सीरिया की तबाही के जिम्मेदार कौन

seriaअाईएस को नष्ट करने में किसका हित है, जो देश सीरिया पर हमले कर रहे हैं, उनका आईएस के खात्मे से कोई लेना-देना है भी या नहीं, अभी इसके बारे में कुछ कहना भले ही मुश्किल लग रहा हो, लेकिन सीरिया या उसकी राजधानी दमिश्क में विश्व के शक्तिशाली देशों ने जो हालात उपस्थित कर दिए हैं, उसे शायद पटरी पर कभी नहीं लाया जा सके या अगर लाया जा सकता है तो उसे लाने में दशकों लग सकते हैं. यह वही दमिश्क है, जहां की संस्कृति, सभ्यता और पुरातत्व पूरे विश्व के लिए एक सबक है, लेकिन आज यह शहर पूरी तरह से खंडहरों में तब्दील हो चुका है. तू-तू, मैं-मैं की इस ल़डाई में सीरिया को आग के ढेर पर बैठाया जा चुका है और खुद को सभ्यता को पुरोधा कहने वाले ये देश अवसरवाद के चूल्हे पर सियासत की रोटियां सेंक रहे हैं.

फिलहाल आईएस पर हमले को लेकर जिस तरह से वैश्विक राजनीति हो रही है, उससे आने वाले दिनों में मामले के और भी अधिक उलझने की संभावना जरूर बढ़ गई है. रूसी लड़ाकू विमानों का सीरिया में हवाई हमले का दौर अभी भी जारी है. हालांकि अमेरिका और रूस के उच्चाधिकारियों ने कहा है कि सीरिया में मौजूद अमेरिकी और रूसी सैनिकों के बीच किसी भी टकराव से बचने के लिए दोनों देशों के सैन्य अधिकारी आपस में बातचीत करेंगे. ये बातचीत कब होगी, होगी भी या नहीं, ये भविष्य के गर्भ में है. सच्चाई यह है कि कोई भी खुद को इस हमले या हमले से उत्पन्न विभत्स हालातों का दोषी नहीं मानना चाहता. अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने पर जोर दे रहे हैं.

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरॉव कहते हैं कि अनचाही घटनाओं को टालने के लिए संवाद स्थापित करना ज़रूरी है. सवाल यह है कि सर्गेई अगर संवाद को जरूरी मानते हैं, तो इसकी भरपूर कोशिश क्यों नहीं की जा रही है. इस बीच अमेरिका ने आशंका जताई है कि रूस जिन ठिकानों पर हमले कर रहा है, वो इस्लामिक स्टेट के नहीं हैं, बल्कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद के दूसरे विरोधियों के हैं.

उधर, रूस का कहना है कि सीरिया में उसके युद्धक विमान उन्हीं आतंकी ठिकानों पर मार कर रहे हैं, जो अमेरिका के भी निशाने पर हैं, जबकि अमेरिका ने रूस के मिलिट्री अभियान की आलोचना करते हुए कहा कि हवाई हमलों में सामंजस्य की कमी है. हालांकि अमेरिका भले ही रूसी हवाई हमले की निंदा कर रहा है, लेकिन सत्य यह है कि खुद अमेरिका को सीरिया में हवाई हमले शुरू किए हुए एक साल हो चुका है.

इस बीच रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसकी वायुसेना ने इस्लामिक स्टेट के सैन्य साजो-सामान को निशाना बनाया है, न कि नागरिक स्थानों पर हमले किए हैं. इस पर सीरिया के विपक्षी कार्यकर्ताओं का कहना है कि रूस ने तालबीसेह और रस्तान और ज़ाफरानेह शहरों पर हमले किए हैं, जिनमें 36 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं. उनके अनुसार, इनमें से कोई भी इलाक़ा ऐसा नहीं है, जिस पर आईएस का नियंत्रण है. गौरतलब है कि सीरिया में चार साल से चल रहे गृह युद्ध में असद सरकार के ख़िला़फ कई संगठन लड़ रहे हैं.

अमेरिकी रक्षा मंत्री एशटन कार्टर ने कहा है कि रूस का रवैया आग में घी डालने जैसा है और ये अभियान असफल होगा, क्योंकि बशर अल-असद के विरोधियों की संख्या का़फी ज़्यादा है. न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार और वॉलस्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस उन विद्रोहियों पर हमले कर रहा है, जिन्हें अमेरिका का समर्थन मिला है. बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ को सीआईए ने ट्रेनिंग दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि रूसी हमले सीरिया को संकट के हल से और भी दूर ले जाएंगे और इससे आईएस को ही बल रहा है.

ओबामा का कहना है कि ये सही है कि रूस और अमेरिका दोनों चाहते हैं कि आईएस को नष्ट किया जाए, लेकिन यह भी तय है कि पुतिन आईएस और उदारवादी सुन्नी विरोधी गुटों में ़फर्क नहीं कर पा रहे हैं. पुतिन के नज़रिए से सब आतंकवादी हैं. ये विनाश को बुलावा है. दूसरी तरफ सीरिया के मुख्य विपक्षी गुट माने जाने वाली सीरियन नेशनल काउंसिल के अध्यक्ष जॉर्ज साबरा ने कहा है कि रूस हवाई हमले राष्ट्रपति असद की मदद के लिए कर रहा है, आईएस के ख़ात्मे के लिए नहीं. रूस ये सब इसलिए कर रहा है, क्योंकि वो सीरिया के भविष्य में भागीदारी चाहता है.

उन्होंने कहा कि रूस जानता है कि जब नया सीरिया बनेगा तो सब कुछ ईरान को मिलेगा. रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने हमले के साथ ही सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद से फोन पर बात की है. पुतिन ने अपील की है कि वो सीरिया में चल रहे हिंसक संघर्ष को ख़त्म करने के लिए राजनीतिक समझौते के लिए तैयार हो जाएं. रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने कुछ ही दिनों पहले संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि इस्लामिक स्टेट के ख़िला़फ हवाई हमले के बारे में रूस विचार करेगा. हालांकि राष्ट्रपति पुतिन के ची़फ ऑ़फ स्टा़फ इवानोव के अनुसार, अमेरिका और फ्रांस के ज़रिए सीरिया पर किए जा रहे हवाई हमले अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार नहीं हैं, क्योंकि इसके लिए संयुक्त राष्ट्र या सीरियाई सरकार की कोई अनुमति नहीं है. इवानोव के अनुसार, सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने आधिकारिक तौर पर रूस से सैन्य सहायता की अपील की है.

इवानोव ने कहा कि रूस अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसा कर रहा है. उनके अनुसार हज़ारों रूसी नागरिक आईएस में शामिल हो गए हैं और रूस लौटने के बाद ये लोग रूस के लिए एक ख़तरा बन सकते हैं. इवानोव ने कहा कि ये न तो विदेश नीति के किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए और न ही किसी इच्छा को पूरा करने के लिए किया जा रहा है, जैसा कि हमारे पश्चिमी मित्र हम पर आरोप लगाते रहे हैं. ये सिर्फ और सिर्फ रूस के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है. गौरतलब है कि सीरिया में चल रहे युद्ध के बारे में अमेरिका और रूस में एक लंबे समय से मतभेद रहे हैं. अमेरिका इस बात पर अड़ा हुआ है कि राष्ट्रपति असद को कुर्सी छोड़नी होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि इतने ख़ूनख़राबे के बाद अब युद्ध से पहले की स्थिति में नहीं लौटा जा सकता है. उधर, पुतिन का कहना है कि चरमपंथियों से लड़ रही सीरियाई सरकार के साथ सहयोग नहीं करना बहुत बड़ी भूल होगी. हाल के दिनों में बशर अल-असद के प्रति कुछ पश्चिमी नेताओं के रवैये में नरमी देखी जा रही है और वो इस बात के लिए तैयार हो रहे हैं कि राजनीतिक बदलाव के समय बशर सत्ता में बने रह सकते हैं.

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