साल 2021 में पटरी पर दौड़ेगी पटना मेट्रो

metroदेश के अन्य महानगरों की तरह बिहार की राजधानी पटना में भी मेट्रो ट्रेन दौड़ती नज़र आएगी. उत्तर भारत में दिल्ली और लखनऊ के बाद पटना मेट्रो ट्रेन की सुविधा से लैस तीसरा शहर होगा. फिलहाल पूरे देश में छह शहरों कोलकाता, दिल्ली, गुड़गांव, बैंगलुरू, मुंबई, चेन्नई और जयपुर में कार्यरत हैं जबकि कोच्ची, हैदराबाद, लखनऊ, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल और पुणे आदि शहरों में मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. इनमें से कुछ शहरों में कार्य अंतिम दौर में पहुंच चुका है. इस सूची में नया नाम पटना का है.

बिहार की राजधानी पटना में मेट्रो का सपना अगले पांच सालों में साकार हो जाएगा. पटना मेट्रो प्रोजेक्ट को बिहार सरकार ने मंजूरी दे दी है. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 17 हजार करोड़ रुपये होगी. इसका निर्माण तीन चरणों में होगा. पटना मेट्रो में कुल 27 स्टेशन होंगे. राइट्‌स ने पटना मेट्रो की डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की है. पटना मेट्रो प्रोजेक्ट की शुरूआत वर्ष 2011 में हुई थी. बिहार सरकार ने जून, 2013 में इसके लिए अपनी प्रतिबध्ता जाहिर की थी. इसके बाद इसकी डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने की जिम्मेदारी राइट्‌स को दी गई थी.

डीपीआर ड्राफ्ट तैयार करने के बाद निवेशकों का सम्मेलन भी आयोजित किया गया था. इस परियोजना की लागत 16 हजार 960 करोड़ आंकी गई है. इसमें से राज्य सरकार साढ़े छह हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी जबकि बाकी पैसा जायका और एशियन डेवलपमेंट बैंक से सरकार लोन लेगी. मेट्रो परियोजना को वर्ष 2021 तक पूरा करने की समय सीमा तय की गई है. इसकी लंबाई 31 किलोमीटर होगी. राज्य सरकार ने पटना में गंगा किनारे दीघा से पटना सिटी तक अलग से मेट्रो दौड़ाने की योजना का प्रस्ताव तैयार करने पर भी सहमति दे दी है. पटना मेट्रो के दो कोरीडोर होंगे.

पूर्व-पश्चिम कोरिडोर में दो भाग होंगे. पहला भाग दानापुर से मीठापुर वाया बेली रोड होगा जबकि दूसरा भाग दीघा से हाईकोर्ट और विकास भवन तक होगा. इसी तरह उत्तर-दक्षिण कोरिडोर में स्टेशन से अंतर्राज्यीय बस स्टैंड तक मेट्रो दौड़ेगी. मीठापुर स्थित बाईपास चौक से दीदारगंज तक और मीठापुर स्थित बाईपास चौक से फुलवारीशरीफ तक मेट्रो दोड़ेगी.

पहले चरण में ईस्ट-वेस्ट कोरीडोर में दानापुर से मीठापुर वाया बेली रोड़ और उत्तर दक्षिण कोरीडोर में पटना स्टेशन से अंतर्राज्यीय बस अड्‌डा तक मेट्रो दौडेग़ी. पूर्व पश्चिम कोरीडोर की लंबाई 16.9 किमी होगी इसमें 5.9 किमी एलिवेटेड ट्रैक और 11.33 किमी भूमिगत ट्रैक होगा. 0.28 किमी सतह पर होगा. 14 स्टेशन होंगे, इसमें चार एलिवेटेड स्टेशन होंगे और नौ भूमिगत. इसी तरह उत्तर-दक्षिण कोरीडोर की लंबाई 14.02 किमी होगी. इसमें 6.625 किमी एलिवेटेड ट्रैक और 4.575 किमी भूमिगत ट्रैक होगा. इस रूट पर 12 स्टेशन होंगे जिसमें नौ एलिवेटड और तीन भूमिगत होंगे.

मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर आशंका जताई जा रही है कि इसके निर्माण से राजधानी की एतिहासिक धरोहरों को क्षति पहुंचेगी. लेकिन इस बात को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कर दिया कि वे पटना में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट द्वारा ऐतिहासिक धरोहरों को जरा भी नुकसान पहुंचने की स्थिति में शुरू नहीं होने देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि ऐतिहासिक धरोहर हमारी पहली प्राथमिकता हैं, वह वहां मेट्रो रेल परियोजना को तब तक मूर्तरूप नहीं लेने देंगे जब तक कोई ऐसी तकनीक ना आ जाए, जो ज़मीन के अंदर पटरी बिछाने के लिये होने वाली खुदाई से पटना की ऐतिहासिक सम्पदा को सुरक्षित रख सके.

ऐतिहासिक धरोहरों को अक्षुण्ण रखना उनकी प्राथमिकता है. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद पटना मेट्रो रेल परियोजना के लिए स्पेशल परपस व्हीकल (एसपीवी) का गठन किया जा रहा है. इसमें केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारी के साथ ही बिहार सरकार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के प्रधान सचिव या सचिव स्तर के अधिकारियों की टीम बनेगी. यही टीम पटना में मेट्रो की राह सुगम करेगी. टीम में ऊर्जा, पथ निर्माण, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण आदि के अधिकारी शामिल होंगे. नगर विकास एवं आवास विभाग नोडल विभाग होगा.

राज्य का नगर विकास एवं आवास विभाग इस महत्वकांक्षी परियोजना को हकीकत में बदलने के लिए धन के इंतजाम में भी जुट गया है. इसके लिए दो अंतरराष्ट्रीय
फंडिंग एजेंसियों- जाइका और एडीबी से पहले से बात चल रही है. दोनों एजेंसियां इस परियोजना में धन लगाने के लिए तैयार हैं, केवल औपचारिकताएं पूरी होने का इंतजार है. परियोजना की कुल लागत 16,960 करोड़ रुपएये है. इसमें 60 से 70 फीसदी राशि फंडिंग एजेंसियां लगाएंगी. वहीं, बाकी 30 से 40 फीसदी राशि केंद्र और राज्य सरकार को आधी-आधी लगानी होगी. चूंकि मेट्रो रेल सेवा शुरू करना केंद्रीय सूची का विषय है लिहाजा इसके लिए केंद्र सरकार की सहमति आवश्यक है. केंद्र सरकार की सहमति मिलने के बाद ही मेट्रो निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी. 

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