यश भारती या पद्म पुरस्कार पाए यूपी के लोगों को मिलेंगे 50 ह़जार रुपये माहवार : बौद्धिकों के आगे पेंशन का चारा

bacchan familyपुरस्कार लौटाने की नव-बौद्धिक-राजनीतिक दौड़ में लगे साहित्यकारों के सामने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बेहद कारगर चारा फेंका है. उत्तर प्रदेश में हर साल मिलने वाले यश भारती पुरस्कार पाने वाली सत्ता-चयनित हस्तियों को अब 50 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन भी मिलेगी.

उत्तर प्रदेश सरकार का बाकायदा कैबिनेट के जरिए लिया गया यह निर्णय सांकेतिक चुनौती है कि अब किसी साहित्यकार या अन्य शख्सियत में दम है तो वह पुरस्कार लौटा कर दिखाए.

इस युवा मुख्यमंत्री ने सस्ती राजनीति पर उतरे पकी उम्र के तथाकथित साहित्यकारों को उत्कृष्ठ कोटि की राजनीति करने की बौद्धिक-सीख दी है. पेंशन पाने वालों की जमात में पद्म पुरस्कार पाने वाली प्रदेश की हस्तियां भी शामिल होंगी.

अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार को भी यह संदेश दे दिया कि जो उन्हें पहले कर देना चाहिए था, वह उत्तर प्रदेश सरकार ने कर दिखाया. यश भारती पुरस्कार से सम्मानित महाकवि नीरज ने पुरस्कार लौटाने वाले तथाकथित बुद्धिजीवियों पर करारा प्रहार किया है और इसे निकृष्ट स्तर की राजनीति बताया है.

उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले को प्रदेश के कई बुद्धिजीवी पुरस्कारशुदा लोगों के हाथ लगा जैकपॉट बता रहे हैं. वे कहते हैं कि साहित्यकारों द्वारा सम्मान लौटाए जाने के बीच ही उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सर्वोच्च पुरस्कार यश भारती और केंद्र के पद्म पुरस्कार पाने वालों को 50 हजार रुपये की मासिक पेंशन देकर उनके हाथ में जैकपॉट थमा दिया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में 20 अक्टूबर को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया.

कैबिनेट की बैठक के बाद खुद अखिलेश यादव ने मीडिया के समक्ष आकर इस निर्णय की जानकारी दी. मुख्यमंत्री से यह पूछा भी गया कि अगर कोई व्यक्ति यश भारती वापस कर दे तो भी क्या पेंशन मिलती रहेगी? मुख्यमंत्री ने बड़े सधे अंदाज में कहा कि अब ऐसी स्थिति समाजवादियों के समक्ष या सपा सरकार के समक्ष कभी नहीं आएगी.

मंत्रिपरिषद में इस सिलसिले में पारित की गयी नियमावली के तहत ऐसे लोग जिनकी जन्मभूमि या कर्मभूमि उत्तर प्रदेश रही है और जिन्हें यश भारती और पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उन्हें यह मासिक पेंशन मिलेगी.

हालांकि 21 अक्टूबर को देर रात उत्तर प्रदेश सरकार ने एक खास विज्ञप्ति जारी कर पेंशन की घोषणा के साथ एक शर्त संलग्न करने का ऐलान किया. नए संलग्नक के मुताबिक पेंशन उसी व्यक्ति को मिलेगी जो जरूरतमंद होंगे और इसके लिए अलग से आवेदन करेंगे.

1994 में मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्वकाल में ही शुरू किए गए यश भारती सम्मान के तहत विभिन्न विधाओं की तकरीबन डेढ़ सौ शख्सियतों को अबतक सम्मानित किया जा चुका है.

इनमें हरिवंश राय बच्चन, गोपाल दास नीरज, कैफी आजमी, सोम ठाकुर, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, अभिषेक बच्चन, राज बब्बर, शबाना आजमी, राजपाल यादव, जसपाल राणा, शकील अहमद, मोहम्मद कैफ, विनोद मेहता, रवींद्र जैन, अनूप जलोटा, जिम्मी शेरगिल, कैलाश खेर, राहत अली खान साबरी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राजन-साजन मिश्र समेत कई मशहूर हस्तियां और कई प्रायोजित हस्तियां शामिल हैं.

वर्ष 2007 में मायावती के कार्यकाल में यश भारती पुरस्कार को बंद कर दिया गया था. समाजवादी पार्टी की 2012 में सरकार आने के बाद वर्ष 2013 से इसे फिर से शुरू किया गया. 2013 में 15 व्यक्तियों को यश भारती सम्मान दिया गया था.

वर्ष 2013-14 के लिए 22 व्यक्तियों को और वर्ष 2014-15 के लिए 34 हस्तियों को यह सम्मान दिया गया. यश भारती सम्मान के तहत पुरस्कार स्वरूप 11 लाख रुपए का चेक और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाता है. जबकि साहित्य अकादमी पुरस्कार में एक लाख रुपये का चेक और ताम्र पत्र दिया जाता है. साहित्य अकादमी पुरस्कार की शुरुआत 1954 से ही हुई थी.

बहरहाल, यश भारती सम्मान और पद्म पुरस्कार से सम्मानित उत्तर प्रदेश के व्यक्तित्वों को 50 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन देने का फैसला ऐसे समय में आया जब साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने की हर तरफ निंदा हो रही है. उत्तर प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है. यहां तक कि यश भारती सम्मान से सम्मानित महाकवि गोपाल दीस नीरज ने भी बेबाकी से कहा कि जो साहित्यकार सम्मान लौटा रहे हैं, वे राजनीति से प्रेरित होकर ऐसा कर रहे हैं.

उनका ऐसा करना बिल्कुल गलत है. नीरज ने कहा, कुछ साहित्यंकार मोदी के खिलाफ राजनीति कर रहे हैं. इन सहित्यकारों को कांग्रेस के राज में पुरस्कार मिला था और अब कांग्रेस ही इनसे ये पुरस्कार लौटाने का काम करा रही है. इससे कांग्रेस की ही बदनामी हो रही है.

नीरज ने सम्मान लौटाने वाले उन साहित्यकारों से यह भी पूछा कि उन्होंने पुरस्कार की रकम क्यों नहीं लौटाई? नीरज बोले कि पुरस्कार लौटाने वालों में से कुछ ही लोगों ने राशि लौटाई है. अन्य सभी क्यों नहीं लौटा देते? पुरस्कार लौटाने वाले साहित्यकार झूठ बोल रहे हैं.

साहित्य की उपासना करना सत्य की उपासना है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. साहित्यकारों को चाहिए कि यदि उन्हें किसी मामले का विरोध करना है तो वे कविता लिखें, कथा लिखें. गोपाल दास नीरज को पद्मश्री और पद्मभूषण सम्मान से नवाजा जा चुका है. उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है.

नीरज ने कहा, मैंने भी इमरजेंसी के दौरान सत्ता का विरोध किया था, लेकिन उस वक्त मैंने कविताएं और गीत लिखे थे. इससे समाज को एक संदेश दिया था. नीरज ने कहा कि गोमांस पर विवाद नहीं होना चाहिए.

भारतीय संस्कृति में गाय को माता माना गया है. कृष्ण गाय चराते थे. मां के दूध के अलावा गाय ही है जिसका दूध बच्चे से बड़ों तक को फायदा पहुंचाता है. गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए. सारे विवाद ही समाप्त हो जाएंगे.

सुधींद्र कुलकर्णी पर कालिख पोते जाने पर पुरस्कार लौटाने वाले साहित्यकारों ने कहा कि देश का मुंह काला हो गया. इस पर नीरज ने कहा, मैं कहता हूं कि ऐसा काम ही क्यों किया, जिससे कालिख पोती गई.

महाकवि नीरज और महाआलोचक नामवर सिंह समेत देश की तमाम नामचीन साहित्यिक-सांस्कृतिक हस्तियों के खुल कर सामने आ जाने से पुरस्कार-वापसी प्रतियोगिता बैक-फुट पर आती दिख रही है. पिछले दिनों नामवर सिंह ने स्पष्ट कहा कि पुरस्कार लौटाने वाले साहित्यकार गलत कर रहे हैं और यह कोई बौद्धिक कृत्य नहीं है.

मुनव्वर राणा को पीएमओ से बुलावा

साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले उत्तर प्रदेश के शायर मुनव्वर राणा को प्रधानमंत्री कार्यालय से बुलावा आया है. मुनव्वर राणा की अगले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होगी. स्पष्ट है कि इस मुलाकात में साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाए जाने को लेकर ही बात होगी. मुनव्वर राणा ने कहा है कि वे लेखकों की मनःस्थिति से प्रधानमंत्री को अवगत कराएंगे. उन्होंने अन्य लेखकों को भी बुलाए जाने की जरूरत पर जोर दिया.

बच्चन परिवार ने पेंशन की राशि लोकसेवा के लिए दी
उत्तर प्रदेश सरकार के यश भारती सम्मान से सम्मानित बच्चन परिवार ने 50 हजार रुपये पेंशन की राशि को लोक सेवा में लगाने की अखिलेश सरकार से अपील की है.

कवि हरिवंश राय बच्चन, फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और अभिषेक बच्चन को यश भारती सम्मान से नवाजा जा चुका है. इस तरह बच्चन परिवार ने दो लाख रुपये माहवार की पेंशन राशि जरूरतमंदों के लिए खर्च करने की पेशकश की है.

प्रभात रंजन दीन

प्रभात रंजन दीन
शोध,समीक्षा और शब्द रचनाधर्मिता के ध्यानी-पत्रकार...
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प्रभात रंजन दीन

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