को 13,222 मतों के अंतर से मात दी. जदयू ने रणवीर यादव की पत्नी पूनम देवी को खगड़िया सीट से उम्मीदवार बनाया था.

रणवीर यादव और उनकी पत्नी दोनों ही विधायक रह चुके हैं. रणबीर यादव के खिलाफ हत्या के कई केस दर्ज हैं. उन्होंने हम उम्मीदवार राजेश कुमार को 25,565 मतों के अंतर से हराया. भाजपा ने नवादा के कुख्यात अखिलेश सिंह की पत्नी अरुणा देवी को वारिसालीगंज से अपना उम्मीदवार बनाया था. अरुणा ने 2010 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

इस बार भाजपा उम्मीदवार के रूप में उन्होंने जदयू उम्मीदवार प्रदीप कुमार को 19,527 मतों के अंतर से हराया. फैजान गिरोह के सरगना रह चुके अवधेश मंडल की पत्नी बीमा भारती रूपौली सीट से चुनावी मैदान में थीं. बीमा पहले भी विधायक और मंत्री रह चुकी हैं. अवधेश मंडल का यहां अब भी दबदबा है. यह बात उनकी पत्नी की जीत से एक बार फिर साबित हो गई है. बीमा ने भारतीय जनता पार्टी के प्रेम प्रकाश मंडल को 9,672 मतों से हराया.